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किसानों को आत्मनिर्भर बनायेंगे नये कृषि कानून

किसानों को आत्मनिर्भर  बनायेंगे नये कृषि कानून

नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाये गये किसान विकास सशक्तिकरण बिल और फार्म सर्विस बिल एक क्रांतिकारी कदम है जो किसानों के लिए बहुत कल्याणकारी साबित होंगे जो उनके जीवन में एक नया बदलाव लायेंगे ये उन्हे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। विपक्ष किसानों को गुमराह करने में सफल नहीं होगा। इसके लागू होने के बाद जब किसान लाभान्वित होंगे तो इसका विरोध करने वाले नेता और पार्टियां बहुत पछतायेंगे। ये कानून केवल उनके हितों की रक्षा के लिये बनाये गये हैं।

 

जारी रहेगा न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)

इन कानूनों से एमएसपी पर कोई फर्क पडऩे वाला नहीं है एमएसपी तो वैसे भी सरकार का निर्णय था जो किसानों की फसल को सरकार द्वारा खरीदे जाने पर उनकी फसल का उचित मूल्य देने के लिये था। ये न्यूनतम कीमत भी भा.ज.पा. की सरकार ने आकर सीधा डेड़ गुना की। स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट तक को पुरानी सरकार ने बस्ते में रखा हुआ था। कुछ फसलों का उदाहरण देता हूं (बॉक्स-A)

यानि किसानों की फसल पर लागत पर पुरानी सरकारें 200 या 300 रूपया अधिक देकर खरीदती थी तो वर्तमान सरकार ने इसे डेड़ गुना कर दिया।  बार बार सरकार घोषणा कर चुकी है कि एमएसपी जारी रहेगी। कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर कह चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आश्वासन दे चुके हैं। विपक्ष का ढोल पीटना कि एमएसपी बन्द हो जायेगा एक कुटिल चाल है जो किसानों को बरगलानें के लिये चली गयी है। इसमें विपक्षी नेता सफल नही हो पायेंगे।

कृषि मंत्री ने तुरन्त में ही कई फसलों का एमएसपी बड़ा दिया है जिसमें गेहूं पर 50 रूपया, चना पर 250 रूपया, दाल पर 300 रूपया और सरसों पर 225 रूपया आदि की बड़ोत्तरी की है। ये अपने आप में सरकार के किसानों के हित में लिये गये फैसलों के मजबूत इरादे दिखाता है। सरकार ने तो कृषि उपज मंडी समिति एपीएमसी को भी चालू रखनें की बात कही है उनका कार्य वैसे ही चलता रहेगा हालांकि एपीएमसीकी शिकायतें किसानों द्वारा रोजाना आती हैं।

नरेन्द्र मोदी सरकार ने पहले समर्थन मूल्य डेढ़ गुना देकर किसानों को एक बड़ी राहत दी थी। उसके बाद गरीब किसानों को किसान सम्मान राशि वार्षिक देने का काम किया। अब नये बिल से उन्हें फसल की सुरक्षा देकर तनाव मुक्त करना है।

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आय के पर्याप्त अवसर

किसानों को अब केवल एक मंडी पर या केवल एमएसपी के समय पर मजबूरी में फसल बेचनें से छुटकारा मिलेगा। किसान जिस समय चाहे, जहां चाहे, फसल बेच सकेंगे।

 

खेत के पास मंडी

अब खेत के पास ही मंडी समझिये चाहें तो उसी गांव या नजदीक के कस्बे में बेचें या फसल को शुरू में ही किसीको बेच दें। अब आवश्यकता नहीं कि अपनीक्षेत्रीय मंडीमें ही फसल बेचनें जायें। चाहे दूसरे प्रदेश के क्षेत्र में बेचें। इस तरह किसानों को मंडी के एकाधिकार से मुक्ति मिलेगी।

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ढुलाई का खर्चा कम

अगर वे अपने खेतों कीफसल बेचतें हैं तो ढुलाई का खर्चा नहीं उठाना पड़ेगा। यदि पास में हीनजदीक में बेचनें जाते हैं तो ढुलाई का खर्चा कम हो जायेगा। कुछ मंडिया 40-50 किलोमीटर दूर तक भी होती है जिसका उन्हें ट्रेक्टरों का आने जाने का खर्चा उठाना पड़ता है। एमएसपी सीजनसमाप्त होने के बाद ये और भी महंगा पड़ता है।

 

फसल की बेहतर कीमत

अभी किसान एमएसपी बन्द हो जानें के बाद एक ही मंडी में जाकर आड़तियों को फसल बेचनें को मजबूर है। अब जहां उसे बेहतर दाम मिलेंगे वहां बेच सकेगा। चाहे कोई अन्य प्रदेश ही हो। बेचनें के पहले कीमत तय कर सकेगा यहां तक कि कोई किसान चाहे तो अपनी फसल ऑनलाईन भी बेच सकेगा।

 

 एमएसपी सीजन न होने पर बेचने की सहूलियत

एमएसपी पूरे साल तो चलती नहीं केवल सीजन में ही होती है बाकी समय किसान को अपनी फसल बेचना हो तो उसी क्षेत्रीय मंडी में ही जाना पड़ेगा जहां आड़तिया मिलकर एक दाम तय कर लेते हैं और किसान को उन्ही के द्वारा तय किये गये रेट पर बेचना पड़ता है। अब किसान अपने हिसाब से वक्तजरूरत पर जहां उचित और अधिक दाम मिलेगा, उसे बेच सकेगा। हर तरह से ये कानून किसानों को लाभान्वित करने वाले हैं। आज जो भी समस्यायें आ रही हैं उन्हें इस नये कानून में दूर किया गया और ये मंडी समतियों की ज्यादितियों से बचानें का काम करेगा। मैं एक उदाहरण देता हूँ: हरयाणा में जगारी की फसल होती है जिसे उन्हें अपनी ही मंडी में बेचना पड़ता है जबकि बिहार में इसकी कीमत बहुत अधिक मिलती है। सारा का सारा लाभ कमेटी के लोग या आड़तिया खा जाते हैं। अब किसान खुद सौदा करके सीधा जहां चाहे बेच सकेगा। आड़तिया को कम कमीशन पर राजी कर सकेगा।

 

कांग्रेस के दांत खाने के और, दिखाने के और

कांग्रेस पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में ऐसी ही बात कही थी। मनमोहन सिंह की सरकार के समय हरयाणा के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी। उस कमेटी ने इन सुधारों की सिफारिश की थी। आज ये एपीएमसी की बात कर रहे हैं। केरल में एपीएमसी नहीं है पर कांग्रेस पार्टी ने इसके लिये कभी प्रयास नहीं किया है।

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विरोधियों की चालों का सच

जो लोग इस कानून का विरोध कर रहे हैं वे निहित स्वार्थ से प्रेरित हैं। ये वही लोग हैं जो बड़े जमींदार किसान है और बड़ी मछली बन कर छोटी मछली का भोजन कर रहे हैं। ये मंडी पर कब्जा चाहते हैं ये किसानों को फसल कहीं और नहीं बेचना देना चाहते हैं। मजबूरी में गरीब किसान कर्जा लेता है फिर ये उनकी जमींन हड़प जाते हैं। इसका विरोध कहीं से भी तार्किक नहीं है इसलिये भा.ज.पा. नेे एक घटक के अलग होने की परवाह भी नहीं की गयी और अकाली दल के एक मंत्री के इस्तीफे का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा।

किसान अब अपनी फसल वहां भी बेच सकेगा जहां इसकी कमी होगी। मानलेंएक क्षेत्र में अधिक फसल हुई और दूसरे क्षेत्र या प्रदेश में कम हुई तो अधिक फसल वाला किसान खुद अपनी मर्जी से दूसरे स्थान पर फसल बेच सकेगा। इससे उसे कीमत भी ज्यादा मिलेगी और कम फसल वाले क्षेत्र में ब्लेकमार्केटिंग भी नहीं हो पायेगी। ये दोहरा लाभ होगा क्योंकि उस क्षेत्र में फसल की कमी पूरी हो जायेगी।

यकायक जरूरत पडऩे पर अब किसान कर्ज से नहीं लदेगा वो अपनी फसल को समय रहते या उससे उसे पूर्व में हीआसानी से बेच सकेगा। अभीकर्जा लेने पर उसकी जमींन गिरवी रख ली जातीहै फिर उन पर कब्जा कर लिया जाता है जिससे किसान बद से बदहाल होता चला गया। ये कभी कभी किसानों के आत्म हत्या की वजह बन जाता है।

 

नये बिल के महत्वपूर्ण बिन्दु

नये कानून में यदि किसान अपनी फसल किसी व्यापारी, कम्पनी या जमींदार को बेचना है तो उसके हितों का इस कानून में पूरा ध्यान रखा गया है जैसे:-

किसी तरह की शिकायत पर स्थानीय परगना अधिकारी का फैसला ही मान्य होगा कहीं कोई कोर्ट, कचहरी, आरबीट्रेटर के पास नहीं जाना पड़ेगा। कम्पनी को उल्टा किसान के क्षेत्र में आना पड़ेगा। अधिकारी को निवेशक पर जुर्माना लगाने का अधिकार होगा लेकिन किसान पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। यदि किन्हीं परिस्थितियों में किसान को निवेशक की राशि लौटानीपड़ती है तो वो केवल मूल राशि ही लौटायेगा। किसान न ब्याज देगा न ही कोई अन्य जुर्माना आदि। यदि कोई प्राकृतिक आपदा आती है जैसे बाड़, ओलावृष्टि, सूखा आदि तो भी किसान को निवेशक द्वारा उचित मूल्य मिलेगा। इस तरह किसानों की रक्षा प्राकृतिक आपदाओं से हो जायेगी। एक और बात है यदि फसल का बाजार मूल्य दोगुना हो जाता है तो किसान को उसका भी कुछ हिस्सा मिलेगा। कॉर्पोरेट सेक्टर या बड़े उद्यममियों के आने से गांव गांव में नई टेक्नोलॉजी पहुंच जायेगी और ग्रामीण विकास के नये आयाम खुलेंगे फॉर्म विकसित होंगे।

विपक्ष के पास इस कानून के विरोध में बोलने के लिये एक शब्द भी नहीं है आज ये नेता और पार्टियां किसानों को केवल बरगला सकतेे हैं। कल सच तो सामने आयेगा ही तब किसान उन्हें गांवो में घुसने भी नहीं देंगे। ये कानून 100 प्रतिशत किसान हित केन्द्रित है केवल उनकीभलाई के लिये है इसलिये किसानों का माल डकारने वाले तड़प रहे हैं। बिल में एक भी बिन्दु किसानों के अहित में कोई नहीं बता सकता।

जिस तरह विरोधी नेताओं ने खासतौर  से कांग्रेस पार्टी ने सर्जिकल स्ट्राइक, वालाकोट और डोकलाम में झूठ प्रचारित कर मुंह की खायी थी। नोटबन्दी में जनता ने चुनाव में करारा जबाब दिया था। किसान बिलों का विरोध उन्हें भारी महंगा पड़ेेगा और किसान बिलों भी समझने के बाद इनकी शक्ल भी देखना पसंद नहीं करेगा।

 

 डॉ0 विजय खैरा

 

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