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‘भारत में ईसाई पूरी तरह सुरक्षित’ के.जे. एलफांस

‘भारत में ईसाई पूरी तरह सुरक्षित’ के.जे. एलफांस

पूर्व आइएएस अधिकारी तथा भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के.जे. एलफांस का मानाना है कि भारत में ईसाई पूरी तरह सुरक्षित हैं और हर ‘छोटी-बड़ी वारदात की सरकार जांच करती है और ज्यादातर मामलों में अपराधी पकड़े जाते हैं।’ भारत में हाल में चर्चों की सुरक्षा को लेकर उठे सवालों पर उनसे रोहन पाल ने विस्तार से बात की। बातचीत के कुछ अंश :

जब भी भारत में गैर-कांग्रेसी सरकारें बनती हैं, हाल में हुईं दिल्ली जैसी वारदातें बढऩे लगती हैं। सत्तर के दशक में जनता पार्टी के दौर में भी यही हुआ। 2008 में कर्नाटक में भाजपा सरकार के दौर में भी यही हुआ। ऐसा क्यों?

जब भाजपा सरकार में आती है तभी चर्चों पर हमले बढ़ते हैं, यह सही नहीं है। न घटनाओं की संख्या में इजाफा हुआ है, न ऐसी वारदातों में खास तेजी आई है। अगर पिछले 10 महीने के आंकड़ों पर गौर करें तो तेजी तो कतई नहीं आई है। इसके विपरीत पिछले 19 महीनों की पुलिस जांच और अपराधियों के पकड़े जाने के आंकड़े देखेंगे तो पाएंगे कि हर मामले की तहकीकात बेहतर ढंग से हो रही है। अब ज्यादातर अपराधी पकड़े गए हैं, जो कांग्रेस शासन में देखने को नहीं मिला। भाजपा के राज में तहकीकात बेहतर हुई है और अपराधी पकड़े भी गए हैं। इसलिए यह भाजपा को नापसंद करने वाले लोगों और मीडिया द्वारा फैलाया दुष्प्रचार ही ज्यादा है। ऐसे तत्व लोगों में डर पैदा करना चाहते हैं कि मोदी और भाजपा के सत्ता में आते ही अल्पसंख्यकों पर खतरा मंडराने लगता है।

कहा जाता है कि भारत में चर्च पश्चिम की सुनियोजित साजिश और भारी धनबल के साथ धर्म परिवर्तन के मिशन में लगे हैं। 1956 में नियोगी आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट में माना था कि ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां और धर्म परिवर्तन भारत के लिए खतरा है। क्या आपको लगता है कि इसके लिए कोई अंतर्राष्ट्रीय एजेंडा काम कर रहा है?

नहीं, दो-तीन बातें हैं। एक तो यह कि ईसाई धर्म भारत में 2000 साल से है। यूरोप और इटली में, जहां कैथोलिक चर्च की पीठ है, पहुंचने से पहले ईसाई धर्म भारत में आ गया था। सन 52 में ईसा के एक शिष्य सेंट थॉमस भारत आए और यहां सीरियाई चर्च की स्थापना की। इसलिए भारतीय चर्च दुनिया में सबसे पुराना चर्च हैं। इसलिए जो लोग कहते हैं कि भारत में चर्च नया है, वे गलत हैं।  सीरियाई चर्च तो पूरी तरह भारतीय चर्च है। यह यूरोप या कहीं और से नहीं आया है। भारतीय चर्च भारतीय परंपराओं पर चलता है। दूसरे, चर्च को बाहर से पैसे नहीं मिलते। सीरियाई चर्च दुनिया का सबसे समृद्ध चर्च है। हमें किसी के पैसे की दरकार नहीं, बल्कि हम काफी रकम बाहर मदद के लिए भेजते हैं। सीरियाई चर्च को कहीं से कोई मदद नहीं मिलती। भारत में अगर ईसाईयों को देखें तो 90 फीसदी सीरियाई ईसाई हैं। अगर आप भारत में चर्च की बात करते हैं तो सबसे पुराने चर्च की बात कीजिए, नए धर्मांतरितों के मुट्ठी भर चर्च की नहीं। आप जब भारत में ईसाईयों की बात करते हैं तो आप नए परिवर्तित, एंग्लो-इंडियन समुदाय की बात करते हैं। भारत में ईसाईयत यही नहीं है, भारत में ईसाईयत की जड़ें गहरी हैं।

आइए आंकड़ों की बात करें। 1951 की जनगणना में ईसाई 2.9 फीसदी थे। 2011 की जनगणना में ईसाई महज 2.3 फीसदी या उससे भी कम हैं। भारत में उनकी संख्या में तेजी से गिरावट आई है। इसलिए किसी को डरने की जरूरत नहीं है। यह डर भी जान-बूझकर फैलाया गया है कि बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है और भारत एक दिन ईसाई देश बन जाएगा। इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मूल रूप से ईसाई भारत में क्या कर रहे हैं? वे स्कूल, अस्पताल उन दूर-दराज के इलाकों में चला रहे हैं जहां कोई नहीं पहुंचता। वे अनाथालय, वृद्धाश्रम, बेसहारों के लिए आश्रय चला रहे हैं। इस तरह वे मानवता की अनोखी सेवा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि सरकार को इसकी सराहना ही करनी चाहिए। अगर वे धर्म परिवर्तन में जुटे होते तो उनकी तादाद काफी बढ़ गई होती, न कि तेजी से घट गई होती। इसलिए मुझे लगता है कि चर्च से किसी को डरने की दरकार नहीं है। बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन और इसके लिए भारी रकम विदेश से आ रही है, ऐसी बातों में कोई सच्चाई नहीं है। फिर, हमारे प्रधानमंत्री ने साफ-साफ कहा है कि भारत का संविधान हर किसी को अपनी आस्था बनाए रखने का अधिकार देता है। इसलिए अगर हर किसी को अपनी मान्यता का अधिकार है तो यह घर वापसी भी जायज है। आप ईसाई बन जाते हैं, मुसलमान बन जाते हैं। फिर कल को आप बौद्ध बनना चाहते हैं और फिर एक दिन आप अपनी मूल मान्यता में लौटना चाहते हैं तो पूरी तरह सही है और संविधान के अनुसार आपको इसका हक है। इसलिए मैं घर वापसी को कोई समस्या नहीं मानता। यह संवैधानिक अधिकार है। इसलिए ईसाईयों समेत किसी को घर वापसी पर हो-हल्ला करने की दरकार नहीं है। अगर आपको धर्म परिवर्तन का अधिकार है तो वापस जाने का भी अधिकार है।

और तीसरे, शानदार सेवा रिकॉर्ड वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रहे जुलियो रिबेरो ने एक लेख लिखा कि वे भारत में असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने बड़ा काम किया है और बड़े नामधारी आइपीएस अफसर रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि उनकी बात सही नहीं है। यह धारणा पूरी तरह गलत है कि यहां ईसाई समुदाय असुरक्षित महसूस करता है। मेरा समुदाय पूरी तरह प्रधानमंत्री के साथ है। देखिए, हर धर्म में कुछ मु_ी भर कट्टर तत्व होते हैं। ईसाईयों में भी होंगे। वे कहते हैं कि मोदी ईसाई विरोधी हैं, मोदी इस्लाम विरोधी हैं, लेकिन मुझे ऐसा नहीं लगता। हमारे प्रधानमंत्री जब कहते हैं कि मैं सबकी रक्षा करूंगा तो हमें उन पर यकीन करना चाहिए।

चर्चों में बलात्कार और बाल यौन उत्पीडऩ की घटनाएं दुनिया भर में सुनाई पड़ती रहती हैं। यहां तक संयुक्त राष्ट्र भी इस बारे में वेटिकन को सचेत कर चुका है। आपका इस बारे में क्या कहना है?

 हां, कैथोलिक पुजारियों के बाल यौन उत्पीडऩ की खबरें आई हैं। वेटिकन को इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। मौजूदा पोप ऐसे मामलों के प्रति काफी कठोर हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि ऐसे मामलों में कतई नरमी नहीं बरती जाएगी। हां, इसके पहले सख्त कार्रवाईयां नहीं हो पाई हैं, लेकिन अब पोप ने कहा है कि हर मामले पर गौर किया जाएगा और किसी बच्चे के अधिकारों का हनन किया गया तो कठोर कदम उठाए जाएंगे।

आप भारत में ईसाईयों को सुरक्षित पाते है?

मेरा मानना है कि भारत में ईसाई पूरी तरह सुरक्षित हैं। यहां सुंदर और बड़े-बड़े चर्च हैं। मैं समझता हूं कि कुछ अपराधी रात में शराब पीकर सुंदर इमारत देखकर पत्थर फेंक देते हैं तो वे अपराधी हैं। मैं उसके लिए पूरे समाज या किसी समुदाय को जिम्मेदार नहीं मानता। हर धर्म में ऐसे असामाजिक तत्व होते हैं। हम कैसे कह सकते हैं कि भलां समुदाय इसके पीछे है। यह जायज नहीं होगा। ये अपराधी तत्व हैं। सरकार ने सभी मामलों की जांच की है और ज्यादातर अपराधी पकड़े गए हैं। इसलिए सरकार अच्छा काम कर रही है। और हर समुदाय में अपराधी तत्वों को अलग-थलग कर देना चाहिए।

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