ब्रेकिंग न्यूज़ 

नहीं दिखेगा कैप्टेन कूल का तूफानी जलवा

नहीं दिखेगा  कैप्टेन कूल  का तूफानी जलवा

15 अगस्त को जब भारत एक तरफ अपना 74 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, वहीं खुशी के माहौल में क्रिकेट जगत से एक मायूसी भरी खबर आई। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने जब एलान किया कि वे भारतीय क्रिकेट टीम से सन्यास ले रहे हैं तो क्रिकेट फैन्स के बीच सन्नाटा सा बसर गया। खासकर सबसे बड़ा झटका धोनी के फैन्स को लगा। भारतीय क्रिकेट टीम में महेंद्र सिंह धोनी का बहुत बड़ा योगदान रहा है। अगर बात उनके करियर पर करे तो उन्होंने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है।

भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तानों में से एक माने-जाने वाले एमएस धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को झारखंड के रांची जिले में हुआ था। उनके पिता पान सिंह मेकॉन कंपनी के जूनियर मेनेजमेंट वर्ग में काम करते थे और उनकी माता देवकी देवी एक ग्रहणी है। बहन जयंती गुप्ता शिक्षिका हैं। महेन्द्र सिंह धोनी बचपन से ही मेधावी छात्र और एक बेहतरीन खिलाड़ी रहे हैं। इनका पंसदीदा खेल बैडमिंटन और फुटबॉल रहा है। धोनी अपने स्कूल की फुटबॉल टीम में गोलकीपर के तौर पर खेला करते थे। जब 1987 में जवाहर विद्या मंदिर स्कूल में, जहां महेंद्र सिंह धोनी पढ़ा करते थे, वहां केशव राजन बनर्जी स्पोर्ट्स टीचर के रूप में जुड़े हुए थे। केशव राजन बनर्जी ने धोनी की खूबियों को पहचाना। हालांकि धोनी का क्रिकेट की तरफ इतना रुझान नहीं था, परंतु स्पोर्ट्स टीचर केशव राजन बनर्जी के कहने पर गोलकीपर से विकेटकीपर तक का सफर धोनी ने किया। धीरे-धीरे कीपिंग के साथ-साथ बल्लेबाजी सीखने लगे और जब केशव राजन बनर्जी ने उन्हें बल्लेबाजी करते देखा तो उन्होंने धोनी से ओपनिंग करवानी शुरू कर दी और यहीं से धोनी का क्रिकेट की तरफ रुझान बढ़ता गया।

धोनी अपना आदर्श आस्ट्रेलिया के दिग्गज विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट को मानते है। धोनी बचपन से ही सचिन तेंदुलकर की धुआंधार बल्लेबाजी के कायल रहे है। वे बॉलीवुड के महान अभिनेता अमिताभ बच्चन और महान गायिका लता मंगेशकर को भी अपना आदर्श मानते हैं। जॉन अब्राहम भी इनके बहुत अच्छे दोस्त माने जाते हैं। क्लास 10 वीं के बाद उनका क्रिकेट की तरफ आकर्षण इतना बढ़ गया कि वे पढ़ाई से ज्यादा क्रिकेट को महत्व देने लगे परंतु 12 वीं के बाद धोनी क्रिकेट के ही होकर रह गए। हालांकि उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन वे क्रिकेट में ही मशगूल रहे। उन्होंने कॉलेज की शिक्षा कभी पूरी ही नहीं की। कैप्टन कूल (महेन्द्र सिंह धोनी) कभी पश्चिम बंगाल के खडग़पुर रेलवे-स्टेशन पर बतौर टिकट कलेक्टर का काम कर चुके है। धोनी बिहार रणजी टीम के लिए क्रिकेट खेला करते थे। और इसी दौरान धोनी की रेलवे स्पोर्ट्स कोटा से बतौर टिकट कलेक्टर की नौकरी लग गई। उन्होंने खडग़पुर रेलवे-स्टेशन पर 3 साल (2001-2003) नौकरी की और इसके साथ अपने खेल को निखारते गए। धोनी, जो अपने दोस्तों में माही के नाम से जाने-जाते है, ने रेलवे की टीम के लिए भी खेला।

14

2003 में धोनी को भारतीय ‘ए’ टीम में चुना गया। 2003-2004 में धोनी जिंबाब्वे और कैन्या के दौरे पर गए। धोनी ने जिंबाब्वे के खिलाफ बेहतरीन विकेटकीपिंग करते हुए 7 कैच और 4 स्टम्पिंग से मैच का रुख बदला। और तो और उन्होंने बल्लेबाजी करते हुए 7 मैचो में अपने बेहतरीन प्रदर्शन से 762 रन बनाए। तत्कालीन टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली ने धोनी के प्रदर्शन को देखा तो उन्होंने धोनी को भारतीय टीम में लेने की सलाह दी और इसी के साथ धोनी को 2004 में टीम इंडिया में जगह मिली। दिसंबर 2004 में उन्होंने अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय पारी बांग्लादेश के खिलाफ खेली। वे नंबर 7 पर खेलने उतरे लेकिन पहली ही बोल पर रन आउट होकर पवेलियन वापिस लौट गए। धोनी इस प्रदर्शन से काफी निराश हुए। भारतीय टीम को भी उन पर शंका होने लगी लेकिन धोनी ने अपने आप को संभाला और 2005 में अपने 5वें वनडे मैच में धोनी पहली बार नंबर 3 पर खेलने उतरे । विशाखापट्टनम के इस मैदान पर 123 गेंदों में उन्होंने 148 रन बनाकर खुद पर उठे सवालों का मुंहतोड़ जबाव दिया। इस प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय टीम ने 2005 में श्रीलंका के खिलाफ होने वाली सीरीज में उन्हें खेलने का अवसर दिया। इस अवसर का धोनी ने बखूबी फायदा उठाया और इस सीरीज में उन्होंने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ वनडे स्कोर, जो 183 है, बनाकर इस सीरीज को अपने नाम किया। वे मैन ऑफ द सीरीज भी रहे।

इन्हीं उपलब्धियों को देखते हुए सितंबर 2007 में राहुल द्रविड़ ने धोनी को वनडे क्रिकेट की कप्तानी की कमान थमा दी। और यहां से धोनी ने अपने कप्तानी करियर की शुरुआत की। उन्होंने कई रिकॉर्ड बनाए और कई रिकॉर्ड तोड़े। धोनी की असली जीत तब हुई जब उन्होंने अपनी कप्तानी से दक्षिण अफ्रीका में टी-20 विश्वकप भारत के नाम किया। यह टूर्नामेंट इस लिए भी खास था क्योंकि भारत ने फाइनल में पाकिस्तान को हराया था। उन्होंने आखरी ओवर एक कम अनुभवी गेंदबाज जोगेंद्र शर्मा से डलवाया और यह मास्टर स्ट्रोक साबित हुआ। अगस्त 2008 में ही धोनी को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार भी मिला। नवंबर 2008 में धोनी को भारत के टेस्ट कप्तान की कमान सौप दी गई। 2008 के अंत में धोनी आईसीसी वर्ष के सर्वश्रेष्ठ वनडे क्रिकेटर बने। मार्च 2009 में न्यूजीलैंड में पहली द्विपक्षीय वनडे सीरीज जिताकर भारत के गौरव को बढ़ाया। इस दौरान धोनी को पद्मश्री से नवाजा गया। और वर्ष 2009 के अंत में धोनी फिर से आईसीसी वर्ष के सर्वश्रेष्ठ वनडे क्रिकेटर बने। मई 2010, यूएई में हुए पहले आईपीएल में धोनी की कप्तानी में सीएसके (चैन्नै सुपर किंग्स) को जीत दिलाई।

13

इसी बीच उन्होंने निजी जीवन पर ध्यान देते हुए शादी करने का निर्णय लिया। उन्होंने 4 जुलाई 2010 को देहरादून से 30 किलोमीटर दूर एक होटल में अपनी बचपन की दोस्त साक्षी रावत से शादी करने का फैसला लिया। धोनी और साक्षी की शादी के बारे में कुछ खास लोगों को ही पता था। मीडिया को धोनी की शादी से दूर रखा गया तथा किसी को भी शादी के बारे में पता नहीं लगने दिया। कहा यही जाता है कि धोनी और साक्षी की शादी करवाने में सबसे बड़ा रोल साक्षी के जीजा विश्वजीत का था। जो कि धोनी के पुराने और करीबी दोस्त माने जाते है।

भारत ने 28 साल बाद धोनी की कप्तानी के अन्तर्गत दूसरा विश्वकप जीता। धोनी ने आखरी गेंद पर छक्का मारकर 2011 का यह विश्वकप भारत के नाम कर दिया। वे मैन ऑफ द सीरीज भी रहे। इसके बाद 2011 के आईपीएल को भी धोनी ने सीएसके के नाम करवा दिया। उन्हें नवंबर 2011 में भारतीय प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल बना दिया गया। मार्च 2013 में धोनी ने 49 वें टेस्ट मैच में 21वीं जीत दर्ज करके सौरव गांगुली का रिकॉर्ड तोडक़र भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान बने।

10

धोनी ने अपनी कप्तानी में जून 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी भारत के नाम की। इससे पहले फरवरी 2013 में धोनी ने अपने टेस्ट करियर का एकमात्र दोहरा शतक जड़ा और मार्च 2013 में धोनी ने अपनी बेहतरीन कप्तानी से भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में 4-0 से हराया। 6 फरवरी 2015 धोनी के लिए सबसे बड़ा खुशी का दिन था क्योंकि इसी दिन धोनी और साक्षी के घर नन्हीं परी के रूप में जीवा ने जन्म लिया। धोनी की कप्तानी में चेन्नई ने तीसरी बार मई 2018 में आईपीएल खिताब जीता। इससे पहले अप्रैल 2018 में धोनी को पद्मभूषण अवार्ड मिला।

यहां यह कहना आवश्यक है की यह किसे पता था कि एक रांची जैसे छोटे शहर का लडक़ा अपनी आम जिंदगी से भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान तक का इतना लंबा सफर तय कर लेगा और भारत ही नहीं पूरी दुनिया को अपना दीवाना बना लेगा। उन्होंने भारतीय टीम में जो योगदान दिया है, वह किसी से भी छुपा नहीं है। उन्होंने कई खिलाडिय़ों को आगे-आने का मौका दिया, जो आज क्रिकेट जगत के जाने-माने खिलाड़ी है और आज वे भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन कर रहे हैं। धोनी हमेशा अपनी टीम को साथ लेकर चलते थे और उन्होंने कभी टीम का हौसला कम नहीं होने दिया। वे एक हल्की सी मुस्कान से हर एक मुश्किल का सामना कर लेते थे और इसीलिए हर युवा खिलाड़ी धोनी जैसा बनना चाहेगा। महेंद्र सिंह धोनी के जज्बे और मुस्कान को भारतीय टीम में हमेशा याद किया जाएगा।

 

अंकुश मांझू 

Leave a Reply

Your email address will not be published.