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विश्वास सबसे बड़ा द्रुम है

विश्वास सबसे बड़ा द्रुम है

इस वैज्ञानिक युग में हम विज्ञान के चमत्कार को स्वीकार कर लेते हैं लेकिन, जिस विज्ञान को मानव ने बनाया है  उसी मानव के अंदर छुपे हुए चमत्कारिक शक्ति को स्वीकार करने में समय लगाते हैं। मानव ने स्वयं अपने अन्दर एक विराट शक्ति को छुपा के रखा है। यह शक्ति केवल उसके चिन्ता, विचार और चेतन द्वारा ही बंधा हुआ है। उसके मन में जन्म लेने वाला विश्वास कभी-कभी इतना क्रीयाशील हो जाता है कि उसे खुद को भी यह अंदाजा नहीं होता। देखा जाए तो विश्वास पर ही दुनिया टिकी है। मगर विश्वास भी गंभीर होना चाहिए। जब विश्वास दृढ़ हो जाता है तो वह अधिक-से-अधिक क्रियाशील हो जाता है। जब यही विश्वास एक से अधिक लोगों के साथ जुड़ जाता है तो करिश्मा दिखाता है।

विश्वास को मन में जन्म देने के लिए मन को पहले निर्मल और स्वच्छ करना जरूरी है। एक छोटा शिशु अपने निर्मल मन में यह विश्वास कर लेता है कि उसके हाथ से भगवान खाना खाएगा, उसके दृढ़ विश्वास के सामने स्वयं भगवान को भी झुकना पड़ता है। भक्त और भगवान के अंदर अगर कोई एक चीज कार्य करती है तो वो केवल भक्त का भगवान के प्रति प्रांगढ़ विश्वास है। भक्त अपने विश्वास के जरिए भगवान को बांधे रखता है।

प्रत्येक संपर्क का मेरूदंड विश्वास ही है। जहां विश्वास नहीं वहां सम्पर्क की दृढ़ता नहीं होती है।  हमारा विश्वास जितना सकारात्मक होगा हमारा जीवन उतना आनन्दमय होता है। जैसे एक व्यक्ति पर हम विश्वास करते हैं कि वह हमारे लिए कभी गलत काम नहीं करेगा, यदि उस व्यक्ति के अन्दर कहीं भी गलत सोच होगी वह पहले तो आपको धोखा दे सकता है लेकीन आपके मन में उसके प्रति रहने वाला विश्वास उसके मन को ठेस पहुंचाएगा और धीरे-धीरे वो व्यक्ति आपके विश्वास का पात्र बन जाएग। ठीक उसी तरह आपकी नकारात्मक सोच सही इंसान को भी गलत बना सकती है।

हमारे भारत वर्ष में गुरू-शिष्य की परंपरा बहुत अधिक मायने रखती है। यहां जितने भी गुरूओं ने जन्म लिया है उन्होंने न केवल अपना मार्गदर्शन किया है, बल्कि अनेक शिष्यों का भी मार्ग दर्शन किया है। गुरू कितना भी बड़ा हो अगर शिष्य का उनके प्रति विश्वास न हो तो कोई गुरू मंत्र कार्य नहीं कर पाता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि गुरू में उतनी शक्ति नहीं होती केवल शिष्य के मन में गुरू के प्रति विश्वास होता है तो उसका वहीं विश्वास उसके जीवन को बदल देता है। अगर रास्ते में पड़े हुए पत्थर को लोग भगवान मानकर हाथ जोड़ ले कभी-कभी उसी पत्थर के प्रति उनका विश्वास उनका भाग्य बदल देता है। ऐसा माना जाता है कि बीमार व्यक्ति अगर उसके चिकित्सक पर विश्वास नहीं करता तो उसका इलाज काम नहीं कर पाता है। किसी भी चीज की संपूर्णता विश्वास  के द्वारा होती है।

आजकल लोगों के अंदर विश्वास की कमी दिखाई देती है। भगवान के ऊपर, अपने ऊपर, अपनों के ऊपर हर जगह से विश्वास धीरे-धीरे लोप पाया गया है। माता-पिता को अपने बच्चों के ऊपर, पति को पत्नी के ऊपर, पत्नी को पति के ऊपर विश्वास हर वक्त रखना चाहिए। सबसे अधिक विश्वास व्यक्ति को परमात्मा के ऊपर रखना चाहिए, जिसने इस सृष्टि को बनाया है। वह जो भी करेंगे वह केवल हमारे भले के लिए ही हो सकता है। हम इस विश्वास में जी कर ही अपने जीवन को सुंदर बना सकते हैं।

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