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लव-जिहाद और भारत

लव-जिहाद और भारत

लव जिहाद का मुद्दा चर्चा में बना ही रहता है क्योंकि यह किसी राज्य, क्षेत्र या देश का मामला नहीं है बल्कि यह एक विश्वव्यापी मुद्दा है। जहां पर भी मुस्लिम समाज अल्पसंख्यक है वहां की बहुसंख्यक आबादी अक्सर यह आरोप लगाती रहती है कि मुस्लिम युवक हमारी बेटियों को बहकाकर विवाह कर लेते हैं, फिर उनका धर्मपरिवर्तन करके उन्हें अपने धर्म में शामिल कर लेते हैं। जहां मुस्लिम बहुसंख्यक है वहां लव-जिहाद के मुद्दे को उठाने की हिम्मत कोई कर ही नहीं सकता इसलिये यह मुद्दा मुस्लिम अल्पसंख्यक आबादी वाले देशों का ही है।

बर्मा की वर्तमान रोहिंग्या समस्या के पीछे भी लव-जिहाद की महत्वपूर्ण भूमिका है। बौद्ध नेता अशीन विराथू का आरोप है कि मुस्लिम युवक उनकी लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फंसाकर शादियां कर लेते हैं और ज्यादा बच्चे पैदा करके आबादी बढ़ाकर जनसंख्या संतुलन बिगाड़ रहे हैं। बौद्ध समाज को सारी दुनिया में सबसे अहिंसक और शान्त स्वभाव का माना जाता है लेकिन यही समाज बर्मा में विराथू के नेतृत्व में रोहिंग्याओं के खिलाफ हिंसक हमले कर रहा है। यूरोप में भी कट्टरवादी ईसाई संगठन मुस्लिमों पर कुछ ऐसा ही आरोप लगा रहे हैं। लव-जिहाद सिर्फ भारत में प्रचलित शब्द नहीं है। यह किसी न किसी रूप में सारी दुनिया में देखने को मिल रहा है।

देखा जाये तो लव-जिहाद अपने आप में सही शब्द नहीं है क्योंकि जहां जिहाद होता है वहां लव के लिये कोई जगह नहीं होती और जहां लव होता है वहां जिहाद की कोई जरूरत ही नहीं है। इस्लामिक धारणा के अनुसार जिहाद पवित्र शब्द हो सकता है लेकिन वर्तमान में जिहाद का मतलब मासूम और निर्दोष महिलाओं, पुरूषों और बच्चों का शोषण-उत्पीडऩ तथा बर्बर हत्याएं करना ही है। दुनिया भर में इस्लाम फैलाने के लिये दनदनाते घूम रहे आतंकवादी मासूम लोगों की हत्याएं जिहाद के नाम पर ही कर रहे हैं।

इसी जिहाद का एक हिस्सा है लव-जिहाद। भारत में इसे हिंदू संगठनों का बेमतलब का हो हल्ला करार दिया जाता है जबकि सच यह है कि इससे कहीं पहले यूरोप में लड़कियों ने यह मामला उठाया है कि उन्हें गलत तरीके से फंसाकर शादियां की गई हैं और उसके बाद उनका जबरन धर्म-परिवर्तन किया गया है। अक्सर इसे हल्के में लिया जाता है और कहा जाता है कि ये कोरी बकवास है जबकि मेरा मानना है कि सच से आंखें चुराने से सच झूठ नहीं हो जाता है। लव-जिहाद एक ऐसा सच है जिससे इन्कार करना मूर्खता ही होगी लेकिन यह भी एक सच है कि हिंदू-मुस्लिम युवक और युवतियों के बीच होने वाले सारे प्रेम-विवाहों को लव-जिहाद का नाम नहीं दिया जा सकता। एक सच यह भी है कि कौन सा प्रेम विवाह लव-जिहाद नहीं है, इसकी पहचान करना भी मुश्किल है।

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वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार प्रभासाक्षी पर अपने कॉलम में बताते हैं की ‘दरअसल, लव जिहाद या रोमियो जिहाद, मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू समुदाय से जुड़ी महिलाओं को इस्लाम में परिवर्तन के लिए प्रेम का स्वांग रचाना है। यह हिंदू समाज की जनसंख्या को कम करने के लिए शुरू किया गया एक जिहाद है। जिसका समर्थन इस्लाम करता है एवं कुरान अपनी कई आयतों में इसका वर्णन करती है। अर्थात् ये अमानवीय व्यवहार मुस्लिम पुरुष द्वारा हिन्दू धर्म की महिला के साथ प्रेम का ढोंग रचकर जबरन धर्म परिवर्तन कराने की प्रक्रिया होती है। अभी हाल ही में बल्लभगढ़ में हुआ निकिता तोमर हत्याकाण्ड इसका ताजा मामला है। इसमें निकिता तोमर का दो वर्ष पहले 2018 में अपहरण भी हुआ था किंतु पुलिस द्वारा सख्त कार्यवाही न किए जाने से एवं परिवार द्वारा ढुलमुल रवैया अपनाने से निकिता तोमर की हत्या हो गयी। यह अवधारणा 2009 में भारत में राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार केरल और उसके बाद कर्नाटक में राष्ट्रीय ध्यानाकर्षण की ओर बढ़ी।

बहरहाल, लव-जिहाद शब्द भारत के सन्दर्भ में प्रयोग किया जाता है किन्तु कथित रूप से इसी तरह की गतिविधियां अन्य देशों में भी होती हैं। केरल हाईकोर्ट के द्वारा दिए एक फैसले में लव जेहाद को सत्य पाया है। 02 नवंबर 2009 में पुलिस महानिदेशक जैकब पुन्नोज ने कहा था कि कोई भी ऐसा संगठन नहीं है जिसके सदस्य केरल में लड़कियों को मुस्लिम बनाने के इरादे से प्यार करते थे। दिसंबर 2009 में न्यायमूर्ति के.टी. शंकरन ने पुन्नोज की रिपोर्ट को स्वीकार करने से इंकार कर दिया और निष्कर्ष निकाला कि जबरदस्ती धर्मांतरण के संकेत हैं। अदालत ने ‘लव जिहाद’ मामलों में दो अभियुक्तों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में इस तरह के 3,000-4,000 सामने आये थे।

कर्नाटक सरकार ने 2010 में कहा था कि हालांकि कई महिलाओं ने इस्लाम में धर्म परिवर्तन किया है लेकिन ऐसा करने के लिए उन्हें मनाने का कोई संगठित प्रयास नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने सितंबर 2014 में लव-जिहाद के छह मामलों में से पांच में से धर्म परिवर्तन के प्रयास का कोई सबूत नहीं पाया।’

देशभर में इस मुद्दे को लेकर राजनीति बढ़ती ही जा रही है। कुछ हिंदू संगठन इस पर मरने-मारने पर उतारूं हैं। अब इस मुद्दे पर कानून बनाने की बात की जा रही है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा है कि ‘शादी-ब्याह के लिए धर्म-परिवर्तन आवश्यक नहीं है, नहीं किया जाना चाहिए और इसको मान्यता नहीं मिलनी चाहिए। सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव-जिहाद को रोकने के लिए सख्ती से कार्य करेंगे। एक प्रभावी कानून बनाएंगे।’

देश के अन्य राज्य भी लव-जिहाद के मसले पह कानून बनाने की बात की लगातार कहते आ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली से सटे हरियाणा में एक लडक़ी की गोली मार कर हत्या के बाद इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि महज शादी के लिए धर्म परिवर्तन वैध नहीं है। जस्टिस एससी त्रिपाठी ने प्रियांशी उर्फ समरीन व अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नूरजहां बेगम केस के फैसले का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने कहा है कि शादी के लिए धर्म बदलना स्वीकार्य नहीं है।

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क्या कहता है कानून!

हालांकि ‘लव-जिहाद’ शब्द की कोई कानूनी हैसियत नहीं है। इसे ना ही अबतक किसी कानून के तहत परिभाषित किया गया है और न ही केंद्र या राज्य की किसी एजेंसी ने किसी कानूनी धारा के तहत इस मामले में कोई केस दर्ज किया है। यहां तक की गृह मंत्रालय भी कहता है कि जबरन अंतरजातीय विवाह को ‘लव-जिहाद’ कहा जा रहा है।

लव-जिहाद के ज्यादातर केसों में यौन शोषण संबंधी कानूनों के तहत मुकदमे चलते रहे हैं। आरोपी को पेडोफाइल मानकर पॉक्सो और बाल विवाह संबंधी कानूनों के तहत भी केस चलते रहे हैं। इसके अलावा, बलपूर्वक शादियों के मामले में कोर्ट आईपीसी के सेक्शन 366 के तहत सजा दे सकते हैं। महिला की सहमति के बगैर यौन संबंध बनाने का आरोप साबित होने पर 10 साल तक की कैद की सजा हो सकती है।

ऐसे मामलों में कानूनी पेंच यहां फंसता रहा है कि मुस्लिम शादियां शरीयत कानून और हिंदू शादियां हिंदू मैरिज एक्ट के तहत कानूनन होती हैं। चूंकि मुस्लिम शादियों में सहमति दोतरफा अनिवार्य है इसलिए इन शादियों में अगर यह साबित हो जाता है कि सहमति से ही शादी हुई थी, तो कई मामले सिरे से खारिज होने की नौबत तक आ जाती है।

अन्त में यही कहा जा सकता है कि लव-जिहाद के बेहद कम मामले हैं लेकिन फिर भी यह चिन्ता का विषय है क्योंकि चाहे कितने ही कम मामले क्यों न हो लेकिन इनसे दोनों समुदायों के बीच नफरत की दीवार खड़ी हो रही है। मुस्लिम समाज को आगे आकर ऐसे मामलों का विरोध करना चाहिये और ऐसे मुस्लिम संगठनों की गतिविधियों के बारे में सरकार को सूचना उपलब्ध करवानी चाहिये। हिंदू मुस्लिम भाईचारे को चोट पहुंचाकर थोड़़े से लोगों का धर्म परिवर्तन कराना कोई उपलब्धि नहीं है। इस देश का भविष्य हिंदू-मुस्लिम समाज के प्रेम और विश्वास पर टिका हुआ है लेकिन कुछ लोग इसे सुनियोजित तरीके से चोट पहुंचा रहे हैं। उदारवादी और सही सोच के मुस्लिमों की चुप्पी के कारण सारे विश्व में इस्लाम बदनाम हो रहा है। आतंकवादी और कट्टरवादी मुस्लिमों के कारण आज पूरे विश्व में मुसलमानों को शक की नजर से देखा जा रहा है। यही समय है जब मुस्लिम समाज को गलत को गलत कहना सीखना होगा।

 

नीलाभ कृष्ण

 

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