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ओडिशा के पांच जिले नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित

ओडिशा के पांच जिले नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित

नक्सलवाद से प्रभावित राज्य के पांच जिलों को आज से इनसे मुक्त घोषित कर दिया गया है। राज्य के पुलिस महानिदेशक अभय ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि पुलिस पूरे राज्य अतिवाद से मुक्त कराने को प्रतिबद्ध है। महानिदेशक अभय ने सूचना देते हुए बताया कि अनुगुल, बौद्ध, देबगढ़, नयागढ़ और संबलपुर जिले को अब नक्सल वाद प्रभाव से मुक्त करा लिया गया है। पिछले कई सालों से इन जिलों में किसी प्रकार की कोई वारदात नहीं होने की वजह से इन जिलों को सामान्य जिलों में शामिल कर लिया गया है।

इससे पहले अप्रैल 2018 में छ: जिलों को नक्सलवाद से मुक्त घोषित किया गया था। वे जिले हैं- जाजपुर, ढेंकानाल, क्योंझर, मयूरभंज, गजपति और गंजाम। उल्लेखनीय है कि पिछले तीन दशक से राज्य में शुरू हुई नक्सल गतिविधियों ने धीरे धीरे विभिन्न क्षेत्रों में अपने समर्थक बना लिये थे। 2012 में राज्य के 30 जिलों में से 19 जिलों में नक्सलियों के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर उन्हें अतिवादी जिले घोषित कर दिया गया था।  राज्य में नक्सली हिंसा की घटनाओं ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। 2012 में नक्सलियों ने मलकानगिरी के जिलाधिकारी विनील कृष्ण का अपहरण कर सरकार को खुली चुनौती दी थी। उसके बाद सरकार ने 19 जिलों केंद्र सरकार की नक्सल वाद विरोधी योजना- सुरक्षा संबंधित व्यय (स्द्गष्ह्वह्म्द्बह्ल4 क्रद्गद्यड्डह्लद्गस्र श्व&श्चद्गठ्ठस्रद्बह्लह्वह्म्द्ग) में शामिल कर लिया था। नक्सली प्रभाव को खत्म करने के लिए सरकार ने उनके विरुद्ध कड़ी पुलिस कार्रवाई के साथ उन इलाकों में जनविकास के कामों में तेजी लाने के दोहरे मोर्चे पर काम करना शुरू किया।

महानिदेशक अभय ने कहा कि अब बचे जिलों में भी आम लोगों का पुरानी, प्रभाव खो चुकी माओ वाद से मोह भंग हो रहा है। वे सरकार के विकास कार्यों को अपना समर्थन देने लगे हैं।

फिलहाल राज्य के कुछ दक्षिणी जिलों जैसे मलकानगिरी, कंधमाल, कोरपुट, रायगढ़ा  में अभी भी नक्सली संगठन काफी सक्रिय हैं।

पुलिस को उम्मीद है कि इन जिलों को भी नक्सली संगठनों के प्रभाव से मुक्त करा लेंगे।

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ओडिशा के दो विधायक कोरोनाग्रस्त

ओडिशा में सत्तारूढ़ बीजू जनता दल (बीजद) के विधायक प्रशांत बेहरा का कोरोना वायरस परीक्षण पॉजिटिव आया है। इससे एक दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक का परीक्षण पॉजिटिव आया था।

सालेपुर सीट से विधायक बेहरा ओडिशा के दूसरे विधायक हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण हुआ है। उन्हें कटक के एक कोविड अस्पताल में स्थाथानांतरित कर दिया गया है।

इससे पहले नीलगिरि से भाजपा के विधायक सुकांत कुमार नायक का कोविड-19 परीक्षण पॉजिटिव पाया गया था।

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बिमलागढ़-तालचर रेल लाइन:   जुएल ओराम ने विलंब पर जताई चिंता

पिछले पांच दशकों से अधिक समय से बिमलागढ़ व तालचर को रेल लाइन से जोडऩे की राज्य वासियों की पुरानी मांग के प्रति राज्य सरकार के उदासीन रवैये पर पूर्व केबिनेट मंत्री सुंदरगढ़ सांसद ने नाराजगी जाहिर की है और राज्य सरकार से इस परियोजना को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया है। सांसद जुएल ओराम ने भुबनेश्वर में राज्य के राजस्व व आपदा प्रबंधन मंत्री सुदाम मरांडी से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मंत्री से रेल लाइन लाइन निर्माण हेतु शीघ्रातिशीघ्र भूमि अधिग्रहण कर रेल मंत्रालय को सौंपने की मांग की है।

पूर्व मंत्री ओराम ने अपने पत्र में लिखा कि 1968 से इस रेल लाइन निर्माण की मांग की जा रही है। बिमलागढ़ व तालचर के बीच 149 किमी बन जाने से भुबनेश्वर व राउरकेला के बीच की दूरी एक सौ किमी कम हो जाएगी। 2003 में वाजपेयी सरकार के समय इस परियोजना को रेल मंत्रालय ने स्वीकृति दी। पर राज्य सरकार द्वारा भूमि  अधिग्रहण में विलंब की वजह परियोजना 17 वर्ष बाद भी सिरे चढ़ती नहीं दिख रही है। जुएल ओराम ने राजस्व मंत्री मरांडी को  कहा है वे भूमि अधिग्रहण के लिये तत्काल एक दक्ष अधिकारी की नियुक्ति करें। उन्होंने पत्र में हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि परियोजना के लिये निजी, जंगल व सरकारी भूमि का अधिग्रहण होना है पर अभी तक स्वंय सरकार ने अपनी 421 एकड़ भूमि भी रेल मंत्रालय को हस्तांतरित नहीं की है।

यह परियोजना अनुगुल, देबगढ़ व सुंदरगढ़ जिले से गुजरने वाली है। तालचर की ओर से अबतक 39 किमी का काम पूरा हुआ है जबकि सुंदरगढ़ जिले में एक इंच भी कम नहीं हुआ है। परियोजना के लिये  रेल विभाग को कुल 2089 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है । जबकि जुलाई 2019 तक  उसे केवल 466 हेक्टेयर भूमि ही हस्तांतरित की गई है। रेल मंत्रालय ने परियोजना के लिए दिसंबर 2022 का लक्ष्य रखा है। पर वह वतर्मान परिस्थिति में कतई पूरा होता नहीं दिखता है।

इससे पूर्व 17 मार्च 2017 को श्री ओराम मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को भी ऐसा पत्र लिख  चुके हैं। इसी वर्ष मार्च महीने में लोकसभा में भी जुएल ओराम यह प्रश्न उठा चुके हैं।

इस रेल लाइन के पचास साल से आवाज उठाने वाले तालचर-बिमलागढ़ रेलपथ संग्राम समिति के अध्यक्ष अद्वेत प्रसाद बिश्वाल भी परियोजना में विलंब के  भूमि अधिग्रहण में विलंब को ही दोषी मानते हैं।

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मलकानगिरी के स्वाभिमान अंचल में हुई बस सेवा की शुरुआत

मलकानगिरी जिले में माओवादियों के दबदबे वाले तथा उनके द्वारा घोषित स्वाभिमान अंचल में आर्थिक विकास को और अधिक प्रोत्साहन देने के लिये राज्य सरकार ने 10 जुलाई से यंहा पहली बस सेवा का शुभारंभ किया है।

चित्रकोंडा के विधायक पूर्णचन्द्र बका  ने स्वाभिमान अंचल के जोड़म्बा से जिला मुख्यालय  मलकानगिरी के लिये झंडी दिखा कर पहली बस को रवाना किया। इस अवसर पर जिलाधिकारी मनीष अग्रवाल भी उपस्थित थे।

राज्य परिवहन द्वारा परिचालित यह बस प्रतिदिन सुबह नौ बजे मलकानगिरी से जोड़ाम्बा के लिये रवाना होगी और शाम को छ: बजे वापस आ जाएगी। इस बस सेवा से स्वाभिमान क्षेत्र में रहने वाले बीस हजार लोगों को फायदा होगा जो 2018 में गुरुप्रिया सेतु के बनने से पहले तक पूरे राज्य के अन्य लोगों से अलग थलग जीवन जीने को विवश थे। गुरुप्रिया सेतु बनने के बाद सरकार ने इस क्षेत्र में अनेक विकास कार्य शुरू किये हैं। सरकार ने इस क्षेत्र में घरों में पाइप लाइन द्वारा जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवा के साथ लोगों को शिक्षा सुविधाएं भी मुहैया कराना आरंभ किया है।

उल्लेखनीय है कि स्वाभिमान अंचल लंबे समय से माओवादियों का दबदबा वाला क्षेत्र रहा है। लोगों को अपने नियंत्रण में रखने के लिए उन्होंने यंहा सरकारी विकास योजनाओं पर रोक लगा रखी थी। सरकारी अधिकारी तो एक तरफ वे पुलिस बल को भी यंहा नहीं आने देते थे।  अपना वर्चस्व कायम रखने के उद्देश्य से माओवादियों ने आम लोगों और सुरक्षा बलों पर अनेक बार हमले भी किये।

सीमा सुरक्षा बल और ओडि़शा पुलिस द्वारा इस तथाकथित स्वाभिमान क्षेत्र में माओवादियों के विरुद्ध आक्रामक अभियान चलाने के बाद यहां स्वाभाविक स्थिति लौटी है और सिलेरू नदी पर गुरुप्रिया सेतु का निर्माण किया जा सका।  1982 में सरकार ने पुल बनाने के लिये पहली बार टेंडर दिया था। पर माओ वादियों ने किसी को भी निर्माण काम  करने नहीं दिया। अंतत: 2014 में सीमा सुरक्षा बल की देखरेख में 910 मीटर लंबे पुल का काम शुरू हुआ । लगभग 180 करोड़ रुपये की लागत से चार वर्ष में यह पुल बनकर तैयार हुआ जिसका उदघाटन मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 26 जुलाई, 2018 को किया।  यह पुल बनने के बाद तथाकथित स्वाभिमान अंचल , चित्रकोंडा प्रखंड के नौ ग्राम पंचायत के 151 गांव का संपर्क  राज्य के अन्य क्षेत्रों से जुड़ पाया है। अब यहां बस सेवा शुरू होने से लोगों को बहुत राहत मिली है और आशा है कि इससे आर्थिक गतिविधियों को और प्रोत्साहन मिलेगा।

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