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योगी केयर्स अपार संभावनाओं के प्रदेश में कोरोना संक्रमण के दौरान संकटमोचक की भूमिका में योगी

योगी केयर्स अपार संभावनाओं के प्रदेश में कोरोना संक्रमण के दौरान संकटमोचक की भूमिका में योगी

देश में वैश्विक महामारी कोरोना का कहर जारी है और भारत सहित पूरे विश्व में लगातार कोरोना के मरीजों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। एक तरफ जहां पूरा देश माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी  के आह्वान पर लॉकडाउन के विभिन्न चरणों का मुस्तैदी से पालन कर रहा है वहीं विभिन्न राज्य सरकारें भी यथासंभव इस दिशा में प्रयासरत हैं ताकि जनमानस को इस विभीषिका से बचाया जा सके। सम्पूर्ण भारत वर्ष के इस महामारी से बचाव और उपचार के राष्ट्रव्यापी अभियान में एक राज्य विशेष और उसके मुख्यमंत्री जिनका नाम प्रभावी प्रबंधन, नवाचार और नियंत्रण के लिए लगातार सामने आता रहा, वह है उत्तर प्रदेश और उसके यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का।

जहां पूरा भारत और दुनिया के अन्य सभी देश कोरोना वायरस से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी की सरकार ने बेहतर रणनीतिक प्रबंधन से कोरोना के प्रसार पर प्रभावपूर्ण नियंत्रण बनाये रखा है। कोरोना वायरस की इस विभीषिका के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक कुशल प्रशासक के साथ ही साथ एक बेहतर प्रबंधक और प्रदेश के आर्थिक-सामाजिक पहलुओं की गहरी पकड़ रखने वाले अर्थ/समाज शास्त्री की छवि भी उभर कर सामने आई है।

आइये जानते हैं किस प्रकार फ्रंटफुट पर योगी सरकार ने वैश्विक महामारी कोरोना के विरुद्ध रणनीति बनायीं जो भारत के अन्य राज्यों ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया है:-

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चुस्त प्रशासनिक व्यवस्था

मार्च 22,2020 को योगी ने जनता कफर््यू पर पदेश के जनमानस को संबोधित करते हुए उनसे आग्रह किया कि इस महामारी से बचाव और इलाज में सहभागिता करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। इतना ही नहीं कोरोना वायरस के संक्रमण के जोखिम के मध्य भी जनसेवा के कर्तव्य पथ पर अडिग रहने वाले स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों और स्वच्छताकर्मियों आदि के प्रति आभार ज्ञापित करते हुए श्री गोरक्षनाथ मंदिर में सायंकाल 5 बजे घंटनाद किया।

मार्च महीने से आज तक इस संक्रमण से निपटने के लिए कोरोना वायरस के सम्बन्ध में योगी सरकार द्वारा गठित 11 समितियों के अध्यक्षों की समीक्षा बैठक, वरिष्ठ अधिकारीयों से वीडियो कांफ्रेंसिंग और सम्बंधित अधिकारियों को दिशा निर्देश देना योगी के दैनिक कार्यक्रम का महत्वपूर्ण अंग बना हुआ है ताकि कहीं भी, किसी भी स्तर पर कोई प्रशासनिक चूक न हो।

कोरोना वायरस संक्रमण के संदिग्ध मामलों व लॉकडाउन के उल्लंघन की सूचना देने, चिकित्सा आपातकाल, आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति या किसी अन्य मुद्दे के त्वरित निवारण हेतु अविलम्ब संपर्क करने के लिए सीएम हेल्पलाइन नंबर 1076 शुरू किया ताकि कोविड-19 से जुड़ी किसी भी शंका का समुचित समाधान हो सके।

अप्रैल माह में एनेक्सी, लखनऊ में एकीकृत आपदा नियंत्रण केंद्र राहत आयुक्त कार्यालय उत्तर प्रदेश का लोकार्पण किया जिसकी कोई भी व्यवस्था आज तक उत्तर प्रदेश में नहीं थी।

अप्रैल 8, 2020 को कोविड-19 संक्रमण से बचाव हेतु सैनिटाइजेशन के लिए स्वीकृत प्रथम फेज के 56 फायर टेंडर का लोकार्पण किया ताकि सैनिटाइजेशन कार्य को गति प्रदान की जा सके। इस दुसाध्य संक्रमण से बचाव व् इलाज हेतु मुख्यमंत्री योगी के कुशल नेतृत्व में चरणबद्ध एवं नियोजित तरीके से सम्पूर्ण समर संचालित किया जा रहा है।

लॉकडाउन के दौरान योगी का सभी अधिकारियों को यह निर्देश है कि आम जन की सुरक्षा व् सुविधा का यथोचित ध्यान रखा जाए। स्थिति की दैनिक समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रदेश में निवासरत एक भी व्यक्ति भूखा न रहे।

प्रत्येक स्थिति में यह सुनिश्चित किया जाए कि कम्युनिटी किचन से जरुरतमंदों और शेल्टर होम्स के निराश्रितों को भोजन मिलता रहे। समीक्षा के दौरान उन्होंने पाया कि कम्युनिटी किचन की व्यवस्था अच्छी है और इसे आगे बढ़ाना होगा और इसके लिए मुहल्ला-वार सर्वे और समीक्षा किया जाना भी आवश्यक है। कोविड-19 प्रकोप के दौरान जहां पूरा विश्व दुष्प्रभावित है भारत के सबसे बड़े प्रदेश उतर प्रदेश में स्थिति नियंत्रण में है और योगी के मार्गदर्शन में लागू ‘आगरा मॉडल’ की चारो तरफ प्रशंसा  की जा रही है।

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आइसोलेशन केन्द्रों का स्वयं निरीक्षण

योगी मैनेजमेंट बॉय वाकिंग एराउंड में विश्वास रखते है और शायद इसीलिए उन्होंने ग्रेटर नोएडा में स्थित शारदा यूनिवर्सिटी में कोरोना वायरस को लेकर सम्बंधित अधिकारीयों के साथ बैठक की और साथ ही शारदा अस्पताल और गाजियाबाद के संतोष मेडिकल कॉलेज में बने क्वारनटाइन व आईसोलेशन सेंटर, का निरीक्षण भी किया एवं जरुरतमंदों को राहत सामग्री प्रदान की। इसके साथ ही संजय गांधी परास्नातक आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ में कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव हेतु आवश्यक चिकित्सकीय व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया ताकि आवश्यक तैयारियों के उच्च स्तर को सुनिश्चित किया जा सके।

 

योगी सरकार ने दिया हॉटस्पॉट मॉडल

योगी सरकार का हॉटस्पॉट मॉडल राज्य ही नहीं देश में भी एक सफल मॉडल बना है जिसके बाद अन्य राज्यों ने भी इसे अपनाया और पीएम मोदी ने भी योगी सरकार के इस मॉडल की जमकर तारीफ की। इसके अंतर्गत जिस स्थान पर कोरोना के मरीज अधिक संख्या में पाए जाते हैं उस स्थान को हॉटस्पॉट बनाकर संक्रमित मरीजों को एक ही जगह पर रोक दिया जाता है और बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाया जाता है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

राज्य में संक्रमण को रोकने में अगर किसी की रणनीति सबसे कारगर रही तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की है जिनकी सख्ती के कारण राज्य में कोरोना ज्यादा नहीं फैल पाया है। यूपी में 40 फीसदी मामले तबलीगी जमात के हैं और अगर योगी आदित्यनाथ सख्ती ना करते तो राज्य में मामले कई गुना बढ़ सकते थे।

इसी मॉडल को दिल्ली सरकार ने भी अपनाया। यदि देश में संसाधन और धन की बात करें तो महाराष्ट्र सरकार के पास सबसे अधिक संसाधन उपलब्ध है, बावजूद उसके महाराष्ट्र से अभी तक देश में कोरोना संक्रमण के आने वाले मामले सबसे ज्यादा हैं। कारोबारी राजधानी होने के कारण राज्य में उद्योग जगत की सभी बड़े नाम मौजूद हैं उसके बावजूद राज्य सरकार कोरोना से लडऩा उनके लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

 

योगी का अर्थशास्त्र

प्रदेश सरकार का मानना है कि कोविड-19 से प्रभावित आर्थिक गतिविधियों की बहाली के लिए औद्यौगिक विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है जिसके लिए सेक्टोरल नीतियों का आवश्यकतानुसार सरलीकरण किया जाना चाहिए। कोरोना वायरस के कारण बंद हो रही व्यावसायिक व आर्थिक गतिविधियों के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के वित्तमंत्री की अध्यक्षता में गठित समिति की संस्तुतियों के अनुरूप लोकहित में निर्णय लिए गए ताकि प्रदेश का अर्थतंत्र सुदृढ़ हो। साथ ही योगी सरकार ने उद्योगों की बड़ी राहत देते हुए तीन वर्ष के लिए श्रम कानून समाप्त करने के भी संकेत दिए, जिसका उद्योग जगत ने पुरजोर स्वागत किया है।

नए उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि की पर्याप्त उपलब्धता आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राजस्व तथा औद्योगिक विकास विभाग को निर्देश भी दिए गए ताकि लैण्ड बैंक स्थापना की कार्ययोजना बनाकर उसे लागू करने का काम भी किया जाए।

कोरोना वायरस महामारी को दृष्टिगत रखते हुए वर्ष 2016-17 के वैट कर निर्धारण/पुन : कर निर्धारण आदेश पारित करने की समय सीमा को 30 जून 2020 तक बढ़ाये जाने की अनुमति भी प्रदान की ताकि व्यापारियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

कोविड-19 से उत्पन्न व्यापार की विकट स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्यापार कर, केन्द्रीय बिक्री कर, मनोरंजन कर आदि वाणिज्य करों के लिए लागू अर्थदण्ड-ब्याज माफी योजना को एक माह का विस्तार देने का निर्णय लिया और 30.04.2020 तक मूलधन एवं ब्याज को एकमुश्त जमा करने पर, ब्याज की माफ न की जाने वाली राशि पर 5 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट देने का प्रावधान किया।

देशव्यापी लॉकडाउन के दृष्टिगत ईंट भट्ठों के संचालन में आ रही समस्या को देखते हुए सत्र 2019-20 हेतु बिना ब्याज विनियमन शुल्क जमा करने की अनुमति प्रदान की और साथ ही शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि को भी बढ़ाया गया।

योगी ने अपने प्रत्येक संबोधन में कहा कि स्वाभाविक रूप से इस आपदा से घबराने की नहीं बल्कि इन चुनौतियों से जूझने, लडऩे और अपने आप को इसके लिए तैयार करने की आवश्यकता है।

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श्रमिकों और दैनिक मजदूरों की सहायता हेतु साहसिक कदम

प्रदेश में श्रम विभाग के अंतर्गत 20.37 लाख निर्माण श्रमिक पंजीकृत हैं जिनमे से 5.97 लाख श्रमिकों के बैंक खातों की सूचना विभाग के पास उपलब्ध थी। ऐसे श्रमिकों के खातों में प्रतिमाह रूपये 1000 की धनराशि हस्तांतरित किये जाने का निर्णय योगी ने लिया। साथ ही यह भी निर्णय लिया कि जिन श्रमिकों के बैंक खाते नहीं हैं उनके खाते यथाशीघ्र खुलवाकर विभाग में Labour Cess Fund से सभी 20.37 लाख श्रमिकों को प्रतिमाह रूपये 1000 की धनराशी डी.बी.टी. के माध्यम से उपलब्ध कराइ जाए। इस निर्णय से लगभग 203 करोड़ रूपये का व्यय भार प्रदेश पर आएगा।

इतना ही नहीं प्रदेश में लागू विभिन्न पेंशन योजनाओं में लाभार्थियों को पेंशन का भुगतान जो सामान्यत: त्रैमासिक रूप से किया जाता था, वर्तमान परिस्थितियों में सम्बंधित लाभार्थियों को दो माह की अग्रिम पेंशन अप्रैल माह में देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया ताकि पेंशनर्स को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

प्रदेश के लगभग 1.65 करोड़ अन्त्योदय, मनरेगा जॉब कार्ड धारकों, जरुरतमंदों, श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और दिहाड़ी मजदूरों को 1 माह का नि:शुल्क राशन अप्रैल माह में उपलब्ध कराने का आदेश दिया और यह भी निर्णय लिया कि जो परिवार किसी सरकारी योजना से आच्छादित नहीं हैं और उनके भरण-पोषण की कोई व्यवस्था नहीं है तो उन्हें भी सबंधित स्तर के अधिकारी की समिति की संस्तुति पर सरकार रूपये 1000 प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान करेगी।

उत्तर प्रदेश के समस्त दिव्यांगजनों को 1000 रूपये की वित्तीय सहायता आगामी तीन माह में प्रदान करने का निर्णय लिया और यह भी सुनिश्चित किया कि यह भुगतान अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में ही किया जाय और इस कार्य हेतु रूपये 1,06,77,86,000 की स्वीकृति प्रदान की।

उत्तर प्रदेश में संचालित समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों व अन्य कार्मिकों के वेतन आदि के समयबद्ध भुगतान हेतु 29 करोड़ 72 लाख 80 हजार रूपये की रकम अवमुक्त किये जाने की भी स्वीकृति दी।

कोरोना वायरस के दुष्प्रभाव से बंद व्यावसायिक व आर्थिक गतिविधियों के परिप्रेक्ष्य में दैनिक रूप से कार्य करके अपने परिवार का जीवन यापन करने वालों के सहायतार्थ बैंक खाते में भरण पोषण भत्ता स्वयं हस्तान्तरित किया ताकि समय पर सरकारी सहायता उपलब्ध हो सके और प्रदेश का कोई भी नागरिक स्वयं को निरीह और असहाय ने महसूस करे। इतना ही नहीं कोविड-19 के दृष्टिगत मनरेगा के 27.5 लाख श्रमिकों को देय 611 करोड़ रूपये की धनराशि को भी उनके खाते में स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हस्तांतरित की।

 

प्रशासनिक कोताही पर जीरो टॉलरेंस

अगर अन्य राज्यों की बात करें तो यूपी में योगी आदित्यनाथ ने कोरोना के खिलाफ जिस स्तर की सख्ती दिखाई, उसकी जगह अन्य राज्यों के सीएम/नेता अपने राजनीतिक हितों के चलते चुपचाप दिखाई दिए। योगी सरकार का प्रशासनिक अमले को स्पष्ट आदेश है कि प्रदेश के प्रत्येक वासी की सुरक्षा और कुशलक्षेम प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है और प्रशासन प्रत्येक स्थान पर अपने कार्यों के द्वारा सहायक के रूप में दिखे, न कि किसी शोषक या अवरोध के रूप में।

इस क्रम में कोविड-19 के संक्रमण की रोकथाम हेतु एसजीआई कॉलेज, आगरा में स्थापित क्वारंटीन/आइसोलेशन केंद्र में आवश्यक व्यवस्थाओं की सुनिश्चितता हेतु उच्चाधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में बीडीओ, अक्षनेरा, आगरा को निलंबित किया जाने का निर्णय हो या फिर गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी का स्थानांतरण हो, ये निर्णय योगी की प्रशासनिक लापरवाही के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति को सिद्ध करते है।

इतना ही नहीं योगी ने जनपद महाराजगंज में मनरेगा योजना के अंतर्गत कार्यों के संपादन में लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के आरोप में तत्कालीन उपायुक्त श्रम एवं रोजगार, महाराजगंज को निलंबित करने का आदेश तो दिया ही और इस प्रकरण की जांच हेतु संयुक्त विकास आयुक्त गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी भी नामित किया।

 

संपर्क और बातचीत से जागरूकता का प्रसार

संक्रमण को देखते हुए सभी प्रकार के धार्मिक अनुष्ठानों को घर पर रह कर ही करने की अपील की और लॉकडाउन को पूर्ण समर्थन देने का आह्वान किया जिससे कोरोना वायरस के खिलाफ अभियान को एक नई गति मिले और प्रत्येक नागरिक को बचाने में भी सफलता मिले।

कोविड-19 संक्रमण के रोकथाम हेतु योगी ने धर्मगुरुओं से वीडियो कांफ्रेंसिंग की ताकि उनके माध्यम से आम जनमानस को भी जागरूक किया जा सके।

 

प्रवासियों का दर्द समझने वाले योगी

मार्च 29, 2020 शुरुआती लॉकडाउन के दौरान योगी ने अपील की कि उत्तर प्रदेश के नागरिक केरल या देश के अन्य किसी राज्य में रह रहे हैं वे लोग लॉकडाउन की इस कार्यवाही का पूर्णत: पालन करें और इस बात के लिए आश्वस्त रहें कि राज्य सरकार प्रदेश में रहने वाले उनके रिश्तेदारों एवं परिजनों के साथ ही प्रत्येक व्यक्ति की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और वे अपनी किसी भी समस्या के लिए सम्बंधित नोडल अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने प्रवासियों से शुरुआत में अपील की कि अनावश्यक यात्रा करके स्वयं और अपने परिवारजनों के स्वास्थ्य को खतरे में न डालें।

बढ़ते हुए लॉकडाउन और इसके जल्दी समाप्त न होने की आशंका ने उत्तर प्रदेश के स्थायी निवासियों जो प्रवासी मजदूरों और कामगारों की तरह दूसरे राज्यों में कार्यरत थे, उनके सामने रोजी-रोटी का एक बड़ा संकट उपस्थित कर दिया। जहां प्रदेश के अन्य राज्यों ने अपने निवासियों को इस संकट की घड़ी में प्रदेश में वापस आने की अनुमति को सिरे से नकार दिया वहीं योगी ने हर संभव प्रयास किया कि उत्तर प्रदेश का निवासी देश के जिस किसी भी राज्य में हो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ की है, और इसके लिए उन्होंने बाकायदा एक हेल्पलाइन भी बनायीं जहां प्रदेश का नागरिक अपनी समस्या बता सकता था।

जब स्थिति नियंत्रण से बाहर निकल गयी और भारत की राजधानी दिल्ली के आनंद विहार बॉर्डर पर बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अफवाहों की वजह से अपने गांव जाने को पहुंच गए तो योगी आदित्यनाथ ने उनके दर्द को समझा और त्वरित निर्णय लेते हुए उनके वापस आने के लिए बसों का इन्तजाम किया, साथ ही यह भी सुनिश्चित किया कि उनके गांव के पास ही उन्हें क्वारंटाइन किया जाए ताकि जो प्रवासी प्रदेश में वापस आ रहे हैं उनकी वजह से प्रदेश में कम्युनिटी स्प्रेड न हो।

यह एक साहसिक निर्णय था जिसके विफल होने पर उनकी आलोचना भी हो सकती थी लेकिन योगी ने अपनी आलोचना की परवाह किये बना प्रवासी मजदूरों के दर्द में उनका साथ दिया।

उत्तर प्रदेश में दूसरे राज्यों से प्रवासी मजदूर और कामगार लगातार आ रहे हैं और उन्हें पहली बार इस बात का एहसास हुआ कि जिस राज्य को छोड़कर वे रोजी-रोटी के लिए दूसरी जगह चले गए आज इस संकट में उसी राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनके एकमात्र सहारा बने। यहां अगर यह कहें कि कोरोना संकट काल में उत्तर प्रदेश पूरे देश में एक मिसाल बनकर उभरा है तो यह कहना गलत नही होगा।

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार ने भीलवाड़ा मॉडल की जमकर तारीफ की लेकिन हकीकत यह है कि राजस्थान का यह मॉडल भीलवाड़ा को छोड़कर राज्य के किसी भी अन्य जिले में बहुत सफल नहीं हुआ।

उत्तर प्रदेश सरकार, अन्य प्रदेशों में रोजगार या पढ़ाई के सिलसिले में निवासरत प्रत्येक प्रवासी मजदूर, युवा अथवा प्रतियोगी छात्र-छात्राओं को उनके घर वापस पहुंचाने हेतु प्रतिबद्ध है, यह कहना है प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का।

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अत्याधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल

प्रदेशवासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा के दृष्टिगत प्रदेश के आयुष विभाग द्वारा विकसित ‘आयुष कवच’ मोबाइल एप का लोकार्पण किया गया। उत्तर प्रदेश कोविड केयर एवं मुख्यमंत्री कार्यालय के ऑफिसियल फेसबुक पेज पर ‘फेसबुक मैसेंजर चैट बोट’ लांच किया गया जिसके माध्यम से सभी फेसबुक यूजर्स कोरोना वायरस से जुड़ी समस्त जानकारियां, जिलों में राहत के लिए तैनात नोडल अधिकारियों के नंबर व जिलों के इमरजेंसी नंबर प्राप्त कर सकेंगे।

मजदूरों के लिए रोजगार और आजीविका की योजनाएं बनाने में सहायता करने के लिए सरकार ने नया एप ‘प्रवासी राहत मित्र एप’ का लोकार्पण किया। प्रवासी श्रमिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा एवं उन्हें आजीविका प्रदान करने में सहयोग करने हेतु आवश्यक डेटा संग्रहण में यह एप उपयोगी होगा।

 

कोरोना योद्धाओं को किया सेफगार्ड

प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कोरोना से लड़ रहे कोरोना योद्धाओं की रक्षा के लिए राज्य में सालों पुराने कानून में आमूलचूल परिवर्तन किया ताकि कोरोना योद्धाओं से मारपीट और बदसलूकी करने वालों को उचित सजा मिल सके। राज्य सरकार ने कोरोना योद्धाओं पर हमला करने वाले और थूकने वालों के लिए 7 साल की सजा और रूपये 5 लाख तक का जुर्माना लगाने का कानून बनाया है क्योंकि अभी तक कमजोर कानून होने के कारण इन मारपीट करने वालों और थूकने वालों के खिलाफ कार्यवाही करना संभव नहीं था।

यही नहीं कोरोना योद्धाओं पर हमला करने वालों को जेल भेजा और उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत रिपोर्ट भी दर्ज की जिसके बाद राज्य में कोरोना योद्धाओं पर होने वाले हमले काफी कम हो गए जबकि अन्य राज्यों में कोरोना योद्धाओं पर हमले अब भी जारी हैं। इतना ही नहीं योगी सरकार ने कोरोना योद्धाओं को आवश्यक संसाधन जैसे पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर समेत अन्य जरूरी सामान भी मुहैया कराएं जबकि वहीं पंजाब और पश्चिम बंगाल में मेडिकल स्टाफ इन जरूरी सामानों की मांग कर रहे हैं और सरकारें उपलब्ध नहीं करा पा रही है।

 

रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु प्रयास

एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कोरोना के संक्रमण को रोकने और उससे पीडि़त मरीजों के उपचार में दिन-रात संघर्षरत हैं वहीं योगी को लॉकडाउन के बाद रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की भी चिंता है। योगी का मानना है कि इस चुनौती के लिए अभी से तैयारी की आवश्यकता है। वे कोरोना के मौजूदा संकट में भी एक अवसर को देखने का साहस कर रहे है और इसे चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए प्रदेश को एमएसएमई सेक्टर का हब बनाने की योजना पर कार्यरत हैं। उनकी माने तो इससे न्यूनतम पूंजी, न्यूनतम जोखिम के निवेश के साथ स्थानीय स्तर पर लोगों को अधिकाधिक रोजगार मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य राज्यों से प्रदेश में आए व्यक्तियों को प्रदेश में ही रोजगार के अवसर प्रदान करना योगी की दूरदृष्टि और संकल्प है यद्यपि यह किसी बड़ी चुनौती से कम न होगा। यदि हम आंकड़ों की बात करें तो मोटे तौर पर इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश में आगामी 03 से 06 महीनों के भीतर कम-से-कम 15 से 20 लाख लोगों के लिए रोजगार सृजित करना होगा।

 

डॉ. आदित्य  पी. त्रिपाठी

(डॉ आदित्य पी.त्रिपाठीदिल्ली विश्वविद्यालय के श्याम लाल कॉलेज (E), में वाणिज्य विषय के शिक्षक हैं )

 

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