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भारत में हैं विश्व के सबसे ज्यादा सुखी मुसलमान:  सरसंघचालक मोहन भागवत

भारत में हैं विश्व के सबसे ज्यादा सुखी मुसलमान:  सरसंघचालक मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ को किसी से नफरत नहीं है। भुवनेश्वर में बुद्धिजीवियों की एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आरएसएस का उद्देश्य भारत में परिवर्तन के लिए सभी समुदायों को संगठित करने का है, न सिर्फ हिंदू समुदाय को।

भारत की विविधता की तारीफ करते हुए आरएसएस प्रमुख ने कहा कि इसने देश को एक डोर में बांधा हुआ है। यहां के लोग विविध संस्कृति, भाषा और भौगोलिक स्थानों के बावजूद खुद को भारतीय मानते हैं। इस अद्वितीय अहसास के कारण मुस्लिम, पारसी या अन्य मजहबों में विश्वास रखने वाले लोग खुद को यहां सुरक्षित समझते हैं।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि यहूदी मारे-मारे फिरते थे, लेकिन उन्हें भारत में आश्रय मिला। पारसियन (पारसी) की पूजा और मूल धर्म केवल भारत में सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि विश्व के सर्वाधिक सुखी मुसलमान भारत में मिलेंगे। यह इसिलए है क्योंकि  हम हिंदू हैं।

मोहन भागवत ने कहा कि समाज में बदलाव लाना जरूरी है ताकि देश का भाग्य बदले। इसके लिए ऐसे लोगों को तैयार करना होगा, जिनका चरित्र साफ सुथरा हो, जो प्रत्येक सडक़, गांव और शहर में नेतृत्व रखने की क्षमता रखें। यह हमारी इच्छा है कि आरएसएस और समाज एक सिंगल गु्रप की तरह मिलकर काम करे।

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रामचन्द्र खराडी बने अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के नये अध्यक्ष

राजस्थान के प्रतापगढ़ निवासी रामचन्द्र खराडी को केन्द्रीय कार्यकारी मण्डल ने वनवासी कल्याण आश्रम के तीसरे अध्यक्ष के रूप में चुना है। बाला साहब देशपाण्डेजी  के निधन के बाद 1995 से लेकर  जगदेवराम उरांव  ने सुदीर्घ 25 वर्ष कल्याण आश्रम का नेतृत्व किया। 15 जुलाई 2020 को जशपूर में जगदेवरामजी के निधन के पश्चात् यह पद रिक्त हुआ था।

रामचन्द्र खराडी का जन्म 15 जनवरी 1955 में राजस्थान के उदयपुर जिला के खरबर गांव के भील जननाति परिवार में हुआ। उन्होंने स्नातक तक की पढ़ाई पूर्ण करके सरकारी सेवा में प्रवेश किये। तहसीलदार, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट, अतिरिक्त जिला अधिकारी आदि सरकारी पदों में रहकर राजस्थान के विभिन्न जिलों में उन्होंने कार्य किया। भूमि संबंधी मामलों का निपटारा करने हेतु उन्होंने सरकारी पद पर रहकर काफी सराहनीय कार्य किया। इसके कारण सरकारी कामकाज के क्षेत्र में श्री खराडीजी का नाम काफी चर्चित रहा।

2014 में सरकारी सेवा से स्वेच्छिक निवृत्ति लेकर धार्मिक एवं सामाजिक कार्य में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। जनजाति समाज के परंपरागत धर्म संस्कृति की रक्षा के साथ साथ गायत्री परिवार के कार्य से भी 1995 में उनका संपर्क आया। उनके नेतृत्व में 17 स्थानों पर गायत्री माता मंदिर निर्माण कार्य हुआ। 108 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में यजमान की भी भूमिका उन्होंने निभाई थी। कई स्थानों पर सामूहिक विवाह कराने में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनका कल्याण आश्रम से संपर्क 2003 में डुंगरपुर कल्याण आश्रम के भवन निर्माण के समय में आया। 2016 में राजस्थान के अध्यक्ष बने। 2019 में दुबारा इस दायित्व के लिये वे चुने गये। गत दो वर्षों से वे कल्याण आश्रम के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में भी कार्यरत थे।

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हिंदूओं की मॉब लिन्चिंग पर चुप्पी क्यों? : डॉ. सुरेन्द्र जैन

दिल्ली में एक गरीब ड्राइवर के लडक़े राहुल कंडेला की कुछ कट्टरपंथी मुसलमानों के द्वारा की गई बर्बर हत्या पर विश्व हिंदू परिषद ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए पूछा है कि क्या इस 19 वर्षीय गरीब युवक की एक मुस्लिम युवती से दोस्ती होना ही उसका अपराध बन गया था जिसकी सजा जिहादी तत्वों ने उसकी मॉब लिंचिंग करके दी। विहिप के केन्द्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने कहा है कि संपूर्ण देश के लिए यह बहुत चिंता का विषय है कि जब भी किसी हिंदू लडक़े का किसी मुस्लिम लडक़ी से प्यार हो जाता है तो वह लका मृत्युदंड प्राप्त करने का अपराधी बन जाता है परंतु जब कोई मुस्लिम लडक़ा किसी हिंदू लडक़ी से जबरन या धोखा देकर भी संबंध स्थापित करता है तो वह द्बइनके लिए किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। हिंदू युवक को अपराधी मानकर उसकी मॉब लिंचिंग कर देना किसी सभ्य समाज का लक्षण नहीं हो सकता।

डॉ जैन ने आगे कहा कि भारत में मुस्लिम समाज सबसे अधिक सुखी है। यह बहुसंख्यक हिंदू समाज की सदाशयता और सहिष्णुता के कारण ही संभव हो सकता है। इसके बावजूद यह समझना पड़ेगा कि मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग हिंदुओं के प्रति इतनी घृणा क्यों करता है। छोटी-मोटी बातों पर भी वह उसी हिंदू की मॉब लिंचिंग कर देता है। पिछले चार-पांच सालों में ही जिहादियों द्वारा हिंदुओं की माब लिंचिंग की 73 से अधिक घटनाएं हो चुकी है। देश की राजधानी दिल्ली में ही पिछले 5 सालों में हिंदुओं की 9 से अधिक मॉब लिंचिंग की घटनाएं हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि विहिप मुस्लिम समाज के नेताओं से आग्रह करती है कि वे अपने समाज के एक वर्ग की इस जेहादी मानसिकता को ठीक करें। अपने युवकों को जेहाद की जगह सह-अस्तित्व के मार्ग पर लाएं। हिंदू समाज की सहिष्णुता को अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि इस कट्टरता व हिंसक घृणा को बढ़ावा देने के लिए कथित सेकुलर बिरादरी भी कम दोषी नहीं है। मुस्लिम समाज के किसी व्यक्ति के साथ हुई कुछ घटनाओं के लिए वे न केवल केंद्र सरकार को अपितु हिंदू समाज व संपूर्ण देश को कटघरे में खड़ा कर देते हैं परंतु राहुल जैसे पचासों युवकों की मॉब लिंचिंग पर उनके मुंह से संवेदना का एक शब्द भी नहीं निकलता। जब आईबी अधिकारी अंकित शर्मा को चाकू से गोद-गोद कर हत्या कर दी थी तब भी इनके मुंह क्यों सिल गए थे? बलात्कार जैसा घृणित अपराध अक्षम्य है। परंतु इसमें भी हिंदू मुस्लिम देखने का अपराध यह सेकुलर बिरादरी ही कर सकती है। हाथरस कांड में उनकी प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट हो गया है कि ये घटनाएं सेकुलर बिरादरी के लिए केवल अपने निहित स्वार्थ पूरे करने का साधन मात्र है और वे अपने इस अपराधिक कृत्य के लिए भारत विरोधी विदेशी शक्तियों की कठपुतली भी बन जाते हैं। भीम आर्मी जैसे दलित संगठनों की भूमिका से यह स्पष्ट हो चुका है कि वे भी अपने स्वार्थों के लिए दलित विरोधी व राष्ट्र विरोधी भूमिका का निर्वाह करने में भी कोई संकोच नहीं करते। राष्ट्रीय विचारधाराओं वाली चुनी गयी सरकारों को अस्थिर करने के लिए वे हिंदू समाज व देश को बदनाम करने का राष्ट्र विरोधी कृत्य कर रहे हैं। इसके लिए समाज उन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

 

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