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कर्नाटक : राजनीतिक आत्महत्या की गूंज

कर्नाटक : राजनीतिक आत्महत्या की गूंज

आमतौर पर राजनीति  में रचे-बसे नेताओं में संवेनशीलता  नहीं के बराबर होती है। कहने  को वे संवेदनशीलता होने का दावा करते है, लेकिन उनकी यह संवेदनशीलता केवल दिखावटी होती है, दिल में नहीं। नेताओं पर लगे   भ्रष्टाचार  जैसे  आरोपों का उनपर  कोई  असर  नहीं होता। नैतिकता उनके लिए दूर  की  बात होती है। लेकिन  इन सब के बीच  कर्नाटक  विधान परिषद के डिप्टी स्पीकर और  जनता दल (एस) के नेता एस एल  धर्मेगौडा   द्वारा  आत्महत्या  कर  लिए  जाने की  घटना से  लगता है कि राजनीति  में आज भी संवेदनशील लोग है। उन पर भ्रष्ठाचार  तथा ऐसे अन्य कोई  आरोप नहीं थे। वे बस सदन  में विपक्षी दलों द्वारा उनके साथ किये गए  दुर्व्यवहार से इतने आहत हुए कि उन्होंने  आत्महत्या कर ली। वे लगभग तीन दशकों  से  राजनीति में थे। उनकी  छवि के साफ-सुथरे नेता की थी तथा वे अपने इलाके के  लोकप्रिय  नेता थे।

उनका सारा परिवार राजनीति में रहा है। उनके पिता कई  बार  विधानसभा का चुनाव जीत चुके  है उनके छोटे भाई भोजेगौड़ा  भी विधान परिषद के सदस्य है। उन्होंने  अपनी आत्महत्या के कारणों को छुपाया नहीं है। उन्होंने आत्महत्या के पहले लिखे  सुसाइड नोट में विस्तार से उन कारणों को लिखा है जिसकी वजह से वे आत्महत्या करे रहे हैं।  उन्होंने लम्बे आत्मचिंतन के बाद ही इतना बड़ा कदम उठाने का निर्णय किया है। आमतौर पर ऐसी घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच की  मांग उठने में अधिक समय नहीं लगता। लेकिन इस मामले में उनके परिवार सहित किसी भी दल और नेता ने जांच की मांग नहीं की है। सबने इस आत्महत्या को दर्दनाक बताया है। हां, लोकसभा अध्यक्ष ओम  बिरला ने इस आत्महत्या की जांच करवाए जाने पर जोर दिया है। पर उनके करीब समझे जाने वाले  लोगों का कहना है विधान परिषद में हुई घटना के बाद वे अति दुखी थे। वे एक तरह से अवसाद में चले गए थे।

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जनता दल(स) के नेता तथा पूर्व मुख्यमंत्री  एच डी कुमारस्वामी  के अनुसार उनकी कुछ दिन पूर्व उनसे फोन पर लगभग आधा घंटा बात हुयी थी तथा उन्हें समझाने की कोशिश  की थी कि राजनीति ऐसे छोटी-मोटी घटनाएं होती रहती है। उन्हें इस घटना को भूल जाना चाहिये, न कि दिल पर लेना चाहिये। जिस शाम उन्होंने रेलवे लाइन पर बैठ कर तेजी से आत्ती हुयी ट्रेन से आत्महत्या की उस दिन उन्होंने कई सार्वजानिक समारोहों में भाग लिया था तथा वे पूरी तरह सामान्य लग रहे थे। शाम के समय उन्होंने अपने जिले  चिकमगलूर  के कडूर तालुके में अपने ड्राईवर को स्टेशन पर चलने को कहा। स्टेशन पर पहुंच कर उन्होंने ड्राईवर को वहीं इंतजार करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि वे बस थोड़ा टहल कर आते है। जब वे काफी समय तक नहीं आय तो ड्राईवर ने उनसे मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश की। जब उत्तर नहीं मिला  तो उसने उनके परिजनों को सूचित किया। पुलिस को दी सूचना के बाद जब उनकी तलाश शुरू हुई तो उनका कटा हुआ शव   रेलवे लाइन पर मिला।

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अब हम चलते है उस घटनाक्रम की ओर  जिसके चलते विधान परिषद के डिप्टी स्पीकर धर्मेगौड़ा ने इतना अहम् कदम उठाया। 2018 हुए विधानसभा चुनावों के बाद  राज्य में कांग्रेस-जनता दल (स) की मिली-जुली सरकार बनी और कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री का पद मिला। दोनों दलों में हुए  समझौते  के  अनुसार, विधान परिषद् अध्यक्ष का पद कांग्रेस के हिस्से में आया और डिप्टी स्पीकर पद जनता दल(स) को मिला। पार्टी ने इस पद के लिए धर्मेगौड़ा का चुना।  लगभग  डेढ़ साल पहले  वह सरकार गिर  गई और बीजेपी सत्ता में आ गयी। पार्टी का विधानसभा में तो बहुमत था लेकिन विधान परिषद  में कांग्रेस और जनता दल (स) का बहुमत बना  रहा। कुछ समय से कुमारस्वामी की बीजेपी से नजदीकियां बढ़ रही है। जनता दल(स) ने कुछ मौकों पर विधानसभा में बीजेपी का समर्थन भी किया। बीजेपी चाहती थी कि जनता दल(स) के सहयोग और समर्थन से वह  विधान परिषद के स्पीकर के पद पर अपने दल के किसी नेता को बैठा दे।  हाल ही में विधान मंडल के सैशन के दौरान, बीजेपी ने विधान-परिषद के स्पीकर प्रताप शेट्टी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया। जनता दल (स) ने इस पर बीजेपी का  साथ देने की सहमति जताई थी। बीजेपी ने सदन में दो बार प्रस्ताव पेश करने की कोशिश की लेकिन स्पीकर शेट्टी ने इसे नियमों के विरुद्ध बता नामंजूर कर सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। जब सैशन फिर हुआ तो दोनों दलों ने यह तय किया कि वे स्पीकर शेट्टी को आसन पर बैठने ही नहीं देंगे। इसके स्थान  पर  डिप्टी स्पीकर धर्मेगौड़ा को  आसन पर बैठ तुरंत फुर्ती से अविश्वास प्रस्ताव पारित करवा लिया जायेगा। जैसे ही सदन की  कार्यवाही  शरू  हुयी  बीजेपी-जनता दल(स) विधायकों ने  शेट्टी का रास्ता रोक धर्मेगौड़ा  को आसन पर बैठाने की कोशिश की तो कांग्रेस विधायकों ने ऐसा नहीं होने दिया और उनके साथ खुल कर धक्का-मुक्की हुयी। इसको लेकर वे बहुत  आहत हुए  तथा उन्होंने अपने सुसाइड नोट में इस बात का विस्तार से  विवरण दिया है। उन्होंने लिखा कि वे इस बात को मानसिक रूप से बर्दाशत नहीं कर पा रहे  है तथा अपने जीवन का अंत कर रहे हैं।

बेंगलुरू से लोकपाल सेठी

 

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