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”भाजपा की विकास-परक नीतियों ने कश्मीर चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई’’

”भाजपा की विकास-परक नीतियों ने कश्मीर चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई’’

सबसे पहले तो कश्मीर का पूरा इंटीग्रेशन। कश्मीर का देश के साथ धारा 370 हटने के बाद समावेश होना और कश्मीर में मोदी जी के नेतृत्व में पूर्ण विकास, जीरो टॉलरेंस टू करप्शन और जम्मू-कश्मीर के हर हिस्से का विकास ये सबसे बड़े मुद्दे थे। जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की बात हुई। इन मुद्दों पर जनता ने आगे बढ़कर वोट दिया। जिस प्रकार से अपने परिवार की संस्था बनाकर, लूट का बाजार बनाकर मुफ्ती और अब्दुल्लाओं ने पहले जम्मू-कश्मीर को चलाने की कोशिश की थी, उन सारी चीजों पर लोगो के सामने उनका भंडाफोड़ हुआ। लोगो को मालूम चला कि किस प्रकार जनता के संसाधनों को मुफ्ती और अब्दुल्ला लूटते रहे थे। इसलिए करप्शन फ्री और हर कोने का विकास सबसे बड़े मुद्दे थे,’’ यह कहना है भाजपा के जम्मू –कश्मीर के सह-प्रभारी एवं दिल्ली भाजपा कि महासचिव आशीष सूद का रवि मिश्रा के साथ हुई बातचीत के दौरान। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के प्रमुख अंश।

 

हाल ही खत्म हुए जम्मू-कश्मीर डीडीसी (जिला विकास परिषद) चुनाव में आप भाजपा के सह-प्रभारी  रहे है। और इन चुनावों में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस पर आप क्या कहेंगे?

डीडीसी का वर्तमान चुनाव सत्तर साल बाद पहली बार तीन चरणों में हुआ। धारा 370 हटने के बाद जो लोग ये कहते थे कि कश्मीर में तिरंगा उठाने वाला कोई भी नहीं मिलेगा, उन सबको जम्मू और कश्मीर की जनता ने मुहतोड़ जबाब दिया है। 55 प्रतिशत से ज्यादा मतदान होना, दूरदराज के क्षेत्रों तक मतदान होना, नौजवानों का आगे बढ़कर चुनाव में मतदान करना और चुनाव में हिस्सा लेना ये अपने आप में लोकतन्त्र को मजबूत करने वाला कदम है। डीडीसी चुनावों में धारा 370 हटने के बाद भारत सरकार के ऊपर जनता के विश्वास को मजबूती से दोबारा स्थापित होते हुए दिखाया है। भाजपा की विकास-परक नीतियों ने कश्मीर चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस चुनाव में भाजपा ने किन मुद्दों को उठाया, जिस पर लोगो ने आप पर विशवास किया?

सबसे पहले तो कश्मीर का पूरा इंटीग्रेशन। कश्मीर का देश के साथ धारा 370  हटने के बाद समावेश होना और कश्मीर में मोदी जी के नेतृत्व में पूर्ण विकास, जीरो टॉलरेंस टू करप्शन और जम्मू-कश्मीर के हर हिस्से का विकास ये सबसे बड़े मुद्दे थे। जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की बात हुई। इन मुद्दों पर जनता ने आगे बढ़कर वोट दिया। जिस प्रकार से अपने परिवार की संस्था बनाकर, लूट का बाजार बनाकर मुफ्ती और अब्दुल्लाओं ने पहले जम्मू-कश्मीर को चलाने की कोशिश की थी, उन सारी चीजों पर लोगो के सामने उनका भंडाफोड़ हुआ। लोगो को मालूम चला कि किस प्रकार जनता के संसाधनों को मुफ्ती और अब्दुल्ला लूटते रहे थे। इसलिए करप्शन फ्री और हर कोने का विकास सबसे बड़े मुद्दे था।

महबूबा मुफ्ती और अब्दुला परिवार ने गुपकार नामक गठजोड़ बनाकर भाजपा के  खिलाफ चुनाव लड़ा, आप इसे कैसे देखते हैं?

ये वो लोग हैं, जो कहते थे कि हम चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। तब-तक हिस्सा नहीं लेंगे जब-तक धारा 370 दोबारा लागू नहीं होती। मगर इन्हें एहसास हुआ कि उनकी जो आज तक विकास को रोकने की चाल थी, तभी तो पूरे देशभर में जिला परिषद् के चुनाव होते थे और जम्मू-कश्मीर में नहीं होते थे। उस चाल से जम्मू-कश्मीर के लोग वाकिफ हो गये है़।  क्योकि ये लोग अपना राज चालाने के लिए ऐसा करते थे। दूसरी बात इन लोगों ने यह कही कि जम्मू-कश्मीर में हम चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे। लेकिन जब जनता ने  आगे बढ़कर हिस्सा लिया तो इन लोगो को भी आना पड़ा और लोकतंत्र के इस प्रक्रिया मे हिस्सा लेना पड़ा। लोकतान्त्रिक प्रक्रिया में आप किसी भी चीज का विरोध कर सकते है। अपने मत को लेकर जनता में जनजागरण कर सकते हंै। जनता को जागरूक कर सकते है। कोर्ट में जा सकते हैं। परन्तु जो देश को तोडऩे का षडयंत्र करेगा उसे जनता मुहतोड़ जबाब देती है। और इनके गठजोड़ की भी दुर्दशा ये थी कि जिनको  मीेडिया का एक बहुत बड़ा वर्ग मेनस्ट्रीम पार्टी कहता है, वे दोनों दल मिलकर भी 280 सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतार पाए। महबूबा मुफ्ती की पार्टी तो चार-पांच जिलों में कुल मिलाकर 68 उम्मीदवार ही उतार पायी। और पूरा गुपकार गठजोड़ ने मिलकर 220 उम्मीदवार उतारें।  जिसमे छ: दल शामिल थे। ये हैं महबूबा मुफ्ती की पार्टी, अब्दुला परिवार की पाटी, सज्जाद लोन की पाटी, कम्युनिस्ट पार्टी और इन्हें कांग्रेस का भी ढका-छुपा समर्थन था। कांग्रेस ने भी वहा वर्षों शासन किया है। किंतु वह भी 118 ही उम्मीदवार उतार पायी। भारतीय जनता पार्टी  एक अकेली ऐसी पार्टी थी जिसने सबसे अधिक 186 उम्मीदवार उतारें। और फिर 50 से ज्यादा निर्दलीय उम्मीदवारों का बाहरी श्रीनगर से जीतना, मुफ्ती, अब्दुल्ला और लोन परिवार की अप्रासंगिकता  को ही दर्शाता है।

क्या जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के चुनाव हो पायेंगे?

देखिये ये प्रशासनिक विषय है। इस सन्दर्भ में मैने कहीं पढ़ा कि उपराज्यपाल साहब ने कहा कि अभी  डीलीमिटेशन की प्रक्रिया जारी है। इसलिए बेहतर है की हम थोड़ा इन्तजार करें।  मगर हां लोकतंत्र के सारे मानक वहां स्थापित हों ये मोदी जी के  नेतृत्व में प्रयास किये जा रहे हंै। और भारतीय जनता पार्टी लोकतंत्र के बेहतरीन मानकों को व्यस्थापित करने में विश्वास करती है। अत: प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी लोकतान्त्रिक पद्धतियों को स्थापित किया जायेगा।

 

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