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राम मंदिर: एक स्वर्णिम अध्याय की शुरूआत

राम मंदिर: एक स्वर्णिम अध्याय की शुरूआत

लगभग ढाई माह से कोरोना संकट एवं लॉकडाउन का दंश झेल रही रामनगरी अयोध्या में अब धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गयी है। रामनगरी का वातावरण शंख, घंटा घडिय़ाल एवं आरती की धुन से राममय हो गया है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार श्रद्वालुओं का यहां के लगभग 6 हजार पौराणिक एवं धार्मिक मंदिरों में दर्शन पूजन एवं अर्चन का कार्यक्रम सीमित दायरे में शुरू हो गया है। कई माह से विरान पड़ा सरयू तट पर अब चहल-पहल शुरू हो गयी है और अयोध्या की गलियों में भी जय श्रीराम का नारा लगाते हुये श्रद्वालुओं का आवागमन शुरू हो गया है। इसी के साथ अब राम मंदिर निर्माण की गतिविधियां भी तेज हो चली है।

श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु रामलला का भव्य अलौकिक राम मंदिर बनाने की प्रक्रिया लॉकडाउन के दौरान प्रशासन की अनुमति से 11 मई से प्रारम्भ हुई। श्रीराम जन्मभूमि परिसर की भूमि का समतलीकरण एवं परिसर के अंदर बने बैरीकेटिंग को हटाने का कार्य शुरू हुआ। लेकिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देखरेख में राम मंदिर निर्माण की अनौपचारिक शुरूआत रामलला विराजमान मेकशिफ्ट स्ट्रक्चर से अस्थायी राम मंदिर में रामलला के स्थापित होने के साथ शुरू हो गयी थी। लॉकडाउन के दौरान रामनवमी तिथि को श्रीराम जन्मभूमि पर राम मंदिर निर्माण के प्रथम चरण की शुरूआत पूजन-अर्चन के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिसर में बने अस्थायी राम मंदिर में रामलला के विग्रह को स्थापित करके किया। जब अस्थायी राम मंदिर में रामलला का दर्शन, पूजन, हवन शुरू हो गया तो दूसरे चरण में श्रीराम जन्मभूमि परिसर के समतलीकरण एवं साफ-सफाई का कार्य शुरू हुआ, जो अनवरत जारी है। श्रीराम जन्मभूमि परिसर के समतलीकरण का कार्य ट्रस्ट के महासचिव चम्पत राय एवं ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र खुद देख रहे है और पिछले एक माह से परिसर स्थित मानस भवन में डेरा डाले हुये है।

ट्रस्ट की देखरेख में शुरू हुये भूमि समतलीकरण कार्य के दौरान मंदिर के प्राचीन दुर्लभ पूरा अवशेष मिले है। यह अवशेष उसी तरह है जैसे माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई के दौरान मिले थे। खुदाई के दौरान मिले सभी दुर्लभ अवशेषों को परिसर में ही अभी सुरक्षित रखा जा रहा है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट राम मंदिर का तकनीकी निर्माण गर्भगृह पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से विधिवत अनुष्ठान एवं पूजन- अर्चन करके कराना चाहता है। इससे पूर्व 30 अप्रैल को प्रधानमंत्री का कार्यक्रम तय था लेकिन लॉकडाउन के कारण कार्यक्रम स्थगित हो गया था। 9 नवम्बर 2019 को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राम मंदिर पर निर्णय देने के बाद से करोड़ों हिन्दुओं को श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य अलौकिक राम मंदिर में विराजमान रामलला के दर्शन की इच्छा बलवती हो उठी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में राम मंदिर पर चर्चा के दौरान राम मंदिर के लिए बनने वाले ट्रस्ट के नाम की घोषणा की। ट्रस्ट का नाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र होगा। 15 सदस्यीय वाले इस ट्रस्ट में अध्यक्ष, महासचिव एवं कोषाध्यक्ष के अतिरिक्त सभी ट्रस्टी होंगे। श्रीराम जन्मभूमि न्याय के अध्यक्ष एवं राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख संत महंत नृत्य गोपालदास जी को अध्यक्ष एवं विश्व हिन्दू परिषद के अन्तर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष चम्पत राय को महासचिव व स्वामी गोविन्द देव गिरि को कोषाध्यक्ष बनाया गया। मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन पूर्व कैबिनेट सचिव नृपेन्द्र मिश्रा को बनाया गया एवं जगतगुरू शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानन्द सरस्वती जी महाराज, जगतगुरू माधवाचार्य स्वामी विश्वप्रसन्न तीर्थ जी महाराज, युगपुरूष परमानन्द जी महाराज, निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास, वरिष्ठ अधिवक्ता के पाराशरण, डा. अनिल मिश्र, राजा विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र, कामेश्वर चौपाल एवं तीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी पदेन ट्रस्टी होंगे।

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट क्षेत्र के ट्रस्टियों ने वरिष्ठ अधिवक्ता एवं ट्रस्टी के पाराशरण के दिल्ली आवास पर आयोजित प्रथम बैठक में कुल 9 प्रस्ताव पास किये और ट्रस्ट की बैठक में यह भी तय हुआ कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार ट्रस्टियों की भूमिकायें भी तय हुई।

श्रीराम जन्मभूमि पर रामलला के राम मंदिर निर्माण के साथ साथ श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या के समग्र विकास की भी रूपरेखा तय कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भूमि पूजन के कार्यक्रम के बाद ही मंदिर निर्माण का कार्य विधि-विधान के साथ शुरू होगा। निर्माण के लिए परिसर में ही आवश्यक तैयारियां की जा रही है। निर्माण कम्पनी ने भी परिसर का निरीक्षण कर आवश्यक तैयारियां कर ली है। श्रीराम जन्मभूमि पर प्रस्तावित राम मंदिर का स्वरूप विश्व हिन्दू परिसर द्वारा प्रस्तावित मॉडल पर ही आधारित होगा। इसके लिए पत्थरों के तरासने का कार्य भी प्रगति पर है एवं कार्य को और गति देने के लिए अब श्रीराम जन्मभूमि परिसर में ही कार्यशाला को स्थानान्तरित करने की कवायद शुरू हो गयी है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डा. अनिल मिश्र का मानना है कि राम का मंदिर भव्य एवं अलौकिक होगा। राम मंदिर का पूरा परिसर भक्ति भाव से ओतप्रोत होगा। अयोध्या में प्रवेश करते ही श्रद्वालुओं को पूरा वातावरण राममय दिखेगा, ऐसी तैयारी की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही अयोध्या के विकास को नयी गति मिली है। जहां मुख्यमंत्री द्वारा दिव्य दीपोत्सव का आयोजन करके पूरी दुनिया को राम नगरी के धार्मिक एवं पौराणिक उत्सव, दीपावली को दिखाने का प्रयास किया गया कि यह अयोध्या के सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर है, वहीं राम की पैड़ी अविरल व निर्मल रहे इसके लिए भी निर्माण जारी है। गुप्तारघाट से लेकर नयाघाट तक निर्माण के कई कार्य चल रहे है। अयोध्या को नगर निगम बनाकर भी अयोध्या को विस्तारित किया गया। बाद में जनपद एवं मण्डल का नाम भी अयोध्या हो गया।

अयोध्या की सांस्कृतिक सीमा चौरासी कोस की है। प्रदेश सरकार अयोध्या के विकास के लिए चौरासी कोस की सीमा को केन्द्र बिन्दु में रखकर योजनाएं बना रही है। केन्द्र सरकार द्वारा चौरासी कोसी परिक्रमा पथ को फोर लेन घोषित कर दिया गया है। चौरासी कोस पथ पर पडऩे वाले सभी धार्मिक, पौराणिक एवं तीर्थस्थलों को विकसित करने की प्रदेश सरकार की योजना है। इसके साथ-साथ अयोध्या में 251 मीटर की प्रभु श्रीराम की दर्शनीय प्रतिमा लगाने का कार्य भी प्रगति पर है। इसके लिए भूमि का चिन्हीकरण का कार्य अंतिम चरण में है।

 

अयोध्या से कमलेश श्रीवास्तव

 

 

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