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ओटीटी दोधारी तलवार

ओटीटी दोधारी तलवार

आज-कल ओटीटी, जिसे ‘ओवर द टॉप’ कहते है, की ही चारों और चर्चा है। ओटीटी ऐप तथा वेबसाइट के माध्यम से धारावाहिक या फिल्म को इंटरनेट के माध्यम से आसानी से देखा जा सकता है, जबकि  ऐसा पहले केबल और डीटीएच के माध्यम से ही संभव था।  आरम्भ में तो ओटीटी केवल कंटेंट होस्टिंग के लिए ही था, किन्तु बाद में ये प्लेटफॉर्म्स खुद का सिनेमा और धारावाहिक बनाने लगे। ओटीटी की बढ़ती लोकप्रियता को केजीएमजी मीडिया की 2018 की एक रिपोर्ट से मापा जा सकता है, जिसमें कहा गया है की 2023 तक भारत में ओटीटी का मार्केट 45 प्रतिशत तक हो जाएगा। लेकिन कोरोना के कारण सिनेमा हॉल के बंद होने की वजह से, इसकी मांग में काफी तेजी से वृद्धि हुई और इसने 45 प्रतिशत का लक्ष्य समय से पहले प्राप्त कर लिया है। और आज यह दुनियाभर सहित भारत तक में हर उम्र के लोगो को आकर्षित कर रहा है। जहां एक तरफ यह आज युवाओं के मनोरंजन का एक बड़ा साधन बना है, वहीं दूसरी तरफ इसने कई विवादों को भी जन्म दिया है। जैसा की हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही इसके भी अच्छे और बुरे दोनों परिणाम है। यदि हम इसके साकारात्मक पहलू की बात करें तो इसने आम लोगों को बिना भेद-भाव के फिल्मी दुनिया में काम करने के अवसर को काफी हद तक मुहैया कराया है। बुरे पहलू पर नजर डालें तो पता लगेगा की जिस प्रकार के कंटेंट मनोरंजन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर दिखाया जा रहा है, वह  चिंताजनक है। मामला और भी गंभीर हो जाता है क्योंकि आज सरकार का भी इसपर कोई नियंत्रण नहीं है। यहां यह बताना आवश्यक है कि ओटीटी कई वर्षों से है, लेकिन कोरोना काल में यह भारत में अपनी छाप छोडऩे में काफी सफल रहा। आज हर प्रकार के लोग इससे जुड़ चुके है। और ऐसा माना जाता है कि 2023 तक भारत में ओटीटी का कुल व्यापार 3 लाख 60 हजार करोड़ का होगा। इस पृष्टभूमि में सरकार ने हाल ही में गाइडलाइन्स जारी की जिसके तहत ऑनलाइन न्यूज पोर्टल और कंटेंट प्रोवाइडर सूचना एवं प्रशारण मंत्रालय के अंतर्गत आएंगे।

सरकार के इस कदम का समर्थन करने वाले लोगो का यह तर्क है कि जिस प्रकार से टेलीविजन न्यूज चैनल और अखबार के लिए नियम-कानून है, वैसे ही इसके लिए भी कानून आवश्यक है। जैसे बिना अनुमति के फिल्म की रिलीज होने की अनुमति नहीं है, वैसे ही बिना अनुमति के ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी दिखाए जाने वाले कंटेंट की अनुमति नहीं होनी चाहिए। यहां यह बताना आवश्यक है कि भारत के मेट्रो और छोटे शहरों में फिल्म लोगो के मनोरंजन का महत्वपूर्ण साधन है। बिना किसी संदेह के धारावाहिक और सिनेमा आज लोगों के जीवन में बदलाव लाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोग फिल्मों और धारावाहिकों के माध्यम से बोलचाल से लेकर रहन-सहन तक सीखते है, जिससे पता चलता है कि सिनेमा और धारावाहिक सभी  प्रकार से लोगों को प्रभावित करते है। कभी-कभार तो ओटीटी प्लेटफॉर्म्स भारत-विरोधी और धर्म-विरोधी कंटेंट के माध्यम से लोगो को प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाते हैं। और यह कहा जा सकता है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स आज नकारात्मक संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में यह कह सकते है कि आने वाले समय में भारत में  मनोरंजन  के क्षेत्र में पूरी तरह से डिजिटल ऑपरेटर्स का ही नियंत्रण होगा। आज फिल्म, वेब सीरीज और खेल-कूद की इवेंट्स हर चीज पर ओटीटी की सबसे अधिक पकड़ हैं। आज इसके सब्सक्राइबर भी लाखो-करोडो में पहुंच चुके है, इसलिए इस पृष्ठभूमि में कड़े कानून लाना सरकार की जिम्मेदारी बनती है की इन ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर नकेल कसी जाये।

 

Deepak Kumar Rath

दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

 

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