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अब चीन की भूटान पर बदनीयत

अब चीन की भूटान पर बदनीयत

अब चीन अपने पड़ोसी देश भूटान के साकतेंग वाइल्ड लाइफ सेंचुरी पर अपना दावा ठोंक रहा है, जिसमें दुलर्भ प्रजाति के कई वन्यजीव हैं। चीनी डै्रगन(अजदहा)की इस नई हरकत को देखते हुए उसकी जमीन हड़पने की भूख की कोई सीमा नहीं है। ऐसा लगता है कि चीन को न विश्व बिरादरी में अपनी भूमाफिया की बनती छवि की परवाह है और न ही अन्तर्राष्ट्रीय कानून और सन्धियों की। इस सेंचुरी को अपना बताते हुए चीन का कहना है कि दोनों देशों की सीमा का निर्धारण करने के लिए वह शीघ्र ही पैकेज सॉल्यूशन पेश करेगा। वह आशा करता है कि भूटान उसके इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेगा और दोनों देश का सीमा विवाद सुलझ जाएगा। लेकिन भूटान ने चीन के इस दावे पर कड़ी आपत्ति जतायी है। वैसे चीन भूटान से अपना सीमा विवाद दिखाकर अपरोक्ष रूप से भारत के साथ लड़ाई का एक नया मोर्चा खोलना चाह रहा है, क्योंकि एक सन्धि के तहत भारत पर ही  भूटान की रक्षा और विदेशी मामले देखने का दायित्व है।उक्त सन्धि के कारण ही भारतीय सैनिकों को चीन के भूटान के डोकलाम पर सडक़ निर्माण करने से रोकना पड़ा था।

वस्तुत: चीन ने इससे पहले कभी भी इस सेंचुरी को अपना होने का दावा नहीं किया था, लेकिन अब चीन अपने विस्तारवादी नीति के तहत भूटान के इस इलाके पर कब्जा कर भारतीय सीमा तक पहुँचना चाहता है, ताकि उसे इस भारतीय क्षेत्र को घेरने में आसानी हो जाए। इस नए विवाद की शुरुआत पिछले दिनों तब हुई, जब भूटान ने इस सेंचुरी के लिए ‘ग्लोबल इन्वॉयरमेण्ट फैसिलिटी (जीईएफ ) आर्थिक सहायता के लिए आवेदन किया था, जिसे उसने स्वीकार भी कर लिया। यह देखकर अचानक चीन ने जीईएफ के निर्णय पर यह कहते हुए आपत्ति जतायी कि यह सम्पति चीन की है, उसे जानकारी दिये बिना  उसने इसे आर्थिक सहायता देने की मंजूरी कैसे कर ली? अब चीन का कहना है कि उसके भूटान के मध्य सीमा स्पष्ट नहीं है। सीमा को लेकर चीन की नीति स्पष्ट है। वैसे यही कह चीन अब तक पड़ोसी मुल्क चीन हड़पता आया है। उसने यही कहते हुए 2017 में भूटान के डोकलाम पर अपना दावा करते हुए सडक़ निर्माण करने की कोशिश की  थी, तब भारतीय सैनिकों से उसके सैनिकों के साथ जबरदस्त भिड़त हुई थी । यह सीमा विवाद तब 73 दिन तक चला था। चीन अपने पड़ोसियों की भूमि हड़पने की एक निश्चित चाल है,जिसके तहत वह पहले पड़ोसी मुल्कों से सीमा विवाद की बात करता है,फिर फर्जी नक्शे दिखाकर या फिर इतिहास की किसी पुरानी घटना का हवाला देकर उसके इलाके पर अपना दावा जताता है। ऐसा करते हुए चीन पुराने समझौतों और सन्धियों को दरकिनारा करता आया है। चीन पड़ोसी देशों से सीमा निर्धारण न होने की बात तो करता है,लेकिन सीमा का निर्धारण करना नहीं चाहता। इसके पीछे उसका इरादा धीरे-धीरे पड़ोसी मुल्क की जमीन पर कब्जा करना  है।

अब जहाँ तक नए विवाद के केन्द्र भूटान का प्रश्न है तो यह हिमालय में एक पर्वतीय देश है। इसके उत्तर में चीन और दक्षिण में भारत है। इसका क्षेत्रफल 46,500 वर्ग किलोमीटर है जिसकी राजधानी थिम्फू और मुद्रा न्गुलट्रम, भारतीय रुपया भी मान्य है। भूटान की  जनसंख्या 6,95,822 से अधिक है,जो बौद्ध और हिन्दू धर्मों की अनुयायी है। इस देश में डेंग्खा, नेपाली, गुरुंग, असमी अँग्रेजी भाषाएँ बोली जाती है। यहाँ पहले निरंकुश राजतंत्र था। सन् 2007 के अपराह्न में 34 वर्ष के बाद किंग वांगचुक ने घोषणा की कि वे पदच्युत हो रहे हैं और उत्तराधिकारी क्राउन प्रिन्स जिग्मे खेसर नामग्याल होंगे। जुलाई, 2008 में राजतंत्र के लगभग एक शताब्दी के बाद संविधान अपनाया गया, जिसमें दो दलीय लोकतंत्र की व्यवस्था की गई। मुख्य उद्यम कृषि है। मुख्य उपज चावल, मक्का, ज्वार, बाजरा और मोम, गोंद ,कस्तूरी जैसे वन उत्पाद है। यहाँ  से इमारती लकड़ी और फलों का निर्यात होता है।

यूँ तो चीन की इन हरकतों से दुनिया भर के तमाम देश हैरान-परेशान तो हैं, किन्तु खुलकर उसकी मुखालफत करने से बचते आ रहे हैं, इससे उसका हौसला बढ़ता ही जा रहा है। विगत कई माह चीन समेत दुनियाभार के देश कोराना विषाणु जनित महामारी से जूझ रहे हैं, पर इस दौरान चीन जिस पर इस महामारी फैलाने का आरोप है, बेफिक्र होकर एक ओर जहाँ  भारत, नेपाल अब भूटान की जमीनों पर कब्जा करने में लगा, वहीं पूरे दक्षिण चीन सागर को अपना बताते हुए दूसरे मुल्कों के जहाजों की आवाजाही में रुकावटें पैदा कर रहा है। इससे ताइवान, वियतनाम, मलेशिया, इण्डोनेशिया,लाओस,फिलीपीन्स आदि मुल्क परेशान हैं। यह सब देखते हुए अमेरिका ने अपनी दो युद्धपोत दक्षिण चीन सागर में तैनात किये हुए है। भारत भी अमेरिका ,आस्टे्रलिया, जापान के साथ मिलकर समुद्र में युद्धाभ्यास कर रहे हैं। भारत और आस्टे्रलिया ने एक-दूसरे के जहाजों को अपने नौसैनिक अड्डों पर रुक कर ईधन इत्यादि की सुविधाएँ उपलब्ध कराने का समझौता किया हुआ। अब भारत अपने अण्डमान द्वीप पर नौसेना की निगरानी बढ़ा दी, ताकि चीन को हिन्द महासागर में मनमानी करने से रोका जा सके। चीन  भारत के पूर्वी लद्दाख के कुछ इलाकों को हड़पने को गीध की तरह नजर गड़े हुए,पर भारतीय सेना भी चीन से लगी सरहद पर उसकी हर चाल का जवाब देने को सर्तक-सावधान है।इसके साथ ही चीन भारत को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और नेपाल के जरिए भी परेशान करा रहा है। नेपाल में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट सरकार ने चीन के बहकावे में आकर भारतीय क्षेत्र लिपुलेख, कालापानी, लिम्पयाधुरा को अपना बताते हुए अपना नया नक्शा जारी कर दिया। इसके बाद भी वह तरह-तरह की हरकतें कर भारत का लडऩे के लिए उकसा रहा है, जबकि उसके एक बड़े भू-भाग ने कब्जा कर लिया है, जिसका नेपाली जनता भी विरोध कर रही है।  अभी तक पाकिस्तान-चीन से मुकाबले की तैयारी में जुटे  भारत को भूटान के मामले में भी चीन से भिडऩे को अपने को तैयार रहना होगा। अब देखना यह है कि भारत चीन खड़ी चुनौतियों को सामना करने में कहाँ तक सफल होता है।

 

डॉ.बचन सिंह सिकरवार

 

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