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पश्चिम बंगाल में किसकी होगी शह और कौन खाएगा मात?

पश्चिम बंगाल में किसकी होगी शह और कौन खाएगा मात?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हर दिन नया समीकरण बनता दिख रहा है। यूं तो सभी दलों ने मोर्चा संभाल लिया है मगर यहां मुख्य लड़ाई भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस में है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस को घेरने की चौतरफा रणनीति बनाकर भारतीय जनता पार्टी मैदान में कूद पड़ी है। पश्चिम बंगाल चुनाव 2021 से पहले राज्य में बाहरी बनाम हाउस मैन की लड़ाई चरम पर है। इसके लिए भाजपा बांग्ला भाषा में दक्ष नेताओं और मंत्रियों को खास तरजीह दे रही है। भाजपा ने जिन लोगों को बंगाल में जिम्मेदारी दी है, उन्हें खास निर्देश दिया गया है कि लोगों के बीच संवाद स्थापित करने लायक बांग्ला भाषा सीख लें। भाजपा इस कदम से तृणमूल कांग्रेस के घरेलू बनाम बाहरी के हथियार को कुंद करना चाहती है।

अगर आप पश्चिम बंगाल के मतदाता हैं, तो इंतजार कीजिए। आपके घर कभी भी भारत सरकार या मध्य प्रदेश सरकार का कोई भी मंत्री किसी भी दिन उपस्थित हो सकता है। प्यारी-सी मुस्कान के साथ घर में प्रवेश करते ही आपको कह सकते हैं, ‘काकी मां! आमी मालपोआ खामू (चाची मैं मालपुवा खाऊंगा)।’ भाजपा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देशन में इसी तरह की व्यवस्था और प्रयास किया है। भाजपा नेतृत्व इस तथ्य से अच्छी तरह से अवगत है कि पार्टी राज्य के सभी हिस्सों में बूथ स्तर पर मजबूत नहीं है। यही कारण है कि उन्होंने चुनाव से पहले इस कमी को पूरी के लिए पार्टी के पांच महासचिवों (संगठन) को भेजा है। रत्नाकर, भीखुभाई दलसानिया, सुनील बंसल, पवन राणा और रवींद्र राजू एक महीना पहले बंगाल पहुंचे। यहीं उन्होंने अपना ठिकाना बना लिया है। भाजपा ने 8 मंत्रियों संजीव बालियान, गजेंद्र सिंह शेखावत, नित्यानंद राय, अर्जुन मुंडा, नरोत्तम मिश्रा, केशव प्रसाद मौर्य, मनसुख मंडाविया और प्रह्लाद सिंह पटेल को राज्य भर में राजनीतिक अभियान चलाने के लिए भेजा है। राज्य की 42 लोकसभा सीटों को आठ मंत्रियों में विभाजित किया गया है। भाजपा सूत्रों के अनुसार, शाह ने अपने बंगाल दौरे के समय एक होटल में पार्टी की बैठक में 13 लोगों को जिम्मेदारियां सौंपी थी। उन्होंने कहा था कि पार्टी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का दिल जीतने के लिए बंगला सीखने की कोशिश करनी चाहिए। हमें बंगालियों का खानपान भी सीखना होगा। उन 13 लोगों में से जो शाकाहारी हैं, उन्हें बंगाली शैली की दाल, चावल, सब्जी, खाना और बनाना सीखना होगा। पांच महासचिवों को महीने में कम से कम 15 दिन और राज्य में आठ मंत्रियों को सप्ताह में कम से कम दो दिन राज्य में बिताना है। उदाहरण के लिए, भीखुभाई पहले से ही बंगला बोल लेते हैं। उन्होंने किताबें एकत्र करके बंगाली वर्णमाला सीखना शुरू कर दिया है। ऐसे में आठ मंत्री कभी होटल में रुकते हैं, कभी पार्टी नेताओं के घर पर। जैसे ही भाजपा ने बाहर से नेताओं को लाना शुरू किया, तृणमूल ने ‘बाहरी’ लेबल के साथ चुनाव प्रचार शुरू कर दिया। राजनीतिक खेमे की राय है कि ‘हाउस मैन’ बनने की यह रणनीति उसके तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ जा रही है, क्योंकि तृणमूल कांग्रेस ने बाहरी की थ्योरी खड़ी करके अखंड भारत पर सवालिया निशान लगा दिया है। उधर, आम लोगों का मानना है कि जब एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने के लिए वीजा या परमिट नहीं लगता, तो आप किसी को बाहरी कैसे करार दे सकते हैं।

इसी मुद्दे को लेकर शाह के सिपहसालार अब बंगाल का हाउस मैन बनकर तृणमूल कांग्रेस व ममता बनर्जी को घेरने की तैयारी में हैं, ताकि मिशन बंगाल के (200 सीट) के टार्गेट को पूरा किया जा सके। उधर राज्य सरकार में परिवहन मंत्री रह चुके कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी के भाजपा में शामिल होने से राजनीतिक समीकरण काफी हद तक बदल गया है। तृणमूल कांग्रेस जहां एक ओर जनता को रिझाने में लग गई है वहीं भाजपा का दामन पकड़ चुके शुभेंदु अधिकारी ने भी अपना दमखम दिखाना शुरू कर दिया है। वह लगातार सभाएं कर रहे हैं और जनता को ये बता रहे हैं कि भाजपा हो बंगाल का सही विकल्प है। सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन के एक दिन बाद ही मेदिनीपुर के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने सत्तारूढ़ दल को अपनी ताकत दिखायी। उन्होंने बंगाल के ब्रांड एंबेसडर शाहरुख खान की फिल्म के मशहूर डायलॉग के जरिये कांथी से ममता बनर्जी की पार्टी के खिलाफ हुंकार भरी। उन्होंने कहा, ‘ये तो सिर्फ टेलर है, फिल्म अभी बाकी है।’ उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव 2021 में सरकार भारतीय जनता पार्टी की ही बनेगी। तृणमूल के सांसद सौगत रॉय और बंगाल के मंत्री फिरहाद हकिम की जनसभा के अगले दिन शुभेंदु ने कांथी के सेंट्रल बस स्टैंड में आयोजित जनसभा में कहा, ‘मेरा फैसला गलत नहीं था। रोड शो में आम लोगों ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि मैंने जो फैसला लिया था, वो सही था। लोग मेरे फैसले के साथ हैं। 2021 के चुनाव में भाजपा की ही सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि इसके बाद तृणमूल को 10 साल तक सरकार बनाने का इंतजार करना होगा। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2011 के पहले तृणमूल कहीं दिखाई नहीं देती थी। जूनपुर में पदयात्रा तक नहीं कर पाती थी तृणमूल कांग्रेस। सिर्फ भाषण देकर चले जाते थे पार्टी के नेता। नाम लिये बगैर फिरहाद हकिम पर कटाक्ष करते हुए  अधिकारी ने कहा, ‘उपचुनाव में टिकट नहीं मिला, तो ममता के खिलाफ विद्रोह कर दिया था।’ उन्होंने कहा, ‘तृणमूल के पैर में अब शुभेंदु का कांटा चुभ गया है। ये जिला के साथ दक्षिण कोलकाता की लड़ाई नहीं है।’


 

बंगाल में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका


 

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पश्चिम बंगाल में वर्ष 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने को लेकर केंद्र, राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को निर्देश देने के लिए उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी है। कहा गया है कि बंगाल में नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है। याचिका में पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के प्रतिद्वंद्वियों और कथित राजनीतिक कार्यकर्ताओं की कथित हत्याओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने सहित कई राहत देने का अनुरोध न्यायालय से किया गया है। इस याचिका में गृह मंत्रालय, पश्चिम बंगाल सरकार, निर्वाचन आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग, सीबीआई और प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में कहा गया है कि राज्य में लगातार नागरिकों के मौलिक अधिकारों और मानव अधिकारों का हनन हो रहा है और इन घटनाओं में राज्य सरकार और उसकी पुलिस के शामिल होने के आरोप लग रहे हैं। मौलिक अधिकारों और मानव अधिकारों के हनन के बावजूद इनकी रोकथाम के लिए राज्य सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है, जबकि कानून व्यवस्था बनाये रखना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना उसका कर्तव्य है। याचिका में हाल ही में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर राज्य में हुए हमले का जिक्र करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को सुरक्षा प्रदान करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य के पुलिस महानिदेशक को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। यह याचिका अधिवक्ता पुनीत कुमार ढांडा ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पश्चिम बंगाल में नागरिकों के जीने और व्यक्तिगत आजादी के मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा है।


शाहरुख खान की फिल्म के डायलॉग के जरिये उन्होंने तृणमूल कांग्रेस को चेतावनी दी। कहा, ‘ये तो अभी ट्रेलर है, सिनेमा बाकी है। भाईपो ने कैडर पुलिस को भेजा है। भाजपा सत्ता में आ रही है। आपको 10 साल तक कम्पलसरी वेटिंग में रहना होगा।’ शुभेंदु यहीं नहीं रुके। उन्होंने सौगत रॉय पर भी कटाक्ष किया। कहा, ‘सौगत रॉय बड़ी-बड़ी बातें बोलकर गये हैं। 1998 में एक ओर ममता का झंडा था, दूसरी तरफ भाजपा का। तब सौगत रॉय ने क्या कहा था, सबको बताऊंगा। अधिकारी ने कहा, ‘मैं गलत बातें नहीं करता। अशालीन बातें नहीं करता। दूसरे लोगों के माध्यम से तृणमूल कांग्रेस मेरे खिलाफ गलतबयानी करवा रही है।’ उन्होंने कहा कि जिस वक्त कोई भी नेता किरणमय नंद और लक्ष्मण सेठ के खिलाफ लडऩे के लिए तैयार नहीं था, मैंने लड़ाई की। पार्टी को उनके खिलाफ लड़कर बचाया था। दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक हाई वोल्टेज ड्रामा भी चल रहा है। हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के सांसद सौमित्र खान की पत्नी सुजाता मंडल टीएमसी में शामिल हो हैं। इसके बाद उनके पति सौमित्र खान ने उन्हें तलाक देने की घोषणा कर दी। राजनीति के इस ड्रामे के बीच उनका 10 सालों का रिश्ता खतरे में आ गया है। वहीं इस बात से नाराज पति ने सुजाता को तलाक देने की घोषणा कर दी और सुजाता मंडल तलाक का नोटिस भेज दिया। अब सुजाता मंडल लगातार भारतीय जनता पार्टी पर हमलावर हैं। भाजपा सांसद सौमित्र खान की पत्नी सुजाता मंडल खान ने राजधानी कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थाम लिया। सुजाता मंडल खान सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद सौगत राय और प्रवक्ता कुणाल घोष की मौजूदगी में पार्टी में शामिल हुईं। अब देखना ये है कि इस हाई वोल्टेज ड्रामे का भविष्य में क्या असर पड़ता है, लेकिन सांसद सौमित्र ने माना कि भाजपा पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ेगा। बता दें कि कांग्रेस और वामदलों ने एक साथ मिलकर चुनाव लडऩे की घोषणा की है। कांग्रेस आलाकमान ने अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वाम दलों के साथ गठबंधन करने के प्रस्ताव को  औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान कर दी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने  यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस आलाकमान ने पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में वाम दलों के साथ गठबंधन को औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान की।’ कांग्रेस के पश्चिम बंगाल प्रभारी जितिन प्रसाद ने कहा, ‘इस चुनाव में कांग्रेस इस गठबंधन में पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी। यह चुनाव पश्चिम बंगाल की अस्मिता, संस्कृति और संस्कार को बचाने का है जिन पर चोट करने की कोशिश की जा रही है।’ प्रसाद ने हाल ही में पश्चिम बंगाल का दौरा किया था और वहां प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं की राय लेकर नेतृत्व को इससे अवगत कराया था। इसके बाद नेतृत्व ने गठबंधन करने को हरी झंडी दी है।


 

पुलिस ने की भाजपा कार्यकर्ता की हत्या  —प्रह्लाद पटेल


 

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केद्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने भाजपा कार्यकर्ता उलेन राय को श्रद्धांजलि दी और आरोप लगाया कि पुलिस ने इस महीने की शुरुआत में उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में एक रैली के दौरान उसकी हत्या कर दी। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री मेंगारा गांव में राय के घर गये और उनके परिवार के लोगों से बातचीत की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उसके परिवार के लोगों ने हत्या की जांच की मांग की है। पटेल ने धूपगुड़ी का दौरा किया और एक मोटरसाइकिल रैली में हिस्सा लिया। बाद में उन्होंने भाजपा के अन्य नेताओं के साथ कॉलेज पाड़ा इलाके का दौरा किया और स्थानीय लोगों से मुलाकात की। उन्होंने लोगों को केंद्र द्वारा किये जा रहे विकास कार्यों की जानकारी दी और इस सिलसिले में उन्हें पुस्तिकाएं दीं।

पटेल ने आरोप लगाये कि राज्य सरकार केंद्रीय कोष का इस्तेमाल कर विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रही है और इसका पूरा श्रेय ले रही है। राज्य में पर्यटन क्षेत्र का जिक्र करते हुए पटेल ने कहा कि दार्जीलिंग और सुंदरबन के अलावा बंगाल में अन्य कई स्थान हैं, जिन्हें विकसित किया जा सकता है। धूपगुड़ी को सब-डिवीजन बनाने की मांग करते हुए पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें ज्ञापन सौंपा। उल्लेखनीय है कि राज्य में तृणमूल और भाजपा के बीच लगातार संघर्ष बढ़ रहा है। भाजपा का आरोप है कि उसके 300 कार्यकर्ताओं को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मार डाला। वहीं, ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी का कहना है कि भाजपा के कार्यकर्ता सांप्रदायिक हिंसा में मारे जाते हैं और उसका आरोप भाजपा वाले सत्तारूढ़ पार्टी पर लगा देते हैं।


वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में भी वाम दल और कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़े थे। हालांकि, ये दोनों केरल में एक-दूसरे मुख्य विरोधी हैं। पश्चिम बंगाल में वर्ष 2021 के अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने हैं। चुनाव की सरगर्मी अभी से तेज हो गयी है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और उसे चुनौती देने वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच लगातार तीखी नोंक-झोंक हो रही है। भाजपा के केंद्रीय नेता लगातार बंगाल का दौरा कर रहे हैं और इसकी वजह से सत्तारूढ़ तृणमूल एवं उसकी नेता ममता बनर्जी टेंशन में हैं। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। वर्ष 2016 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने कुल 211 सीटें जीतीं थीं, जबकि कांग्रेस को 44 सीटों पर जीत मिली थी। माकपा को 26, गोरखा जनमुक्ति मोर्चा, भारतीय जनता पार्टी, आरएसपी को 3-3, फॉरवर्ड ब्लॉक को 2, भाकपा और निर्दलीय को 1-1 सीट पर जीत मिली थी।

भारतीय जनता पार्टी के पश्चिम बंगाल प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने ममता बनर्जी की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कोरोना (कोविड-19) से भी खतरनाक वायरस करार दिया है। साथ ही कहा है कि भाजपा इस वायरस से छुटकारा पाने का टीका है। उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में टीएमसी को खत्म करने के लिए भाजपा टीका का काम करेगी। अगर उनकी पार्टी सत्ता में आयी, तो वह भाजपा और अन्य विपक्षी कार्यकर्ताओं पर थोपे गये ‘गलत’ (फर्जी) मामलों को वापस ले लेगी, लेकिन तृणमूल के कार्यकर्ताओं को ‘राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ज्यादती करने को लेकर’ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। उन्होंने कहा, ‘टीएमसी कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक वायरस है। अगले साल विधानसभा चुनावों में भाजपा टीका टीएमसी वायरस को खत्म कर देगा।’ राज्य की 294 सदस्यों वाली विधानसभा के लिए अगले साल अप्रैल-मई में चुनाव होने की उम्मीद है। तृणमूल को राज्य में अब तक का ‘सबसे अलोकतांत्रिक दल’ करार देते हुए घोष ने आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार के ‘गिनती के दिन’ बचे होने के बावजूद सत्ताधारी दल के कार्यकर्ता भाजपा के कार्यकर्ताओं को धमका रहे हैं।

दिलीप घोष ने कहा, ‘जब हम सत्ता में आयेंगे, तब भाजपा कार्यकर्ताओं और अन्य विपक्षी कार्यकर्ताओं पर लगाये गये सभी झूठे मामलों को वापस लेंगे। लेकिन, हमें प्रताडि़त करने वाले टीएमसी सदस्यों को अंजाम भुगतना होगा। हम उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।’ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के कुछ दिनों बाद 29 दिसंबर को बीरभूम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तय रोड शो का मजाक उड़ाते हुए दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल को भाजपा के सुशासन के उदाहरण का भी पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘बीरभूम में वैसे ही रोड शो की योजना बनाकर टीएमसी भाजपा का अनुकरण कर रही है। उन्हें केंद्र के सुशासन के उदाहरण को भी अपनाना चाहिए। टीएमसी सरकार पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को लागू करने की मंजूरी नहीं देती।’

दिलीप घोष के वायरस वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा कि ऐसी टिप्पणी भाजपा की मनोदशा को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ‘हम ऐसे बयानों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते। यह भाजपा की मनोदशा दर्शाती है। प्रदेश के लोग उन्हें माकूल जवाब देंगे।’

बताता चलूं कि पश्चिम बंगाल में कभी दल-बदल को बहुत बुरा माना जाता था। आज दल-बदल की संस्कृति बढ़ रही है। एक दशक पहले तक बंगाल में दल बदलने वालों का उपहास होता था। आज इसे बुरा नहीं माना जाता। भाजपा पर अपनी पार्टी को तोडऩे का आरोप लगाने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने एक दशक के अपने शासन में 40 से अधिक विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करवाया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर पैसे का लालच और केंद्रीय जांच एजेंसियों का डर दिखाकर तृणमूल नेताओं को अपने पाले में करने के आरोपों पर भाजपा के प्रदेश दिलीप घोष ने ममता बनर्जी को आड़े हाथ लिया, तो कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने भी उन्हें नहीं बख्शा कांग्रेस व वामदलों ने तृणमूल पर राज्य में दल बदलने की संस्कृति को लाने का आरोप लगाया। वर्ष 2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से ही कांग्रेस और वामदलों के कई नेताओं ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा शुरू की गयी ‘विकास की प्रक्रिया’ में भाग लेने के लिए तृणमूल का दामन थामा। अब चूंकि, तृणमूल कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं, ऐसे में सत्ताधारी दल को अपनी ही कड़वी दवा का स्वाद चखना पड़ रहा है। पिछले साल के लोकसभा चुनाव से लेकर अब तक कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी समेत तृणमूल के 15 अन्य विधायक और सांसद भाजपा में शामिल हो चुके हैं। मेदिनीपुर में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की  रैली के दौरान राज्य सरकार में पूर्व मंत्री अधिकारी समेत 34 अन्य नेता भाजपा में शामिल हो गये थे। जिससे तृणमूल को तगड़ा झटका लगा था।

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इसके जवाब में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष और विष्णुपुर से सांसद सौमित्र खान की पत्नी सुजाता मंडल खान, भाजपा का साथ छोड़कर तृणमूल में शामिल हो गयीं। एक दशक तक दार्जीलिंग में भाजपा का समर्थन करने वाले गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के बिमल गुरुंग ने आगामी चुनाव में तृणमूल कांग्रेस का साथ देने का फैसला लिया है। नाम उजागर न करने की शर्त पर तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी को ‘आया राम गया राम’ की संस्कृति को बढ़ावा नहीं देना चाहिए था। उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी द्वारा कांग्रेस और वामदलों से ढेर सारे विधायकों को अपने दल में शामिल करना गलत था। वह अनैतिक राजनीति थी और हमें ऐसा नहीं करना चाहिए था। कभी-कभी अपने समर्थन का आधार बढ़ाने के लिए आपको ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जो आगे जाकर आपको प्रभावित करते हैं।’

पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में जहां नेता की पहचान विचारधारा से होती थी, पार्टी छोड़ देने की घटनाएं दुर्लभ थीं। तृणमूल और भाजपा के सूत्रों के अनुसार, दोनों पार्टियों से अभी और नेता पाला बदलते नजर आयेंगे। हालांकि, तृणमूल का कहना है कि पार्टी छोडऩे वाले विधायक ‘गद्दार’ हैं, लेकिन विपक्षी दलों और राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि तृणमूल ने वही काटा है, जो उसने बोया था।

तृणमूल का भी एक वर्ग इससे सहमत है। पार्टी के सांसद सुखेंदु शेखर रॉय कहते हैं कि ऐसी कोई भी पार्टी नहीं है, जो ‘आया राम गया राम’ की संस्कृति से मुक्त हो। उन्होंने कहा कि यह भारत की राजनीति की वास्तविकता है। उन्होंने भाजपा पर तृणमूल सांसदों को धमकाने का भी आरोप लगाया। तृणमूल की दल बदलने की संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि तृणमूल को इस पर ज्ञान नहीं देना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘दल बदलने की संस्कृति पर बात करने वाली तृणमूल अंतिम पार्टी होगी। पिछले 10 सालों में तृणमूल ने पैसे और बाहुबल के प्रयोग से 40 से ज्यादा विधायकों को अपने पाले में किया है। क्या यह लोकतांत्रिक तरीके से किया गया है? तृणमूल को पहले इसका जवाब देना होगा, इसके बाद हमें ज्ञान दें।’ विपक्षी दल कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों ने तृणमूल पर राज्य में दल बदलने की संस्कृति को लाने का आरोप लगाया है। बंगाल में विधानसभा चुनाव के चंद महीने बाकी हैं। ऐसे में किसकी सरकार बनेगी, फिलहाल ये कहना तो बेमानी है लेकिन आधुनिक चाणक्य अमित शाह की रणनीति कुछ ना कुछ रंग जरूर ला सकती है।

 

कोलकाता से संजय सिन्हा

 

 

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