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द्वेष और छल भरा ‘प्यार’

द्वेष और छल भरा ‘प्यार’

हरियाणा के बल्लभगढ़ में हुईं निकिता तोमर की सरेआम हत्या ने देश भर में एक नई बहस को जन्म दे दिया हैं। और अब लोग पीडि़ता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं। हिंदू संगठन इस घटना में एक बड़ी साजिश को देखते हैं, जिनका कहना है कि एक खास धर्म के युवा दूसरे धर्मों की लड़कियों से प्यार करने का ढोंगकर, उसे शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन करने को कहते हैं। यदि लड़की धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर देती हैं तो या तो उसे मार देते हैं, या उसके चेहरे पर एसिड फेंक देते हैं। और इसे लव-जिहाद का नाम दिया गया हैं। हिंदू संगठनों ने निकिता के हत्या की शीघ्रता से जांचकर इनमे लिप्त लोगों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग की हैं। बिल्कुल, निकिता की हत्या ने पूरे देशभर में इस सुनियोजित तरीके से लव-जिहाद को बढ़ावा देने वाले गैंग, जो पूरब-पश्चिम,  उत्तर-दक्षिण भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी तथा असम से राजस्थान तक फैला है, के ऊपर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। मुस्लिम बहुल पाकिस्तान और बांग्लादेश में हम अल्पसंख्यक समुदाय की औरतों का दिन में अपहरण कर जबरदस्ती निकाह एवं इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं को सुनते रहे हैं और यह अब  भारत में भी सुनने और पढऩे को मिल रहा हैं। इस लव-जिहाद की घटनाएं अब खुलकर सामने आने लगी हैं, लेकिन अभी तक इस सम्बंध में कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया हैं। जो लव-जिहाद की इस घटना को दो वयस्कों के बीच का मामला बताकर टाल देते हैं,  वे पक्षपाती हैं। दरअसल, यह मामला दो व्यक्तियों की आपसी सहमति से लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि यह जालसाजी, दुर्भावना और जबरदस्ती का मामला है। निश्चित रूप से यह केवल दो वयस्क के बीच का मामला नहीं हैं। यह मामला एक निर्दोष लड़की का हैं, जो इस बड़े षड्यंत्र से अनिभिज्ञ हैं।

जबरन किसी व्यक्ति को इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराने, विश्वासघात कर लव-जिहाद करने की यह परम्परा भारत की स्वतंत्रता के पश्चात खाड़ी देशों से आने वाले धन का प्रयोगकर आरम्भ किया गया। मासूम लड़कियों का मुस्लिम युवकों द्वारा दबाव बनाकर इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराया जाता हैं। लड़की से अपने परिवार को मुस्लिम युवक से संबंध बनाने की बात को कहलवाया जाता हैं। उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए वीडियो बनाए जाते हैं। उनमें से कई लडि़कयां अपने समुदाय, अपने परिवार की इज्जत बचाने के लिए इस षड्यंत्र का शिकार बन जाती हैं। साफ शब्दों में कहे तो कट्टर इस्लामवादी अपने कट्टर विचार को श्रेष्ठ साबित करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। लव-जिहाद की घटना आरम्भ में गरीब लड़कियों के साथ हुईं, जो इनकी चालों में फंस गई। एक बार इनकी चाल में फंसने के बाद इनके मस्तिष्क को भ्रमित किया और उन्हें धर्म परिवर्तित कर कट्टर जिहादियों के बच्चों को गोद में उठाने के लिए छोड़ दिया गया। ये लव-जिहाद एक खास जनसंख्या बढ़ाने के षड्यंत्र के रूप मे भी देखा जाना चाहिए। किसी भी धर्मनिरपेक्ष प्रवचन से यह दूर नहीं हो सकता। अभी तक तो हिंदू महिलाओं को ही लव-जिहाद का  शिकार बनाया जाता रहा हैं, लेकिन केरल में अब कुछ नए प्रकार के मामले देखने को मिल रहे है, जहां शादीशुदा महिलाएं अपने पति और बच्चों को छोड़ रही हैं। देखा जाए तो असल में यह लव-जिहाद जनसंख्या में बदलाव कर कट्टरपंथियों द्वारा इस्लामिक दुनिया की श्रेष्ठता साबित करना है। इस सुनियोजित षड्यंत्र से कई महिलाओं के जीवन को नष्ट कर दिया गया हैं। अत: यदि सरकार इसकी रोकथाम के लिए जब तक कोई सख्त कानून नहीं बनती तब तक देश की संप्रभुता और अखंडता के ऊपर प्रश्न-चिन्ह बढ़ता ही जाएगा।

 

Deepak Kumar Rath

  दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

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