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आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

भारत को विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के कारण अनेक कठिन स्थितियों का सामना करना पड़ा है, भारत मे सांस्कृतिक रूप से आत्मनिर्भरता की भावना है। जो इस तथ्य से स्पष्ट है कि मार्च 2020 से पहले व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (क्कक्कश्व) के शून्य उत्पादन से, भारत ने आज 2 लाख क्कक्कश्व किट उत्पादन की क्षमता बना ली है, जो लगातार बढ़ रही है। यदि देश के पास संसाधन उपलब्ध नहीं है तो किसी दूसरे देश से उस संसाधन की कमी को पूरी करनी पड़ेगी। यदि उस संसाधन को बनाने की सारी सामग्री उसके पास उपलब्ध है तो वह उसका प्रयोग कर उसका निर्माण स्वयं कर सकता है। इससे वह आत्मनिर्भर भी बनेगा और किसी दूसरे देश पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। हमारे देश में हर संसाधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। लेकिन हम कई सारी ऐसी चीजे उपयोग में लेते हैं जो किसी दूसरे देशों में बनी होती है। इससे हमें एक नागरिक और उपभोक्ता के रूप में तो नुकसान होता ही है, साथ में ही देश को भी इसका बहुत बड़ा नुकसान भुगतना पड़ता है।

हमारे देश में हर संसाधन उपलब्ध है। यदि उस संसाधन का सही उपयोग करके देश में ही वस्तुएं बननी शुरू हुई तो इससे देश को काफी फायदा होगा। इससे देश में उद्योगों की बढ़ोतरी होगी और देश के हर युवा को रोजगार मिलेगा देश के नागरिको को प्राप्त मात्रा में आवश्यक सामान मिलेगा।  इसके अतिरिक्त, भारत ने यह प्रदर्शित किया है कि वह किस तरह से चुनौतियों का सामना करता है और अवसरों को उजागर करता है, जैसा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर के उद्योगों द्वारा जीवन-रक्षक वेंटिलेटर बनाने में सहयोग करने से प्रकट होता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी द्वारा इन प्रयासो को बार-बार करने के  स्पष्ट आह्वान ने भारतीय अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान को सक्षम बनाने के लिए आत्मनिर्भर बनने का भरपूर स्वागत किया।  हमें ज्यादा से ज्यादा कोशिश करनी चाहिए कि हम अपने आसपास निर्मित लोकल वस्तुओं का प्रयोग करें उनके लोकल उपयोग को प्रोत्साहित करें लोकल सामान का इतना प्रचार करें कि वे ग्लोबल बन जाएं। इससे छोटे कारीगर और मजदूरों को प्रोत्साहन मिलेगा। इसे प्रधानमंत्री ने वोकल फॉर लोकल का नाम दिया।

‘लोकल फार वोकल’ ‘स्वदेशी अभियान’ का ही एक विस्तारित स्वरूप है जिसका आग्रह देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आजादी की लड़ाई के समय से ही करते आए है, स्वदेशी उपयोग के साथ साथ स्वदेशी उत्पादन को जोड़कर देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने स्वदेशी अभियान को एक अर्थ क्रांति के रूप में परिवर्तित करने का प्रयास किया है। स्वदेशी व्रत लेने पर कुछ समय तक असुविधाएं तो भोगनी पड़ेंगी, लेकिन उन असुविधाओं के बावजूद यदि समाज के विचारशील व्यक्ति स्वदेशी का व्रत अपना लें, तो हम उन अनेक बुराइयों का निवारण कर सकते हैं जिनसे हम पीडि़त हैं। मैं कानून द्वारा किए जाने वाले हस्तक्षेप को, वह जीवन के किसी भी विभाग में क्यों न किया जाय, बिल्कुल नापसन्द करता हूं। उसके समर्थन में ज्यादा-से-ज्यादा यही कही जा सकता है कि दूसरी बुराई की तुलना में वह कम बुरी है।’ अंतरराष्ट्रीय स्थितियों को देखते हुए समय की मांग है कि हम हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने। 1960 के दशक में गेहूं के लिए हम विकसित देशों पर निर्भर थे। लेकिन आज गेहूं, चावल तथा अन्य खाद्य पदार्थों से हमारे गोदाम भरे हुए हैं। यह बात इस संकट की घड़ी में देश का आत्मविश्वास बढ़ाती है। आर्थिक व सैन्य रूप से जिस दिन देश आत्मनिर्भर हो जाएगा उस दिन भारत को महाशक्ति बनने से दुनिया को कोई नही रोक सकती।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी ने नागरिकों का भारतीय व्यवसाय जगत के पांच स्तंभों पर ध्यानाकर्षण किया :-

अर्थव्यवस्था : एक ऐसी इकॉनॉमी जो इन्क्रीमेंटल चेंज (वृद्धिशील परिवर्तन) नहीं बल्कि क्वांटम जंप (बड़ी उछाल) लाए।

आधारभूत संरचना : भारत की सरकार आधारभूत संरंचना में जरूरी निवेश के सुधार करेगी जिससे कि स्वदेशी वस्तुएं बाहर से आने वाले उत्पादों का मुकाबला कर सकें।

तंत्र : आने वाले समय में ऑनलाइन सर्विस को बढ़ावा दिया जायेगा। 21 वीं सदी में विकास के लिए भारत को टेक्जिनोलॉजी ड्रिवेन सिस्टम की आवश्यकता है। जिससे सरकारी काम में पारदर्शिता बढ़ जाये और लोगों का सरकार पर और भारत पर विश्वास स्थापित हो सके।

जनसंख्या संरचना : भारत की जनसंख्या में 18 से 35 वर्ष की आयु के लोग सबसे ज्यादा है। इसलिए उन्हें वाइब्रेंट डेमोग्राफी नाम से संबोधित किया है। हमारे पास युवा शक्ति का विशाल भंडार है। इस जनसंख्या के भार को मुनाफे में तब्दील करने के लिए हमें लोगों को ज्यादा से ज्यादा काम देना होगा। उन्हें रोजगार तभी मिल सकता है जब हम लोकल निर्मित वस्तुओं का प्रयोग करें। मेड इन इंडिया और मेक इन इंडिया को बढ़ावा देकर भारत का सामान दूसरे देशों तक पहुंचाना है।

मांग : 137 करोड़ की जनसंख्या वाले भारत देश में वस्तुओं की मांग की कोई कमी नही है। हमे इस भारी मांग का उपयोग अपने देश के में निर्मित चीजों की बिक्री बढ़ाने के लिए करना है। हमें अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा।

आत्मनिर्भर भारत पैकेज में लैंड, लेबर, लिक्विडिटी और लॉ पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अर्थात जमीन, श्रम, पूंजी तथा नियमो को सुगम बनाने हेतु विशेष प्रयास किए जा रहे है।

सरकार द्वारा भारत को आत्मनिर्भर बनाने सात कदम उठाए गए है  इसमें मनरेगा, हेल्थ एंड एजुकेशन, बिजनेस, डी-क्रिमिनलाइजेशन ऑफ कम्पनीज ऐक्ट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज, राज्य सरकारें और उन्हें दिए गए रिसोर्सेज शामिल हैं। मनरेगा का बजट अलॉकेशन 61,500 करोड़ रुपये था। अब घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों को उनके ही राज्य में काम मिल सके, इसके लिए 40 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।

हेल्थ सेक्टर में सरकारी खर्च को बढ़ाया जाएगा। हर डिस्ट्रिक्ट में इन्फेक्शियस डिजीज ब्लॉक होगा। ब्लॉक लेवल पर पब्लिक हेल्थ लैब  सेटअप की जाएंगी।

‘पीएम ई-विद्या प्रोग्राम’ की जल्द शुरुआत होगी। एजुकेशन के लिए ‘दीक्षा’ नाम का नया प्लेटफॉर्म। हर क्लास के लिए टीवी चैनल शुरू होगा। रेडियो, कम्युनिटी रेडियो और पॉडकास्ट्स का यूज बढ़ेगा। दिव्यांग बच्चों के लिए नया कंटेंट डेवलप होगा। टॉप 100 यूनिवर्सिटीज को ऑटोमेटिकली ऑनलाइन कोर्सेज शुरू करने की परमिशन मिलेगी।

MSMEs को फायदा पहुंचाने के लिए दीवालियेपन की प्रक्रिया शुरू करने की सीमा 1 लाख से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दी गई है। IBC के सेक्शन 240ए के तहत स्पेशल फ्रेमवर्क बनाया जाएगा। एक साल तक दीवालियेपन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकेगी। कोविड-19 से हुए कर्ज ‘डिफॉल्ट’ कैटेगरी में नहीं डाले जाएंगे। छोटी-मोटी तकनीकी चूकों को डी-क्रिमिनलाइज किया जाएगा। कंपनीज एक्ट में बदलाव किए जा रहे हैं। कम्पाउंडेबल सेक्शंस में बड़े पैमाने पर चेंज किया गया है।  भारतीय कंपनियों को ये अधिकार दिया जाएगा कि वे जायज विदेशी अधिकार क्षेत्र में नॉन-पब्लिक कंपनीज को डायरेक्टली लिस्ट करवा सकती हैं । पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज में बड़ा बदलाव। सारे सेक्टर्स प्राइवेट सेक्टर के लिए खोले जाएंगे। एक नई पॉलिसी बनेगी। उसमें स्ट्रैटेजिक सेक्टर्स और अन्य की लिस्टिंग होगी।

प्रधानमंत्री जी द्वारा 20 लाख करोड़ रुपये का विशेष आर्थिक और व्यापक पैकेज देश को समर्पित किया गया जो कि भारत के GDP के 10 प्रतिशत के बराबर है। इस पैकेज के पीछे यह योजना है कि कुटीर उद्योग सहित विभिन्न वर्गों को पूरा करने के लिए पैकेज, एमएसएमई, मजदूर, मध्यम वर्ग, उद्योग, अन्य हेतु पैकेज देकर समस्त सेक्टर में क्रांतिकारी सुधार द्वारा देश को आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ाएंगे। प्रधानमंत्री जी ने इस पैकेज की घोषणा के साथ यह कहा कि – ‘यह हमारे स्थानीय उत्पादों के लिए मुखर होने और उन्हें वैश्विक बनाने का समय है’। भारतीय कृषकों के लिए कृषि अवसंरचना की स्थापना के लिए 11 लाख करोड़ रुपये का कोष, सूक्ष्म खाद्य उद्यमों के एक औपचारिककरण के उद्देश्य से एक नई योजना अंतर्गत रु 10,000 करोड़, प्रधानमंत्री मातृ संपदा योजना के तहत मछुआरों के लिए 2000 करोड़ रुपये, पशुपालन के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 15000 करोड़ रुपये का सेटअप किया जाएगा, केंद्र सरकार हर्बल खेती के लिए 4000 करोड़ रुपये आवंटित करेगी, मधुमक्खी पालन की पहल के लिए 500 करोड़ रुपये आबंटित किए गए हैं, 500 करोड़ रुपये के सभी फलों और सब्जियों को कवर करने के लिए ऑपरेशन ग्रीन का विस्तार किया जाएगा, अनाज, खाद्य तेल, तिलहन, दालें, प्याज और आलू जैसे आवश्यक भोजन में संशोधन लाया जाएगा, कृषि विपणन सुधारों को एक नए कानून के माध्यम से लागू किया जाएगा जो अंतरराज्यीय व्यापार के लिए बाधाओं को दूर करेगा, किसान को सुविधात्मक कृषि उपज के माध्यम से मूल्य और गुणवत्ता का प्रबंध किया जाएगा।

किसान सम्मान निधि योजना  के अंतर्गत आर्थिक सहायता केंद्र सरकार द्वारा 4 महीने के अंतराल पर प्रदान की जाती है। हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिनांक 9 अगस्त 2020 को सुबह 11:00 बजे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की  छठी किस्त सभी लाभार्थी किसानों के खाते में भेजी गई

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पीएम किसान पांचवी किस्त अप्रैल 2020 के अंतर्गत कुल 9 करोड़ किसानों के अकाउंट में करीब 18000 करोड़ रुपए की रकम भेजी है7 दिनांक 10 अप्रैल 2020 तक केंद्र सरकार द्वारा कुल 7 करोड़ किसानों के बैंक अकाउंट में  14000 रूपये की धनराशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भेजे जाने की पुष्टि की गई है। और अब वर्ष 2020-21 के अंतर्गत पीएम किसान छठी किस्त रुपए 17000 करोड की धनराशि 8.5 करोड़ किसानों के बैंक खातों में भेजी गयी है। किसान सम्मान निधि योजना में महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए है जब किसान सम्मान निधि योजना की अनौपचारिक तौर पर शुरुआत की गई थी तो इसकी पात्रता की शर्तों में यह निर्धारित किया गया था कि इस योजना का लाभ केवल वही किसान उठा पाएंगे जिनके पास 2 हेक्टेयर की जमीन है लेकिन केंद्र सरकार ने यह सीमा को खत्म कर दिया है। जिसके कारण इस योजना का लाभ 12 करोड़ किसानों से बढ़ कर 14.5 किसानों को मिलेगा।

‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज-1’ के अंतर्गत 1.70 लाख करोड़ राहत पैकेज जारी किया गया है जिसमे कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लडऩे में गरीबों की मदद मुहैया करवाई गई है इस योजना में 50 लाख रुपये प्रति स्वास्थ्य कार्यकर्ता का बीमा कवर, 80 करोड़ गरीबों को प्रति व्यक्ति 5 किलो गेहूं या चावल का लाभ दिया गया अगले 3 महीनों के लिए। अगले 3 महीने के लिए हर महीने मुफ्त में प्रत्येक घर के लिए 1 किलो दाल , 20 करोड़ महिला जन धन खाता धारकों को प्रति माह 500 रुपये अगले 3 महीनों के लिए, मुफ्त में गैस सिलेंडर  8 करोड़ गरीब परिवारों को दिए गए 3 महीने के लिए, लाभ के लिए 182 रुपये से एक दिन में मनरेगा मजदूरी में 202 रुपये की वृद्धि की गई है जिस से 13.62 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे। 1,000 रु का गरीब वरिष्ठ नागरिक, गरीब विधवाओं, गरीब वरिष्ठ नागरिकों और गरीब दिव्यांग को अनुदान दिया गया जिससे 3 करोड़ लाभान्वित हुए।

किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति को सक्षम करने के लिए अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम में संशोधन किए गए, अत्यावश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को संकट के दिनों में लागू किया गया था।  निवेश और कृषि क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी बना कर किसानों के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति को सक्षम करने की आवश्यकता है, अनाज, खाद्य तेल, तिलहन सहित कृषि खाद्य सामग्री,दालें, प्याज और आलू को अलग-अलग किया जाना है।  ऐसी कोई स्टॉक सीमा प्रोसेसर या मूल्य श्रृंखला प्रतिभागी के लिए लागू नहीं होगी, जो उनकी स्थापित क्षमता के अधीन या निर्यात मांग के अधीन किसी भी निर्यातक के अधीन होगी।

‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज-2’ के अंतर्गत मौजूदा पीएम-किसान के तहत किसानों को 2,000 रु भुगतान किए गए  जिससे 8.7 करोड़ किसानों को लाभ मिला।  बिल्डिंग एंड कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर फंड श्रमिकों को राहत देने के लिए उपयोग किया जाता है इस योजना के अंतर्गत मासिक मजदूरी का 24प्रतिशत मजदूरों के पीएफ खातों में जमा किया जाएगा। कर्मचारी भविष्य निधि ईपीएफ के तहत मासिक आय का 24 प्रतिशत कर्मचारियों के खातों में जमा किया जाएगा। इस योजना का लाभ उन्हें मिलेगा जिन उद्योगों में 100 से कर्मचारी है तथा उनकी मासिक आय 15000 से कम है। कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) फंड के अंतर्गत 5 करोड़ मजदूर पंजीकृत , इस स्कीम में ईपीएफ में जमा कुल राशि का 75प्रतिशत या पिछले तीन महीनों में जमा ईपीएफ धनराशि नानरिफंडेबल एडवांस के रूप मजदूरों को दी जाएगी। यह राशि मजदूर को वापस नही करनी है। महिला स्वसहायता समूहों के लिए ग्यारंटी मुक्त उधार की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की गई जिससे 6.85 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे, जिला खनिज निधि का उपयोग चिकित्सा परीक्षण, स्क्रीनिंग आदि की सुविधाएं बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

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आत्मनिर्भर भारत चरण – 2 के अंतर्गत 3 करोड़ किसान जिनका  कृषि ऋण 4.22 लाख करोड़ रुपये है उनकी लोन मोरेटोरियम की अवधि 3 माह की गई है। अर्थात उनसे 3 महीने की किस्त फिलहाल न लेकर बाद में ली जाएगी, ब्याज न देने की फसल लोन की तिथि 1 मार्च से बढ़ाकर 31 मई 2020 कर दी गई है। 25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए जिनकी लोन सीमा देशभर में अब 25,000 करोड़ रुपये हो गई है। 63 लाख कृषि लोन दिनांक 1.3.2020 से 30.04.2020 तक पारित किए गए जिसके अंतर्गत 86,600 करोड़ रुपये दिए गए । वर्ष 2020 में नाबार्ड द्वारा सहकारी  तथा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को 29,500 करोड़ रु. के लोन पुन: आबंटित किए गए। 4200 करोड़ रूपये का विकास मद ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास हेतु केंद्र शासन के द्वारा राज्य सरकारों को आबंटित किया गया। कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण हेतु केंद्र शासन द्वारा 6,7000 करोड़ रु. राज्य सरकारों को दिए गए ।  किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा बढ़कर 2.5 करोड़ किसानों को कवर किया जाएगा और फलस्वरूप लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के ऋण प्रवाह से किसानों को सीधा लाभ होगा।

आत्मनिर्भर भारत चरण- 3 के अंतर्गत माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज (एमएफई) के औपचारिककरण के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना लाई गई है, लॉकडाउन अवधि के दौरान कृषि उपज की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 74,300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि की खरीद की गई। इसमे एग्री इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड के अंतर्गत 1,00,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सुविधा फार्म-गेट पर कृषि अवसंरचना परियोजनाओं का वित्तपोषण किया जाएगा, एकत्रीकरण (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां, किसान उत्पादक संगठन, कृषि उद्यमी, स्टार्टअप आदि) के माद्यम से किया जाएगा। औषधीय कृषि संवर्धन हेतु औषधीय पौधों की खेती के हेतु 2.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 4000 करोड़ रु नेशनल मेडिसिनल प्लांट्स बोर्ड के समर्थन से वितरित किए जाएंगे। हर्बल खेती के तहत 10,00,000 हेक्टेयर को कवर किया जाएगा। 4000 करोड़ रु रुपये के परिव्यय के साथ अगले दो वर्षों में किसानों के लिए 5,000 करोड़ की आय सृजन किया जाएगा। औषधीय पौधों के लिए क्षेत्रीय मंडियों का नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।

पशुपालन क्षेत्र के विकास हेतु बि सरकार के गम्भीर प्रय्यास दृष्टिगत होते है, लॉकडाउन के दौरान, दूध की मांग 20-25 प्रतिशत कम हो गई। इससे निपटने हेतु रणनीति तैयार कर वितरण व्यवस्था को री आर्गनाइज किया जाएगा, सहकारी समितियों द्वारा प्रति दिन 560 लाख लीटर (एलएलपीडी) की खरीद की जाती है जबकि भारतीय बाजार की डिमांड केवल 360 एलएलपीडी की दैनिक है ।  कुल 111 करोड़ लीटर अतिरिक्त खरीद का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए 4100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, 20-21 के लिए डेयरी सहकारी समितियों को वार्षिक ब्याज ञ्च 2 प्रतिशत प्रति प्रदान करने के लिए एक नई योजना लाई गई, प्रॉम्प्ट पर अतिरिक्त 2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भुगतान/ब्याज सर्विसिंग प्रदान होंगे, यह योजना 5000 करोड़ अतिरिक्त तरलता को अनलॉक करेगी, योजना का उद्देश्य 2 करोड़ किसानों को लाभान्वित करना है।

राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत फुट एंड माउथ डिजीज (एफएमडी) और ब्रुसेलोसिस के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम कुल के साथ लॉन्च किया गया जिसमे 13,343 करोड़ रुपये का व्यय हुआ। यह मवेशियों, भैंस, भेड़, बकरी का 100 प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करता है और सुअर आबादी (कुल 53 करोड़ पशु) फुट के लिए और मुंह रोग (एफएमडी) और ब्रुसेलोसिस के लिए टीकाकरण सुनिश्चित किया गया। अब तक, 1.5 करोड़ गायों और भैंसों को टैग किया गया और टीका लगाया गया। पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष के अंतर्गत 15,000 करोड़ रुपये का पशुपालन इंफ्रास्ट्रक्चर विकास कोष सेट अप किया जाएगा।

मछली पालन को बढ़ावा देने आयात के लिए स्वच्छता आयात परमिट (एसआईपी) की वैधता झींगा ब्रूडस्टॉक 3 महीने तक बढ़ाया गया, ब्रूड स्टॉक के आने में 1 महीने तक की देरी हुई खेप रद्द करने के लिए संगरोध क्यूबिकल्स की अनुमति दी गई, बुकिंग खेप पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा, दस्तावेजों का सत्यापन और संगरोध के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रदान करना 7 दिन से 3 दिन के भीतर होगा। 242 पंजीकृत चिंराट हैचरी का पंजीकरण और 3 माह के लिए 31.03.2020 को समाप्त होने वाली नौपल्ली रियरिंग हैचरी का विस्तार किया जाएगा, मरीन कैप्चर फिशरीज और एक्वाकल्चर का संचालन अंतर्देशीय मत्स्य पालन को कवर करने के लिए सुविधा दी जाएगी। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना  के माध्यम से मछुआरों के लिए 20,000 करोड़ रुपये, सरकार एकीकृत, स्थायी मत्स्य पालन व आखेट के विकास हेतु  क्करूरूस्ङ्घ शुरू करेगी। समुद्री, अंतर्देशीय मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर गतिविधियों के लिए 11,000 करोड़ रु आवंटित किए गए, इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 9000 करोड़ ₹ फिशिंग हारबर्स, कोल्ड चेन, मार्केट्स आदि का निर्माण किया गया। साथ ही मधुमक्खी पालन व्यवसाय के विकास हेतु 500 करोड़ दिए गए,  इस राशि से 2 लाख मधुमक्खी पालक लाभान्वित होंगे।

कुल मिलाकर आत्मनिर्भर भारत अभियान को भारत के पुनर्निर्माण का अभियान कहा जा सकता है। आत्मनिर्भर भारत अभियान में सरकार ने किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के हाथ में अधिक पैसे पहुंचाने की कोशिश की है साथ ही उद्योग जगत की समस्याओं को समझकर उनके निराकरण का प्रयास भी किया है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत जारी आर्थिक पैकेज में विद्यार्थियों, छोटे व्यापारी, बड़े उद्योगपति, मजदूर, किसान, मत्स्यपालक से लेकर मधुमक्खी पालकों सहित सभी का ध्यान रखा गया है, निश्चित ही यह पैकेज कोरोना के संकटकाल में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी बूटी का काम करेगा।

 

चन्द्रशेखर साहू

(लेखक पूर्व कृषि मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन, हैं)

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