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मुसलमान न बना पाने की बौखलाहट में हत्या?

मुसलमान न बना पाने की बौखलाहट में हत्या?

केरल के कोट्टायम की रहने वाली लड़की अखिला अशोकन के मुसलमान (हादिया जहां) बन जाने की कहानी और उस पर उठी चर्चा ज्यादा पुरानी नहीं है। वह कहानी यहां इसलिए फिर याद आई है क्योंकि फरीदाबाद के वल्लभगढ़ की निकिता तोमर हत्याकांड में भी लड़की के इस्लामीकरण का मुद्दा ही सबसे बड़ी खबर बनकर सामने आया है। तो क्या निकिता की हत्या केवल इसलिए कर दी गई कि उसने मुस्लिम बनने से इन्कार किया और लव-जिहाद का शिकार बनने की बजाए साजिशकर्ताओं को बेनकाब करने में वह जुट गई? निकिता के पिता मूलचंद तोमर के सनसनीखेज खुलासे से तो यही बात उभर कर सामने आती है कि मामला केवल प्यार-इश्क की एकतरफा कोशिशों में नाकामी का ही नहीं है। एक बार फिर एक पिता के कलेजे से यह दर्द छलक उठा है कि निकिता को मुसलमान न बनने की सजा दी गई है। केरल की हादिया के पिता का दर्द भी यही था कि उनकी अबोध बेटी प्यार के नाम पर मुसलमान बनाने की धर्म परिवर्तन वाले गिरोह की साजिश का शिकार हो गई। उनका आरोप था कि उनकी बेटी के मामले में पीएफआई के संगठित गिरोह के जरिए एक समूह गैर-मुस्लिम लड़की को किसी मुस्लिम युवक के प्रेमजाल में फंसाने के लिए मिशन मोड पर सारे इंतजाम में सहयोग करता रहा तो दूसरा समूह लड़की के इर्द-गिर्द इक_ा होकर मुस्लिम बन जाने के लिए उसका ब्रेनवॉश करता है। इसी में एक समूह ऐसा भी होता है जो निकाहनामे की जगह से लेकर पुलिस और अदालतों तक जाल बनाकर खड़ा हो गया ताकि चंगुल में फंसी लड़की किसी भी तरह से मुस्लिम युवक के जाल से बाहर निकलने न पाए। अखिला ऊर्फ हादिया के पिता अशोकन ने जिस साजिश की ओर केरल में उंगली उठाई, उसी जैसी साजिश के संकेत निकिता तोमर हत्याकांड में देखने को मिले हैं। तो क्या दक्षिण से उत्तर तक कोई खतरनाक इस्लामिक मिशन सधी और तेज चाल से मिशन-मोड पर डटा है जिसके टारगेट पर गैर-मुस्लिम लड़कियों को बड़ी तादाद में मुसलमान बनाने की मुहिम है?

निकिता तोमर हत्याकांड को विस्तार से हम समझने की कोशिश करेंगे लेकिन उसके पहले सवाल यही है कि केरल में अखिला हादिया क्यों बनी या बना दी गई? यह सवाल केरल के तमाम हिन्दू संगठनों और चर्चे से ज्यादा उसके माता-पिता के लिए उस समय एक पहेली बन गया था जबकि उन्होंने बेटी को मेडिकल की पढ़ाई के लिए बड़े उत्साह के साथ कॉलेज और हॉस्टल में भेजा था, लेकिन कॉलेज की पढ़ाई में अचानक उसका झुकाव ‘इस्लामिक शिक्षा’ की ओर बढ़ता चला गया और देखते ही देखते वह मुस्लिम बनकर शफीन जहां नाम के नेता की बीवी बन गई। मामला इसलिए गंभीर हो गया क्योंकि शफीन जहां का सीधा संबंध इस्लामिक उसूलों के प्रचार-प्रसार से जुड़े अतिवादी संगठन पीएफआई से जुड़ा पाया गया। जाहिर तौर पर अखिला के पिता के मन में तमाम सवाल उठ खड़े हुए कि अचानक उनकी बेटी को कॉलेज में ‘इस्लामिक शिक्षा’ का पाठ किसके द्वारा और क्यों पढ़ाया जाने लगा कि उसे अपने माता-पिता ही बैरी नजर आने लगे और हिन्दू धर्म की खुली हवा की बजाए उसे इस्लाम की पर्दादारी परंपरा में बुरकानशीं होना ज्यादा अच्छा लगने लगा।

मामले में पिता ने शिकायत की तो पुलिस से होते हुए केस केरल हाईकोर्ट पहुंच गया जहां केरल हाईकोर्ट ने अखिला यानी हादिया की मुस्लिम युवक के साथ शादी को रद्द करने का फैसला दिया, जिस पर कथित प्रगतिशील संगठनों, सेक्युलर ब्रिगेड ने दिल्ली तक शोर मचा दिया। केरल हाईकोर्ट के फैसले को हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया और लव-जिहाद से जुड़े आरोपों को भी खारिज कर दिया लेकिन केरल में सीरियन-मालाबार चर्च से जुड़े कार्डिनल जॉर्ज ऐलनचैरी की अध्ययक्षता वाली पादरियों की सर्वोच्च संस्थो ने यह बयान देकर सनसनी पैदा कर दी कि लव-जिहाद के आरोपों में सच्चाई है जबकि केरल सरकार ‘लव- जिहाद’ के मामलों को गंभीरता से नहीं ले रही। गैर-मुस्लिम लड़कियों को सुनियोजित तरीके से मुसलमान बनाने के लिए निशाने पर लिया जा रहा है। भोली-भाली ईसाई लड़कियां भी इसकी शिकार हो रही हैं।

लव-जिहाद का यह कथित स्लोगन तभी से सुर्खियों में बढ़-चढ़कर जगह घेर रहा है। निकिता हत्याकांड उसकी एक नई दिल दहलाने वाली कहानी है। हरियाणा के फरीदाबाद के वल्लभगढ़ में कॉमर्स की पढ़ाई कर रही लड़की निकिता तोमर की कहानी का प्रारंभिक फ्रेमवर्क भी अखिला ऊर्फ हादिया से मिलता-जुलता दिखाई पड़ता है। हादिया को प्रेमजाल में फांसने वाला शफीन जहां पीएफआई का नेता रहा था वहीं निकिता तोमर मामले में आरोपी राजनीतिक रसूख रखने वाले परिवार से जुड़ा बताया गया है। उसके दादा विधायक रह चुके हैं जबकि चाचा हरियाणा सरकार में मंत्री। मामले में फर्क केवल इतना है कि अखिला हादिया बनकर रहने को राजी हो गई तो उसके साथ पूरा प्रगतिशील जमात केरल से दिल्ली तक एकजुट हो गया जबकि निकिता ने कलमा पढऩे, मुस्लिम बनकर निकाह करने से इन्कार कर दिया तो उसके जीवन की सुरक्षा, पढ़ाई-लिखाई आदि की चिन्ता की परवाह न प्रशासन ने की और ना ही अदालत ने स्वत: कोई संज्ञान लिया, प्रगतिशील संगठनों ने तो भूलकर भी निकिता की ओर देखना गंवारा नहीं किया जबकि उसे मुसलमान बनाने के लिए तौसीफ और उसके दोस्तों की कोशिशों की जानकारी प्रशासन और तमाम सामाजिक संगठनों को 2018 में ही हो चुकी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी तौसीफ ने पहले हिन्दू नाम रखकर निकिता से दोस्ती की कोशिश की। उसने लगातार निकिता को टारगेट पर रखा, शुरुआत में निकिता इसे नहीं भांप पाई, और तौफीस अंकित बनकर उसे प्रेमजाल में फांसने में जुटा रहा। इसी सिलसिले में साल 2018 में तौसीफ ने निकिता को अगवा भी कर लिया और उस पर मुस्लिम बनकर निकाह के लिए दबाव भी बनाया था। मामला उस समय पुलिस में पहुंच गया था और तौसीफ के परिवार वालों के माफीनामे के बाद केस खत्म हुआ। तब निकिता के परिवार वालों ने समझा कि खतरा खत्म हो गया लेकिन क्या पता था कि दो साल में ही परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ेगा। निकिता के पिता मूलचंद तोमर का कहना है कि निकिता को मुसलमान बनाने की साजिश रची गई थी, चूंकि निकिता तौसीफ की असलियत जान गई, इसलिए उसने शुरु से ही उससे दूरी बना ली लेकिन तौसीफ अपने रसूखदार राजनीतिक पृष्ठभूमि और दोस्तों के समर्थन के साथ ‘लव-टारगेट’ पर जुटा रहा। जब उसे निकिता को मुस्लिम बना पाने में नाकामी हाथ लगी तो उसने निकिता का मर्डर कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, 26 अक्टूबर को वल्लभगढ़ में कॉलेज से परीक्षा देकर घर लौट रही बी.कॉम फाइनल ईयर की छात्रा निकिता तोमर (20 वर्षीय) को पहले कार से तौसीफ और उसके दोस्त रेहान ने अगवा करने की कोशिश की लेकिन सफलता न मिलने पर उसे दिनदहाड़े गोली मार दी गई। लहूलुहान हालत में छात्रा को पास के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हत्या के बाद आरोपी भागने में उस वक्त सफल रहे। हत्या की यह वारदात घटनास्थल के पास लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गई। घटना का वीडियो खूब वायरल भी हुआ। वायरल वीडियो के अनुसार, दो लड़के छात्रा को जबरन कार में खींचने की कोशिश करते दिख रहे हैं, लेकिन जब वह कामयाब नहीं हो पाए तो उन्होंने पिस्तौल निकालकर छात्रा को गोली मार दी।

दिल दहलाने वाले इस संगीन हत्याकांड को लेकर लोगों में उबाल आ गया। यूपी में ‘विकास दूबे एनकाउंटर’ की तर्ज पर हाथों हाथ निकिता को इंसाफ देने की मांग तेज हो गई। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया तो हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि सरकार ‘लव जिहाद’, जबरन धर्म परिवर्तन और अन्य दृष्टिकोण से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराएगी। विज ने इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव को बुधवार को निर्देश दिए। पुलिस ने मामले मे एक अन्य आरोपी अजहरुद्दीन को नूंह जिले से गिरफ्तार किया जिसने हत्याकांड को अंजाम देने के लिए तौसीफ को पिस्तौल मुहैया कराई और उसके साथ टारगेट को अंजाम तक पुहंचाने में शुरू से जुटा रहा।

जाहिर तौर पर निकिता तोमर हत्याकांड ने केरल से कश्मीर और असम से राजस्थान समेत उत्तर-दक्षिण के पूरे भारत में तथाकथित लव-जिहाद के संगठित प्रयत्नों से जुड़े तमाम सवालों को एक बार से बीच बहस ला खड़ा किया है। पाकिस्तान और बंग्लादेश में दिन-दहाड़े गैर-मुस्लिम युवतियों को अगवा करने, उन्हें जबरिया मुस्लिम बनाकर निकाह पढऩे की जो खबरें आए दिन बीते दशकों से दुनिया भर में पढ़ी जा रही थीं, अचानक वह खबरें अब पूरे भारत के प्रत्येक प्रांत में प्रतिदिन छपने लगी हैं। ज्यादातर में प्यार का मुलम्मा चढ़ाए मामले बताकर हिन्दू लड़कियों को अपना धर्म छोड़कर मुस्लिम बन जाने पर कोई सवाल नहीं है। किन्तु वहां सवाल उठने लाजिमी हैं कि जहां तौसीफ जैसे युवक अपनी मुस्लिम पहचान को छिपाकर गैर-मुस्लिम हिन्दू लड़की से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करते नजर आते हैं। और ज्यादातर मामलों में पुलिस भी यह देखकर हैरान है कि मुस्लिम युवक न केवल नाम बदलकर प्रेमजाल बिछा रहे हैं बल्कि उनमें से कई तो हिन्दू प्रतीक भी धारण करते हैं, कलावा पहनने, तिलक लगाने, हिन्दू त्योहार मनाने और मंदिर जाने समेत सभी रस्मों को तब तक निभाते हैं जबतक कि लड़की प्रेमजाल में पूरे तरह से फंस नहीं जाती है।

शुरूआती दौर में वामपंथी सरकार वाली केरल पुलिस भी लव-जिहाद के शिकायत से जुड़े मामले में संगठित गिरोह की मिलीभगत को सिरे से खारिज नहीं कर सकी थी। हालांकि बाद में केरल पुलिस के मुखिया ने इसे स्लोगन को खारिज करते हुए इसे किसी प्रकार का खतरा मानने से इन्कार किया और कोर्ट ने भी यही बात कही। पर सवाल उस समाज का है जिसके दिलोदिमाग पर निकिता तोमर हत्याकांड का असर कहीं गहरा पड़ता दिख रहा है। क्या वह किसी के इस बयान को मानने के लिए आसानी से तैयार होगा कि ये केवल आशिकी और दीवानगी के जुनून में की गई हत्या है, इसका मुसलमान बनाने की किसी बात से कोई लेना-देना नहीं है।

 

डॉ. राकेश उपाध्याय

 

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