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गंगे च यमुने…. कावेरि तीर्थऽस्मिन्सन्निधिं कुरु

गंगे च यमुने…. कावेरि तीर्थऽस्मिन्सन्निधिं कुरु

नित्यकर्म में प्रतिदिन करने योग्य बहुत से कार्य हैं, लेकिन उन सभी कार्यों में स्नान महत्वपूर्ण है। स्नान करने से जहां शरीर स्वच्छ और सुंदर रहता है, वहीं मन प्रफुल्लित रहता है। स्नान एक दैनिक क्रिया है, लेकिन शास्त्रों में इसके अनेक फायदे बताए गए हैं। प्रतिदिन स्नान स्वस्थ्य और सुंदर शरीर के लिए बहुत जरूरी है। जो लोग रोज नहाते हैं उन्हें स्वास्थ्य की दृष्टि से कई लाभ प्राप्त होते हैं। स्नान से जहां थकान और तनाव घटता है, वहीं मन प्रसन्न और शरीर भी ऊर्जावान रहता है। हमारे शास्त्रों और आयुर्वेद में नित्य स्नान के बहुत से फायदे बताए गए हैं। यदि हम सूर्योदय के समय या उससे पहले स्नान करते हैं तो यह धर्म की नजरिए से बहुत शुभ होता है। पुराने समय में विद्वान और ऋषि-मुनि सूर्योदय से पूर्व या ठीक सूर्योदय के समय स्नान करते थे। इस प्रकार की गई दिन की शुरुआत से पूरे दिन कार्यों में सफलता और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

नित्य सूर्योदय से पूर्व तारों की छांव में स्नान करने से नि:संदेह ही मां लक्ष्मी की कृपा, तेज बुद्धि प्राप्त होती है। इस समय स्नान करने से अनेकों परेशानियों और ग्रहों के दुष्प्रभाव से भी मुक्ति मिलती है। स्नान करते समय सदैव निम्न मंत्र का जप करें ऐसा करने से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है।

गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती।

नर्मदे सिन्धु कावेरी तीर्थऽस्मिन्सन्निधिम कुरु।।

शास्त्रों में समय अनुसार स्नान के कई प्रकार और नहाने की एक विशेष विधि भी बताई गई है। यदि मनुष्य इस विधि से सही समय पर स्नान करें तो चमत्कारिक रूप से शुभ फलों की प्राप्ति होती है।

ब्रह्म स्नान

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का विशेष महत्व है। ब्रह्म मुहूर्त में अर्थात सुबह-सुबह लगभग 4-5 बजे जो स्नान भगवान का मनन चिंतन करते हुए, विभिन्न मन्त्रों का जाप करते हुए किया जाता है, उसे ब्रह्म स्नान कहते हैं। माना जाता है कि इस समय जल में सारे देवता वा तीर्थ वास करते हैं। इसलिए इस समय स्नान करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है। ऐसा स्नान करने वाले व्यक्ति को ईश्वर की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के सभी संकट दूर रहते हैं।

ऋषि स्नान

यदि कोई व्यक्ति सुबह-सुबह, जब आकाश में तारे दिखाई दे रहे हों और उस समय ईश्वर का ध्यान करते हुए स्नान करे तो उस स्नान को ऋषि स्नान कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय से पूर्व किए जाने वाले सभी स्नान श्रेष्ठ होते हैं।

देव स्नान

वर्तमान समय में अधिकतर लोग सूर्योदय के बाद ही स्नान करते हैं। जो लोग सूर्योदय के तुरंत बाद किसी नदी में या घर पर ही विभिन्न नदियों के नामों का, विभिन्न मंत्रों का जप करते हुए स्नान करते हैं तो उस स्नान को देव स्नान कहते हैं। ऐसे स्नान से निश्चित ही व्यक्ति के जीवन में आने वाली सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं।

दानव स्नान

आज के युग में बहुत से लोग सूर्योदय के बाद चाय-नाश्ता करके खा-पीकर स्नान करते हैं, ऐसे स्नान को दानव स्नान कहते हैं। ऐसे स्नान करने वाले व्यक्तियों को जीवन में बहुत सारी अस्थिरताओं का सामना करना पड़ता है। उनकी जिंदगी में बहुत परेशानियां और तनाव रहता है। शास्त्रों के अनुसार हमें ब्रह्म स्नान, देव स्नान या ऋषि स्नान ही करना चाहिए। यह स्नान ही सर्वश्रेष्ठ स्नान माने जाते हैं।

ध्यान रखने योग्य बात ये है कि शाम या रात के समय स्नान नहीं करना चाहिए। इससे दरिद्रता आती है, लेकिन यदि सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण का दिन हो तो उस स्थिति में रात के समय स्नान किया जा सकता है।

स्नान करते समय सर्वप्रथम सिर पर पानी डालना चाहिए, बाद में पूरे शरीर पर। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। ऐसे स्नान करने से सिर और शरीर की गर्मी पैरों के माध्यम से निकल जाती है। नहाने के तुरंत बाद प्रतिदिन सूर्य को जल अवश्य ही अर्पित करना चाहिए। सूर्य देव को नित्य जल चढ़ाने से व्यक्ति को मान-सम्मान, सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। सूर्य देव को जल चढ़ाते हुए पानी के बीच से भगवान सूर्य को देखना चाहिए इससे हमारी आंखों की रौशनी बढ़ती है। सूर्य की किरणों में विटामिन डी के भी कई गुण होते हैं, इससे व्यक्ति की त्वचा में भी एक आकर्षक चमक आती है।

उदय इंडिया ब्यूरो

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