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थम नहीं रहा किसानों की खुदकुशी का सिलसिला

थम नहीं रहा किसानों की खुदकुशी का सिलसिला

पश्चिम बंगाल में आलू-किसानों के खुदकुशी का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य सरकार इन मौतों की वजह पारिवारिक अशांति बता रही है, जबकि सच्चाई ये है कि ठंड एवं कोहरे के कारण आलू की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है, जिसके कारण किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं।

26 मार्च 15 को मालदा में आलू किसान भगत राय ने कीटनाशक खाकर खुदकुशी कर ली। इस खबर ने प्रशासन के कान खड़े कर दिए। इस संदर्भ में मृतक किसान के भाई गेनू राय ने बताया कि उनकी सात बीघा जमीन है, जिस पर तीन भाइयों ने मिलकर आलू और मकई की खेती की थी। भगत ने ढ़ाई बीघा जमीन पर आलू के बीज बोये थे, मगर पूस के महीने में कड़ाके की ठंड और कोहरे के कारण आलू के फसलों को काफी नुकसान हुआ। इससे भगत सहित तीनों भाइयों को करारा झटका लगा। फिर भी भगत राय ने 40 हजार रूपए ऋण लेकर पुन: नए सिरे से आलू की खेती शुरू की, लेकिन उसे दूसरा झटका तब लगा जब जोरदार बारिश एवं तूफान ने पुन: उसके मकई की खेती को नुकसान पहुंचाया। आलू का फसल भी बर्बाद हो गया। उसने सोचा था कि आलू के फसल से जो फायदा होगा, उससे महाजन के रूपए लौटा देगा, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। उसकी उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फिर गया। उधर महाजन ने उसे पैसों के लिए परेशान करना शुरू कर दिया, लिहाजा उसका मनोबल टूट गया और उसने कीटनाशक खाकर खुदकुशी कर ली।

यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी आलू-किसानों ने खुदकुशी की है। पूरे राज्य में अब तक 15 आलू-किसानों ने आत्महत्यां कीं, जबकि राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक मरने वाले किसानों की संख्या नौ है। जो भी हो, किसानों की मौत का सिलसिला राज्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं।

18-04-2015

मालदा के जिलाधिकारी शरद द्विवेदी के मुताबिक, आलू के फसलों के नष्ट होने के कारण किसानों को भारी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे वे खुदकुशी करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि भगत राय की मौत की विस्तृत रिपोर्ट बामनगोला ब्लॉक के प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से मांगी गई है। साथ ही मामले की तहकीकात के आदेश भी जिला प्रशासन की ओर से दिए गए हैं। लिहाजा विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही कोई ठोस कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी तरफ , जब इस संवाददाता ने इलाके के प्रखण्ड विकास पदाधिकारी समीर डे से मुलाकात की तो उन्होंने कुछ और ही बताया। उनके मुताबिक, भगत राय राज्य के बाहर मजदूरी करने गया था, लेकिन वहां उसे मजदूरी के एवज में रूपए नहीं मिले, जिसकी वजह से उसने खुदकुशी कर ली। इस पर भाजपा नेता राहुल सिन्हा का कहना है कि प्रशासन अपना पल्ला झाड़ रहा है। ऐसे समय में राज्य सरकार को किसानों की मदद करनी चाहिए, लेकिन सरकार इस मामले पर मौन है।

आलू-किसानों की खुदकुशी के मामले को लेकर राज्य की विपक्षी पार्टियां एवं मजदूर-संगठन मुखर हो रहे हैं। इसे लेकर लगातार आंदोलन हो रहे हैं। रैलियां निकाली जा रहीं हैं। महानगर कोलकाता में मजदूर क्रांति परिषद ने रैली निकाल कर राज्य सरकार पर हमला बोला और आलू किसानों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक ध्यान देने की मांग की। दरअसल आलू को लेकर पश्चिम बंगाल पिछले कई महीनों से अस्थिर है। आलू के कम पैदावार को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रदेश से बाहर आलू ले जाने पर प्रतिबंध लगा दी, ताकि बंगाल के लोगों को पर्याप्त मात्रा में आलू मिल सके। इसके बावजूद भी चोरी-छिपे आलू लदे वाहन धड़ल्ले से प्रदेश के बाहर जाते रहे हैं।

अब किसानों की खुदकुशी के मामले पर सरकार खामोश है। राज्य में आलू किसानों द्वारा एक के बाद एक खुदकुशी किए जाने की घटना पर प्रदेश के मंत्री अरूप विश्वास का कहना है कि कोई भी किसान कर्ज से नहीं मरा है, बल्कि मौत की वजह उनकी पारिवारिक अशांति है। राज्य सरकार के श्रम मंत्री मलय घटक भी इस मामले पर कुछ ऐसा ही कहते हैं। उन्होंने बताया कि विपक्षी पार्टियां नाहक ही इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेर रही हैं, जबकि कर्ज के कारण किसी भी किसान की मौत नहीं हुई है। राज्य सरकार ने किसानों के आलू उचित मूल्य पर खरीद कर लोगों तक पहुंचाए हैं। दूसरी तरफ  मजदूर क्रांति परिषद् के सदस्यों का कहना है कि किसानों को आलू की उचित कीमत नहीं मिली, जिससे उन्हें काफी क्षति हुई। गरीब किसानों ने कर्ज लेकर आलू की खेती की, लेकिन नुकसान ने उन्हें तोड़ कर रख दिया, लिहाजा उनके सामने आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। किसानों के इस दलील को राज्य सरकार सिरे से खारिज कर रही है, इससे किसानों में खासी नाराजगी है।

कृषि विभाग के आंकड़ें

कृषि विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, मालदा जिले में इस वर्ष 10 हजार 385 हेक्टेयर जमीन पर आलू की खेती हुई है, जिससे 2 लाख मिट्रिक टन से भी ज्यादा पैदावार होने की संभावना है। पिछले साल 10 हजार 200 हेक्टेयर जमीन पर आलू उगा था, जिससे एक लाख 77 हजार मिट्रिक टन आलू का उत्पादन हुआ था। मालदा के सामसी एवं आदिना इलाके में दो सरकारी कोल्ड स्टोरेज हैं तथा चार प्राइडेट कोल्ड स्टोरेज हैं।

मालदा से संजय सिन्हा

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