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कुदाल-फावड़ा तो चलाएंगे नहीं

कुदाल-फावड़ा तो चलाएंगे नहीं

मंत्रीजी के दरबार की गपशप सुनिए। महफिल जमी थी और पीएम के वफादार मंत्री के आगे उन्हीं का सेवक साल भर के काम-काज का रोना रो रहा था। सेवक ने जैसे ही कहा कि इससे भली तो मनमोहनी सरकार थी, नेताजी भड़क गए। लगे समझाने, मोदीजी जैसा पीएम न तो हुआ है और न होगा। पीएम हैं, अब कोई कुदाल-फावड़ा थोड़े ही चलाएंगे। उन्होंने एक मॉडल रख दिया है। लोगों को काम करना चाहिए। स्वच्छ भारत अभियान की बात की है तो उसका मतलब यह तो नहीं कि वह सबके घर में जाकर झाड़ूपोछा लगाएं। यहां तो मंत्रीमंडल में भी जिसको देखो, पीएम ही बनने की पड़ी है।

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