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अविचल राजनीतिक योद्धा

अविचल राजनीतिक योद्धा

सोशल मीडिया की नकारात्मकता को देखें तो ऐसा लगेगा, मानों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे अलोकप्रिय नेता हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। एक खास वर्ग के निजी आलोचनाओं के केंद्र में नरेंद्र मोदी भले ही हों, लेकिन वे जनता के दुलारे हैं। अरसे बाद भारत का आम नागरिक, जिसे सोशल मीडिया से खास वास्ता नहीं है, जो अपनी जिंदगी की दुश्वारियों से निकलने की लगातार जद्दोजहद कर रहा है, लोकतांत्रिक शीर्ष पर बैठे व्यक्ति को लेकर भरोसेमंद है। उसे लगता है कि मोदी हैं तो देश सुरक्षित है। देश का अधिसंख्य वर्ग यह मान चुका है कि अगर उसकी जिंदगी में थोड़ी- बहुत दुश्वारियां हैं भी तो वे तात्कालिक हैं। दीर्घावधि में जब देश आगे बढ़ेगा, तब वे उस दुश्वारियों से पार पा लेगा। लोकतंत्र में किसी राजनेता की सबसे बड़ी ताकत क्या होती है? सबसे बड़ी ताकत होती है, उस नेता के प्रति उसकी जनता का भरोसा। नरेंद्र मोदी के प्रति आम लोगों का यह भरोसा ही है कि वे कड़े से कड़ा कदम उठाने की हिम्मत दिखा पाते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के प्रति लोगों के भरोसे की वजह है उनका अपना जीवन, जिसमें राष्ट्रनिष्ठा कूट-कूटकर भरी है। उम्र के सातवें दशक में भी वे युवाओं की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन परिश्रम करते हैं। उनके व्यक्तित्व की खासियत है कि वे प्रतिकूल से प्रतिकूल हालात में भी धैर्य नहीं खोते। गुजरात का मुख्यमंत्री रहते जिस तरह उन पर निजी हमले हुए, उनके चरित्र पर लांछन तक लगाने की कोशिश हुई, सर्वोच्च न्यायालय तक उन्हें घेरने का तत्कालीन केंद्रीय सत्ता द्वारा प्रयास किया गया, इसके बावजूद वे अविचल खड़े रहे और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। लक्ष्य की ओर यह बढऩा भी आसान नहीं रहा। निजी हमलों के बीच बड़े से बड़ा धैर्यशाली व्यक्ति भी संतुलन खो देता है। लेकिन मोदी कुछ अलग ही मिट्टी के बने हैं। मध्य प्रदेश के आदिम जाति जनजाति विकास विभाग से अवकाशप्राप्त अधिकारी और समाजविज्ञानी एस के पांडेय का कहना है कि विपरीत हालात में अविचल खड़े रहना सबके वश की बात नहीं होती। नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व में जरूर कुछ योगीत्व है, जिसकी वजह से निजी आक्षेप भी उन्हें अपने लक्ष्य से विचलित नहीं कर पाते।

प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद से लेकर भाजपा के निर्विवाद नेता तक की यात्रा अपने कठोर परिश्रम और राष्ट्रनिष्ठा के साथ पूरी की है…उनका व्यक्तित्व चुनौतियों से जूझने और लक्ष्य पर निगाह रखने की गहरी सीख देता है..इसमें अहम भूमिका निभाई है संगठन के दिनों से ही उनके जीवन में शामिल राष्ट्र निष्ठा के व्रत ने… जिसने उन्हें नई सोच दी…नया उत्साह दिया और गरीबों, किसानों, महिलाओं और सैनिकों के लिए काम करने की ऊर्जा दी…यही वजह है कि प्रधानमंत्री के तौर पर लिए गए मोदी के हर फैसले में नजर आता है…गरीबों का दर्द..उनके आंसू पोंछने की ललक और राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम…

प्रधानमंत्री मोदी की सबसे बड़ी ताकत है, गांव, गरीब और किसानों के प्रति उनका अगाध स्नेह। वे गांव, गरीब और किसानों की पीड़ा और महिलाओं का दर्द बखूबी समझते हैं। यह सच है कि जब तक बुनियादी स्तर से गरीबी को दूर नहीं किया जाता, तब तक देश को प्रगति के पथ पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। पहली पारी में सत्ता संभालते ही उन्होंने जब जन-धन योजना शुरू की तो उसकी विपक्ष ने हंसी उड़ाई। लेकिन ये खाते ही अब जनता से सरकारी तंत्र के जुडऩे और उसे राहत पहुंचाने के माध्यम बन गए हैं। जनधन योजना के तहत अब तक खुले 40 करोड़ बैंक खातों की वजह से अब सरकार की ओर से दी जाने वाली राहत राशि सीधे गरीबों और किसानों के खाते में जा रही है। कोरोना काल में किसान सम्मान निधि और महिलाओं को लगातार नगद सहायता पहुंचाने में ये बैंक खाते ही सहायक बने। इसका सीधा असर जमीनी स्तर पर नजर आया। इसकी वजह से भुखमरी नहीं दिखी, कोरोना संकट काल में जब देश ठप रहा, गांवों में आर्थिक गतिविधि चलती रही और इसकी वजह बने जनधन खाते और उनके द्वारा गरीबों और किसानों तक पहुंची सीधी मदद।

देश की बड़ी समस्या यह रही है कि कई इलाकों में लिंगानुपात असंतुलित हो गया। इसे ध्यान में रखते हुए मोदी ने सौ करोड़ के शुरूआती फंड से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान शुरू किया। जिसका असर अब नजर आने लगा है। हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिन इलाकों में लिंगानुपात असंतुलित था, वहां हालात बदलने लगे हैं। इसी तरह सदियों से धुएं में घुटती रही महिलाओं की जिंदगी को उबारने के लिए उन्होंने उज्ज्वला योजना लागू की…इसकी कामयाबी को इससे आंका जा सकता है कि इस योजना के तहत तहत अब तक करीब आठ करोड़ गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं…जिसके जरिए अपनी रसोई में दूर-दराज तक की वे महिलाएं राहत की सांस ले पा रही हैं, जिन्होंने अपनी आर्थिक हालत के चलते सोचा भी नहीं होगा कि उन्हें कभी गैस कनेक्शन हासिल हो पाएगा।

पहली बार सत्ता संभालते ही प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की कमाई 2022 तक दोगुनी करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए मोदी ना सिर्फ खुद हर मोर्चे पर जुटे हुए हैं, बल्कि कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालय को भी सक्रिय रखा है। किसानों की मदद के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और किसान सम्मान निधि योजनाएं लागू करना मौजूदा मोदी सरकार की प्रमुख उपलब्धि है। इसी तरह उनकी सोच है कि साल 2022 तक देश का कोई भी नागरिक ऐसा नहीं रहे,जिसके सिर पर छत ना हो। इसके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में तेजी लाई गई है। इस योजना की कामयाबी को इसी से समझा जा सकता है कि अब तक देश के लाखों गरीबों को घर मुहैया कराया जा सका है।

भारत युवाओं का देश है। युवाओं को हुनरमंद बनाने, हर हाथ को काम मुहैया कराने की दिशा में भी मोदी की सक्रियता लगातार बनी हुई है। इसके लिए उन्होंने कौशल विकास और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रम शुरू किए है। लोगों के दिल को छूने की उनकी कला ही है कि जब वे अपील करते हैं तो खादी की बिक्री आसमान छूने लगती है..आत्मनिर्भर भारत बनाने की जब बात करते हैं..तो देसी उद्यमी भी उत्साहित हो उठते हैं। गांधीजी की ही तरह मोदी मानते हैं कि विकसित देश के लिए जरूरी है सफाई और स्वास्थ्य। उनकी इसी सोच की देन है आयुष्मान भारत योजना, जिसने कोरोना महामारी के दौर में अपनी उपयोगिता साबित भी की है। मोदी यह भी मानते हैं कि बिना सफाई के विकास की कल्पना भी बेमानी है, यही वजह है कि उन्होंने खुद अपने हाथों शुरू किया स्वच्छता अभियान। मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने स्वच्छता को राष्ट्रीय अभियान बनाया और लाल किले से शौचालय क्रांति की अपील की। सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ बिंदेश्वर पाठक का कहना है कि किसी प्रधानमंत्री द्वारा लालकिले की प्राचीर से शौचालय क्रांति की बात करना मामूली बात नहीं है। इसी तरह उन्होंने लड़कियों की माहवारी के दिनों में इस्तेमाल होने वाली नैपकिन को जिस तरह केंद्रीय विमर्श में स्थान दिलाया, उससे उनका नया व्यक्तित्व ही सामने आता है। इसी तरह नदियों की सफाई के प्रति भी वे सचे हैं। नमामि गंगे प्रोजेक्ट भले ही गंगा के लिए चलाया जा रहा है, लेकिन उनकी योजना यमुना और दूसरी गंदी नदियों को भी साफ करने क है।

नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने से पहले दुनिया में भारत की स्थिति एक ऐसे राष्ट्र की रही, जो महाशक्तियों की मुंहदेखी के लिए मजबूर रहा। लेकिन आज भारत की स्थिति बदल गई है। आज भारत चीन जैसे देश को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। यह मोदी की विदेश नीति का ही कमाल है कि चीन की कुटिल नीति के बावजूद भारत को अमेरिका, जापान, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और दक्षिण एशिया के देशों का सहयोग मिल रहा है। भारत के साथ कदम बढ़ाने के लिए अफ्रीकी देश भी हाथ बढ़ा रहे हैं। बालाकोट में सर्जिकल स्ट्राइक करने के बावजूद भारत के अंतरराष्ट्रीय संबंधों और हितों पर वैश्विक स्तर पर कोई असर ना पडऩा, मामूली बात नहीं है। मोदी को अहर्निश काम में जुटे रहने की ऊर्जा और प्रेरणा योग से मिलती है। जिस योग के वे सच्चे उपासक हैं, उसे दुनियाभर में प्रतिष्ठा दिलाने में उनकी बड़ी भूमिका रही। सॉफ्ट पावर के तौर पर उभारने में योग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही भारतीय आयुर्वेद की भी पहुंच दुनियाभर में हुई है और लोग इसकी ओर उम्मीदभरी निगाह से देख रहे हैं।

पूरी दुनिया के शिक्षा शास्त्री मानते हैं कि बच्चों की शिक्षा का माध्यम अगर मातृभाषा हो तो बच्चे की सीखने और समझने की गति तेज होती है। लेकिन भारत की आजादी के 73 वर्षों में भी इस ओर किसी सरकार ने गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। मोदी का ध्यान इस ओर भी है। हाल ही में आई नई शिक्षा नीति में बच्चों की शिक्षा का माध्यम उनकी मातृभाषाओं को बनाने पर जोर है।

गांधी जी और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद श्री मोदी ऐसी शख्सियत हैं। जिनकी आवाज पर करोड़ो दिल उत्साह से भर उठते हैं..देश का यह भरोसा ही उनके प्रति आगे भी उम्मीद बनाए रखने की वजह है। उम्मीद कर सकते हैं कि जल्द ही देश कोरोना संकट से उबरेगा और श्री मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मोर्चे पर नई इबारत लिखेगा।

उमेश चतुर्वेदी

 

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