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चला गया फुटबॉल का जादूगर मैराडोना

चला गया फुटबॉल का जादूगर मैराडोना

अर्जेंटिना के दिग्गज फुटबॉलर डिएगो माराडोना का दिल का दौरा पडऩे से 60 साल की उम्र में निधन हो गया। इसी महीने की शुरुआत में दिमाग में क्लॉटिंग के चलते उनका ऑपरेशन हुआ था। यह ऑपरेशन सफल रहा था। उनके निधन से दुनिया भर में फैले उनके करोड़ों चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गयी है।

विश्व कप 1986 में इंग्लैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में ‘खुदा का हाथ’ वाले गोल के कारण फुटबॉल की किवदंतियों में अपना नाम शुमार कराने वाले माराडोना दो दशक से लंबे अपने कैरियर में फुटबालप्रेमियों के नूरे नजर रहे। माराडोना ने बरसों बाद स्वीकार किया था कि उन्होंने जान बूझकर गेंद को हाथ लगाया था। उसी मैच में चार मिनट बाद हालांकि उन्होंने ऐसा शानदार गोल दागा था जिसे फीफा ने विश्व कप के इतिहास का महानतम गोल करार दिया।

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अर्जेंटीना ने उस जीत को 1982 के युद्ध में ब्रिटेन के हाथों मिली हार का बदला करार दिया था। माराडोना ने 2000 में आई अपनी आत्मकथा ‘आई एम डिएगो’ में लिखा था, ‘वह मैच जीतने की कोशिश से बढक़र कुछ था। हमने कहा था कि इस मैच का जंग से कोई सरोकार नहीं है लेकिन हमें पता था कि वहां अर्जेंटीनाइयों ने अपनी जानें गंवाई थी। यह हमारा बदला था। हम अपने देश के लिए खेल रहे थे और यह हमसे बड़ा कुछ था।’

अर्जेंटीना से खेलते हुए मैराडोना ने इंटरनेशनल करियर में 91 मैच खेले, जिसमें उन्होंने 34 गोल किए। उन्होंने 4 फीफा वल्र्ड कप टूर्नामेंट खेले, जिसमें 1986 का विश्व कप शामिल था। 1986 वल्र्ड कप में वे अर्जेंटीना के कैप्टन भी थे। वे टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित किए गए थे। उन्हें गोल्डन बॉल अवॉर्ड जीता था।

अपने क्लब करियर में मारोडना बार्सिलोना और नैपोली के लिए खेले और दो सीरीए खिताब भी अपने क्लब को दिलाए, तो वहीं माराडोनाने अर्जेंटीना के लिए 91 मैचों में 34 गोल गिए और चार विश्व कप में देश का प्रतिनिधित्व किया और कई ऐसे बेहतरीन प्रदर्शन और सर्वकालिक बेहतरीन गोल किए, जिनकी मिसाल हमेशा आनी वाली पीढ़ी को दी जाएगी। कई ऐसे गोल रहे, जिन्हें देखकर दुनिया भर ने दांत तले उंगली दबा ली।  माराडोना ने साल 1990 में विश्व कप फाइनल में भी अर्जेंटीना का नेतृत्व किया, जहां उनके देश को पश्चिम जर्मनी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था, तो साल 1994 में फिर से अमरीका में भी अर्जेंटीना की कप्तानी की, लेकिन ड्रग टेस्ट में फेल होने के बाद उन्हें वापस घर लौटना पड़ा था।

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मैराडोना को फीफा प्लेयर ऑफ द सेंचुरी से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने एक बार वल्र्ड कप गोल्डन बॉल, एक बार बेलोन डी ओर, 2 बार साउथ अमेरिकन फुटबॉलर ऑफ द ईयर, 6 बार नेशनल लीग टॉप स्कोरर अवॉर्ड जीता है।

अपने करियर को दूसरे हॉफ में मारोडोना को कोकीन की लत के साथ खासा संघर्ष करना पड़ा और साल 1991 में उन्हें इसका सेवन का दोषी पाए जाने के बाद माराडोना पर 15 साल का प्रतिबंध लगा दिया गया था। मारोडना ने साल 1997 में पेशेवर फुटबॉल को 37 साल की उम्र में अलविदा कह दिया था। साल 2008 में इस दिग्गज खिलाड़ी को राष्ट्रीय टीम का हेड कोच नियुक्त किया गया। साल 2010 विश्व कप के बाद मारोडना ने यह पद छोड़ दिया था, जब अर्जेंटीना को क्वार्टरफाइनल में जर्मनी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसे बाद मारोडोना संयुक्त अरब अमीरात और मेक्सिको टीम के कोच रहे।

फुटबॉल से रिटायरमेंट के बाद मैराडोना कई बार हॉस्पिटल में भर्ती हो चुके थे। साल 2000 में उन्होंने इतनी ज्यादा कोकीन ले ली थी कि उनका हार्ट फेल हो सकता था और उनकी जान जा सकती थी। इसके बाद कई साल तक रिहैबिलिटेशन में रहे थे। 2005 में उनका वेट लॉस के लिए ऑपरेशन हुआ था। इसके बाद 2007 में भी उन्हें ज्यादा शराब पीने की वजह से अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। पिछले फुटबॉल वल्र्ड कप में भी उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। इस वल्र्ड कप में उन्हें एग्जीक्यूटिव बॉक्स में देखा गया था। इसी दौरान अर्जेंटीना ने नाइजीरिया को हराया था।

(उदय इंडिया ब्यूरो)

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