ब्रेकिंग न्यूज़ 

भारत के आत्मिक-सांस्कृतिक भौतिक उत्थान का सेतु बनेगा राम मंदिर

भारत के आत्मिक-सांस्कृतिक भौतिक उत्थान का सेतु बनेगा राम मंदिर

वह शुभ घड़ी आ गयी। 492 वर्ष के संघर्ष के पश्चात भारतीय संस्कृति की आत्मा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर का पुनर्निर्माण होने जा रहा है। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी स्वयं जगत नियंता भगवान श्री राम के मंदिर के पुनर्निर्माण का शिलान्यास कर रहे हैं। यह क्षण भारत के आत्मिक पुनरुत्थान का साक्षी बनने जा रहा है। सियाराम मय सब जग जानी के भाव में जीने वाला भारत हर्षित, आनंदित और आह्लादित है।

परम सौभाग्य का यह क्षण भारत के आत्मिक व सांस्कृतिक उत्थान का ही प्रतीक नहीं है, अपितु यह भारत की विकास यात्रा में मील का पत्थर सिद्ध होने वाला आयोजन है। प्रभु राम व राममंदिर आंदोलन के प्रति भारतीय जनता पार्टी का समर्पण और इसके निर्माण का संकल्प केवल एक मंदिर निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता नहीं थी। भाजपा की यह प्रतिबद्धता भारत के वैभवशाली अतीत की स्मृतियों को जन—जन तक पहुंचाने के साथ ही उस गौरवशाली अतीत की नींव पर शक्तिशाली व विश्वगुरु भारत के वैभव की वर्तमान में स्थापना की हेतुक व उद्देश्य रही है। यह उद्देश्य 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गठित सरकार ने पहले दिन से प्रदर्शित किया है। मोदी सरकार ने एक ओर राममंदिर के निर्माण की बाधाओं को दूर करने के लिये प्रत्येक संवैधानिक प्रयास किया तो दूसरी ओर राम नाम की आध्यात्मिक प्राणवायु से उत्साहित और उल्लासित भारत की आत्मा को भारत भूमि के तन के विकास अर्थात भौतिक विकास की धुरी बनाने का संकल्प किया। इसी संकल्प के अंतर्गत मोदी सरकार स्वदेश दर्शन योजना प्रारंभ कर ‘रामायण सर्किट’ का विकास कर रही है। ‘रामायण सर्किट’ भगवान राम से जुड़े प्रमुख स्थलों को एक साथ जोडऩे की वृहद परियोजना है।

मोदी सरकार समृद्ध सांस्कृतिक विविधता के संरक्षण पर ध्यान देते हुए रामायण सर्किट को विकसित करने की योजना पर कार्यरत है। पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक देश को जोडऩे वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना राम जन्मस्थान, अयोध्या से देश के दूसरे छोर रामेश्वरम तक 10 राज्यों से होकर तैयार होगी। केंद्र सरकार देश के धार्मिक स्थलों को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर लाने तथा पर्यटन उद्योग को गति देने के लिये रामायण सर्किट का विकास कर रही है। इस योजना के लिये केंद्र सरकार ने बजट का अंश भी निर्गत कर दिया है। मोदी सरकार द्वारा 5,895 करोड़ रुपए से अधिक राशि स्वीकृत करने के साथ ही केंद्रीय सहायता के साथ 73 परियोजनाएं रामायण सर्किट में स्वीकृत की गयी हैं। इस परियोजना में आने वाले पर्यटन स्थलों पर आधारभूत संरचना व सुविधाओं के विकास, आवास और सौंदर्यीकरण के साथ ही इन्हें राजमार्गों व यातायात सुविधा के मुख्यमार्गों से जोडऩे के लिये उच्च स्तरीय मार्गों का संजाल विकसित हो रहा है। उत्तर प्रदेश में अयोध्या, श्रृंगवेरपुर (प्रयागराज), नंदीग्राम व चित्रकूट, मध्यप्रदेश स्थित चित्रकूट, बिहार के सीतामढ़ी, बक्सर व दरभंगा, उड़ीसा के महेंद्रगिरि, छत्तीसगढ़ के जगदलपुर, महाराष्ट्र के नासिक व नागपुर, तेलंगाना के भद्राचलम, कर्नाटक के हम्पी और तमिलनाडु के रामेश्वरम इस परियोजना से जुड़े हैं। मोदी सरकार की इस परियोजना के अंतर्गत घाटों, मंदिरों, पर्यटन स्थलों का विकास और उन्हें आधुनिक सुविधायुक्त किया जायेगा।

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर पर्यटन क्षेत्र के विकास व देश में रोजगार सृजन की अपार संभावनाओं से भरा है। ऐसे में इन स्थानों पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये थीम—आधारित पर्यटक सर्किट के निर्माण की आवश्यकता दशकों से थी, जिसे मोदी सरकार पूरा कर रही है। मोदी सरकार घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन उद्योग के विकास के लिये एकीकृत दृष्टिकोण व कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ रही है। इसी उद्देश्य से केंद्र की मोदी सरकार रामायण सर्किट के विकास के साथ ही कृष्ण सर्किट, बौद्ध सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, आदिवासी सर्किट, थार सर्किट, पूर्वोत्तर भारत सर्किट, हिमालय सर्किट, तटीय सर्किट, पारिस्थितिकी सर्किट, वन्यजीव सर्किट, ग्रामीण सर्किट और विरासत सर्किट आदि सहित 15 सर्किटों के हजारों करोड़ रुपए के पर्यटन विकास पर एक साथ काम करते हुए इनका एकीकृत विकास एवं देश के कोने—कोने में स्थिति पर्यटन स्थलों का एक सुविकसित, संसाधनयुक्त व आकर्षक संजाल तैयार करने में जुटी है।

24

रामायण सर्किट के प्रथम चरण में अयोध्या का विकास एक ऐसे पर्यटन स्थल के रूप में किया जा रहा है, जो आने वाले समय पूरे विश्व से पर्यटकों को आकर्षित करेगा और देश का एक बड़ा पर्यटन स्थल होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी को वैश्विक पर्यटन का अग्रणी केंद्र बनाने के लिये विकास कार्य, बाबा विश्वनाथ कोरिडोर आदि

कार्य तीव्र गति से हो रहा है। रामायण व बौद्ध सर्किट परियोजना के अंतर्गत वाराणसी—गया, लखनऊ—अयोध्या—लखनऊ, गोरखपुर—कुशीनगर, कुशीनगर—गया—कुशीनगर राजमार्ग व सुविधा विकास कार्य स्वीकृत हुए हैं। जैसा कि विदित है कि भगवान राम का आदिवासी समुदाय व आदिवासी क्षेत्रों से गहना नाता रहा है तो मोदी सरकार रामायण सर्किट के अंर्तगत छत्तीसगढ़ में भगवान राम से जुड़े स्थलों के विकास के साथ ही आदिवासी पर्यटन सर्किट का विकास कर रही है। केंद्र सरकार आदिवासी पर्यटन सर्किट में छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर, कुंकरी, मैनपाट, अम्बिकापुर, महेशपुर, रतनपुर, कुरदर, सरोददादर, गंगरेल, कोंडगांव, नथिया, नवगांव, जगदलपुर, चित्रकूट व तीर्थगढ़ का विकास करवा रही है।

इन सारी परियोजनाओं पर एक साथ और तेजी से काम चल रहा है। देशवासियों की आध्यात्मिक उन्नति के साथ ही राष्ट्र को भौतिक गति कैसे मिलेगी, उसका एक उदाहरण देखिये। मोदी सरकार ने केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय के अंतर्गत स्वदेश दर्शन योजना में रामायण सर्किट, कृष्ण सर्किट, आदिवासी सर्किट सहित अन्य थीम—आधारित ये जो डेढ़ दर्जन  परियोजनाएं प्रारंभ की हैं, उनमें करोड़ों स्थानीय लोगों को रोजगार मिल रहा है। अत: इन सर्किटों का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद इनसे जुड़े स्थानों और उसके आसपास के क्षेत्रों में घरेलू व अंतर्राष्ट्रीय पर्यटकों का आवागमन बढ़ेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास के साथ ही रोजगार के अपार अवसरों का सृजन होगा। उन धार्मिक स्थलों के पास सेवा क्षेत्र से जुड़े उद्योग यथा होटल व्यवसाय, टैक्सी सेवा विकसित होगी। इससे स्थानीय कला और शिल्प को बढ़ावा मिलेगा। स्वतंत्रता के बाद से ही अविकसित व पिछड़े रहे इन क्षेत्रों क्षेत्र के विकास के लिये ये परियोजनाएं वरदान सिद्ध हो रही हैं।

एसोसिएशन आफ चैम्बर्स आफ कामर्स (एसोचैम) की पर्यटन कमेटी का मानना है कि पर्यटन उद्योग के विकास के लिये मोदी सरकार द्वारा प्रारंभ की गयी इन परियोजनाओं की पूर्णता और राम मंदिर का निर्माण घरेलू धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा। विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के लोग दर्शन करने अवश्य आएंगे। दुनिया में विदेशी भारतीयों की संख्या करीब साढ़े तीन करोड़ है। भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों में करीब तीस प्रतिशत अंश विदेश में रहने वाले भारतीयों की होती है। राम मंदिर धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण स्थान होगा। विदेश में रहने वाले भारतीय भगवान राम के दर्शन करने अयोध्या आएंगे।

अत: यह निश्चित है कि राम मंदिर का निर्माण किसी एक समुदाय अथवा वर्ग की उन्नति से नहीं जुड़ा है, वरन् यह भारत के सम्पूर्ण वासियों की आकांक्षाओं, अपेक्षाओं और आशाओं को पूरा करने वाला शुभ अवसर बनेगा। एक ओर राममंदिर के निर्माण से भारत की एकता और अखंडता को बल मिलेगा तो दूसरी ओर राममंदिर देशभर के लोगों को अपनी माटी, अपनी संस्कृति और अपने राष्ट्र के प्रति सूत्र, संकल्प और प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करने के साथ राष्ट्र के भौतिक विकास को अपार गति देगा।

 

हरीशचंद्र श्रीवास्तव

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.