ब्रेकिंग न्यूज़ 

बंगाल में राजनीतिक हिंसा का तांडव

बंगाल में राजनीतिक हिंसा का तांडव

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने शासन की बागडोर संभाल ली है। पुलिस महकमे में अपने मनपसंद अफसरों को पदों पर आसीन कर दिया है। बावजूद इसके, बंगाल चुनाव 2021 के बाद शुरू हुई हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। अब तक भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे थे, लेकिन अब केंद्रीय मंत्री पर भी हमला हो गया। जी हां, बंगाल में केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन पर हमला हुआ है। सोशल मीडिया पर इसका वीडियो वायरल हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता इस वीडियो को ट्वीट करके ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस से सवाल कर रही है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर ममता बनर्जी पर हमला बोला। कहा- कितने शर्म की बात है। आपमें इतना साहस आ गया कि पश्चिमी मेदिनीपुर में आप अपने लोगों को केंद्रीय मंत्री पर हमला करने के लिए उकसाती हैं। क्या यह फर्जी वीडियो है? संबित पात्रा ने आगे पूछा कि क्या आपने बंगाल को किलिंग फील्ड (हत्या के मैदान) में नहीं तब्दील कर दिया। आपके कार्यकाल में शासन प्रायोजित हिंसा का दौर पूरी दुनिया देख रही है। आपको बता दूं कि शपथ लेने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दावा किया था कि राज्य में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जायेगी। जो भी हिंसा करेगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगले ही दिन जब प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राहुल सिन्हा के साथ वी. मुरलीधरण पश्चिमी मेदिनीपुर पहुंचे, तब एक इलाके में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उन पर हमला कर दिया।

चौंकाने वाली बात यह है कि केंद्रीय मंत्री की सुरक्षा में पुलिस की पायलट कार होने के बावजूद सैकड़ों तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उनकी कार पर हमला किया। कार के शीशे तोड़े, कार पर ईंट-पत्थर बरसाये और लाठी-डंडे से लगातार हमला किया। जैसे-तैसे ड्राइवर ने जिधर रास्ता मिला, उधर गाड़ी भगाकर केंद्रीय मंत्री की जान बचायी। हमले का जो वीडियो सामने आया है, उसमें देखा जा सकता है कि केंद्रीय मंत्री ड्राइवर के पास वाली सीट पर बैठे हुए हैं। पीछे से हमलावर लगातार लाठी-डंडे से हमले कर रहे हैं। गाड़ी के कांच तोड़े जा रहे हैं, ईंट-पत्थर बरस रहे हैं। पीछे से पुलिस की पायलट कार आगे निकलने के लिए हॉर्न दे रही है। ड्राइवर ने समझदारी दिखाते हुए पुलिस की पायलट कार को साइड नहीं दी, जिसके कारण हमलावर पुलिस की कार पर हमला नहीं कर पा रहे थे। इस तरह केंद्रीय मंत्री की जान बची।

22-2

गौरतलब है कि दिन पहले  ही भाजपा ने ममता बनर्जी के बयान को ट्वीट किया था। चुनाव प्रचार के दौरान ममता बनर्जी ने एक जनसभा में सार्वजनिक रूप से कहा था कि बाद में तो हम ही रहेंगे, तब हम देख लेंगे। भाजपा ने कहा है कि चुनाव से पहले नंदीग्राम की रैली में ममता दीदी ने यह बयान दिया था। भाजपा ने आगे लिखा- स्पष्ट है, बंगाल में जो कुछ भी हो रहा है, उसकी तृणमूल कांग्रेस ने बहुत पहले से तैयारी कर ली थी। भाजपा ने ममता बनर्जी से कहा है कि आपको देश को इस बात का जवाब देना ही होगा कि क्या लोकतंत्र ऐसा होता है? हालांकि पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। जबकि, लापरवाही बरतने के आरोप में तीन पुलिस कर्मियों को सस्पेंड भी किया गया है। वहीं, हमले को लेकर बीजेपी ने टीएमसी के गुंडों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। केंद्रीय राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने ट्वीट करके खुद पर हमले करने का वीडियो जारी किया था। इस मामले से सियासी तूफान आ गया था। केंद्रीय राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा था कि उन पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया, जिसके बाद उन्हें यात्रा छोटी करके लौट जाना पड़ा। उनकी गाड़ी की खिड़कियां टूट गई थीं। हमले में उन्हें चोट नहीं लगी। केंद्रीय राज्यमंत्री वी मुरलीधरन पर हमले के बाद सियासी घमासान तेज होता जा रहा है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हमले को लेकर टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पर सीधा हमला किया जबकि, बीजेपी का आरोप है कि पुलिस की मौजूदगी में वी मुरलीधरन पर हमला किया गया। हमले के दौरान वहां मौजूद पुलिस तमाशबीन बनी रही। अब हमले को लेकर तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव रिजल्ट के बाद लगातार हिंसा की घटनाएं सामने आ रही हैं। बीजेपी के मुताबिक बंगाल में जारी हिंसा में कम से कम 16 लोगों की हत्या की जा चुकी है। जबकि, एक लाख से ज्यादा लोग घरों को छोड़कर दूसरी जगह जा चुके हैं। सीएम ममता बनर्जी ने भी हिंसा से सख्ती से निपटने के आदेश दिए हैं। इन सबके बीच लगातार हिंसा की घटनाएं हो रही हैं। यहां तक कि केंद्रीय राज्यमंत्री वी मुरलीधरन पर भी हमला किया गया।

बंगाल में चुनावी रिजल्ट के बाद हिंसा की घटनाएं जारी है। इसी बीच बंगाल में दो बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या की खबर सामने आई। बीजेपी का दावा है कि पश्चिम बंगाल में दोनों बीजेपी कार्यकर्ताओं की निर्मम तरीके से हत्या की गई है। राज्य के कई इलाकों में बीजेपी कार्यकर्ताओं के घरों को जलाने का दावा भी किया गया है।

33

बीजेपी का कहना है कि पूर्व बर्दवान के केतुग्राम में 22 साल के बलराम माजी पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया। इस हमले में बीजेपी कार्यकर्ता बलराम माजी की हत्या कर दी गई। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल विधानसभा क्षेत्र में बीजेपी नेता विश्वजीत महेश की हत्या करने का भी आरोप लगाया गया है। बीजेपी ने दोनों कार्यकर्ताओं की तस्वीरें जारी करके टीएमसी पर पश्चिम बंगाल में अस्थिरता और हिंसा फैलाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पश्चिम बंगाल में चुनाव रिजल्ट के बाद जारी हिंसा से राजधानी कोलकाता भी अछूता नहीं है। कोलकाता के जादवपुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी कैंडिडेट रिंकू तस्कर के घर पर हमले की भी खबर सामने आई है।

33बताया जाता है कि टीएमसी के गुंडों ने घर में लूटपाट भी की है। यहां तक कि सामानों को लेकर भाग गए। बीजेपी का दावा है कि उत्तर 24 परगना जिले के मिनाखां और बामनपुकुर इलाके में करीब पांच सौ बीजेपी कार्यकर्ताओं के घरों पर हमले करके उन्हें जान से मारने की धमकियां दी गई हैं। बीजेपी का आरोप है कि टीएमसी के गुंडों की धमकी से बड़ी संख्या में बीजेपी समर्थक अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगहों पर जाने को मजबूर हुए हैं। जारी हिंसा का जायजा लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की चार सदस्यीय टीम राज्य के दौरे पर हैं।

दूसरी तरफ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पश्चिम बंगाल के दौरे पर दावा किया था कि चुनाव रिजल्ट निकले के बाद जारी हिंसा में कम से कम 20 बीजेपी समर्थकों की हत्या की गई है। टीएमसी के गुंडों की धमकियों से डरकर एक लाख से ज्यादा लोग अपने घरों को छोड़ चुके हैं। जबकि, पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने हिंसा पर सख्ती बरतते हुए हिंसा के शिकार लोगों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए मुआवजा देने का एलान किया है। बंगाल में राजनीति से जुड़ी हिंसा की घटनाएं नई बात नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में राजनीति हिंसा की शिकार आम जनता के दुख और तकलीफों पर मुआवजे का मरहम लगाने की बात भी नई नहीं है। इन सबके बीच बड़ा सवाल यह है कि आम जनता को हिंसा में सबसे ज्यादा तकलीफ क्यों होती है? क्यों उनके ही घर को जला दिया जाता है? क्यों उनकी दुकानों में ही लूटपाट की जाती है? आम जनता तो अपनी सरकार चुनती है। आखिर इन्हें ही सबसे ज्यादा निशाना क्यों बनाया जाता है?

सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में केंद्रीय राज्यमंत्री वी मुरलीधरन की गाड़ी पर हुए हमले में कुछ लोग गिरफ्तार होते हैं। कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जाता है। हिंसा के शिकार एक दर्जन से ज्यादा लोगों के परिवारों को दो-दो लाख मुआवजे का एलान किया गया है। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है बंगाल में रिजल्ट के बाद जारी हिंसा के कारण एक लाख लोगों को घर छोडऩा पड़ा है। इनकी सुध कौन लेगा? दरअसल, दो मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का रिजल्ट निकला था। बंगाल में चुनाव प्रचार, रिजल्ट डे और रिजल्ट के बाद भी राज्य के विभिन्न जिलों से हिंसक घटनाएं रिपोर्ट की जा रही हैं।

बीजेपी का आरोप है कि राजनीतिक हिंसा में 20 लोगों की मौत हुई है। टीएमसी के गुंडे राज्य में हिंसा का तांडव कर रहे हैं। जबकि, ममता बनर्जी का आरोप है कि हिंसा में बीजेपी, टीएमसी और तीसरे मोर्चे के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों को दो-दो लाख रुपए के मुआवजे का एलान भी किया गया है। सीएम ममता बनर्जी ने किसी भी सूरत में हिंसा बर्दाश्त नहीं करने की बात कही है। लेकिन, हिंसा हो रही हैं। दूसरी तरफ बंगाल में हिंसा से जुड़े मामलों की जांच करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की चार सदस्यीय टीम राज्य के दौरे पर है। केंद्र का आरोप है कि राज्य सरकार से हिंसा की घटनाओं को लेकर सवाल किए गए और उसने चुप्पी साध ली। बात बंगाल में राष्ट्रपति शासन की भी हो रही है। सीएम ममता बनर्जी का दावा है कि बीजेपी ने जनादेश को स्वीकार नहीं किया है और सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है।

यहां जिक्र करना जरूरी है कि केंद्रीय राज्य मंत्री वी मुरलीधरन पर हमले के मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, तीन पुलिसकर्मी भी सस्पेंड हो चुके हैं। बड़ा सवाल फिर वही है कि सरकार चुनने वाली आम जनता का कसूर क्या है? क्यों राजनीति से जुड़ी हिंसा का उन्हें ही ज्यादा नुकसान होता है? जारी हिंसा के बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय की चार सदस्यीय टीम बंगाल दौरे पर पहुंची है। टीम ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मुलाकात की और राज्य में जारी हिंसा से जुड़ी जानकारी ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम की बैठक में बातचीत के मुद्दे क्या रहे, इसका खुलासा नहीं हो सका है। सूत्रों की मानें तो राज्य में जारी हिंसा को लेकर बैठक में चर्चा हुई है। बताते चलें कि पश्चिम बंगाल में रिजल्ट के बाद हिंसा को लेकर राज्यपाल से गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट मांगी है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ के ऑफिस के मुताबिक शुक्रवार की सुबह दस बजे केंद्रीय गृह मंत्रालय की चार सदस्यीय बैठक करने राजभवन पहुंची थी। टीम ने राज्यपाल के साथ करीब एक घंटे बैठक की। इसके पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम ने बंगाल के मुख्य सचिव अलापन बंद्योपाध्याय, गृह सचिव एचके द्विवेदी और डीजी वीरेंद्र के साथ भी मीटिंग की थी। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने हिंसा पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी थी। बताया जाता है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम दौरे से लौटने के बाद दिल्ली में बंगाल हिंसा पर रिपोर्ट सौपेंगी। बता दें कि कुछ दिन पहले पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद शुरू हुई हिंसा को लेकर पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्य के राज्यपाल जगदीप धनखड़ से फोन पर जानकारी ली थी।

E0wL2uGVoAMcDyT

5 मई को शपथ ग्रहण के बाद भी राज्यपाल ने सीएम ममता बनर्जी को हिंसा पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी राज्य सरकार से हिंसा को लेकर रिपोर्ट की मांग की थी। राज्य सरकार ने रिपोर्ट देने में आनकानी की। जिसके बाद चार सदस्यीय विशेष टीम को बंगाल भेजा गया है। विधानसभा चुनाव का रिजल्ट निकलने के बाद हुई हिंसा में कम से कम 16 लोगों की मौत हुई है। इन घटनाओं के पीछे टीएमसी समर्थकों का हाथ बताया जाता है। बीजेपी का दावा है टीएमसी के गुडों ने बीजेपी समर्थकों की बेरहमी से हत्या की है। जबकि, टीएमसी ने बीजेपी पर राज्य में हिंसा फैलाने का आरोप लगाया है।

5 मई को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी बंगाल दौरे पर हिंसा पीडि़तों से मुलाकात की थी। इसके साथ बंगाल से हिंसा की राजनीति को हमेशा के लिए खत्म करने का संकल्प कार्यकर्ताओं-समर्थकों के साथ लिया था। आसनसोल के भाजपा पार्टी कार्यालय में डेढ़ सौ परिवार के सदस्यों ने शरण ले रखा है। इनका कहना है कि तृणमूल के लोग इनपर अत्याचार कर रहे हैं और नाहक परेशान कर रहे हैं, जबकि तृणमूल ने इससे इंकार किया है। केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने सभी से मुलाकात की और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। देखा जाए तो पूरे बंगाल में हिंसा का तांडव हो रहा है।

ममता पर साध्वी का हमला

ममता बनर्जी पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बड़ा हमला किया है। प्रज्ञा ने तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी को राक्षसी ताड़का की संज्ञा दे डाली है। उन्होंने कहा है कि बंगाल में ताड़का का शासन हो गया है। साध्वी ने कहा है कि एनआरसी और राष्ट्रपति शासन ही बंगाल को बचा सकता है। मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ताड़का बताया। ममता बनर्जी ने तीसरी बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। प्रज्ञा ने ट्वीट किया, मुमताज लोकतंत्र। हिंदुओं, भाजपा के बंगाल के कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्या, बलात्कार। हे कलंकिनी… बस्स्स। 154233994_1336798416679838_4872531838968452365_nबंगाल में चुनाव के बाद जारी हिंसा पर उन्होंने आगे लिखा-शठे शाठ्यम समाच्चरेत, टिट फॉर टैट करना ही होगा। राष्ट्रपति शासन और एनआरसी (राष्ट्रीय नागिरक पंजी) बस यही उपाय हैं। प्रज्ञा ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा- संतों और वीरों की भूमि पर ताड़का का शासन हो गया। अब तो राम बनना ही होगा। जय श्री राम। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा- असम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में भाजपा की विजय यह संदेश देती है कि जनता ईमानदार है। उसने (प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी नीत सरकार द्वारा किये गये विकास कार्यों का धन्यवाद देकर आगे और विकास के लिए भाजपा को चुना। जयतु-जयतु भाजपा। ज्ञात हो कि भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने बुधवार को दावा किया पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में हुई हिंसा में भाजपा के कम से कम 14 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गयी, जबकि एक लाख के करीब लोग अपना घर छोडऩे को मजबूर हुई वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि जिन इलाकों में हिंसा और झड़प हो रही है, वहां पर भाजपा चुनाव जीती है। ममता बनर्जी को शपथ दिलाने के बाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने उन्हें नसीहत दी थी कि वह राज्य में कानून का राज स्थापित करें। इस पर ममता बनर्जी ने कहा था कि राज्य में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जायेगी। तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ने राजभवन में यह भी कहा कि जो भी लोग हिंसा में लिप्त पाये जायेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। ममता बनर्जी ने बुधवार (5 मई) को लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

 

हिंसा में मारे गए लोगों को मुआवजा – ममता

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि बंगाल में चुनाव बाद हुई हिंसा में मारे गये लोगों को बिना भेदभाव के दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया जायेगा।ममता बनर्जी ने कहा कि इलेक्शन कमीशन के अनुसार चुनाव बाद हुई हिंसा में 16 लोग मारे गये जिनमें से आधे टीएमसी के और आधे भाजपा के थे, एक व्यक्ति संयुक्त मोर्चा का था। mamatabanerjeeeci-1618236641ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि भाजपा के लोग पूरे प्रदेश में घूम रहे थे और लोगों को उकसा रहे थे। वे अपनी हार को स्वीकार करना ही नहीं चाह रहे थे। नयी सरकार का गठन हुए 24 घंटे भी नहीं हुए और वे लेटर भेजने लगे अपने नेताओं को बुला लिया। दरअसल वे जनादेश को स्वीकार करना ही नहीं चाहते। मैं उनसे यह आग्रह करती हूं कि वे जनादेश को स्वीकार करें। गौरतलब है कि बंगाल में चुनाव बाद जमकर हिंसा हुई। भाजपा का आरोप है कि टीएमसी के गुंडों ने भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं को पीटा।

 

टीएमसी के जावेद खान सबसे अमीर नेता

नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामे के मुताबिक इस बार विधानसभा चुनाव के रिजल्ट में जीत का स्वाद चखने वाले 158 कैंडिडेट्स करोड़पति हैं। पार्टी के हिसाब से देखें तो इसमें टीएमसी के 132 और बीजेपी के 25 कैंडिडेट्स शामिल हैं। सबसे अमीरविजयी कैंडिडेट की बात करें तो टीएमसी के पूर्व मंत्री जावेद खान के पास सबसे ज्यादा संपत्ति है।

Javed Khan

उनकी कुल संपत्ति 32 करोड़ रुपये है। दूसरे नंबर टीएमसी के एमएलए विवेक गुप्ता हैं, उनकी संपत्ति 31 करोड़ रुपये है। तीसरे नंबर पर टीएमसी विधायक और पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी का नाम आता है। मनोज तिवारी ने अपनी कुल संपत्ति 20 करोड़ रुपये बताई है।

चुनाव में जीतने वाले करोड़पति कैंडिडेट

कुल करोड़पति विजेता      : 158

टीएमसी            : 132

बीजेपी               : 25

रिजल्ट में टॉप थ्री करोड़पति विजेता

जावेद खान (टीएमसी)     : 32 करोड़

विवेक गुप्ता (टीएमसी)     : 31 करोड़

मनोज तिवारी (टीएमसी)   : 20 करोड़

 

113 विजयी उम्मीदवारों पर गंभीर मामले दर्ज

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव का रिजल्ट निकल चुका है। टीएमसी ने तीसरी बार बहुमत का आंकड़ा हासिल किया है। जबकि, टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार बंगाल की सीएम की कुर्सी संभाली है। इस बार पश्चिम बंगाल में 294 में से 292 सीटों पर वोटिंग हुई है। जंगीपुर और शमशेरगंज विधानसभा सीट पर 16 मई को वोटिंग होने जा रही है। इन दोनों सीटों पर मैदान में उतरे एक-एक कैंडिडेट की कोरोना संक्रमण से मौत होने के बाद चुनाव को टाल दिया गया था। रिजल्ट के बाद एडीआर की रिपोर्ट से पता चलता है नवनिर्वाचित कई विधायकों पर गंभीर मामले दर्ज हैं। वेस्ट बंगाल इलेकशन वाच और एडीआर की रिपोर्ट से पता चलता है कि नवनिर्वाचित 292 में से 142 विधायकों पर आपराधिक (केस) मामले चल रहे हैं। unnamed कुल विजयी विधायकों में इनकी 49 प्रतिशत भागीदारी है। जबकि, 113 विजयी उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। 113 विजयी कैंडिडेट्स पर हत्या, हत्या की कोशिश, महिला हिंसा से जुड़े गंभीर मामले दर्ज हैं। पिछले चुनाव में (2016 में) जीते 107 के कैंडिडेट्स के खिलाफ आपराधिक मामले थे। इस बार इनका प्रतिशत 49 फीसदी हो गया है। पार्टी के हिसाब से बात करें तो सत्तारूढ़ टीएमसी के निर्वाचित 213 में से 91 और बीजेपी के 77 में से 39 विधायकों पर आपराधिक मामले हैं।

आपराधिक केस    : 142
गंभीर मामले        : 113
टीएमसी               : 91
बीजेपी                  : 39

 

कोलकाता से संजय सिन्हा

Leave a Reply

Your email address will not be published.