ब्रेकिंग न्यूज़ 

कार्य विस्तार, समाज परिवर्तन, वैचारिक प्रबोधन के लिए काम करेगा संघ: दत्तात्रेय होसबले

कार्य विस्तार, समाज परिवर्तन, वैचारिक प्रबोधन के लिए काम करेगा संघ: दत्तात्रेय होसबले

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की दो दिवसीय बैठक का आयोजन पिछले 19-20 मार्च को  बेंगलुरु में हुआ। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने कहा कि संघ का कार्य समाज में आज अपरिचित नहीं है। देश-विदेश में संघ के बारे में जिज्ञासा है, प्रशंसा है व सहयोग भी है और संघ के कार्य का स्वागत भी सर्वदूर है, यह हम सबका प्रत्यक्ष अनुभव है। संघ को समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों से लेकर सर्वसामान्य तक स्नेह, आत्मीयता से सहयोग का अनुभव भी है। सरकार्यवाह बेंगलूरु में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के अंतिम दिन प्रेस वार्ता में संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण संघ का कार्य प्रभावित हुआ, नियमित शाखाएं नहीं लग सकीं। लेकिन कोरोना संकट के दौरान संघ कार्य का एक नया आयाम हमारे ध्यान में आया। घर में रहकर भी अपने कार्यकर्तत्व को, स्वयंसेवकत्व को जागृत, क्रियाशील रखने का कार्य स्वयंसेवकों ने किया। साथ ही सामाजिक दायित्व को भी स्वयंसेवकों ने निभाया। संकट के दौर में स्वयंसेवकों ने समाज के सहयोग से सबकी सेवा की। लाखों-करोड़ों की संख्या में लोगों तक दैनंदिन आवश्यकता और राहत सामग्री पहुंचाई।

सरकार्यवाह ने कहा कि इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया गया है। संकट के दौरान पूरा भारत एकजुट होकर खड़ा हुआ। महामारी का सामना करने के लिए समाज ने अपनी शक्ति का परिचय दिया। इस दौरान समस्त फ्रंटलाइन वर्कर्स ने अपना दायित्व निभाया, देश की भावी पीढ़ी उनके इस समर्पण से प्रेरणा लेगी। उन्होंने आशा जताई कि देश और विश्व जल्द ही इस समस्या से मुक्त होगी। भारत ने वेंटिलेटर, पीपीई किट, कोरोना जांच की तकनीक तथा जल्दी व सस्ती स्वदेशी कोरोना वैक्सीन के विकास एवं निर्माण के औद्योगिक नवाचारों के द्वारा हम इस आपदा को भी अवसर में परिवर्तित करने में सफल हुए। इस कठिन समय में समाज की आंतरिक शक्ति और प्रतिभा को प्रकट होने का अवसर प्राप्त हुआ। प्रतिनिधि सभा को पूर्ण विश्वास है कि भारतीय समाज सतत दृढ़ता एवं निश्चय के साथ इस महामारी के दुष्प्रभावों से मुक्त होकर शीघ्र ही सामान्य जीवन को प्राप्त करेगा।

श्रीराम मंदिर पर पारित प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय के सर्वसम्मत निर्णय, तत्पश्चात् श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र’ का गठन, अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को प्रारंभ करने हेतु किया गया अनुष्ठान एवं निधि समर्पण अभियान भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम पृष्ठ बन गया है, जो आने वाली पीढिय़ों को भी प्रेरणा देगा। जब तीर्थ क्षेत्र ने निधि संग्रह का अभियान लिया तो मंदिर आंदोलन में सहयोगी रहे संघ के स्वयंसेवकों ने सहयोग किया। इस अभियान के दौरान समाज का सहयोग व उत्साह ऐतिहासिक था। जहां स्वयंसेवक नहीं पहुंच पाए तो वहां के लोगों ने संपर्क करके स्वयं बुलाया। भारत में रहने वाले श्रीराम के साथ किस प्रकार जुड़े हैं, यह इस अभियान से सिद्ध हो गया।

ग्रामवासी-नगरवासी से लेकर वनवासी और गिरिवासी बंधुओं तक, सम्पन्न से सामान्य जनों तक सभी ने इस अभियान को सफल बनाने में अपना भरपूर योगदान दिया। इस अद्वितीय उत्साह व सहयोग के लिए प्रतिनिधि सभा सभी रामभक्तों का अभिनंदन करती है। इस अभियान ने एक बार पुन: यह सिद्ध किया है कि संपूर्ण देश भावात्मक रूप से सदैव श्रीराम से जुड़ा हुआ है।

अगले तीन वर्षों में हर मंडल तक पहुंचेगा संघ

संघ कार्य के विस्तार पर उन्होंने कहा कि अगले तीन वर्षों में भारत में संघ कार्य को हर मंडल तक पहुंचाने की योजना है। 58 हजार मंडलों तक संघ कार्य पहुंचाने को लेकर योजना बनी है। कोरोना संकट के कारण दीवाली तक शाखा नहीं लग सकी थी, उसके पश्चात आवश्यक गाइडलाइन का पालन करते हुए धीरे-धीरे शाखाएं प्रारंभ हुईं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि परिस्थितियां सुधरती हैं तो संघ न केवल मार्च 2020 की स्थिति को हासिल करेगा, बल्कि उससे आगे बढ़ेगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में परिवार प्रबोधन, गौ सेवा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन्हें आगे बढ़ाया जाएगा। संघ का उद्देश्य भेदभाव रहित हिंदू समाज का निर्माण करना है।

उन्होंने बताया कि आने वाले समय में ग्राम विकास और कृषि क्षेत्र में विशेष दृष्टि रखते हुए कार्य का आरंभ करेगा। 13 अप्रैल से संघ भूमि सुपोषण अभियान शुरू करने वाला है। कृषि क्षेत्र के तज्ञ लोगों ने प्रयोग करके सिद्ध किया है कि इन प्रयोगों से किसानों की स्थिति बेहतर बनाई जा सकती है। इस क्षेत्र में कार्य करने वाली संस्थाओं, संगठनों ने मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया है। इसे सामाजिक अभियान के रूप में चलाने का निर्णय लिया है। भूमि-सुपोषण से अर्थ है कि मृदा में आवश्यक तत्वों की कमी को दूर करने के लिए काम किया जाए।

भारत का नेरेटिव, वैचारिक पक्ष। भारत क्या है, भारत का अतीत, भारत का संदेश क्या है। पुरातन ज्ञान को नकारने से काम नहीं बनेगा, उसके आधार पर नए भारत का निर्माण। नई पीढ़ी की आवश्यकता के अनुरूप उसे कैसे विकसित करना। इसके लिए भारत के नेरेटिव को सही दृष्टि में रखने के एक वैचारिक प्रबोधन, वैचारिक अभियान की भी आवश्यकता है। इसलिए समाज परिवर्तन का बड़ा काम और वैचारिक क्षेत्र में परिवर्तन का काम, ये दोनों करना है तो संगठन की शक्ति को बड़ा करना पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि अभी हुए अभियान ने हमें अद्भुत प्रेरणा दी है। कार्य विस्तार, समाज परिवर्तन, वैचारिक प्रबोधन, तीनों पर काम करते हुए आगे बढ़ेंगे।

इस प्रतिनिधि सभा में राम मंदिर तथा कोरोना संकट के समय भारत द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रस्ताव पारित किए गए। इस प्रतिनिधि सभा में संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक दत्तात्रेय होसबले को भैया जी जोशी के स्थान पर सर-कार्यवाह बनाने का निर्णय लिया गया। इस आयोजित सभा में संघ ने हाई कमान में कई बदलाव भी किए। यहां नीचे प्रतिनिधि सभा में पारित किये गये प्रस्तावों के संपादित अंश प्रस्तुत हैं:-

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण भारत की अन्तर्निहित शक्ति का प्रकटीकरण

श्रीराम जन्मभूमि पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय का सर्वसम्मत निर्णय तत्पशात श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए सार्वजनिक न्यास -श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र का गठन, अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण कार्य को प्रारंभ करने हेतु किया गया अनुष्ठान एवं निधि समर्पण अभियान भारत के इतिहास का वह स्वर्णिम पृष्ट बन गया है जो आने वाली पीढिय़ों को भी प्रेरणा देगा। अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा का यह सुविचारित मत है कि उपयुक्त कार्यक्रमों से भारत की अंतर्निहित शक्तियों जागृत हुई है तथा ये कार्यक्रम आध्यात्मिक जागरण राष्ट्रीय एकात्मता, सामाजिक समरसता एवं सद्भाव और समर्पण के अद्वितीय प्रतीक बन गए हैं।

युगाब्द 5122 भाद्रपद कृष्ण द्वितीया (5 अगस्त 2020) को संपूर्ण विश्व उन क्षणों का साक्षी बनकर भावविभोर हो रहा था, जब भारत के माननीय प्रधानमंत्री संघ के पूजनीय सरसंघचालक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र के न्यासी एवं भारत के सभी मत-पथों के पूज्य धर्माचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति मंदिर निर्माण को प्रारंभ करने हेतु किये गए भव्य कार्यक्रम को आभामयी बना रही थी। भारत के सभी तीर्थो की पावन रज और सभी पवित्र नदियों के जल से यह अनुष्ठान सम्पन्न हुआ। कोरोना महामारी की भीषणता के समय किया गया यह कार्यक्रम सभी मर्यादाओं का पालन करते हुए सीमित संख्या का रखा गया था, परंतु इसका प्रभाव असीमित था। प्रत्यक्ष उपस्थिति तो मर्यादित थी। परंतु आभासी माध्यमो से समरत हिन्दू समाज इस कार्यक्रम में भागीदारी कर रहा था। समाज के सभी वर्गो और राजनैतिक दलों ने एकमत होकर इस कार्यक्रम का स्वागत किया था।

मकर संक्रांति के पवित्र दिन भारत के प्रथम नागरिक महामहिम राष्ट्रपति के निधि समर्पण और दिल्ली स्थित भगवान वाल्मीकि मंदिर से प्रारंभ हुआ 44 दिन का यह अभियान विश्व इतिहास का सबसे बड़ा संपर्क अभियान सिद्ध हुआ है। लगभग 55 लाख से अधिक नगर – ग्रामों के 12 करोड़ से अधिक रामभक्त परिवारों ने भव्य मंदिर निर्माण के लिए अपना समर्पण किया है। समाज के सभी वर्गों और मत-पंथो ने इस अभियान में बढ़-चढक़र सहभागिता की है। ग्रामवासी-नगरवासी से लेकर वनवासी और गिरिवासी बंधुओं तक सम्पन्न से सामान्य जनों तक सभी ने इस अभियान को सफल बनाने में अपना भरपूर योगदान दिया। इस अद्वितीय उत्साह व सहयोग के लिए प्रतिनिधि सभा सभी रामभक्तों का अभिनंदन करती है।

इस अभियान ने एक बार पुन यह सिद्ध किया है कि संपूर्ण देश भावात्मक रुप से सदैव श्रीराम से जुड़ा हुआ है। प्रतिनिधि सभा देश के सभी सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं शिक्षाविदो, प्रबुद्ध वर्गों सहित समस्त रामभक्तों का आवाहन करती है कि वे श्रीराम के आदर्शों को समाज में संचारित करने की दिशा में सार्थक प्रयास करें। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के साथ-साथ सभी के सामूहिक संकल्प और प्रयास से श्रीराम के जीवन-मूल्यों से प्रेरित सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन खड़ा होगा इसके आधार पर ही वैभवसम्पन्न सामर्याशाली भारत का मार्ग प्रशस्त होगा जो विश्व कल्याण की अपनी भूमिका का निर्वाह करेगा।

कोविड महामारी के सम्मुख खड़ा एकजुट भारत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा, वैश्विक महामारी कोविड-19 की चुनौती के संदर्भ में भारतीय समाज के उल्लेखनीय, समन्वित एवं समग्र प्रयासों को संज्ञान में लेते हुए तथा इसके भीषण परिणामों के नियंत्रण हेतु समाज के प्रत्येक वर्ग द्वारा निभाई गई भूमिका के लिए उसका हार्दिक अभिनंदन करती है।

जैसे ही इस महामारी तथा उसके हानिकारक परिणामों के समाचार आने प्रारम्भ हुए, केंद्र तथा राज्यों का शासन एवं प्रशासन तन्त्र तुरंत सक्रिय हो गया। जनसामान्य को इस रोग के लक्षण व उससे बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों से अवगत कराने हेतु देशभर में विभिन्न सृजनात्मक साधनों एवं मीडिया के सकारात्मक सहयोग द्वारा एक वृहद् जनजागरण का कार्य हुआ।

परिणामस्वरूप पूरे देश ने एकजुट होकर निर्धारित नियमों का पालन किया और प्रारम्भिक काल में अनुमानित विभीषिका से हम बच सके। कोरोना जांच तथा रुग्ण सेवा के कार्य में संलग्न सभी चिकित्सकों, नर्सों, अन्य स्वास्थ्य एवं स्वच्छता कर्मियों ने चुनौती को स्वीकार किया एवं अपने जीवन को खतरे में डालकर भी वे कार्य में जुड़े रहे। समाज के अनेक वर्गों जैसे सुरक्षा बल, शासकीय कर्मी, आवश्यक सेवाओं तथा वित्तीय संस्थाओं से जुड़े कर्मियों सहित, संगठित तथा असंगठित क्षेत्र से संबंधित अनेक समूहों की सक्रियता के कारण ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में दैनंदिन जीवन का प्रवाह सामान्यत: अबाधित रूप से चलता रहा। ये सभी कार्य और विभिन्न शासकीय विभागों के द्वारा किए गए समन्वित प्रयास यथा ‘‘श्रमिक ट्रेन’’, ‘‘वंदेभारत मिशन’’ और वर्तमान में चल रहा ‘‘कोविड टीकाकरण अभियान’’ सराहनीय है।

वैश्विक महामारी से जूझते हुए नि:स्वार्थ भाव से कर्तव्य पालन कर रहे अनेक कोरोना योद्धाओं ने अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। अ.भा.प्र. सभा हृदय की गहराइयों से उनके साहस और बलिदान का स्मरण करते हुए अपनी कृतज्ञता व्यक्त करती है। इस कालखण्ड में महामारी के कारण हजारों लोग काल ग्रसित हो गए। हम उन दिवंगत आत्माओं को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके शोक-संतप्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं।

भारत के सम्पूर्ण समाज ने इस अनपेक्षित घटनाचक्र से पीडि़त करोड़ों लोगों की राशन, तैयार भोजन, स्वास्थ्य सेवा, यातायात, आर्थिक सहायता आदि अनेक माध्यमों से सहयोग कर सेवा, आत्मीयता एवं सामाजिक एकजुटता की एक नई गाथा रची है। विविध धार्मिक, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों तथा सामान्य जनों ने जरूरतमंदों के घर-घर तक पहुंच कर उन्हें आवश्यक सहयोग दिया। अ.भा. प्रतिनिधि सभा ऐसी सभी संस्थाओं तथा व्यक्तियों द्वारा किए गए उनके नि:स्वार्थ एवं आत्मीयतापूर्ण व्यवहार के प्रति अपना साधुवाद व्यक्त करती है।

कोविड के प्रकोप एवं तत्पश्चात् हुए लॉकडाउन के कठिन समय में प्रवासी श्रमिकों सहित समाज के एक बड़े वर्ग को अनेक संकटों व चुनौतियों से जूझना पड़ा। परंतु अपने समाज ने उल्लेखनीय धैर्य एवं असाधारण साहस का परिचय देते हुए इस विषम एवं अनिश्चिततापूर्ण परिस्थिति का सामना किया। चिकित्सा सुविधाओं की अपर्याप्तता और नगरों से हो रहे पलायन के कारण व्यक्त किए गए सभी भीषण अनुमानों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में रही। वास्तविकता यह रही कि स्थानीय निवासियों द्वारा नगरों से आए इन लोगों की व्यवस्था एवं देखभाल प्रशंसा के योग्य रही।

इस कालखंड में कृषि उत्पादन सामान्य से अधिक हुआ और उद्योग जगत सहित साधारण आर्थिक परिदृश्य भी उत्साहवर्धक दिखाई दे रहा है। वेंटिलेटर, पीपीई किट, कोरोना जांच की तकनीक तथा जल्दी व सस्ती स्वदेशी कोरोना वैक्सीन के विकास एवं निर्माण के औद्योगिक नवाचारों के द्वारा हम इस आपदा को भी अवसर में परिवर्तित करने में सफल हुए। इस कठिन समय में समाज की आंतरिक शक्ति और प्रतिभा को प्रकट होने का अवसर प्राप्त हुआ।

इस वैश्विक संकट में भारत ने अपनी ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’ की परंपरा के अनुरूप प्रारंभिक काल में हाईड्रोक्सिक्लोरोक्विन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति तद्नंतर ‘‘वैक्सीन-मैत्री’’ अभियान द्वारा विश्व के अनेकानेक देशों की ओर सहयोग का हाथ बढ़ाया। भारत द्वारा किए गए समयोचित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की विश्व के अनेक नेताओं व देशों द्वारा प्रशंसा की गई।

इस महामारी में हमें अपनी समग्र वैश्विक दृष्टि, सदियों से चली आ रही परम्पराओं एवं विकेंद्रित ग्रामीण अर्थव्यवस्था की शक्ति तथा सामर्थ्य की अनुभूति भी हुई है। परंपरागत मूल्य बोध के अनुरूप हमारा दैनंदिन आचार-व्यवहार, परिवार के साथ मनोयोग से बिताया गया समय, संयमित उपभोग पर आधारित स्वस्थ जीवनशैली, पारंपारिक भोजन पद्धति एवं औषधियों के सेवन से प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि व रोगों की रोकथाम, योग और ध्यान के सकारात्मक परिणाम आदि इस कालखंड में उपयोगी सिद्ध हुए हैं। विश्वभर में अनेक विशेषज्ञों ने भारत की इस एकात्म दृष्टि और उस पर आधारित दैनंदिन जीवन के महत्व को स्वीकार किया है।

अ.भा. प्रतिनिधि सभा को पूर्ण विश्वास है कि भारतीय समाज सतत दृढ़ता एवं निश्चय के साथ इस महामारी के दुष्प्रभावों से मुक्त होकर शीघ्र ही सामान्य जीवन को प्राप्त करेगा। हम सबको यह ध्यान रखना होगा कि कोरोना के संकट से समाज अभी पूर्णतया मुक्त नहीं हुआ है। इस पृष्ठभूमि में संपूर्ण समाज से अपेक्षा है कि महामारी के उन्मूलन हेतु आवश्यक सूचनाओं व दिशा-निर्देशों का कठोरतापूर्वक पालन करें। अ.भा. प्रतिनिधि सभा समस्त समाज का आवाहन करती है कि महामारी के कालखंड में अनुभवों से प्राप्त पाठ जैसे सुदृढ़ परिवार व्यवस्था, संतुलित उपभोग व पर्यावरण संरक्षण को व्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में अपनाते हुए आत्मनिर्भरता एवं स्वदेशी के मंत्र को जीवन में उतारें।

 

उदय इंडिया ब्यूरो

Leave a Reply

Your email address will not be published.