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मुख्यमंत्री सोरेन की हैवानियत?

मुख्यमंत्री सोरेन की हैवानियत?

सात साल पुरानी एक घटना ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सांसत में डाल दिया है। मामला बेहद संगीन है। उन पर आरोप है कि 05 सितंबर 2013 की रात मुंबई के ‘ताज लैंड्स एंड होटल’ में उन्होंने एक लड़की का यौन उत्पीडऩ किया था। यहां ध्यान देने की बात यह है कि हेमंत सोरेन उस वक्त झारखंड के मुख्यमंत्री थे। इस घटना के महज कुछ दिनों पहले यानी 15 जुलाई 2013 को उन्होंने राज्य की कमान संभाली थी।

कहा जा रहा है कि सितंबर में अपने दोस्तों के साथ हेमंत सोरेन जश्न मनाने गए थे। उसी वक्त यह कांड हुआ। झारखंड की राजनीति में हंगामे की वजह बने इस कांड पर विवाद अब जाकर क्यों हुआ है? यह सवाल ज्यादा मौजूं हैं। इसकी वजह यह है कि इस मामले की जांच को लेकर पिछली 28 जुलाई को गोड्डा से भारतीय जनता पार्टी के सांसद निशिकांत दुबे ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख को टैग करते हुए एक ट्वीट किया था। जिसमें उन्होंने इस मामले के रफा-दफा किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच कराने की मांग की थी। इस ट्वीट के सामने आते ही राष्ट्रीय महिला आयोग भी कूद गया। उसने इस मामले में महाराष्ट्र सरकार को तलब कर लिया और जानकारी मांग ली।

दरअसल हुआ यह था कि मुंबई की उस लड़की के साथ कथित तौर पर पांच सितंबर को हुई रेप की इस घटना को साजिश के तहत अंजाम दिया गया। आरोप है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथी सुरेश नागरे की इसमें मिलीभगत थी। रेप का शिकार लड़की फिल्मों में काम करने का मंसूबा बांधे थी। ब्रेक की तलाश के वक्त उसका सुरेश नागरे से संपर्क हुआ। लड़की का बयान उदय इंडिया के पास है। लड़की के बयान के मुताबिक सुरेश नागरे ने पांच सितंबर 2013 की रात को उसे घटना वाले होटल के इक्कीसवीं मंजिल स्थित कमरे में बुलाया था, जहां हेमंत सोरेन ठहरे थे। लड़की के बयान के मुताबिक जब वह होटल के कमरे में पहुंची तो वहां तीन लोग थे। वहां नागरे ने हेमंत सोरेन से लड़की का परिचय कराया और बताया कि वे बेहद ताकतवर व्यक्ति हैं। उनके कहने से प्रोड्यूसर फिल्मों में लीड रोल दे सकते हैं। इसके बाद काम का बहाना बनाकर दो व्यक्ति कमरे से निकल गए। सबसे आखिर में नागरे ने पंद्रह मिनट में लौटने को कहकर बाहर निकल गया। लड़की के बयान के मुताबिक इसके बाद लड़की पर कथित तौर पर हेमंत सोरेन ने हमला किया और दुष्कर्म किया। लड़की के बयान के मुताबिक उसे करीब साढ़े तीन बजे तक होटल में कैद रहना पड़ा। इसके बाद एक और लड़की उस कमरे में आई और उसने पीडि़त लड़की को तत्काल वापस लौटने के साथ ही मुंह बंद रखने को कहा। पीडि़त लड़की के बयान के मुताबिक, उस लड़की ने कहा कि अगर उसने जुबान नहीं खोली तो उसकी जान जा सकती है।

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इस बीच सुरेश नागरे को उस लड़की ने कई बार फोन किया। लेकिन उसने उसका फोन उठाना बंद कर दिया। फिर इस घटना के एक महीने बाद सात अक्टूबर को नागरे का फोन लड़की के पास आया और उसने उसे हेमंत सोरेन से मिलने के लिए उसे झारखंड बुलाया। तब तक लड़की हिम्मत जुटा चुकी थी। उसे लगा कि उसके साथ फिर दोबारा ऐसा कांड हो सकता है। उसे पता था कि आरोपी एक राज्य का मुख्यमंत्री है, लिहाजा उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया और बांद्रा के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष 21 अक्टूबर 2013 को शिकायत दी, जो अगले दिन पंजीकृत हुई। पीडि़त लड़की ने मजिस्ट्रेट के समक्ष आईपीसी की धारा 376, 365, 354, 323 और 120 बी के तहत शिकायत दी। इस मामले की पहली सुनवाई 25 नवंबर को पड़ी, कि इसके 25 दिन पहले ही कथित तौर पर लड़की ने शिकायत लेने की अर्जी मजिस्ट्रेट के सामने डाल दी। जिसमें उसने शादी करने की बात कहकर शिकायत वापस ले ली। दिलचस्प यह है कि मजिस्ट्रेट ने भी इसे मंजूरी दे दी और मामला बंद हो गया।

कानून के जानकार मानते हैं कि ऐसे मामलों में सिर्फ उच्च न्यायालय को ही केस बंद करने का आदेश देने का अधिकार है। और सात साल पहले झारखंड की राजनीति में हंगामा मचाने से पहले ही यह हाईप्रोफाइल केस बंद हो गया और पीडि़त लड़की भी परिदृश्य से गायब हो गई। यहां यह कहना आवश्यक है कि अगर यह मामला कोर्ट में जायेगा तो मुबई पुलिस को जवाब देना मुश्किल हो जायेगा। बहरहाल इस बीच झारखंड की राजनीति ने करवट बदली। मामला खुला बीती जुलाई में, जब इस मामले को लेकर गोड्डा से सांसद निशिकांत दुबे ने इस मामले पर सवाल उठाया और महाराष्ट्र के गृहमंत्री से इस मामले को देखने की मांग की।

इसी बीच लड़की भी सामने आ गई। हुआ यह कि आठ अगस्त को मुंबई में उसका एक एक्सीडेंट हुआ। हादसे के बाद उसे ऐसा महसूस हुआ कि कहीं यह हादसा तो जानबूझकर नहीं कराया गया। उसे अपनी जान का डर सताने लगा। उसे डर हुआ कि कहीं हादसे के पीछे सात साल पहले उसके साथ हुए दुष्कर्म की घटना के तार तो नहीं जुड़े हैं। लड़की से जुड़े सूत्रों का कहना है कि तब तक उसे निशिकांत दुबे के ट्वीट की भी जानकारी नहीं थी। लेकिन जब उसने तहकीकत करनी शुरू की तो उसे निशिकांत दुबे के ट्वीट की जानकारी मिली। इसके बाद उसने एहतियातन फिर से सात साल पुराने मामले में जांच की मांग को लेकर झारखंड के नेताओं से सहयोग मांगा। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में उसने अपने वकील के जरिए झारखंड भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी से संपर्क किया और उनसे सहयोग मांगा। सूत्रों के मुताबिक बाबूलाल मरांडी ने लड़की से जुड़े लोगों को आश्वस्त किया कि अगर लड़की खुद आगे आएगी तो वे लोग इस मामले को उठाएंगे। इसके बाद लड़की ने इस मामले की जांच के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को ईमेल किया। इसके बाद मामला तूल पकडऩे लगा।

सांसत में सोरेन (पाञ्चजन

इसे लेकर झारखंड की राजनीति में हंगामा मचना स्वाभाविक है। बाबूलाल मरांडी ने 19 दिसंबर को दुमका में प्रेस कांफ्रेंस करके हेमंत सोरेन का इस्तीफा मांगा। भारतीय जनता पार्टी इस मामले की जांच सीबीआई से कराने की कर रही है। उधर झारखंड मुक्ति मोर्चा इसे लेकर भारतीय जनता पार्टी पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाया है।

बहरहाल भारतीय जनता पार्टी की इस मांग के बाद हेमंत सोरेन उलझन में फंस गए हैं। इस बीच एक और घटनाक्रम में और कडिय़ां जुड़ गई हैं। पीडि़त लड़की ने 08 दिसंबर को बांद्रा के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के साथ ही बांबे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और इस मामले की सीबीआई जांच कराने के साथ ही सुरक्षा की मांग की। इस बीच मामला सुनवाई के लिए पंजीकृत हो पाता कि पीडि़त 16 दिसंबर को नए वकील के साथ अदालत पहुंच गई और उसने फिर से इस मामले को वापस लेने की अर्जी डाल दी। इस अर्जी में उसने बाबूलाल मरांडी के एक सहयोगी पर जान के खतरे का भी आरोप लगाया है।

बीजेपी ने पीडि़त के इस कदम पर सवाल उठाते हुए उसके पीछे हेमंत सोरेन के लोगों द्वारा दबाव डालने का आरोप लगाया है। बाबूलाल मरांडी कहते हैं, ‘यह गंभीर आरोप है। अगर इसकी निष्पक्ष जांच नहीं करायी गई, तो हर रसूखदार आदमी अपनी हैसियत से लोगों को प्रभावित करता रहेगा और फिर प्रलोभन या दबाव देकर से मामलों मे समझौता करा लेगा। ऐसे में तो देश में अपराध रुकेगा ही नहीं।’

भारतीय जनता पार्टी का तर्क है कि ऐसे मामले पीडि़त के कहने के बाद भी खत्म नहीं किए जा सकते। पार्टी सर्वोच्च न्यायालय के हालिया एक निर्णय का हवाला दे रही है। पार्टी का आरोप है कि हेमंत सोरेन को बचाने के लिए धनबल के साथ ही सत्ता की ताकत का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा का कहना है कि झारखंड में सरकार ठीक ढंग से काम कर रही है, इससे भाजपा घबरा गई है और वह सरकार गिराने के लिए साजिश कर रही है।

चाहे जो भी हो, चूंकि यह आरोप बेहद संगीन है और मौजूदा मुख्यमंत्री पर लगा है, इसलिए इस मामले की जांच होनी ही चाहिए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

 

उमेश चतुर्वेदी

 

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