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“देश के स्वाभिमान पर किसी भी तरह की चोट हम बर्दाश्त नहीं करेंगे”

“देश के स्वाभिमान पर किसी भी तरह की चोट हम बर्दाश्त नहीं करेंगे”

आज, जब वायुसेना की यह प्रतिष्ठित एकेडमी, अपनी गोल्डन जुबली से बस कुछ कदम दूर है, हम संकल्प लें, कि अपने राष्ट्र की सुरक्षा, सम्मान और उसके प्रति समर्पण को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। देश की रक्षा का हमारा दायित्व और कर्तव्य सर्वोपरि होगा, और हम किसी भी परिस्थिति के लिए हमेशा तैयार रहेंगे।

अब आप जिस संगठन के अंग हैं, उसका एक गौरवशाली इतिहास रहा है। देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा के लिए इंडियन एयरफोर्स ने जरूरत पडऩे पर, दुश्मनों के हौसले पस्त करने वाले शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन किया है।

1961 के ‘गोवा मुक्ति संग्राम’ से लेकर 65 के इंडो-पाक युद्ध’, 71 के ‘बांग्लादेश मुक्ति संग्राम’ और ‘लोंगेवाला’ में आपका प्रदर्शन, 84 के ‘ऑपरेशन मेघदूत’, 99 में ऑपरेशन ‘सफ़ेद सागर’ और हाल ही में ‘बालाकोट’ के कुछ ऐसे अध्याय हैं, जो न केवल वायुसेना के, बल्कि हमारे देश के इतिहास के गोल्डन चैप्टर्स हैं।

हमारे सैनिकों ने जिस तरह अपना सर्वस्व दांव पर लगाकर, देश की आन-बान-शान पर कोई आंच नहीं आने दी, वह अपने आप में एक मिसाल है। शुरू से लेकर अब तक, हमारे एयरक्राफ्ट भले बदल गए हों, इक्विपमेंट भी भले बदल गए हों, पर राष्ट्र की सुरक्षा का संकल्प, जोश और जुनून आज भी ठीक उसी तरह, एक विरासत के रूप में बरकरार है, जिसके आप ही वारिस हैं। अब इस विरासत को न केवल आपको सहेज कर रखना है बल्कि एक वारिस के तौर पर उसे और आगे भी ले जाना है। नॉर्थेर्न सेक्टर में हाल ही में हुए इंडिया-चाइना स्टेनडॉफ से आप सभी परिचित हैं। कोविड जैसे संकट के समय में चीन का यह रवैया उस देश की नीयत को दिखाता है। हालांकि हमने यह दिखा दिया है कि अब यह हमारा भारत कोई कमजोर भारत नहीं है। यह एक नया भारत है जो किसी भी तरह के ट्रान्स्ग्रेशन, एग्रेसन या सीमाओं पर किसी भी तरह के युनीलेटरल एक्शन का माकूल और मुक्कमल जवाब देने की कूवत रखता है। हमारे द्वारा उठाए गए कदमों की प्रसंशा और समर्थन कई बड़े देशों द्वारा भी हुई है, आप सब भी इससे अवगत होंगे।

हम किसी भी विवाद का समाधान, शांतिपूर्ण और बातचीत के जरिए ही निकालने में यकीन रखते हैं।

दोनो देशों के बीच मिलिट्री और डिप्लोमेटिक चैनल्स के जरिए बातचीत हो रही है। मैं आज के इस अवसर पर फिर से कहना चाहूंगा कि हम संघर्ष नहीं बल्कि शांति चाहते हैं। मगर देश के स्वाभिमान पर किसी भी तरह की चोट हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम किसी भी स्थिति का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

इसी तरह वेस्टर्न सेक्टर में, पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर आए दिन हमारा पड़ोसी कुछ न कुछ नापाक हरकतें करते रहता है। एक नहीं बल्कि चार युद्धों में मात खाने के बाद भी पाकिस्तान आतंकवाद के जरिए एक प्रॉक्सी वार लड़ रहा है। आतंकवाद की चुनौती के खिलाफ हमारी सेना, सुरक्षा बल और पुलिस पूरी मजबूती से मुकाबला कर रही है।

अब तो भारत आतंकवादियों के खिलाफ देश के भीतर ही नहीं बल्कि सीमा पार जाकर भी प्रभावी कारवाई कर रहा है। बालाकोट में इंडियन एयरफोर्स ने आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कारवाई करके सारी दुनिया को भारतीय सेना की ताकत और आतंक के खिलाफ उसके मजबूत इरादों से परिचित करा दिया है।

अब युद्ध के तरीके लगातार बदल रहे हैं और हमें उसी के हिसाब से, खुद को ढालना आवश्यक होगा। साथ ही इन चुनौतियों का दायरा भी बहुत व्यापक हुआ है। आज देश के सामने चुनौती केवल सरहदों या समुंदर के रास्ते ही नहीं बल्कि स्पेस और साइबरस्पेस के रास्ते भी आ सकती हैं।

मैं मानता हूं कि आने वाले दिनों में डिफेन्स केवल जल-थल-वायु की रक्षा तक ही सीमित नहीं रहेगा। यह एक ऐसा डायनामिक चैलेंज होगा जिसके लिए हमें आने वाले दिनों में खुद को तैयार करना होगा।

इसलिए अपने आप को लगातार अपडेट रखना आज के समय की जरूरत है। आने वाले संघर्षों में, और बेहतर करने के लिए आपके अंदर एक सोल्जर ही नहीं, एक स्कॉलर का भी होना जरूरी है।

इसलिए आप सभी टेक्नोलॉजीस और मिलिट्री स्ट्रैटेजीस की अपनी नॉलेज को अपडेट करते रहें। मेरा सुझाव है कि आप इतिहास से सीखें, वर्तमान को जानें और भविष्य की तैयारी करें।

हमारी आर्म्ड  फोर्सेज की सेवा का दायरा केवल युद्ध तक ही सीमित नहीं है। हमारी वायुसेना ने, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक ऐसी जिम्मेदारियां निभाई हैं, जो हमारी रक्षा तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। वह चाहे पीस ऑपरेशन्स हों, ह्यूमैनिटेरिअन ऐड हो तथा आपदा राहत कार्य हो, इंडियन एयरफोर्स की उसमें महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

इंडियन एयरफोर्स आज देश में फ़ोर्स मल्टीप्लायर  के साथ-साथ सप्लाई लाइन्स की मजबूती के लिए काम कर रही हैं। आज लद्दाख में मौजूद हमारी सेनाएं, जरूरी हथियारों, इक्विपमेंट, कपड़े और राशन से लैस हैं, तो उसमें इंडियन एयरफोर्स का पूरा योगदान है।

सुदूर क्षेत्रों में हमारा सैनिक, पूरे जोश के साथ तैनात है, तो उसके पीछे यह आत्मविश्वास है, कि किन्हीं भी कठिन परिस्थितियों में इंडियन एयरफोर्स हमारे साथ होंगी। भारतीय नागरिक भी, देश-दुनिया में कहीं भी अगर मुसीबत में फंसते हैं, तो उनके अंदर एक विश्वास रहता है कि हमारी सेनाएं उनके बचाव के लिए निकल चुकी होंगी। हमें नागरिकों के इस भरोसे को कायम रखना है।

हमारी सरकार ने, आर्म्ड फोर्सेज के अंदर एम्पावरमेंट और स्वदेशवाद को बढ़ावा देने के लिए हाल के दिनों में कई अहम कदम उठाए हैं। हमारी वायुसेना भी इससे अछूती नहीं है।

एक तरफ जहां हमने स्वदेशी ‘लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट’ तेजस को शामिल किया  और ऑपेरशनलाइज किया है, वहीं दूसरी और फिफ्थ जनरेशन मल्टीरोल फाइटर प्लेन, राफेल को भी शामिल किया है। इससे एयरफोर्स की कैपबिलिटी तो बढ़ी हैं साथ ही एयरफोर्स में एक नया कॉन्फिडेंस भी आया है। हाल में डिफेन्स में एफडीआई लिमिट में बढ़ोत्तरी, डिफेन्स मैन्युफैक्चरिंग की नई पालिसी, ऑर्डनेन्स फैक्ट्री बोर्ड का कॉरपोरेटीकरण जैसे कई कदम रिफार्म की दृष्टि में लिए गये हैं।

अपने प्रशिक्षण के दौरान आप लोगों ने, सेनाओं में जॉइन्ट्नेस के महत्व को समझा होगा। जिस समय आप यह महत्व अपनी किताबों में पढ़ रहे थे, लगभग उसी समय हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी लाल किले से, सेनाओं में जॉइन्ट्नेस बढ़ाने वाले कदमों की घोषणा कर रहे थे। सेनाओं की क्षमता को और अधिक बढ़ाने के लिए, सीडीएस और डीएमए की स्थापना की गई है।

आप लोगों को बताते हुए मुझे खुशी हो रही है, कि एयर डिफेन्स और मेरीटाइम कमांड के बारे में सोच-विचार एडवांस्ड स्टेज पर चल रहा है जो आने वाले समय में हमारी सेनाओं को इंटीग्रेटेड और कॉम्प्रिहेंसिव तरीके से काम करने में सहूलियत देगा।

हमारी आर्म्ड फोर्सेज के ऑफिसर्स के अच्छे संतोष के लिए, प्रोमोशंस और अन्य सुविधाओं से संबंधित मामलों में भी एक पॉजिटिव एप्रोच अपनायी गयी है। मैं आप सभी को यह भरोसा देता हूं कि आर्म्ड फोर्सेज और पर्सनेल के एम्पावरमेंट और वेलफेयर के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

 

राजनाथ सिंह

(यह लेख डंडीगल, हैदराबाद, में आईएएफ अकादमी में संयुक्त स्नातक परेड के अवसर पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के सम्बोधन के सम्पादित अंशों पर आधारित है)

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