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सेहत के लिए रामबाण अमरूद

सेहत के लिए रामबाण अमरूद

सर्दियां आते ही धूप में बैठकर मीठे-मीठे अमरूद खाने का मजा तो आपने भी लिया होगा, लेकिन क्या कभी भी आपने अमरूद के पोषक तत्वों के बारे में सोचा है। जी हां, अमरूद में मैग्नीशियम, पोटेशियम, विटामिन (ए,ई) मिनरल्स, बीटा कैराटीन और ट्यूमर को खत्म करने वाले लाइकोपीन नामक फाइटो न्यूट्रएिंट्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। जो हमारे शरीर को सर्दियों में होने वाली बीमारियों के अलावा कई गंभीर रोगों से भी बचाता है।

अमरूद आसानी से मिल जाने वाला फल है और अमरूद के गुण शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाव का काम भी कर सकते हैं। इस लेख में हमारे साथ जानिए अमरूद के औषधीय गुण और विभिन्न शारीरिक समस्याओं पर अमरूद के फायदे। इसके अलावा, लेख में अमरूद के औषधीय गुण के साथ अमरूद के नुकसान पर भी प्रकाश डाला गया है।

अमरूद भारत में मिलने वाला एक साधारण फल है। लगभग अधिकांश घरों या ग्रामीण इलाकों में इसके पेड़ मिल जाते हैं। कुछ पाश्चात्य विद्वानों का कहना है कि इसे अमेरिका से यहां पुर्तगीज लोगों द्वारा लाया गया है तथा साथ ही साथ यह भी कहते है कि अमरूद का पेड़ भारतवर्ष के कई स्थानों पर जंगलों में होता है। परंतु सच यह है कि जंगली आम, केला आदि के समान इसकी उपज अत्यन्त प्राचीन काल से हमारे यहां होती रही है तथा यह यहां का ही मूल फल है।

डायबिटीज में अमरूद के लाभ देखे जा सकते हैं। माना जाता है कि बिना छिलके वाला अमरूद ब्लड शुगर को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, एक शोध से पता चलता है कि अमरूद में मौजूद पॉलीसैकराइड तत्व टाइप-2 डायबिटीज को कम करने में मदद कर सकता है। वहीं, दूसरी ओर अमरूद के पत्ते के अर्क में भी एंटी-हाइपरग्लिसमिक प्रभाव पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। इसलिए, मधुमेह के लिए डाइट में अमरूद को शामिल किया जा सकता है।

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जुकाम के पुराने रोगी, जिसका कफ न निकल रहा हो, को एक बड़ा अमरूद बीज निकालकर खिला दें और ऊपर से ताजा जल रोगी नाक बंद करके पी ले। दो-तीन दिन में ही रुका हुआ जुकाम बहकर साफ हो जाएगा। दो-तीन दिन बाद अगर स्राव रोकना हो तो 50 ग्राम गुड़ रात्रि में बिना जल पीए खा लें। यदि सूखी खांसी हो और कफ न निकलता हो तो, सुबह एक ताजे अमरूद को तोड़कर, चबा-चबा कर खाने से 2-3 दिन में लाभ होता है। अमरूद का भबका यंत्र द्वारा अर्क निकालकर उसमें शहद मिलाकर पीने से भी सूखी खांसी में लाभ होता है। एक रिसर्च के अनुसार अमरुद की पत्तियों का सेवन जुकाम खांसी से आराम दिलाने में सहायक होता है

क्योंकि अमरुद में पाये जाने वाला विटामिन-सी जुकाम और खांसी से शरीर को लडऩे में मदद करता है।

अगर आपको पेट की समस्या है तो अमरूद खाने से ये समस्या जड़ से दूर हो जाएगी। जी हां, अगर आप कब्ज या पेट में गैस होने की वजह से परेशान हैं और दवाईयों पर पैसा खर्च कर रहे हैं तो इससे अच्छा आप उसी पैसों से अमरूद खरीद लें और इस परेशानी को जड़ से मिटा दें।

अमरूद में लाइकोपीन फाइटो न्यूट्रिएंट्स होते हैं जो कि कैंसर और ट्यूमर जैसी खतरनाक बीमारियों से दूर रखते हैं। इतना ही नहीं अमरूद आपके कोलेस्ट्रोल को भी बैलेंस करके रखता है। वहीं अगर आप मुंह के छालों से परेशान हैं तो अमरूद का सेवन कर सकते हैं।

स्वस्थ व्यक्ति में उसकी लंबाई के अनुसार कितना वजन होना चाहिए, इसका जवाब बॉडी मॉस इंडेक्स के जरिए लगाया जाता है। बॉडी मॉस इंडेक्स का अधिक होना मोटापा की ओर इशारा करता है। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर पब्लिश एक स्टडी के अनुसार, छिलके वाले पके अमरूद से बने सप्लीमेंट से बॉडी मॉस इंडेक्स कम हो सकता है। सप्लीमेंट के साथ-साथ पके हुए अमरूद का भी सेवन किया जा सकता है। हालांकि, बॉडी मॉस इंडेक्स और मोटापा कम करने में अमरूद कैसे फायदेमंद हो सकता है, इस विषय पर अधिक शोध की जरूरत है।

अमरूद का सेवन हृदय के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल, इसमें पोटेशियम की कुछ मात्रा पाई जाती है, जो रक्त वाहिकाओं को आराम पहुंचाने का काम कर सकती है, जिससे रक्तचाप को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। वहीं, इसमें फाइबर पाया जाता है और फाइबर खराब कोलेस्ट्रॉल, जो दिल की बीमारी का कारण बन सकता है, उसे कम कर सकता है और कोलेस्ट्रॉल की वजह से होने वाले हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है ।

बच्चे का पुराना पेचिश मिटाने के लिए अमरूद की 15 ग्राम जड़ को 150 मिली जल में पकाकर जब आधा जल  शेष रह जाए तो 6-6 मि.ली. तक दिन में दो-तीन बार पिलाना चाहिए। कच्चे अमरूद के फल को भूनकर खिलाने से भी अतिसार में लाभ होता है। अमरूद की छाल व इसके कोमल पत्रों का काढ़ा बनाकर 20 मि.ली. मात्रा में पिलाने से हैजा की प्रारम्भिक अवस्था में लाभ होता है।

अमरूद की छाल का काढ़ा अथवा छाल के 5-10 ग्राम चूर्ण का सेवन करने से पेचिश, हैजा, दूषित भोजन की विषाक्ता, उल्टी तथा अनपच आदि ठीक होते हैं। अमरूद का मुरब्बा, पेचिश एवं अतिसार में लाभदायक है। अमरूद के नये पत्तों को पीसकर स्वरस निकाल लें। इस स्वरस में चीनी मिलाकर प्रात:काल सेवन करने से सात दिनों में बदहजमी में लाभ होने लगता है।

 

उदय इंडिया ब्यूरो

 

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