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क्या है कोवर्ट ऑपरेशन?

क्या है कोवर्ट ऑपरेशन?

हर प्रकार के रक्तरंजित संघर्ष का केंद्र बने कराची में आतंकवादियों ने एक बस पर अंधाधुध गोलीबारी करके 43 इस्मालिया शिया लोगों की नृशंस हत्या कर दी। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा असिफ ने भारत की खुफिया एजेंसी रॉ पर आरोप लगाया कि वो पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ाने का काम कर रही है। उसका काम पाकिस्तान को दुनिया के नक्शे से खत्म करना है। पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष राहिल शरीफ ने इस बयान का समर्थन किया है। एमएमक्यू नामक राजनीतिक दल के प्रमुख अल्ताफ हुसैन ब्रिटेन में रहते हैं। आरोप यह है कि भारत एमएमक्यू को मदद करके कराची में आतंकवाद फैला रहा है। आठवें दशक में भी कराची में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी तब भी इसी तरह का आरोप लगाया गया था कि इंदिरा गांधी के नेतृत्व में भारत सरकार कराची में अशांति फैला रही है।

पाकिस्तान के ये आरोप नए नहीं हैं। बलूचिस्तान में आजादी के लिए आंदोलन चल रहा है। पाकिस्तान का आरोप है कि बलूचिस्तान के आतंकवादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को भारत मदद दे  रहा है। अभी भारत बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के 600 से ज्यादा कार्यकत्र्ताओं को प्रशिक्षण दे रहा है। जिससे बलूचिस्तान को पाकिस्तान से आजाद करने में सहायता मिलेगी। पिछले दिनों पाकिस्तान मुस्लिम लीग के सहसचिव और पत्रकार मुर्शिद हुसैन ने आरोप लगाया कि भारत अफगानिस्तान के जरिये पाकिस्तान और अफगानिस्तान में गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष ने भारत के सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल का जिक्र किया है, कि अजित डोवाल की कोशिश के चलते भारत ने पाकिस्तान में आतंकवाद फैलाकर पाकिस्तान के टुकड़े करने की कोशिश की  है।

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दूसरी तरफ लगातार यह खबरें फैलाई जा रही हैं कि भारत ने कोवर्ट ऑपरेशन डिवीजन बंद कर दिया है। तब सवाल खड़ा होता है कि सच्चाई क्या है? इस तरह की खुफिया गतिविधियों के बारे में हमारे देश के अखबारों में कभी कुछ नहीं छपता। लेकिन इस बारे में पाकिस्तानी अखबारों में जानकारियां छपती हैं। पाकिस्तान में कुछ भी हो उसका दोष भारतीय सेना या भारतीय खुफिया एजेंसियों पर मढ़ा जाता है। पाकिस्तान सरकार भारतीय खुफिया एजेंसियों का इस्तेमाल जनता को भारत के खिलाफ एकजुट होने के लिए करतीं है। क्या भारत की खुफिया एजेंसियों ने सचमुच पाकिस्तान में गड़बड़ करने की कोशिश की है। नौवें दशक में प्रधानमंत्री इंद्रकुमार गुजराल ने भारत के द्वारा पाकिस्तान में चलाए जा रहे कोवर्ट ऑपरेशन बंद करने का फैसला किया था। आज पाकिस्तान ने 200 से 250 तक सीक्रेट एजेंट तैयार किए हैं जिनकी मदद से वह भारत में आतंकवादी कार्रवाईयां करता है। पाकिस्तानी अखबार यह मानकर चलते हैं कि इस तरह के सेल भारत ने भी पाकिस्तान में तैयार किए होंगे।

1960 के दशक में गठित सीआईटी-एक्स कहा जाने वाला यह प्रकोष्ठ पाकिस्तान के भीतर गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बनाया गया था, जिसका नेतृत्व एक अतिरिक्त सचिव के हाथ में होता था, लेकिन रॉ के पाकिस्तान डेस्क से इसे अलग रखा जाता था। ‘एक्स मैन’ कहे जाने वाले इसके सदस्य प्रशिक्षित हमलावर जासूसों को पाकिस्तानी शहरों में विस्फोटक रखने के लिए प्रविष्ट करवाते थे और इसकी सूचना सीधे एजेंसी के प्रमुख को देते थे।

रॉ के एक पूर्व ऑफिसर बताते हैं, ‘हम सिर्फ हल्के बम रखवाते थे, ताकि भारत के खिलाफ पाकिस्तान के सीक्रेट वार की लागत बढ़ सके।’ सीआईटी-एक्स को इंदिरा गांधी ने पुनर्जीवित किया था और बाद में राजीव गांधी ने अस्सी के दशक की शुरुआत में इसे चालू रखा, जब पाकिस्तान पंजाब के भीतर खालिस्तानी आतंकवाद की लपटों को हवा दे रहा था। इस दौरान पाकिस्तान के भीतर जवाबी हमलों के लिए एक्स जासूसों का इस्तेमाल किया जाता था। इस गोपनीय शाखा के बारे में सबसे पहली जानकारी रॉ के एक पूर्व ऑफिसर बी.रमन की 2007 में आई पुस्तक ”द काओबॉयज ऑफ रॉ’’ में मिलती है।

रमन रॉ को इस ‘छद्म गतिविधि’ के माध्यम से पुनर्जीवित करने का श्रेय जोखिम उठाने वाले रॉ प्रमुख ए. के. वर्मा के तीन साल के कार्यकाल को देते हैं। वे लिखते हैं, ”वर्मा ने रॉ को पैने दांत दिए जो 1977 से गायब थे और दोबारा उसे काटने के काबिल बना दिया।’’ सीआईटी-एक्स को 1997 में प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने बंद कर दिया, जिनका मानना था, कि दक्षिण एशिया में विवादों के शांतिपूर्ण निबटारे से संबंधित उनके ‘गुजराल सिद्धांत’ का ऐसे छद्म अभियान का उल्लंघन करते हैं। इसके बाद से ही गुप्तचर एजेंसियां कहने लगी हैं, कि वे फील्ड एजेंटों का इस्तेमाल सिर्फ इंसानों से जुड़ी जासूसी गतिविधियों के लिए करती रही हैं।

एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी कहते हैं, ”चाहे सैन्य टुकडिय़ों की आवाजाही की सूचना लेनी हो या फिर किसी इलाके में जंगी टैंकों के घुसने की स्थिति का पता लगाने के लिए मिट्टी का नमूना लेना हो, जासूसी उपग्रह जैसी तकनीकों के आने के बावजूद जमीनी स्तर पर ऐसे एजेंटों का कोई विकल्प अब तक पैदा नहीं हुआ है।’’ पुराने जासूस ऐसी कहानियां खूब सुनाते हैं।

PAGE 12-19_Page_4हमें एक बात ख्याल रखनी चाहिए कि जासूसों को पाकिस्तान में घुसाना लंबी प्रक्रिया होती है। इसमें पंद्रह से बीस साल लग सकते हैं। उसे अगर अचानक बंद कर दिया गया तो फिर बनाने में पंद्रह से बीस साल लग सकते हैं। एक सच्चाई यह है 1971 के युद्ध से पहले भारतीय सेना ने बांग्लादेशी मुक्ति वाहिनी को प्रशिक्षण देकर पाकिस्तान के खिलाफ लडऩे में मदद की थी। इस सत्य को स्वीकर करना पड़ेगा। उस समय जब भारतीय सेना बांग्लादेश में घुसी तब उन्हें मुक्ति वाहिनी से ही खुफिया और अन्य जानकारियां मिलीं। इस बारे में कई पुस्तकें लिखी गई हैं। लेकिन, पाकिस्तान में भारत के कोई आतंकवादी हरकते किए जाने के बारे में कोई पुस्तक या भारतीय समाचार पत्रों में कोई लेख प्रकाशित नहीं हुआ।

1984 में इंदिरा गांधी की हत्या खालिस्तान समर्थक आतंकवादी द्वारा किए जाने के बाद प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने खुफिया एजेंसी द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करवाई थी। जिन खालिस्तानियों की मदद पाकिस्तानी सेना व पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां कर रही हों उन्हें वहीं खत्म किया जाए। इस ऑपरेशन को सीआईटी एक्स और ऑपरेशन सीआईटीजे नाम दिया गया था। ऐसा माना जाता है कि राजीव गांधी और इंदिरा गांधी के शासन काल में हमारी खुफिया एजेंसियों और भारतीय सेना ने पाकिस्तान की जमीन पर कुछ कार्रवाईयां करने में सफलता मिली थी। लेकिन 1997 के बाद ये सारी कार्रवाइयां रोक दी गईं। ऐसा प्रधानमंत्री गुजराल के आदेश पर किया गया था। अभी पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक भारत में मोदी सरकार आने के बाद सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल के आने के बाद पाकिस्तान में फिर इस तरह कि कार्रवाईयां करने का निर्णय लिया गया है। उसके दो उदाहरण है बलूचिस्तान आर्मी और एमएमक्यू को मदद करना। एमएमक्यू भारत से पाकिस्तान गए मुसलमानों का संगठन और राजनीतिक दल है। भारत से पाकिस्तान गए मुसलमान ज्यादातर कराची में ही बसे हैं जहां एमएमक्यू पार्टी का वर्चस्व है। इसलिए ऐसा कहा जाता है कि भारत की खुफिया एजेंसियां उनकी मदद कर रही होंगी। यदि सचमुच भारतीय खुफिया एजेंसियां पाकिस्तान में इस तरह कि कार्रवाईयां कर रही होंगी तो उनसे हमें क्या फायदा और नुक्सान है?

नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेते ही कुछ ऐसी नियुक्तियां की जिसके दम पर ही अगले 5 साल बेहद सुकून के साथ गुजारे जा सकते हैं। सबसे पहले तो नियमों को बदलकर उन्होंने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को अपना प्रमुख सचिव बनाया और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) का पद भूतपूर्व खुफिया विभाग के वरिष्ठ अधिकारी अजीत डोवाल को दिया। ये दोनों ऐसे पद हैं जिसकी सलाह प्रधानमंत्री सबसे ज्यादा लेते हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल हमेशा से गुप्त अभियानों के पक्ष में रहे हैं। बताया जाता है कि डोवाल ने कई सालों तक पाकिस्तान में ही रहकर वहां की खुफिया जानकारी इकट्ठा की थीं। इसी तर्ज पर अब डोवाल एक ऐसे ऑपरेशन को अंजाम देंगे जिसके तहत मोस्ट वांटेड दाऊद और सईद को भारत लाया जा सकेगा।

यहां यह सवाल उठता है कि कहां हैं हाफिज सईद और दाऊद? मीडिया में आई खबरों के मुताबिक, भारत में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने दाऊद इब्राहिम को कराची से हटाकर अफगानिस्तान सीमा के नजदीक के इलाके में भेज दिया है। यह इलाका तालिबान के प्रभाव में माना जाता है। वहीं, 26/11 का मास्टर माइंड हाफिज सईद लाहौर में रहता है। पाकिस्तानी पुलिस की निगरानी में वह एक कंपाउंड में रहता है, जिसके भीतर घर, दफ्तर और मस्जिद मौजूद हैं। अमेरिका ने भी उसके सिर पर करीब 60 करोड़ रुपए का इनाम रखा हुआ है, लेकिन बावजूद इसके सईद पाकिस्तान में बड़ी-बड़ी रैलियां करता है और भारत के खिलाफ जहर उगलता है। दिलचस्प बात यह है कि जिस अमेरिका ने उसके सिर पर इनाम रखा है, उसी देश के मशहूर अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के रिपोर्टर ने सईद का इंटरव्यू लाहौर में उसके घर में फरवरी, 2013 में किया। क्या होता है ओवर्ट और कोवर्ट ऑपरेशन? सिक्युरिटी के मामले में दो तरह के ऑपरेशन होते हैं। पहला ओवर्ट और दूसरा कोवर्ट। ओवर्ट ऑपरेशन वह ऑपरेशन होता है, जिसकी घोषणा पहले से ही कर दी गई हो। यानी उसकी जानकारी दुनिया के सामने हो। उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में इन दिनों चल रहा ऑपरेशन जर्ब-ए-अज्ब ऐसा ही ऑपरेशन है। इस ऑपरेशन में पाकिस्तानी फौज आतंकवादियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर रही हंै। पाकिस्तान सरकार ने इस ऑपरेशन की घोषणा पहले से ही कर दी थी। वहीं, कोवर्ट ऑपरेशन बहुत ही गुप्त तरीके से किया जाता है। इस ऑपरेशन के बारे में बहुत ही सीमित लोगों को जानकारी होती है। कई बार ऐसे ऑपरेशन के नतीजे भी दुनिया के सामने नहीं आ पाते हैं। कोवर्ट ऑपरेशन का अच्छा उदाहरण मई, 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिका की ओर से ओसामा बिन लादेन के खिलाफ किया गया ऑपरेशन नेप्च्यून स्पियर था।

पाकिस्तान को भारत में आतंकवाद फैलाने में ज्यादा सफलता मिली है भारत को पाकिस्तान में आतंकवाद को फैलाने या कार्रवाईयां करने में बहुत ही कम सफलता मिली है। हमें ध्यान रखना जाहिए कि पाकिस्तान 1972 से भारत में आतंकवाद फैला रहा है या छद्मयुद्ध लड़ रहा है। भारतीय सेना की ताकत बहुत जबरदस्त है फिर भी 1999 के बाद पाकिस्तान से पारंपरिक युद्ध नहीं किया। पाकिस्तान हर बार धमकी देता है कि यदि भारत ने पाकिस्तानी पारंपरीक तरीके से हमला किया तो पाकिस्तान उसके जवाब में एटम बम का हमला कर सकता है। इस कारण अमेरिका परंपरागत युद्ध की पद्धति बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करने दे रहा। क्योंकि पाकिस्तान ने सारी दुनिया को डराने के लिए परंपरागत युद्ध का इस्तेमाल किया है। हमें पाक समर्थित आतंकवाद से अपनी रक्षा करने के लिए केवल रक्षात्मक कार्रवाईयां कर रहे हैं। यानी अपनी सीमा पर कड़ा बंदोबस्त करना या शहरों में आतंकवादी हमले होने पर दोषियों को पकडऩे की कोशिश जैसे सुरक्षात्मक उपाय करने के लिए भी पुलिस की और खुफिया पुलिस की संख्या बढ़ाने पर भी भारी पैसा खर्च करना पड़ता है। इसलिए पाकिस्तान द्वारा की गई आतंकवादी कार्रवाई के जवाब में बलूचिस्तान आर्मी और एमएमक्यू को मदद करना प्रभावी जवाब होता है।

दरअसल पाकिस्तान को उसकी दवा चखाई जानी चाहिए। पाकिस्तान में बलूचिस्तान और एनडब्लूएफपी आदि राज्य बुरी हालत में है। वहंा अलगाववादी ताकतें सक्रिय हैं। भारत भी इन राज्यों में असंतोष और आक्रोश बढ़ाने के लिए सभी तरह के उपाय अपना सकता है। एक बार पाकिस्तानी थलसेना के सैनिकों को प्राण गंवाने पड़ेंगे तब ही वे पाकिस्तानी आतंकवाद को समर्थन देना रोकेंगे।

(सतीश पेडणेकर) 

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