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मोदी का एजेंडा, पार्टी का झंडा

मोदी का एजेंडा, पार्टी का झंडा

”अपने प्रभावी और बेहतरीन कार्य-प्रणाली और मर्यादित व्यवहार से हम अपने सभी कार्यकर्ताओं, सदस्यों और समर्थकों के साथ साथ उन सभी लोगों को, जिन्होंने हमें वोट दिया है, गौरवान्वित कराएंगे…।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बंगलुरू के भाजपा  के राष्ट्रीय अधिवेशन में।

‘राष्ट्र सर्वोच्च है, पार्टी सरकार से ज्यादा महत्वपूर्ण है, सरकार बदलाव लाने का साधन मात्र है…’ इन शब्दों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन की शुरुआत की। उन्होंने परेशानियों से घिरी अपनी सरकार के लिए एक सुरक्षा कवच के साथ-साथ  आक्रामक रणनीति की जरुरत पर बल दिया, ताकि भूमि अधिग्रहण बिल जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्ष की नकारात्मक राजनीति पर रोक लगाई जा सके।

‘टकराव की राजनीति विपक्ष को फायदा पहुंचाती है और जोडऩे की राजनीति सरकार को।’ इस मंत्र को काफी चतुराई से प्रधानमंत्री ने प्रयोग करते हुए पार्टी को अपने साथ मिलाया, ताकि उनका खून पीने को तैयार बैठी विपक्ष से एक सुरक्षा कवच बनाया जा सके। और किसानों के तथाकथित रहनुमाओं के खिलाफ आक्रामक हुआ जा सके। उन्होंने कहा कि अपनी तरफ से सरकार ने सभी पक्षों को शामिल करते हुए भूमि अधिग्रहण बिल में कम से कम 9 संशोधन किये हैं।

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर विपक्षी दलों के आचरण और व्यवहार पर मोदी ने अपने विचारों को स्पष्ट करते हुए कहा, ”अब तक संसदीय लोकतंत्र में यहीं प्रचलन रहा है कि विपक्षी पार्टी अपनी बात रखती रहेगी और सत्तारूढ़ पार्टी अपने तरीके से आगे बढ़ती रहेगी। संशोधनों को स्वीकारने में हमने विपक्षी दलों के विचारों को भी शामिल किया है (भूमि बिल के लिए), लेकिन हमें ऐसा लगता है कि कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दल नकारात्मक राजनीति में शामिल हैं और वो देश की प्रगति के रास्ते में बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं, जिन्हें उजागर करने की जरूरत है। पार्टी की भूमिका यहां महत्वपूर्ण है।”

मोदी ने इस बैठक के जरिए पार्टी के  जमीनी स्तर से जुड़े कार्यकार्ताओं और पार्टी के बीच आई मनोवैज्ञानिक खाई को कम करने की कोशिश की। सरकार ने महसूस किया कि शक्ति के भंडारण की सीमाएं हैं। विपक्ष के भूमि अधिग्रहण बिल के विरोध से देश की तरक्की में अवरोध आने से मोदी काफी हताश हुए हैं, जिसके बाद उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं का आह्वान किया।

राष्ट्रीय कार्यकारणी की बैठक के माध्यम से मोदी ने पार्टी को आश्वासन दिया है कि वो अपनी निर्धारित सीमा से आगे जाएंगे और उम्मीद से ज्यादा करने की कोशिश करेंगे। जब सरकार अपना एक साल पूरा करेगी तो उसके कार्य धरातल पर स्पष्ट तौर पर दिखई देंगे। सरकार जो कर रही वो दिखाई देगा, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता, जो कि जनता के संपर्क में रहते हैं, अगर वो चाहे तो लोगों के बीच पार्टी के लिए एक सकारात्मक माहौल तैयार कर सकते हैं।

भाजपा की राष्र्टीय कार्यकारणी बैठक का महत्व इसलिए भी ज्यादा है, क्योंकि केंद्र में सरकार गठन होने के बाद यह पहली बैठक है। जाहिर है कि इसमें देश से लेकर विदेश के मोर्चों तक पर सरकार की उपलब्धियों का बखान किया गया। पूरी रूपरेखा उसी के मुताबिक तैयार की गई थी। इसमें पूरा फोकस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों पर रहा।

बेदम कांग्रेस को ऑक्सीजन मुहैया कराती भाजपा

18-04-2015
गिरिराज सिंह द्वारा कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी पर की गयी अभद्र टिप्पणी से बहुत सारे सदस्य नाराज दिखे। बावजूद इसके कि केंद्रीय नेतृत्व ने गिरिराज द्वारा माफी मांग लेने के बाद मामले का पटाक्षेप कर दिया, सदस्यगण खुश नहीं दिखे। एक सदस्य ने तो यहां तक कह दिया कि ”कांग्रेस सांसों के लिए छटपटा रही है और एक हम हैं जो अपनी जुबान से उन्हें ऑक्सीजन दे रहे हैं। यह उचित नहीं है।’’ एक अन्य सदस्य ने कहा कि ”वाणी पर नियंत्रण रखना हमारा मंत्र होना चाहिए, लेकिन जिस तरह से यह बार-बार हो रहा है, उससे तो यही लगता है कि कोई भी चेतावनी काम नहीं कर रही है।’’ अमित शाह और मोदी दोनों ने सदस्यों को भरोसा दिलाया कि वह इन चीजों पर नजर रखेंगे कि कोई भी मंत्री या सांसद ऐसे बयान न दे, जिससे पार्टी या सरकार को शर्मिंदगी झेलनी पड़े। इस राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान ‘अपने बयान अपने मंत्रालय तक सीमित रखने’ की नसीहत अपने कैबिनेट सहयोगियों को प्रधानमंत्री शायद दे पाएं।

चर्चों पर हमला: एक कुटिल साजिश तो नहीं

18-04-2015
देश के विभिन्न भागों में चर्चों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर सदस्यों ने सरकार से एक ऐक्शन प्लान के तहत इन हमलों के पीछे के सच को उजागर करने की अपील की। एक सदस्य ने तो यहां तक कह दिया कि ‘चर्चों पर हमले ईसाईयों द्वारा एक सुनियोजित साजिश के तहत खुद करवाए जा रहे हैं, ताकि सरकार को बदनाम किया जा सके।’ बैठक में यह भी मांग की गई कि केंद्र और राज्य सरकार, दोनों को मिलकर इन हमलों के दोषियों को सामने लाना चाहिए। अपने तर्क को और मजबूत करते हुए उपरोक्त सदस्य ने यह ध्यान दिलाया की येदुयरप्पा के सरकार में आते ही कैसे इन हमलों में बढ़ोत्तरी हो गयी थी और भाजपा की सरकार गिरते ही ये हमले अचानक ही बंद हो गए। उनका मानना है कि यह एक तरह से भाजपा को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश है। उन्होंने आगे कहा कि ‘यह हमले भाजपा से द्वेष रखने वाले लोगों की रणनीति का हिस्सा है, ताकि सरकार विकास के अपने लक्ष्य से भटककर इन मुद्दों में अटकी रह जाए।’

 बंगलुरू से एस.ए.हेमंता कुमार

otz aveteslaлобановский политик

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