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गडकरीजी की जय

गडकरीजी की जय

25-04-2015

अपने गडकरीजी काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। इस समय किसानों के नुकसान का जायजा ले रहे हैं। सुना है भूमि अधिग्रहण बिल का पेंच सुलझाने में भी लगे हैं। लेकिन, भाई लोगों का कहना है कि गडकरीजी मेहनत चाहे जितनी करें, लेकिन चलेगी जेटली की। क्योंकि गडकरी अभी मोदीजी को चुभते हैं। लिहाजा भूमि अधिग्रहण पर सदन में मोर्चा चौधरी बीरेन्द्र सिंह ही संभालेंगे। बाकि खेल पीएम का चलेगा और तमाशा राजनाथ, सुषमा सब देखेंगे।

साहब बर्खास्त कर दो

25-04-2015
नई सरकार के साथ नौकरशाहों का तालमेल नए दौर से गुजर रहा है। इस संबंध में अभी हाल में बीआईएफआर (औद्योगिक पुननिर्माण ब्यूरो) के अध्यक्ष जी का ही मामला लीजिए। वह गए थे जेटली से मिलने। वित्त मंत्री ने जाने किस अंदाज में क्या समझाया कि आए और चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। सुना है बाद में सदस्यों को भी कोई फरमान (मौखिक)जारी किया गया, लेकिन वे घाघ निकले। अब उन्होंने इस्तीफा देने से मना कर दिया है। बताते हैं कि वित्त मंत्री के दबाव बढ़ाने पर अब साफ कह रहे हैं कि साहब मुझे बर्खास्त कर दो। खबरची को पता चला है कि अफसरों के इस रवैये के बाद जेटली का पैर का पसीना सिर पर चढ़ गया है। मंत्रालय जहां सदस्यों की रवानगी के लिए नियम खोज रहा है, वहीं बीआईएफआर को नए मामले लेने से मना कर दिया गया है।

आडवाणीजी मुस्कराए

25-04-2015

अपने आडवाणी जी की एक फोटो खूब वाइरल हुई है। इसमें राष्ट्रपति भवन में पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान वह पीएम मोदी के बगल में बैठकर किसी बात पर उन्मुक्त ठहाका लगा रहे हैं। पितामह की यह मुद्रा कई भाजपाई भाईयों को भी हजम नहीं हो रही है। दिल्ली के ही एक बड़े नेता को लीजिए। लगे कहने ‘आडवाणीजी का हंसना और समारोह में भावुक होकर रोना दोनों समझ में नहीं आता। ठीक वैसे ही जैसे नरेन्द्र भाई का पहले लोगों को परेशान करके रूलाना और फिर थोड़ा-सा पुचकार कर हंसाना।’

कांस्टेबल साब के दिन आए

25-04-2015
एक कांस्टेबल को अपने अच्छे दिन के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ा। हुआ यह कि कांस्टेबल साहब की एफआईआर दर्ज नहीं हो रही थी। पुलिस अधिकारियों के चक्कर लगा कर थक गए तो कोर्ट तक जाना पड़ गया। हुआ यह कि बेचारे ठगी का शिकार हो गए थे। सैमसंग का मोबाइल लिया, बनाने को दिया और इसके बाद न मोबाइल मिल रहा था न उनका ठगों पर पुलिसिया रौब। जब पुलिस वाले का यह हाल है तो सोचिए भला आम जनता का क्या होता होगा।

अभी तो कई अफसर बाकी हैं

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अपनी स्मृति ईरानी का जलवा है। उनके मंत्रालय के अफसर सुना है महामृत्युंजय पढ़कर आते हैं। एक निदेशक स्तर के अधिकारी ने बताया कि वह माला जाप करके ही निकलते हैं। पूछने पर पता लगा कि मियां मंत्रालय से बोरिया-बिस्तर बंध जाने को लेकर डरे रहते हैं। डरे भी क्यों न। मंत्रीजी की भृकुटि देखकर पहले ही चार संयुक्त सचिव किनारा कर चुके हैं। मंत्रालय के दो पूर्व पीआईबी अधिकारी भी कोप झेल चुके हैं। यहां तक पीएस विनिता श्रीवास्तव को भी दर्द का पूरा एहसास है।

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