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कोरोना वैक्सीन पर विपक्ष ने फिर कटवायी नाक

कोरोना वैक्सीन पर विपक्ष ने फिर कटवायी नाक

विरोधी दलों का काम सत्तादल की गल्तियां पकड़ कर उनके कान खींचने का होता है लेकिन विगत कुछ वर्षों में ये सरकार चलाने वालों के कान खींचने के बजाय खुद की नाक कटवाने में लगे हैं। पार्टियां सत्ता में आती रहती हैं पर जिस तरह सत्ताच्युत होने पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने बिना सोचे-समझे सरकार की हर बात का विरोध शुरू कर दिया है उससे जनता का भरोसा उठने लगा है, लोग सोचने लगे हैं कि क्या अब ये पार्टियां कभी सरकार चलाने योग्य भी होगी लगता नहीं। जनता कभी उन्हें कुर्सी पर बैठने का मौंका नहीं देगी।

कांग्रेस ने सर्जिकल स्ट्राईक के प्रमाण मांग। मांग कर बहुत शोर मचाया पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी चुप ही रहे। आर्मी के उत्तर से कांग्रेसी नेता संतुष्ट नहीं हुये। राहुल गांधी ने पूरे देश में चिल्ला-चिल्ला कर तरह-तरह के आरोप लगाये। जब सब कुछ निबट गया, पूरे देश में बात फैल गयी तो सरकार ने प्रमाण दिखा कर विरोध करने वालों का मुंह बन्द कर दिया। फिर पाकिस्तान के अन्दर जाकर बालाकोट पर भारतीय वायु सेना ने हमला किया और आतंकी अड्डों को ध्वस्त कर दिया। कांग्रेस इस घटना को झूठा कहने में लगी रही, प्रमाण मांगती रही। कितने पाकिस्तानी सैनिक, आतंकवादी मरे ये पूंछती रही। वायु सेना के उच्चस्तरीय अधिकारियों की बात नकारती रही। बाद में सरकार ने प्रमाण दे दिये ताकि अब इस विजय की बात देश के प्रत्येक नागरिक को पता लग जाये। सर्जिकल स्ट्राईक पर अविश्वास कर कांग्रेस ने सबक नहीं लिया और बालाकोट, जहां पाक को घर में घुस कर मारा था, पर सवाल करके अपनी नाक कटवा ली।

अब ताजा किस्सा कोरोना वैक्सीन का है। जबसे कोरोना की बीमारी 2020 जनवरी से दुनिया में फैलने लगी और धीरे-धीरे विकराल रूप लेने लगी उसकी वैक्सीन पर तमाम देशों में काम होने लगा। प्रत्येक देश इसे जल्दी से जल्दी बनाना चाहता था। कुछ समय वैक्सीन में लगता ही है क्योंकि उसमें वैज्ञानिक गतिविधियों के अलावा प्रायोगिक कार्य भी जमीनी स्तर पर होना जरूरी होता है। लेब में रिसर्च और वैक्सीन का प्रयोग कर मानव पर भी प्रयोग करके उसका प्रभाव और दुष्प्रभाव देखना होते हैं। भारतवर्ष में इस पर उसी तेजी से काम हुआ जिस तेजी से कोरोना को नियंत्रित करने में हुआ था। विदेशी कम्पनियां भी भारत की लेब में काम करने को उत्सुक थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने तत्काल इस पर निर्णय लिया। पिछली सरकारों की तरह फाइलें नहीं लटकायी। जब काम होने लगा, रिसर्च आगे बडऩे लगी तो प्रधानमंत्री स्वयं कई कम्पनियों की प्रयोगशालाओं में गये। वहां जाकर काम देखा और वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाया। उसका नतीजा ये हुआ कि भारत कोरोना वैक्सीन बनानें में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो गया। हिन्दुस्तान के नाम एक नया इतिहास लिख गया। पूरी दुनिया भारत की प्रशंसा कर रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत वर्ष की उपलब्धि पर बधाई देते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा की। कांग्रेसी नेताओं ने वैक्सीन के उपयोगी होने पर शक जताया, मीडिया में अनर्गल बातें की। मोदी की बुराई के चक्कर में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के कर्णधारों ने देश की ही बुराई कर डाली।

कांग्रेस पार्टी वैक्सीन के मामले में दो धड़ों में बंट गयी है। पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला वैक्सीन के पक्ष में बोल रहे हैं तो वरिष्ठ नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री शशि थरूर ने वैक्सीन के उपयोग पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया। उनका कहना है कि इसे जल्दबाजी में उपयोग के लिये ओके कर दिया गया है। इस तरह अपने ही देश के वैज्ञानिकों, डॉक्टरों पर शक जता दिया। उन्हें ये समझना चाहिये कि कब, कैसे कहां कोई दवा का उपयोग किया जाये, ये पूरी तरह डॉक्टरों और विशेषज्ञों की सलाह पर ही तय किया जाता है और किया जाता रहेगा।

उधर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने तो कमाल ही कर दिया। उन्होंने कोरोना वैक्सीन को भाजपा की वैक्सीन कह दिया। क्या ये वैक्सीन भाजपा के कार्यालय में बनी है या नरेन्द्र मोदी जी ने बनाई है। कह रहे हैं जब हमारी सरकार आयेगी तब हम अपनी वैक्सीन लगवायेंगे और मुफ्त में लोगों को देंगे। भारत में तो अभी भी भाजपा सरकार मुफ्त में दे रही है। अखिलेश ने अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं को सत्ता में आने का लालीपाप थमा दिया है। अखिलेश की सरकार का काम जनता ने बुरी तरह नकारा है पांच साल में रहने के बाद मुश्किल से 10 प्रतिशत सीटें जीत पाये हैं वो भी तब जब कांग्रेस से मिल कर चुनाव लड़े हैं दो चार सीटें और हार जाती तो पार्टी विरोधी दल की मान्यता के लायक भी नहीं रहती। उनके ब्यान के चौतरफा निंदा हो रही है।

कोई आपदा हो, बड़ा हादसा हो, देश की सुरक्षा को खतरा हो, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद उसको लगातार मानीटर करते हैं, कार्य में जुटे प्रत्येक व्यक्ति को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने थाली, घंटी, ताली बजा कर उन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों का अभिनंदन किया था जो अपनी जान पर खेल कर कोरोना बीमारी से लड़ रहे लोगों की सेवा में लगे थे। उन्होंने बॉर्डर पर जाकर जवानों का उत्साह बड़ाया उन्होंने कोरोना वैक्सीन पर रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों को स्वयं उनके पास जाकर उनका मान बड़ाया। कश्मीर में बाड़ आयी हो या विदेश में फंसे लोग सबकी मदद को मोदी सरकार ने तत्परता दिखा कर मुसीबतों से बाहर निकाला है। बेमतलब में प्रधानमंत्री की बुराई करके विरोधी अपने ही ऊपर थुकवा लेते हैं।

बात वैक्सीन की करें तो ये दो चार माह में नहीं बन गयी इस पर पूरा काम हुआ है। दो ट्रायल में पूरी सफलता प्राप्त हुयी और तीसरे ट्रायल पर भी काम हुआ है। जब हर तरह से उस पर रिसर्च हो गयी तब उसे उपयोग में लाने की अनुमति दी गयी है। कई बार इस पर भी हंसी आती है कि कुछ नेता कह रहे हैं पहले मोदी जी वैक्सीन लगवायें। कल कहेंगे पहले मोदी जी बॉर्डर पर तोप चलायें। गनीमत है कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने ये नहीं कहा कि राफेल हवाई जहाज पहले मोदी जी उड़ायें तब जानेंगे कि वे सही जहाज खरीद रहे हैं और वैज्ञानिकों से भी नहीं कहा कि पहले वे अपने ऊपर वैक्सीन लगायें। जिस तरह विपक्ष हर बात का विरोध करता है सरकार के प्रत्येक कदम पर प्रश्नों की झड़ी लगा देता है उससे उसकी विश्वसनीयता ही समाप्त हो चली है। वैक्सीन के बननें पर बधाई देते हुये अपनी शंकाओं का समाधान मोदी सरकार से मांगा होता तो कुछ और बात होती।

विपक्ष की हालत ये हो गयी है कि वे खुद जो कहते हैं। घोषणा करते हैं और करना चाहते हैं लेकिन कर नही पाते वही जब आज की सरकार करती है तो उसका डट कर विरोध करने लगते हैं। कृषि बिल कांग्रेस के घोषणा पत्र में था, खुद ने कभी पास नहीं किया जब भाजपा सरकार ने यही बिल पास किया तो विरोध किया। राफेल खरीदना तय किया था पर कांग्रेस शासन में खरीदे नहीं गये यदि जब मोदी सरकार ने खरीदे तो उसका भी विरोध किया। यही हाल लगभग सभी पार्टियों का है। ममता बनर्जी 2005 में बंगला देश आदि से आये शरणार्थियों को नागरिकता देने के खिलाफ थी। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके पक्ष में बोलनें लगी। समाजवादी पार्टी या अन्य कोई दल किसानों को डेड़ गुना समर्थन मूल्य उनकी फसलों का नहीं दे सका। जब मोदी सरकार ने दिया तो दोगुने की मांग करके अपना पिटा हुआ चेहरा ढकने का प्रयास करने लगी।

यह तय है कि सत्ता में कोई अन्य सरकार होती तो ये वैक्सीन भारत में नहीं बन पाती। दुनिया में 20 अति विकसित और 50 विकसित देश हैं लेकिन कोरोना वैक्सीन केवल गिने-चुने तीन-चार देश ही बना पाये हैं। आज भारत विश्व के चार-पांच देशों की पंक्ति में खड़ा हो गया। भारत की सर्वत्र प्रशंसा हो रही है, दुनिया अब भारत को शक्तिशाली देश की तरह देखता है। हमारे वैज्ञानिकों, डॉक्टरों पर दुनिया का भरोसा और भी मजबूत हो गया है लेकिन विपक्ष नरेन्द्र मोदी की बुराई करते करते देश का हित भी भुला बैठा।

मुस्लिम नेताओं तथा मुल्ला-उलेमाओं ने भी वैक्सीन के खिलाफ बोला है कह रहे हैं कोई भी मुसलमान इसे न लगवाये। कोरोना जाति धर्म देख कर नहीं पकड़ता है। कितने मुसलमान भी कोरोना बीमारी से मर गये हैं। क्या मुसलमान डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मचारी वैक्सीन नहीं लगवायेंगे जिन्हें कोरोना मरीजों की सेवा लगे होने के कारण खतरा बना रहता है। अभी खबर ये भी है कि सउदी अरब ने कह दिया है कि हज में वही यात्री जा सकेगा जो कोरोना की वैक्सीन लगवा कर आयेगा अन्यथा उसे हज में नहीं आने दिया जायेगा। समझ नहीं आता हिन्दुस्तान के इस्लामिक धर्म गुरू क्यों दुनिया के दूसरे मुसलमानों से अलग चलते हैं अलग राय देते हैं। मुस्लिम वोटों के लिये तुष्टीकरण करनें में कई पार्टियों की सरकारों ने सभी हदें पार कर दीं। उनकी हर मांग को पूरा करनें की कोशिश की।

नरेन्द्र मोदी भारत को आत्मनिर्भर बनाने में देश को नई पहचान देने के लिये। सशक्त भारत की ओर अग्रसर कदम बढ़ाने के लिये तो बधाई के पात्र है। उन्हें गरीबों का स्तर उठाने के लिये बेसहारा मरीजों के इलाज की व्यवस्था करनें के लिये और विशेष तौर से सभी धर्मों के लिये समान अवसर, समान सुविधायें देने के लिये विपक्ष को बधाई देना ही चाहिये। विपक्ष बधाई दे न दे पर देश की फौज और देश के वैज्ञानिकों, डॉक्टरों पर उंगली न उठायें। चीन, पाकिस्तान से लड़ाई होने पर या देश में बनें रक्षा उपकरणों पर जीवन संजीवनी दवाओं के बननें पर कोरोना जैसी जानलेवा बीमारी की वैक्सीन बननें पर राजनैतिक लाभ उठानें की कोशिश से बाज आना चाहिये। कहीं एैसा न हो कि जनता एैसे गैर जिम्मेदाराना विपक्ष की आवाज ही आने वाले चुनाव में बन्द कर दे।

डॉ. विजय खैरा

 

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