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राम मंदिर से राष्ट्र मंदिर

राम मंदिर से राष्ट्र मंदिर

सरयू तट पर बसी राम नगरी अयोध्या में 5 अगस्त को मानो त्रेता युग सजीव हो उठा जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वैदिक मंत्रोचारण के बीच बहुप्रतीक्षित भव्य व दिव्य राम मंदिर की पहली ईंट रखी। राम मंदिर के नींव पूजन व भूमिपूजन के साथ करोड़ो हिन्दुओं की आस्था और विश्वास के प्रतीक प्रभु श्रीराम का 500 वर्षो का एक वनवास और खत्म हो गया। पहला वनवास उन्होंने पिता के वचन का मान रखने और रावण वध के लिए मनुज अवतार के रूप में 14 वर्ष का काटा था। जिसमें उन्होंने राक्षसी प्रवृत्तियों का विनाश किया था और धर्म की स्थापना की थी। दूसरा वनवास उन्होंने 5 अगस्त को समाप्त किया जब नरेन्द्र मोदी ने सगुण मूरत को स्थापित करने के लिए राम मंदिर की आधार शिला रखी। इस समय देश और दुनिया को एक ऐसे मार्ग पर ले जाना है। जहां आज का वैश्विक हालात सुधर जाय इसीलिए प्रभु श्रीराम ने अपने लिए इस कल्प व पहर को चुना जिससे असीम ऊर्जा से आच्छादित होकर भारत वर्ष पूरे विश्व को सकारात्मक भाव से भर दें। यही राम की शक्ति है यही उनका योग है अब हमारे और आपके राम हम सबके राम साकार रूप में श्रीराम जन्मभूमि स्थित भव्य दिव्य मंदिर में स्थापित होंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जैसे ही राम मंदिर के लिए भूमि पूजन सम्पन्न किया पूरा वातावरण राममय हो गया और चहुंओर जय श्री राम जय सिया राम के जयकारे लगने लगे। 5 अगस्त दिन बुधवार को 12 बजकर 44 मिनट पर प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर निर्माण कार्य प्रारम्भ पूजन कार्य पूरा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि राम मंदिर के साथ साथ अब राष्ट्र मंदिर बनेगा। यह मंदिर पूरे विश्व में राम के मर्यादित पुरूषोत्तम स्वरूप का प्रतीक होगा। रामराज्य में जहां समानता थी, समरसता थी, अनुशासन था, सकारात्मक राजनीति थी, उच्च स्तरीय राजनीति थी, सखा धर्म था, बचनबद्वता थी, त्याग था। भारत वर्ष आज से यहां से उत्पन्न हुई असीम ऊर्जापुंज से पूरे विश्व को रामराज्य का संदेश दे रहा है।

9 नवम्बर 2019 को माननीय उच्चतम न्यायालय से निर्णय आने के बाद अयोध्या की धरती पर भगवान श्रीराम के जन्मस्थली की 492 साल पुराना इतिहास सजीव हो उठा। सियावर रामचन्द्र की जय और जय सियाराम का यह उद्घोष पूरी दुनिया में आज सुनायी दिया। वर्षो तक टाट व टेन्ट के नीचे रह रहे रामलला के लिए भव्य राम मंदिर का करोड़ो राम भक्तों का सपना आज साकार हो उठा। राम सबके है राम सबमे है और उनकी यही सर्वव्यापकता देश की विविधता में एकता का जीवन चरित्र है। राम मंदिर भारतीय संस्कृति की समृद्व सांस्कृतिक विरासत का द्योतक होगा। राम का मंदिर भारतीय संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा। हमारी शास्वत आस्था राष्ट्रीय भावना सामूहिक शक्ति, भारतीय संस्कृति को अनन्त काल तक यह मार्गदर्शन करता रहेगा। भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए ईमारते नष्ट कर दी गयी, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे है, हमारी संस्कृति का आधार है।

 

भूमिपूजन 40 मिनट में पूरा

रामलला के भव्य मंदिर के लिए भूमिपूजन के लिए बकुल की लकड़ी से बना पात्र जिसे शंकु कहते है इसमें सोना चांदी सहित नवरत्न भरे गये। भूमिपूजन के लिए जमीन में जो गड्ढा किया गया उसके मूल में इसी बकुल के शंकु को रखा गया। यह पूजन विधि कांचीपुरम पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती महाराज जी ने बतायी थी। इसी के साथ नाग नागिन का जोड़ा, चांदी की ईंट और विभिन्न धर्मस्थलों व सरोवरो से लाया गया पवित्र जल रखा गया। 32 सेकेण्ड के अभिजित मुर्हुत में प्रधानमंत्री से पूर्णाहुति करवायी गयी, लेकिन भूमिपूजन का कार्यक्रम वैदिक रीति से विद्वानों के निर्देशन में 40 मिनट तक चला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चांदी का अपना एक कुम्भ कलश भी स्थापित किया जिसको नींव में रखा गया। संघ प्रमुख मोहन भागवत उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमिपूजन में स्वर्ण मुद्रायें डाली।

 

आज से नवीन युग प्रारम्भ-योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीराम जन्मभूमि पूजन एवं आधार शिला को नवीन युग का प्रारम्भ बताया। यह युग रामराज्य तथा नये भारत के निर्माण का है। मेरे लिए भावुक उत्साह, उमंग और गौरव का क्षण है। मेरी गुरू परम्परा में यह संकल्प दशको पूर्व देखा था वह आज साकार हुआ। योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकतांत्रिक तरीके से राम मंदिर निर्माण का समाधान निकलने तक प्रतीक्षा की और प्रतीक्षा की इसी घड़ी में कई पीढिय़ां गुजर गयी। आज पीढिय़ों का बहुप्रतीक्षित सपना साकार हो गया।

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संकल्प आज पूरा हुआ-मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आज राम मंदिर निर्माण का संकल्प पूरा हुआ। जिसकी नींव आज से 30 वर्ष पहले सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने डाली। उसी समय लम्बे संघर्ष का संकल्प लिया गया। जिसकी परिणित आज भव्य राम मंदिर की नींव पूजन से हुआ। उन्होंने मंदिर आंदोलन में लालकृष्ण आडवाणी, अशोक सिंघल और रामचन्द्र परमहंस ही महाराज को भी याद किया। मोहन भागवत ने कहा कि प्रभु श्रीराम जिस धर्म के विग्रह माने जाते है वह सबको जोडऩे वाला है सबकी उन्नति मांगने वाला धर्म है। उसकी ध्वजा को फहरा कर हम सबकी उन्नति चाहने वाला भारत बना सकते है। राम मंदिर निर्माण में प्रक्रिया शुरू हो गयी है दायित्व बांटे गये है जिसका जो काम है वह करेंगे।

 

अभूतपूर्व क्षण-महंत नृत्य गोपाल दास

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं मणिराम छावनी के पीठाधीश्वर महंत नृत्य गोपाल दास ने भूमि पूजन को अभूतपूर्व क्षण कहा। 500 वर्षो से हिन्दू समाज व संत समाज इस क्षण की प्रतीक्षा कर रहा था। आज वह क्षण आ गया। राम मंदिर निर्माण के साथ साथ अब अयोध्या का स्वरूप भी उसी के अनुरूप होना चाहिए।

 

राम मंदिर निर्माण के साक्षी बने संत धर्माचार्य

राम मंदिर शिलान्यास के 36 परम्पराओं के संत धर्माचार्य के साथ साथ धर्मगुरू, विद्वतजन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक भैय्या जी जोशी, सहसरसंघचालक डा.कृष्ण गोपाल, क्षेत्र प्रचारक अनिल जी, योग गुरू बाबा राम देव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी चम्पत राय, डा.अनिल मिश्र, राजा विमलेन्द्र मोहन प्रताप मिश्र, महंत दिनेन्द्र दास, कामेश्वर चौपाल, मंदिर आंदोलन के अगुवा रहे विनय कटियार, उमा भारती सहित 192 विशिष्टजन साक्षी बने।

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राम मंदिर पूजन का पहला प्रसाद दलित को

मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान वनवासी, जंगलवासी की सहायता लेकर धर्म की स्थापना की थी। उसी परम्परा का निर्वाहन करते हुये राम मंदिर पूजन का पहला प्रसाद अयोध्या के कौशिल्या घाट स्थित दलित महावीर के  यहां पहुंचा। इससे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महावीर के घर खुद जाकर भोजन भी कर चुके है। प्रसाद के साथ साथ राम चरित्र मानस भी भेंट किया गया। भूमिपूजन में आने वाले अतिथियों के लिए रघवीर लड्डू बनाये गये। चांदी का सिक्का दिया गया। राम मंदिर नींवपूजन कार्यक्रम में पहला निमंत्रण विध्नहर्ता गणपति महाराज और बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी को दूसरा निमंत्रण भेजा गया था।

 

राम नगरी में उतरे सितारे

कोरोना संक्रमण काल के चलते भूमिपूजन में आम जनमानस को ट्रस्ट आमंत्रित नही कर पाया लेकिन 5 अगस्त की शाम को पूरी अयोध्या घी के दीपक की रोशनी में जगमगा उठी। ऐसा लगा कि जैसे राम नगरी के जमी व सरयू तट पर चांद तारे उतर आये हो। रामनगरी के धर्मस्थानों, प्रतिष्ठानों, मकानों, देवस्थानों, सार्वजनिक स्थानों एवं मार्गो के दोनों पटरियों पर 3 लाख 51 हजार से अधिक घी के दीपक जलाये गये। पूरे नगर को दुधियां रोशनी में नहला दिया गया।

 

रामशिलाओं का किया गया पूजन

राम मंदिर आंदोलन के दौरान विश्व हिन्दू परिषद द्वारा देश के सभी गांवों में रामशिलाओं का पूजन कराया गया। श्रीराम जन्मभूमि कार्यशाला में रखी 31 साल पुरानी रामशिलाओं का भी विधिविधान के साथ पूजन हुआ। राम मंदिर निर्माण के लिए पारम्परिक सामाग्रियों के साथ साथ दो हजार पवित्र देवस्थलों की मिट्टी, 100 से ज्यादा नदियों सरोवरो का जल एवं 5 सागरों के पवित्र जल से राम मंदिर की आधारशिला रखी गयी। राम मंदिर आंदोलन में 1984 से 1989 तक लगभग विश्व भर से दो लाख 75 हजार रामशिलायें अयोध्या भेजी गयी थी।

अयोध्या से कमलेश श्रीवास्तव

 

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