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माथे पर तिलक शुभकारी

माथे पर तिलक शुभकारी

सनातन धर्म में पूजा-पाठ का बड़ा महत्व है। पूजा-पाठ के विधान को विभिन्न तरह से पूर्ण किया जाता है। इसी विधान में आता है तिलक या टिका। इसके बिना कोई भी पूजा-पाठ आधूरी है या यूं कहें कि पूजा की शुरूआत ही तिलक से होती है। हिंदू धर्म की मान्यता है कि तिलक लगाने से समाज में मस्तिष्क हमेशा गर्व से ऊंचा रहता है। तिलक कई वस्तुओं और पदार्थो से लगाया जाता है। इनमें हल्दी, केसर, सिंदूर, चंदन, भस्म, अष्टगंध, गोरोचन, श्वेतचंदन, रक्तचंदन, पंचगंध, अष्टगंध आदि प्रमुख हैं। चंदन का तिलक लगाने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति संकटों से बचता है। चंदन का तिलक धारण करने वाले व्यक्ति पर लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।

तिलक लगाने के आध्यात्मिक महत्व

हमारे शरीर में सात सूक्ष्म ऊर्जा केन्द्र होते हैं, जो अपार शक्ति के भंडार हैं। इन्हें चक्र कहा जाता है। माथे के बीच में जहां तिलक लगाते हैं, वहां आज्ञाचक्र होता है। यह चक्र हमारे शरीर का सबसे महात्वपूर्ण स्थान है, जहां शरीर की तीन प्रमुख नाडिय़ा इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना आकर मिलती हैं। इसलिए इसे त्रिवेणी या संगम भी कहा जाता है। यह गुरू  स्थान कहलाता है। इसी कारण यह स्थान शरीर में सबसे ज्यादा पूजनीय है।

तिलक लगाने से एक तो स्वभाव में सुधार आता है और देखने वाले पर सात्विक प्रभाव पड़ता है। तिलक खास प्रयोज्य के लिए भी लगाए जाते हैं। यदि मोक्ष प्राप्ति करनी हो तो तिलक अगूंठे से, शत्रु नाश करना हो तो तर्जनी से, धन प्राप्ति हेतु मध्यमा से तथा शांति प्राप्ति हेतु आनामिका से लगाया जाता है। ज्योतिष के अनुसार अनामिका तथा अंगूठा तिलक सदा शुभ माने गए हैं। अनामिका सूर्य की अधिष्ठाता अंगुली है। यह अंगुली सूर्य का प्रतिनिधित्व करती है। इसका तात्पर्य है कि सूर्य के समान दृढ़ता, तेजस्वी, प्रभाव, सम्मान, निष्ठा-प्रतिष्ठा बनी रहे। दूसरा अंगूठा है जो हाथ में शुक्र क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। शुक्र ग्रह जीवन शक्ति का प्रतीक है। जीवन में सौम्यता, सुख-साधन तथा काम-शक्ति देने वाला शुक्र ही संसार का रचयिता है। जब अंगुली और अंगूठे से तिलक किया जाता है तो आज्ञा चक्र के साथ ही सहासत्र चक्र पर ऊर्जा का प्रवाह होता है और हमारे विचार सकारात्मक व कार्यसिद्ध होते हैं। तिलक संग चावल लगाने में लक्ष्मी को आकर्षित करने तथा ठंडक और सात्विकता प्रदान करने का निमित छुपा हुआ है।

18-04-2015

तिलक लगाते वक्त निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए

चन्दनस्य महत्पुण्यम, पवित्रं पापनाशनम, आपदां हरते नित्यम, लक्ष्मी तिष्ठतु सर्वदा।

वार अनुसार तिलक धारण के प्रभाव और ग्रहों के शुभ फल

सोमवार – सोमवार का दिन भगवान शंकर का दिन होता है। इस वार का ग्रह स्वामी चन्द्रमा हैं जो मन का कारक ग्रह है। मन को काबू में रखकर मस्तिष्क को शीतल और शांत बनाए रखने के लिए सफेद चंदन का तिलक लगाएं। इस दिन विभूति या भस्म भी लगाई जा सकती है।

मंगलवार – इस दिन को हनुमानजी का दिन माना गया है। इस वार का ग्रह स्वामी मंगल हंै। इस दिन लाल चंदन या चमेली के तेल में घुला हुआ सिंदूर का तिलक लगाने से ऊर्जा और कार्यक्षमता में विकास होता है। इससे मन की उदासी और निराशा खत्म होती है।

बुधवार – बुधवार को मां दुर्गा का दिन माना गया है। इस दिन को भगवान गणेश का दिन भी माना जाता है। इस दिन का ग्रह स्वामी बुध हैं। इस दिन सूखे सिंदूर का तिलक लगाना चाहिए। इस तिलक से बौद्धिक क्षमता तेज होती है।

गुरूवार – ये बृहस्पतिवार के नाम से भी जाना जाता है, जोकि देवताओं के गुरू हैं। इस दिन के खास देवता हैं ब्रह्मा। इस दिन का ग्रह स्वामी है बृहस्पति। गुरू को पीला या मिश्रित पीला रंग प्रिय है। सफेद चंदन की लकड़ी को घिसकर उसमें केसर को मिलाकर टीका लगाना चाहिए। हल्दी या गोरोचन का तिलक भी लगा सकते हैं। इससे आर्थिक परेशानी का हल भी निकलता है।

शुक्रवार – ये मां लक्ष्मी का दिन माना जाता है। इस दिन का ग्रह स्वामी शुक्र हंै। इस दिन लाल चंदन लगाने से तनाव दूर होता है, वहीं भौतिक सुख-सुविधाओं में भी वृद्धि होती है।

शनिवार – ये दिन भैरव, शनि, यमराज का दिन माना गया है। इस दिन के ग्रह स्वामी शनि हैं। इस दिन विभूत, भस्म या लाल चंदन का तिलक करें। इससे ये तीनों देवता प्रसन्न होते हैं और किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है।

रविवार – इस दिन को भगवान विष्णु या सूर्य का दिन माना जाता है। इस दिन के ग्रह स्वामी सूर्य ग्रह हैं, जो ग्रहों के राजा हैं। इस दिन लाल चंदन या हरि चंदन लगाएं। इससे भगवान विष्णु की कृपा मिलती है। इससे मान-सम्मान बढ़ता है और निर्भयता आती है।

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