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उम्मीद पर कायम दुनिया

उम्मीद पर कायम दुनिया

इस विचित्र जीवन में कब किस चीज का महत्व हमारे लिए बढ़ जाता है और कौन-सी चीज हमारे लिए मुल्यहीन हो जाती है, कहना कठिन है। जहां बड़ी-से-बड़ी चीज काम नहीं कर पाती है एक छोटी सी बात अपना काम कर लेती है। हम उम्मीद की बात करें तो ये समझ में आता है कि कभी-कभी एक आदमी को जीवित रखने के लिए एक छोटी सी उम्मीद भी बहुत होती है। उम्मीद पर ही दुनिया चलती है। रात के घने अंधकार में सुबह की खिलखिलाती धूप की उम्मीदें लोगों को चैन की नींद देती है। महाप्रलय में सब कुछ हारने वाले इंसान को फिर से एक नई दुनिया बसाने की उम्मीद जीने की वजह बन जाती है। देखा जाए तो उम्मीद के बिना ये दुनिया संभव ही नहीं है। उम्मीद रखना या आशावादी होना एक स्वभाव है। कभी-कभी उम्मीद की वजह से बेजान सूखी डाली पर भी नए पत्ते आने लगते हैं। आशावादी होना एक कला है, अपने अंदर हर इंसान को यह कला जागृत करनी चाहिए।

निराशावादी होना एक स्वभाव है। निराशावादी लोग अपने जीवन को व्यर्थ महसूस करते हैं। वे हर परिस्थिति को प्रतिकूल मानते हैं। दूसरों की गलती निकाल कर नकारने का बहाना ढूंढते हैं। किसी भी हालत में ऐसे लोगों को संतोष नहीं प्राप्त होता है। ऐसे लोग किसी भी काम को मन से नहीं करते हैं। व्यक्ति सदा ही दुख तथा हताशा में जीवन बीताता है।

जिस व्यक्ति के मन में उम्मीद, आशा तथा उत्साह हो, वह एक आनंदमय जीवन निर्वाह करता है। आशावादी व्यक्ति पूरी सृष्टी में ईश्वर की उपस्थिति को महसूस करता है। ईश्वर की इच्छा के विरूद्ध एक पत्ता तक नहीं हिल सकता, यह मानकर वह जीवन बिताता है। वह मन से उम्मीद के दिया को कभी बुझने नहीं देता। प्रत्येक प्रतिकूल परिस्थिति का वह धैर्य और साहस के साथ सामना करता है। ईश्वर में सच्चा विश्वास करने वाला व्यक्ति ही आशावादी रह सकता है। उम्मीद रखने वाला इंसान हर कार्य को अनंत उत्साह के साथ करता है। उसका उत्साह और सकारात्मक  सोच उसकी प्रगति का कारण बनता है।

कई बार एक छोटी सी उम्मीद भी बड़ी-से-बड़ी महाऔषधि का कार्य कर जाती है। मनुष्य का हृदय ही उसके कार्य को नियंत्रित करता है। मनुष्य का हृदय जितना सुखी रहता है, उसमें कार्य करने की क्षमता उतनी ही बढ़ जाती है। हृदय में उम्मीद रखने वाला व्यक्ति हमेशा न केवल खुद सुखी रहता है, बल्कि अपने आस-पास एक खुशी का वातावरण बना लेता है। उम्मीद रखने वाला व्यक्ति सबके साथ मिलजुल कर रहना पसंद करता है। जो व्यक्ति जितना दूसरों के साथ मिलकर रहता है वो उतना अधिक जीवन को समझ सकता है। जीवन की बेहतर समझ दु:खों से दूर रखता है।

समाज में परिस्थितियों को देखकर लोगों के अंदर उम्मीद रखना कम हो गया है। अस्पताल में वो पीडि़त व्यक्ति जिसके अंदर उम्मीद होती है वह जल्द-से-जल्द ठीक हो जाता है। लेकिन, जिस क्षण उसे यह महसूस होगा कि वह अंदर से टूट जाएगा, उस दिन से वह अपना जीवन खोना शुरू कर देगा।

समय के साथ-साथ इंसान अपने बच्चों को बड़ा कर लेता है और अपनी जिम्मेदारी खत्म कर लेता है। वह दिनों-दिन क्षीण होने लगता है, अपने अंदर से उम्मीद हार बैठता है। लेकिन, जब वह अपने बच्चों के बच्चों के साथ खेलने लगता है तो फिर से उसमें जीने के लिए उत्साह पैदा हो जाता है। जीवन में हमेशा ईश्वर के ऊपर आस्था रखें और उम्मीद को कभी नहीं छोड़ें। उम्मीद ही जीवन को नई दिशा दिखा सकती है।

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