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सेठ अजीत

सेठ अजीत

सेठ तो कैबिनेट सेक्रेटरी मियां अजीत ही हैं, बाकी सब बाबू। पिछले 15 साल में शायद ही दिल्ली का कोई बाबू इतना मजे में रहा हो। मोदी हो या मनमोहन सेहत पर कोई फर्क नहीं। मनमोहन ने जाते-जाते एक साल का सेवा विस्तार दे दिया था तो मोदी ने आते ही दो किश्तों में एक साल का विस्तार कर दिया। अब सुना है सेवा का ईनाम मिलने वाला है। मियां का नाम मिजोरम के राज्यपाल के तौर पर चल रहा है। जाने कब किस्मत आकर दरवाजे पर घंटी बजा जाए, क्योंकि पीएम भी सेठ से खुश बताए जा रहे हैं। वहीं सेठ हैं कि सावन हरा न भादों सूखा जैसी समान मुस्कान लिए निगाह नीची किए बस किए जा रहे हैं।



बोलते नहीं, मुंह से निकल जाता है

 

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अपने गिरीराज सिंह इन दिनों परेशान हैं। उनकी परेशानी यह है कि ऐसा-वैसा कुछ नहीं बोलना चाहते, लेकिन जुबान है कि काबू में ही नहीं रहती। मौका पाते ही मुंह के दरवाजे से बाहर लप-लपाने लगती है। जब पीएम मोदी को पता चला कांग्रेसियों ने सोनिया पर उनकी टिप्पणी का मुद्दा बना लिया है और संसद में इस पर दबाब बनाएंगे तो उन्होंने गिरिराज को तलब कर लिया, लेकिन बेचारे गिरिराज क्या करते। बताइए भला अगर जुबान पर इतना ही काबू होता तो अपने घर में एक करोड़ की नकदी हुई चोरी पर बयान नहीं देते! अब कौन पीएम से पूछे कि अगर गिरिराज की जुबान न होती तो उन्हें ही गिरिराज इतना क्यों सुहाते।



लो मैं आ गया

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कांग्रेसी बहुत परेशान थे। युवराज लापता हो गए थे। कुछ तो इसलिए परेशान थे कि आते ही उनकी लहलहाती फसल ‘जोत’ देंगे। हम भी परेशान थे कि आस्तीन चढ़ाकर बनारस से लेकर दिल्ली के प्रेस क्लब तक कागज फाडऩे वाले जोशीले युवा तुर्क कहां हैं। जिस दिन उनके आने की खबर सुनाई दी उस दिन कांग्रेस मुख्यालय पहुंचा जानने के लिए कि कम-से-कम यही पता चल जाए कि कहां गए थे? थक-हार कर रामलीला मैदान पहुंचा तो देखा कि वाकई राहुल बाबा खेत जोतने के लिए हल बनवाने गए थे। 56 दिन में लुहार ने काठ (लकड़ी) का ढांचा बना दिया है और फार (लोहे का जमीन में घंसने वाला) अभी पीट कर बना रहा है। इसलिए बाबा हल लेकर आ गए हैं, फार लेने फिर जाएंगे। अब भला बाबा को मोदीजी मेक इन इंडिया में ट्रैक्टर और हार्वेस्टर बनाने का सपना दिखा रहे हैं और बेमौसम बारिश से तंग किसान को बाबा हल की खेती समझा रहे हैं।



जनरल साहब और सुषमा दी

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इन दिनों अपने जनरल साहब का मिजाज फिर हिलोरें लेने लगा है। पीएम मोदी ने यमन से भारतीय नागरिकों की वापसी को लेकर उनके प्रयास की सराहना जो कर दी है। ये वही जनरल वी.के. सिंह हैं जिनकी पाकिस्तान उच्चायोग से लौटने के बाद महज एक ट्वीट से नौकरी जाते-जाते बची थी। भला हो गृहमंत्री राजनाथ का जो वीटो लगा दिया, वरना भाई लोग काम कर गए थे। हालांकि पीएम ने तारीफ तो सुषमा की भी की है। पीएम सरकार बनने के बाद से 14 देश हो आएं हैं। अगले महीने में तीन देशों की और यात्रा करेंगे, जबकि सुषमा 20 देश हो आईं हैं। करें भी क्या जब देश में काम-दाम नहीं बचा तो विदेश यात्रा ही सही।



बाबुओं की आफत

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सुना है मियां मोदी इन दिनों बाबुओं की आफत झेल रहे हैं। सामने आने पर बाबू (मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी) अपनी ‘स्मार्ट’ छवि तो दिखाते हैं, लेकिन 7 आरसीआर से हटते ही अपने ढर्रे पर लौट आते हैं। वहां मंत्रियों बिचारों के पास मोदीजी ने पहले से ही कोई बड़ा काम नहीं दिया है। बताते हैं कि नई सरकार के आने के बाद पहले तो बाबू डर गए थे, लेकिन अब थम गए हैं। मोदीजी की दिक्कत है कि पहले से आईएएस,आईपीएस की कमी झेल रहे देश में आखिर नया अधिकारी अचानक कैसे लाया जाए। लिहाजा पीएम जितना सुलझाने में लगे हैं, मामला उतना उलझता जा रहा है।



मोरा दरद न जाने कोय

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पीर परायी जाने कौन। यही हाल इस समय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का है। संजय काचरू बिचारे निबट गए। इससे पहले मंत्री महोदया ने अपनी निजी सचिव विनिता श्रीवास्तव, मीडिया सलाहकार मौसमी चक्रवर्ती, रंगनाथ मिश्रा को भी बाहर का गेट दिखा दिया था। इतना ही नहीं पांच-पांच संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी तक तंग होकर एचआरडी से हटने में भलाई समझे। अब ये सब जहां मैडम का कद छोटा किए जाने की खबरों से दिवाली मना रहे हैं, वहीं मैडम भी अपनी जुबान को कस रही हैं। संघ के एक बड़े पदाधिकारी से मिलने क्या गईं, बहुत कह आईं। बाद में पूरी ट्रांसक्रिप्ट अमित भाई को मिल गई। अमित भाई ने नरेन्द्र भाई से क्या गुफ्तगू की कि उनकी कृपा से जमीन से सीधे आसमान की फ्लाइट पकड़ कर ‘मंगल’ पर पहुंचने वाली ‘बहना’ को अब जमीन पर तारे टिम-टिमाते नजर आ रहे हैं। वह न इसे कह पा रही हैं, न हजम कर पा रहीं हैं।

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