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”सेवा में कोई भेद नहीं होता’’ – मोहनराव भागवत

”सेवा में कोई भेद नहीं होता’’ – मोहनराव भागवत

”जीवन में सेवा धर्म है और सेवा ही दान है। सेवा में कोई भेद नहीं होता, इसलिए इसकी पात्रता के लिए हिंदू या स्वयंसेवक होना जरूरी नहीं है। यह संबंध निरपेक्ष आत्मीयता का है।’’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने राष्ट्रीय सेवा संगम के दिल्ली में आयोजित भव्य सम्मेलन में यह बात कही।

राष्ट्रीय सेवा भारती ने राष्ट्रीय सेवा संगम का त्रिदिवसीय भव्य सम्मेलन दिल्ली के समीप अलीपुर में बाला साहब देवरस सभागार में आयोजित किया। बंगलुरू में प्रथम राष्ट्रीय सेवा संगम के सफल आयोजन के बाद यह  सेवा संगम का दूसरा आयोजन था। सेवा संगम का उद्घाटन माता अमृतानंदमयी ‘अम्मा’ ने अपने करकमलों द्वारा किया।

माता अमृतानंदमयी ‘अम्मा’ ने अपने आशीर्वचनों में शांति एवं संतोष से परिपूर्ण विश्व के निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने प्रेम, करुणा और सेवा के निष्काम भाव पर जोर देते हुए कहा कि यदि संपन्नता और निर्धनता की बड़ी खाई को भरने में देर लगी तो हिंसा और युद्ध से नहीं बचा जा सकेगा।  इस अवसर पर अमृतानंदमयी ‘अम्मा’ ने राष्ट्रीय सेवा भारती की पत्रिका ‘सेवा साधना’ का भी विमोचन किया।

राष्ट्रीय सेवा भारती दुर्बल समाज के आंसू पोंछने के लिये अपेक्षित भाव पैदा करने के साथ ही उनमें स्वाभिमान जगाने का प्रयास कर रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कार्यकर्ताओं और गरीबों एवं समाज के वंचित वर्ग के लोगों के लिए काम करने वाले एनजीओ में समन्वय एवं सहयोग स्थापित करना है। इसके माध्यम से अनुभवों को साझा करने के साथ ही कमजोर एवं वंचित वर्ग के लोगों की मदद के जरिए राष्ट्र निर्माण में योगदान करने को प्रोत्साहित करना रहा। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि संघ ने वर्षों से पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों के बीच सेवा भाव के विस्तार के लिए काम किया है। विदेशों में भी लोगों को सेवा के कार्यों से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति समर्थ हो इसके लिए हमें और अधिक व्यवस्थित ढंग से कार्य करना होगा।

25-04-2015

 संघ के सह सरकार्यवाह कृष्ण गोपाल ने कहा, ”भारत के बाहर की धरती से जो चैरिटी आती है उसमें निहितार्थ जुड़े होते हैं और जब चैरिटी में निहितार्थ छिपे होते हैं तो सेवाभाव नहीं रह जाता है। सेवा भाव के अभाव में वह व्यापार बन जाता है, जबकि इसके उलट भारत में नि:स्वार्थ सेवा का दर्शन होता है।’’

प्रसिद्ध उद्योगपति अजीम प्रेमजी ने कहा कि वह राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा कि देश और समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में संघ का काम प्रशंसनीय है। उन्होंने बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में मिलकर काम करने की जरूरत बताई। उद्योगपति जी.एम. राव ने कहा कि हमें यह समझना चाहिए कि हम समाज को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। हमें भविष्य को देखकर काम करना होगा ताकि समाज में शाति हो और अमीर-गरीब का अंतर मिटाया जा सके।

इस कार्यक्रम में दामिनी वुमेंस फाउंडेशन की चेयरपर्सन सिंपल टंडेल ने भी शिरकत की। ये फाउंडेशन महिला सशक्तिकरण एवं  महिला उत्थान के कार्यों के प्रति सजग है। दामिनी वुमेंस फाउंडेशन के कार्यों को माता अमृतानंदमयी समेत आरएसएस के सभी वरिष्ठ नेताओं ने सराहा।
25-04-2015

‘समरस भारत, समर्थ भारत’ ही सेवा संगम का उद्देश्य है। देश के सामाजिक तथा सांस्कृतिक ताने-बाने में वांछित बदलाव लाने के लिए जो संस्थाएं तथा व्यक्ति कार्यरत हैं, उन सभी का लेखा-जोखा इस सम्मेलन में लिया गया। हमारे समाज में श्रेष्ठ-पवित्र कार्यों का प्रचार कम मात्रा में होता है और दुर्भाग्यवश समाज के दोष-विकृतियों का प्रचार अधिक हो रहा है। समाज का बारीकी से अध्ययन करने पर ध्यान में आएगा कि आज भी समाज में दुर्जनशक्ति से सज्जनशक्ति अधिक है। स्वार्थी-भ्रष्टाचारी से नि:स्वार्थ समाज जन-सेवकों की संख्या अधिक है। यह सत्य सभी के सामने न आने के कारण ही समाज में एक प्रकार से निराशा, हताशा, उसके कारण उदासीनता, नकारात्मक भाव आता है और मन में निष्क्रियता बढ़ती है। ऐसे समय में समाज में इस प्रकार के सेवाभावी कार्यकर्ताओं को एक साथ लाना, आपसी परिचय और एक दूसरे के कार्य की जानकारी का आदान-प्रदान करने से सभी के मन का आत्मविश्वास बढ़ाकर, समाज को सही दिशा में परिवर्तित करते हुए समाज को समतायुक्त, शोषणमुक्त, निर्दोष और सुखी बनाने का निश्चय अधिक दृढ़ करने का प्रयास भी इस सेवा संगम द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने इस कार्यक्रम को अद्वितीय बताते हुए आशा व्यक्त की कि यह देश में सेवा की सुनामी लाने में सहायक होगा। भारत को विश्व के बीच श्रेष्ठ स्थान पर प्रतिष्ठित करने के प्रयत्नों में भारतीय मूल के विदेशों में बसे लोगों, विशेषकर युवकों से सहायता ली जा सकती है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि उच्च शिक्षित युवकों में सेवा का आकर्षण बढ़ रहा है। वे अच्छी नौकरियां छोड़ कर सेवा क्षेत्र में आ रहे हैं। होसबले ने सेवा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह जीवन का मंत्र है।

इस मौके पर देश की जानी-मानी दिग्गज कंपनियों के संस्थापक भी मौजूद रहे। सेवा संगम के लिये गठित स्वागत समिति के अध्यक्ष और जी मीडिया समूह के अध्यक्ष सुभाष चंद्रा ने मंचस्थ महानुभावों और प्रतिभागी समस्त प्रतिनिधियों का स्वागत किया। मंच पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह सुरेश जोशी (भैयाजी), व्यवसायी अतुल गुप्ता, राष्ट्रीय सेवा भारती के अध्यक्ष सूर्य प्रकाश टोंक उपस्थित रहे। संगम में राष्ट्रीय सेवा भारती से संबंधित 850 संस्थाओं के लगभग चार हजार प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा इस अवसर पर प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी गुणवंत कोठारी, अजीत महापात्रा और रेणु पाठक समेत कई और दिग्गजों ने भी संगम में अपनी भागीदारी दर्ज कराते हुए सभा को संबोधित किया। संगम-स्थल पर विभिन्न संस्थाओं ने अपने स्टॉल लगाये, जहां उनके उत्पादन उपलब्ध थे।

प्रीति ठाकुर

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