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शहद के फायदे

शहद के फायदे

शहद स्वाद में काफी मीठा होता है। मिठास के लिए शहद का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन सेहत को स्वस्थ बनाए रखने के लिहाज से भी शहद काफी उपयोगी साबित होता है। शहद में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं जिससे शरीर में कई जरूरी तत्वों की पूर्ति की जा सकती है। कई बीमारियों में शहद दवा की तरह भी काम करता है। शहद के सेवन से आंखों की रोशनी बढ़ाई जा सकती है तो वहीं कफ, अस्थमा और हाईब्लडप्रेशर की समस्या से भी छुटकारा पाया जा सकता है।

शहद शरीर पर अलग-अलग तरह से असर डालता है, जो इस पर निर्भर करता है कि आप उसका सेवन कैसे करते हैं। अगर शहद को गुनगुने पानी में मिलाकर पिया जाए तो उसका खून में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) की संख्या पर लाभदायक असर पड़ता है। लाल रक्त कोशिकाएं मुख्य रूप से शरीर के विभिन्न अंगों तक खून में ऑक्सीजन पहुंचाती हैं। शहद और गुनगुने पानी का मिश्रण खून में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाता है, जिससे एनीमिया या खून की कमी की स्थिति में लाभ होता है। आयरन की कमी यानी एनीमिया की स्थिति तब आती है जब आहार में लौह तत्व को कम मात्रा में ग्रहण किया जाता है या शरीर उसे पर्याप्त रूप से सोख नहीं पाता। इससे रक्त की ऑक्सीजन ढोने की क्षमता प्रभावित होती है। ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता कम होने से थकान, सांस फूलना और कई बार उदासी और दूसरी समस्याएं होती हैं। शहद रक्त की ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को बढ़ाते हुए इन समस्याओं को कम कर सकता है।

शहद का नियमित सेवन सर्कुलेटरी सिस्टम और रक्त की केमिस्ट्री में संतुलन को पाने में न सिर्फ आपकी मदद करता है, बल्कि आपको ऊर्जावान और फुर्तीला भी बनाए रखता है। अगर आपको निम्न रक्तचाप की शिकायत है और अगर आप नीचे बैठे-बैठे अचानक उठने की कोशिश करते हैं तो आपको चक्कर आ जाते हैं। निम्न रक्तचाप का मतलब दिमाग में ऑक्सीजन का कम मात्रा में पहुंचना है। इसी तरह से अगर आप अपना सिर नीचे करते हैं और आपको चक्कर आते हैं तो इसका मतलब है कि आपको उच्च रक्तचाप की समस्या है। या तो उच्च रक्तचाप की वजह से या फिर ऑक्सीजन की कमी की वजह से आपको चक्कर आते हैं। शहद का सेवन हमारे शरीर के इन असंतुलनों को दूर करता है।

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दिनभर के काम के लिए शरीर को काफी ऊर्जा चाहिए होती है लेकिन भागदौड़ भरी इस जिंदगी में तनाव काफी बढ़ जाता है और ऊर्जा का स्तर गिर जाता है। ऐसे में शहद की मदद से शरीर को ऊर्जावान बनाया जा सकता है। नियमित रूप से एक बड़े चम्मच शहद का सेवन करने से शरीर को ऊर्जा मुहैया करवाई जा सकती है।

शरीर की मांसपेशियां जितनी मजबूत होंगी, शरीर उतनी फर्ती से ही मुश्किल काम कर पाएगा। ऐसे में शरीर की मांसपेशियां मजबूत करने के लिए शहद का सेवन करना काफी लाभ पहुंचा सकता है। चमकदार त्वचा के लिए भी शहद का सेवन काफी मददगार साबित हो सकता है। त्वचा का रंग साफ करने और इसमें निखार लाने के लिए ठंडे पानी में शहद मिलाकर रोजाना पीना चाहिए।

जिन लोगों को रात में नींद की समस्या होती है, उनके शरीर में स्लीपिंग हार्मोन बड़ी कम मात्रा में बनता है। ऐसे लोगों के लिए रात में शहद का सेवन करना काफी लाभदायक साबित होगा क्योंकि शहद का सेवन करने से स्लीपिंग हार्मोन में बढ़ोत्तरी होती है। इस कारण रात में जो लोग शहद का सेवन करेंगे उन्हें बढिय़ा नींद आ सकती है। अनिद्रा की समस्या से बचने के लिए आप इसे दूध के साथ भी पी सकते हैं।

सिर दर्द की समस्या किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है। जो लोग स्ट्रेस लेते हैं और जिन पर काम का दबाव ज्यादा रहता है वह लोग सिरदर्द की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। कुछ लोगों को रात के समय भी सिरदर्द की समस्या बहुत ज्यादा परेशान करती है। वहीं, नेशनल सेंटर फॉर बायो टेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन के अध्ययन के अनुसार, इस बात की पुष्टि की गई कि शहद का सेवन करने वाले लोग सिरदर्द की समस्या से काफी हद तक राहत महसूस कर सकते हैं।

पूरे दिन काम करने के बाद सभी लोगों की शरीर को थकावट महसूस होती है। यह थकावट काफी लंबे समय तक बनी रहे तो शरीर की मांसपेशियों में खिंचाव भी होने लगता है। जबकि शहद का सेवन करने से थकान को मिटाने में काफी मदद मिल सकती है। शरीर की थकान को दूर करने के लिए रात को सोने से पहले आप एक गिलास दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर पी सकते हैं। इसका आपको सकारात्मक फायदा खुद ही महसूस होगा।

शहद का सेवन लाभदायक एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की संख्या को बढ़ाता है, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है और हानिकारक सूक्ष्मजीवों से लड़ता है। कई अध्ययनों में जख्मों की चिकित्सा में भी शहद के इस्तेमाल पर विचार किया गया है। एक अध्ययन में एक उपचारात्मक शहद का इस्तेमाल किया गया जो एक खास शुद्धिकरण प्रक्रिया से गुजरा था। इस अध्ययन में भाग लेने वाले सभी लोगों के जख्मों से सारा बैक्टीरिया नष्ट हो गया। एक और अध्ययन में असंसाधित (अनप्रोसेस्ड) शहद के इस्तेमाल से 59 मरीजों के जख्म और पैर के अल्सर ठीक हो गए। इन मरीजों में से 80 फीसदी पर पारंपरिक उपचार का कोई असर नहीं हुआ था। एक मरीज को छोडक़र बाकी सभी के जख्मों में सुधार हुआ। साथ ही शहद लगाने के एक सप्ताह के भीतर संक्रमित जख्म जीवाणुरहित हो गए। पारंपरिक चिकित्सा में, शहद के एक लाभ में श्वास संबंधी संक्रमणों का उपचार शामिल है।

उदय इंडिया ब्यूरो

 

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