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ओटीटी का तांडव

ओटीटी का तांडव

लॉकडाउन के दौरान जब देश में सभी लोग अपने घरों में एक तरह से कैद थे, तो उस समय सबसे सुलभता से उपलब्ध मनोरंजन के सशक्त प्लेटफॉर्म के तौर पर ओटीटी प्लेटफार्म देश में उभरा था, देश में इस प्लेटफार्म का चलन बहुत तेजी से बढ़ा था, सिनेमा हाल बंद होने की वजह से अचानक बड़े-बड़े धुरंधर ओटीटी प्लेटफार्म पर आ गये थे, आज बहुत बड़ी संख्या में हर उम्र के दर्शक किसी ना किसी देशी या विदेशी ओटीटी प्लेटफार्म से जुड़े हुए हैं। भारतीय बाजार के मद्देनजर आये दिन भारतीय दर्शकों के लिए नयी फिल्म या वेब सीरीज ओटीटी प्लेटफार्म पर उपलब्ध होती है। ओवर द टॉप (ओटीटी) ने कई सालों पहले ही जमीन तलाश ली थी लेकिन कोरोना काल के आठ महीनों में इसने भारत में जड़ें जमा ली। दर्शकों का एक बड़ा वर्ग अब इससे जुड़ा हुआ है। अनुमान है कि 2023 तक केवल भारत में ही ओटीटी का बाजार 3.6 लाख करोड़ रुपए का होगा। आने वाले समय में इसके विस्तार को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऑनलाइन समाचार पोर्टल, ऑनलाइन कंटेंट प्रोवाइडर को सूचना एवं प्रसारण मंत्रलय के तहत लाने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। अब इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने ऑनलाइन मीडिया फिल्म और ऑडियो विजुअल प्रोग्राम के साथ ही सामाचार और करंट अफेयर्स कंटेंट को भी सूचना एवं प्रसारण मंत्रलय के अधीन लाने का फैसला किया है। 20 नवंबर 2020 को भारत सरकार ने एक गजट नोटिफिकेशन के जरिए यह जानकारी दी है। यह इसलिए जरूरी है कि अभी तक देश में डिजिटल कंटेंट के नियमन के लिए कोई स्वायत्त संस्था या कानून नहीं है। सरकार के  इस कदम को लेकर मनोरंजन की दुनिया से जुड़े लोगों की प्रतिक्रिया आना शुरू हो गया है। इंडियन फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स काउंसिल (आइएफटीपीसी) ने स्वागत किया तो जाने माने निदेशकों ने ट्वीट कर विरोध जताया।

क्या है नई गाइडलाइ ?

फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप पर नजर

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अपना मॉडरेटर रखना होगा जो इनके जरिए फैलाई जा रही सामग्री के लिए जिम्मेदार होगा। अगर उनके मॉडरेशन में गलती पाई गई तो सजा दी जा सकेगी।

सरकार दूसरे स्तर पर नियामक एजेंसी बनाएगी जिसमें हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज हो सकते हैं।

तीसरे स्तर पर सरकारी संस्थाएं होंगी जो इन प्लेटफॉर्म पर निगरानी रखेंगे और मामले सामने आने पर दोषी कंपनी को दंडित कर पाएंगे। उनकी सबसे अहम शक्ति सामग्री को ब्लॉक करने की होगी। इनके आदेश पर कुछ मामलों में कंपनियों को 24 घंटे में और बाकियों में 15 दिन में कार्यवाही करनी होगी।

यू’ से ‘ए’ की रेटिंग देनी होगी

नेटफ्लिक्स, अमेजॉन प्राइम, जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म को तीन स्तरीय निगरानी प्रणाली के तहत रखा जाएगा।

किसी शो को ‘यू’ (सभी के लिए उपयुक्त) से लेकर ‘ए’ (केवल वयस्कों के लिए) जैसी रेटिंग देनी होगी।

मैसेज पकडऩे के अधिकार

ऐसे मैसेजेस को पकडऩे के अधिकार सरकारी एजेंसियों को मिले है, जो उन्हें लगता है कि फर्जी हैं और लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह किसी एसएमएस की तरह हो सकता है, जिसे किसने शुरू किया, यह टेलीकॉम कंपनियों के जरिए पकड़ा जा सकता है। सोशल मीडिया कंपनियों को इसके लिए अपनी निजता नीति एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के नियमों में कुछ ढील देनी पड़ सकती है।

लेकिन फिलहाल मौजूदा स्थिति के बाद मन में अब प्रश्न यह उठता है कि आखिरकार हमारे देश में आये दिन अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली वेब सीरीजों के द्वारा देश के हर उम्र के लोगों के बीच जमकर अश्लीलता, फूहड़ता व गाली-गलौज क्यों परोसी जा रही है और बार-बार लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने का कार्य क्यों किया जा रहा है, हर बार वेब सीरीज व फिल्मों के देश-विदेश में निशुल्क प्रचार व जबरदस्त टीआरपी हासिल करने के लिए कोई ना कोई विवादित सीन उसमें डाल दिया जाता है, जिसके दम पर विवाद खड़ा करके दर्शकों को वेब सीरीज व फिल्म देखने के लिए आकर्षित करके ओटीटी प्लेटफार्म के द्वारा आम जनमानस की भावनाओं से खिलवाड़ करके जमकर धन कमाया जा रहा है। देश में मौजूदा समय में ओटीटी प्लेटफार्म के लिए कोई नियम-कायदे नहीं बने हुए है, जिसका यह लोग अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर गाली-गलौज व अश्लीलता परोस कर नाजायज फायदा उठा रहे हैं। और बार-बार घटनाओं की पुनरावृत्ति देखकर लगता है कि वेब सीरीज के निर्माताओं के लिए धन ही सभी कुछ हो गया है उसके लिए चाहे देश की सभ्यता का मानमर्दन ही क्यों ना करना पड़े।

बता दें कि फिल्मे जब बनती हैं तो उसे रिलीज करने से पहले केन्द्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड या सेंसर बोर्ड से पहले अनुमति लेनी होती है। सम्बंधित संस्था से अनुमति के बाद ही फिल्मे रिलीज की जाती हैं। वेबसीरीज जो की नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और हॉटस्टार जैसे ओटीटी एप के माध्यम से इन्टरनेट पर डायरेक्ट रिलीज की जाती है इन पर कोई भी लगाम नहीं होता न ही कोई सेंसर बोर्ड की पूर्व अनुमति लेनी होती है। किसी भी विषय पर वीडियो स्ट्रीमिंग की जाती है। ओटीटी का फुल फॉर्म ओवर द टॉप (ह्र1द्गह्म्-ञ्जद्धद्ग-ञ्जशश्च) होता है। यह ऐसे प्लेटफॉर्म को कहा जाता है जो इंटरनेट के जरिए वीडिओ या अन्य मीडिया कंटेंट उपलब्ध करते है।

ओटीटी शब्द का उपयोग सामान्य रूप से वीडियो ऑन डिमांड प्लेटफॉर्म के लिए किया जाता है। ओटीटी कंटेंट लोगों को इंटरनेट के जरिए उपलब्ध कराया जाता है। वीडियो  स्ट्रीमिंग सर्विस दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही है। अमेरिका में ओटीटी प्लेटफॉर्म बहुत ज्यादा लोकप्रिय है और पिछले कुछ समय में ओटीटी सेवायें भारत में भी लोकप्रिय हो रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में मनोरंजन के लिए ओटीटी कंटेंट सबसे ज्यादा देखे जाएंगे। ओटीटी एप के द्वारा फिल्म या टेलीविजन कंटेंट उपलब्ध कराया जाता है, जो ग्राहकों के लिए उनकी मांग के अनुसार उपलब्ध होता है या इसे उनकी आवश्यकता के अनुरूप बनाकर दिया जाता है। इसी सन्दर्भ में वर्तमान में कुछ ऐसे भडक़ाऊ, अशोभनीय, निंदनीय, संस्कार विहीन, वेबसीरीज भारतीय गौरवशाली संस्कृति, इतिहास के साथ छेड़ छाड़ करके, धार्मिक भावनाओं का अपमान करके दर्शकों को दिखाया जा रहा है। इन पर कोई लगाम न होने के कारण नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिये वेब सीरीज युवाओं में काफी लोकप्रिय हो रहे है।

प्रश्न यह उठता है कि आखिर आज यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है पहले भी ऐसी चलचित्र बनाकर दिखाए जा रहे हैं? बात यहां सिर्फ मनोरंजन से सम्बंधित नही है न ही किसी अभिनेता या अभिनेत्री के व्यवसाय से भी सम्बंधित नहीं है और ऐसा भी नहीं है कि पूर्व में ऐसे कंटेंट फिल्मों के माध्यम से नहीं दिखाए जा रहे हैं लेकिन विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए बीते दिनों केन्द्रीय प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी के द्वारा एक सीरीज पर आपत्ति जताई गई जिसमे एक बच्ची को सेक्सुअलाइज किया जा रहा है। दूसरा, साथ ही साथ यह शिक्षा जगत से जुड़ा है, एक महिला शिक्षिका जो कि इसमें मुख्य किरदार निभा रही है जिससे एक शिक्षिका की समाज में, छात्रों के मध्य छवि को खराब किया जा रहा है। मनोरंजन के नाम पर कुछ भी परोस दिया जा रहा है। अनियंत्रित रूप से अश्लीलता को दिखाया जा रहा जो कि भारतीय संस्कृति और समाज के अनुकूल नहीं है इस सन्दर्भ में सरकार को कुछ सख्त नीति बनानी चाहिए जिससे इस तरह के वेब सीरीज पर प्रतिबन्ध या नियंत्रण लगाया जा सके। देश का एक जिम्मेदार नागरिक होने के कारण छात्रों के चरित्र निर्माण, संस्कार, नैतिक मूल्यों, मानवीय मूल्यों का ह्रास न हो इस बात को ध्यान में रखकर मुखर रूप से हमें इस मुद्दे को उठाने की जरुरत है।

 

नीलाभ कृष्ण

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