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भविष्य के लिए अधिक चुनौतियां

भविष्य के लिए अधिक चुनौतियां

एक साल का उल्लासपूर्ण शासन काल पूर्ण करने पर एनडीए शासन अपनी उपलब्धियों को उजागर करने के लिए कई केन्द्रिय मंत्रियों के साथ अपनी पहली वर्षगांठ के अवसर पर भव्य समारोह के  आयोजन की योजना बना रही है। एनडीए सरकार की उपलब्धियों को संप्रेषित करने के लिए देश भर में बड़े पैमाने पर साप्ताहिक मीडिया अभियान की योजना बना रही है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी कांग्रेस पार्टी और वामपंथी दल मोदी सरकार के एक साल के कार्य को शून्य या नकारात्मक करार दे रही हैं, उनका मानना है कि मोदी सरकार अपने चुनावी वायदे ”अच्छे दिन’’ लाने में विफल रही है।

मोदी सरकार के एक साल के शासन काल के विशलेषण से पता चलता है कि मोदी सरकार ने अपने एक साल के शासन काल में भ्रष्टाचार की जांच पर काफी अच्छे से ध्यान दिया, अर्थिक स्थिति में सुधार और विकास में तेजी लाई है। वो बात अलग है कि मोदी विदेश में जमा काला धन वापस लाने के अपने वायदे को पूरा नहीं कर पाए। सरकार ने सामाजिक क्षेत्र के आवंटन में कमी करके कॉर्पोरेट जगत का समर्थन किया। यूपीए सरकार के एक के बाद एक घोटाले सामने आने के बाद लोग यूपीए सरकार से पूरी तरह से निराश हो चुके थे जिसके चलते वो बदलाव चाहते थे जिसकी वजह से पूर्ण बहुमत के साथ मोदी को सत्ता में लाया गया। मोदी सरकार से उन्हें काफी उम्मीदे हैं। लेकिन जैसे रोगी को ठीक होने में वक्त लगता है वैसे ही एक अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित होने में वक्त लगता है। पिछले एक साल के मोदी शासन में कोई वित्तीय घोटाला सामने नहीं आया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि दस साल के शासन में यूपीए सरकार ने घोटालों के जरिए लाखों करोड़ों वसूले हैं। जबकि अपने एक साल के कार्यकाल में एनडीए सरकार का एक भ्रष्टाचार का मामला देखने को नहीं मिला है।

मोदी के शासन में राष्ट्र को उसके वास्तविक स्थिति में लाने के लिए, मजबूत और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को सुधारने का श्रेय दिया जा रहा है। इस काम की शुरूआत मोदी ने अपने 26 मई 2014 से ही शुरू कर दी थी। जब उन्होंने सभी पड़ोसी देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के लिए निमंत्रण भेजा था। पिछले एक साल की अवधि में मोदी ने विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों को सुधारने के अथक प्रयास किए हैं। इस दौरान मोदी ने कई देशों की यात्राएं की जिसमें देश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए अन्य राष्ट्रों के साथ बड़ी संख्या में समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर हुए। यही नहीं नेपाल में आए भूकंप प्रभावित लोगो को समय पर राहत पहुंचा कर क्षेत्रीय शक्ति के रूप में भी मोदी ने भारत को बल दिया है। मोदी को विदेशों में बसे भारतीयों के बीच भी काफी प्रसिद्धि हासिल हो रही है। हालांकि विपक्षी विदेशी धरती पर पिछले शासन की आलोचना और ‘घोटाला भारत’ जैसी टिप्पणी करने से देश की छवि धूमिल करने के लिए उन्हें दोष देते नहीं थक रहे हैं पिछले एक साल के दौरान देश की अर्थिक स्थिति में सकारात्मक संकेत दिखाई दिए हैं। वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कह कि यूपीए सरकार की घोर पूंजीवाद की नीति को सुधार और उदारीकरण द्वारा प्रतिस्थापित किया गया है।

मोदी ने ‘मेक इन इंडिया’ योजना की शुरूआत की ताकि देश में विनिर्माण क्षेत्र में विदेशी और घरेलू निवेशकों को लुभाया जा सके और देश में अधिक-से-अधिक रोजगार पैदा किया जा सके। हालांकि इस एमओयू के भाग्य का भविष्य में ही निर्णय लिया जाएगा। इस विषय में आरोप है कि मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए भी करोड़ो रूपये के ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए लेकिन वो सिर्फ कागजी ही है। सरकार देश में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए लोगों में कौशल विकास के लिए अलग से एक मंत्रालय का गठन कर रही है, लेकिन बेरोजगारी कमी और रोजगार में सुधार भविष्य में ही देखने को मिलेगा। मोदी शासन काल में विभिन्न योजनाओं के लागू होने पर विपक्षी सवाल उठा रही है कि मोदी ने पूर्व सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि यूपीए शसन में डॉलर की तुलना में रूपये में काफी गिरावट आई थी, लेकिन मोदी के शासन में भी हालत जस के तस ही है। साथ ही मोदी ने 100 स्मार्ट सिटी की स्थापना और बुनियादी ढांचे के विकास की घोषणा की थी उस पर भी कुछ खास नजर नहीं आया। काफी धूम-धाम के साथ ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरूआत के बावजूद साफ-सफाई की वस्तुओं के आवंटन में कमी की गई। यही नहीं शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास, समाज के गरीब और कमजोर वर्गों की वृद्धि और विकास के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाएं पर भी कुछ खास असर पड़ता नहीं दिखाई दे रहा है।

पिछले एक साल के दौरान मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण विधेयक  संशोधन को संसद में मंजूर दिलाना था,क्योंकि विपक्षी दल एकजुट होकर इसका विरोध करते रहे ताकि मोदी बार-बार अध्यादेश का मार्ग अपनाते रहें। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि, असमय बरसात और ओलों की वजह से फसले बर्बाद हो गई जिसके चलते किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं लेकिन, मोदी सरकार ने किसानों के प्रति किसी भी तरह की कोई सहनूभूति नहीं जताई है। ग्रामीण रोजगार योजना के आवंटन में भी कमी आई है जिसकी वजह से गरीबों की अजीविका पर असर पड़ा है। मोदी सरकार को किसान विरोधी, गरीब विरोधी और कॉर्पोरेट समर्थन होने की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जिसे मोदी सरकार दूर करने की कोशिश में लगे हैं।

हालांकि मोदी सरकार यूपीए द्वितीय के शासन की तुलना में संसद में अच्छे प्रदर्शन का श्रेय ले रही है। पिछले एक साल में देखा गया कि संसद में कम व्यवधान के बीच अधिक बिलों को मंजूरी दी गई है। लेकिन कुछ एक बिल जैसे भूमि अधिग्रहण बिल, जीएसटी बिलों को राज्यसभा में बहुमत का आभाव होने  की वजह से बाधा का सामना करना पड़ा। हिंदुत्व एजेंडे की मांग करके कुछ तत्व सरकार के लिए असहजता की स्थिति उत्पन्न कर रहे है। कई जगह चर्च पर आक्रमण की खबरों ने भी आग में घी डालने का काम किया है। हालंकि मोदी ने इन तत्वों को नियंत्रित करने के लिए सही कदम उठाये हैं। हालांकि लोगो को विकास में अधिक-से-अधिक गति, कम मुद्रास्फीति, अधिक रोजगार सरकार को जल्द-से-जल्द उपलब्ध कराने चाहिए। क्योंकि मोदी सरकार से लोगों को काफी उम्मीदे हैं और लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए मोदी को सभी योजनाओं को सफलतापूर्व लागू करना बहुत जरूरी है।

अन्नपूर्णा झा

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