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सूर्य नमस्कार के लाभ

By प्रीती ठाकुर

सूर्य नमस्कार योग सुबह-सुबह दैनिक क्रिया के बाद मुंह को पूरब की ओर करके करना चाहिए। इस क्रिया को प्रतिदिन कम-से-कम 10-12 बार करने से शारीरिक और मानसिक लाभ मिलता है।

मनुष्य की जिंदगी में योगासन का बहुत महत्व है। सभी योगासन शरीर को हृष्ठ-पुष्ठ बनाते हैं और मजबूती प्रदान करते हैं। योगासनों में सबसे आसरकारी और लाभदायक सूर्य नमस्कार है। इसमें सभी योगासनों का सार छिपा है। सूर्य नमस्कार करने से शरीर में छिपे रोगों से छूटकारा मिलता है, शरीर स्फूर्ति और ताजगी से भरा रहता है, मन प्रफुल्लित रहता है। आइये जानते हैं सूर्य नमस्कार में छिपे स्वास्थ्य के रहस्यों को।

सूर्य नमस्कार 12 मुद्राओं में होता है। इसके आसनों को बहुत आसानी से किया जा सकता है। सूर्य मुद्रा हमारे शरीर के अग्नि तत्वों को संचालित करती है। सूर्य की उंगली का संबंध सूर्य और यूरेनस ग्रह से है। सूर्य नमस्कार करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है, खून का प्रवाह तेज होता है, ब्लड प्रेशर में आराम मिलता है, वजन कम होता है।

सूर्य नमस्कार की 12 मुद्राएं


  • सावधान की मुद्रा में खड़े होकर दोनों हाथों को कंधे के बराबर में उठाते हुए ऊपर की ओर ले जाएं। हाथों के अगले भाग को एक-दूसरे से चिपका लीजिए, फिर हाथों को उसी स्थिति में सामने की ओर लाकर नीचे की ओर गोल घुमाते हुए नमस्कार की मुद्रा में खड़े हो जाएं।
  • सांस लेते हुए दोनों हाथों को कानों से सटाते हुए ऊपर की ओर खींचिए तथा कमर से पीछे की ओर झुकते हुए भुजाओं और गर्दन को भी पीछे की ओर झुकाएं। ये अर्धचक्रासन की स्थिति मानी गई है।
  • सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए बाहर की ओर झुकिए। हाथ को गर्दन के साथ, कानों से सटाते हुए नीचे जाकर घुटनों को सीधे रखते हुए पैरों के दाएं-बाएं जमीन को छुएं। कुछ समय तक इसी स्थिति में रूकिए। इस स्थिति को पाद-पश्चिमोत्तनासन या पाद-हस्तासन भी कहते हैं।
  • इसी स्थिति में हाथों को जमीन पर टिकाकर सांस लेते हुए दाहिने पैर को पीछे की तरफ ले जाइए। उसके बाद सीने को आगे की तरफ खींचते हुए गर्दन को ऊपर उठाएं। इस मुद्रा में पैर का पंजा खड़ा हुआ रहना चाहिए।
  • सांस को धीरे-धीरे बाहर निकालते हुए बाएं पैर को भी पीछे की तरफ ले जाएं। अब दोनों पैरों की एडिय़ां आपस में मिली हों। शरीर को पीछे की ओर खिचाव दीजिए और एडिय़ों को जमीन पर मिलाकर गर्दन को झुकाते हुए शरीर को पर्वताकर स्थिति में लाएं।
  • सांस लेते हुए शरीर को जमीन के बाराबर में साष्टांग दंडवत करें और घुटने, सीने, ठोड़ी को जमीन पर लगा दीजिए। जांघों को थोड़ा ऊपर उठाते हुए सांस को छोड़े।
  • इस स्थिति में धीरे-धीरे सांस को भरते हुए सीने को आगे की ओर खींचते हुए हाथों को सीधा कीजिए। गर्दन को पीछे की ओर ले जाएं। घुटने जमीन को छू रहे हों तथा पैरों के पंजे खड़े रहे। इसे भुजंगासन भी कहते हैं।
  • अब फिर पांचवी स्थिति जैसी मुद्रा बनाएं उसके बाद इसमें ठोड़ी को कंठ से टिकाते हुए पैरों के पंजे को देखते हैं।
  • इस स्थिति में चौथी स्थिति जैसी मुद्रा बनाएं उसके बाद बाएं पैर को पीछे ले जाएं,दाहिने पैर को आगे ले आएं।
  • तीसरी स्थिति जैसी मुद्रा बनाएं उसके बाद बाएं पैर को भी आगे लाते हुए पाद-पश्चिमोत्तनासन की स्थिति में आ जाएं।
  • दूसरी मुद्रा में रहते हुए सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर ले जाएं। उसी स्थिति में हाथों को पीछे की ओर ले जाएं साथ ही गर्दन तथा कमर को भी पीछे की ओर झुकाएं।
  • यह स्थिति पहली मुद्रा की तरह है अर्थात नमस्कार की मुद्रा में।

सूर्य नमस्कार के लाभ

  • सूर्य नमस्कार से विटामिन-डी मिलता है जिससे हड्डियां मजबूत होती हैं।
  • शरीर में खून का प्रवाह तेज होता है जिससे ब्लड प्रेशर की बीमारी में आराम मिलता है।
  • आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  • मोटापे को कम करता है।
  • सूर्य नमस्कार का असर दिमाग पर पड़ता है, जिससे दिमाग शांत रहता है।
  • बालों को सफेद होने, झडऩे व रूसी से बचाता है।
  • कमर लचीली  होती है और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
  • त्वचा रोग होने की संभावना समाप्त हो जाती है।

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