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मनोचिकित्सा : बेशुमार संभावनओं का कॅरियर

मनोचिकित्सा : बेशुमार संभावनओं का कॅरियर

देश भर में डिप्रेशन और आत्महत्या की तेजी से बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक लेटेस्ट रिपोर्ट की मानें तो एक सौ पैंतीस करोड़ से भी अधिक आबादी वाले भारत में आज प्राय: हर तीसरा व्यक्ति किसी-न-किसी रूप में डिप्रेशन की समस्या से जूझ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के ही एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार अपने देश में प्रत्येक वर्ष  2 लाख से भी अधिक लोग आत्महत्या कर लेते हैं।

यदि स्टूडेंट्स के द्वारा सुसाइड की घटनाओं का जिक्र करें तो तथ्य और भी चौंकाने वाले हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के एक रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक घंटे एक स्टूडेंट सुसाइड कर लेता है।  इस तरह प्रत्येक दिन औसतन 28 स्टूडेंट्स सुसाइड कर लेते हैं। कुल मिलकर डिप्रेशन और आत्महत्या के ये डरावने आंकड़े हमारे मानसिक स्वास्थ्य की अत्यंत खराब दशा और खतरनाक अंदेशे की तरफ इशारा करते हैं।

देश में मानसिक समस्याओं की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए मनोचिकित्सक (साइकेट्रिस्ट्स) की उपलब्धता की स्थिति भी अत्यंत ही दयनीय है। नेशनल सर्वे ऑफ मेंटल हेल्थ रिसोर्सेज के लेटेस्ट डाटा की मानें तो देश में वर्तमान में कुल मनोचिकित्सकों की संख्या 9000 है। देश में कुल एक लाख की जनसंख्या पर मनोचिकित्सकों की संख्या केवल 0.75 हैं जबकि जरूरत के हिसाब से यह 3  होने चाहिए।

मनोचिकित्सक का जॉब प्रोफाइल

साइकेट्रिस्ट एक डॉक्टर होता है जो मानसिक व्याधियों की पहचान, रोकथाम और इलाज में स्पेशलाइज्ड होता है। मानसिक रोगियों को दवाइयां प्रेस्क्राइब करने के साथ उनकी मुख्य जिम्मेदारी निम्नांकित होती है –

  • विभिन्न प्रकार की मानसिक बीमारियों का इलाज करना।
  • मेंटल प्रॉब्लम्स के रोगियों को रोग शमन में उनकी सहायता करना।
  • रोगी के उसकी मानसिक समस्या की हिस्ट्री और उसके सभी मेडिकल रिकार्ड्स का स्टडी करके स्थायी निदान ढूंढऩा।
  • मानसिक व्याधियों से ग्रस्त रोगियों की काउंसलिंग करना और आवश्यक होने पर दवाइयां प्रेस्क्रायिब करना।
  • रोग के उपचार के लिए रिलैक्सेशन थेरेपी, साइकोथेरेपी और अन्य तकनीकों का उपयोग करना।
  • रोगियों के साथ व्यक्तिगत स्तर पर कार्य करना।
  • मनोचिकित्सक के बनने के लिए अनिवार्य व्यक्तिगत दक्षता

मनोचिकित्सक के रूप में करियर का कार्य आसान नहीं होता है। मानसिक रूप से परेशान, व्यथित, अवसाद और तनाव से ग्रस्त लोगों के मन को समझना और उनकी परेशानियों को सच्चे दिल से महसूस करना एक कठिन कार्य है। धैर्य और साहस इस करियर के मूलमंत्र हैं। इच्छुक उम्मीदवार में सेवा भाव के साथ आत्मविश्वास भी आवश्यक है। दूसरों के दु:ख के साथ सच्ची सहानुभूति, उनके दर्द को सुनने के लिए धैर्य और संवेदनशीलता और भी आवश्यक है।

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अनिवार्य शैक्षिक योग्यताएं

मनोचिकित्सक के रूप में करियर के इच्छुक उम्मीदवारों को अनिवार्य रूप से एमबीबीएस पास होने चाहिए। इसके लिए शुरुआत बारहवीं कक्षा के लेवल पर से ही हो जाती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक अभ्यर्थियों को बारहवीं कक्षा बायोलॉजी स्ट्रीम के साथ पास करनी होती है। एमबीबीएस की डिग्री के लिए आल इंडिया लेवल की नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट) अच्छे रैंक के साथ पास करनी होती है।

एमबीबीएस की डिग्री के बाद मनोचिकित्सा में एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) की डिग्री हासिल करनी होती है। यह पोस्टग्रेजुएशन का कोर्स होता है जो तीन वर्ष का होता है। इसके अतिरिक्त एक और आप्शन के रूप में कैंडिडेट एमबीबीएस करने के बाद किसी मान्यताप्राप्त इंस्टिट्यूट से दो वर्ष का साइकियाट्रिक मेडिसिन में डिप्लोमा (डीपीएम) प्राप्त कर सकता है।

अन्य आप्शन के रूप में एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद कैंडिडेट डिप्लोमा ऑफ नेशनल बोर्ड एग्जामिनेशन (डीएनबी) प्राप्त कर सकता है जो कि एमडी डिग्री के ही समान होता है।

कोर्स के प्रकार

साइकाइट्री में एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) का कोर्स काफी जटिल और विस्तृत होता है। इस कोर्स में न्यूरोलॉजी, साइकोलॉजी, फिजियोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, बायोकेमिस्ट्री के अतिरिक्त सोशल साइकाइट्री, फॉरेंसिक साइकाइट्री, चाइल्ड साइकाइट्री शामिल किये जाते हैं। इतना ही नहीं इस कोर्स में मानसिक अस्पतालों में भी प्रशिक्षण दिया जाता है।

साइकाइट्री में स्पेशलाइजेशन के प्रकार

साइकाइट्री में एमडी की पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट्स को विभिन्न प्रकार के स्पेशलाइजेशन के कोर्स में मनपसन्द आप्शन का चुनाव करना होता है जिसके वे स्पेशलिस्ट बनना चाहते हैं। साइकाइट्री में निम्नांकित डोमेन में स्पेशलाइजेशन किया जा सकता है-

  • सब्सटेंसियल एब्यूज थेरेपी : ये स्पेशलिस्ट ड्रग्स और अल्कोहल के एडिक्ट्स का ट्रीटमेंट करते हैं।
  • चाइल्ड एंड एडोलसैंट्स साइकाइट्री : इसके अंतर्गत 19 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और किशोरों के प्रॉब्लम्स का ट्रीटमेंट किया जाता है।
  • एडल्ट साइकाइट्री : इसके स्पेशलिस्ट 19 और उससे अधिक उम्र के लोगों के मेंटल डिसऑर्डर्स का समाधान करते हैं।
  • साइकोसोमाटिक मेडिसिन : साइकोसमैटिक का डोमेन इमोशन और माइंड से जुड़े प्रॉब्लम्स से संबंध रखता है। ये स्पेशलिस्ट्स ऐसे रोगियों के डायग्नोसिस करके उनका ट्रीटमेंट करते हैं।
  • इमरजेंसी साइकाइट्री : साइकाइट्री का यह डोमेन आपातकाल में संकट की स्थिति में फंसे रोगियों के ट्रीटमेंट से जुड़ा होता है। इसके अंतर्गत पुराने मेंटल डिसऑर्डर, डिप्रेशन और स्ट्रेस से जूझ रहे और आत्महत्या की कोशिश किये हुए रोगियों जिन्हें कि इमरजेंसी लेवल पर ट्रीटमेंट और केयर की जरूरत होती है, की समस्याओं का निदान किया जाता है।
  • जेरिअट्रिक साइकाइट्री : जेरिअट्रिक में स्पेशलाइजेशन बुजुर्ग लोगों के इमोशनल और मेंटल प्रॉब्लम्स से संबंध रखता है।

साइकाइट्री की स्टडी के लिए देश भर में निम्न संस्थान काफी प्रसिद्ध हैं –03

  • आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली (एम्स)।
  • क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु।
  • पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़।
  • पंडित भगवत दयाल शर्मा पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, रोहतक।
  • आम्र्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे।
  • डी. वाई. पाटिल मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, पुणे।
  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज, बेंगलुरु।
  • विद्यासागर इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज (विमहान्स), दिल्ली।

जॉब्स के अवसर की उपलब्धता

एक साइकेट्रिस्ट के लिए जॉब्स हॉस्पिटल, रिहैबिलिटेशन सेंटर्स, प्राइवेट क्लीनिक, मानसिक अस्पताल में बड़े पैमाने पर उपलब्ध होते हैं।

देश में निम्न हॉस्पिटल्स साइकेट्रिस्ट को रिक्रूट करती है-

  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज, (निमहंस) बेंगलुरु।
  • आम्र्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे।
  • आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली (एम्स)।
  • क्रिस्चियन मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर, तमिलनाडु।
  • पोस्टग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, चंडीगढ़।
  • इंस्टिट्यूट ऑफ बेहवियर एंड अलाइड साइंसेज, नई दिल्ली।

इसके अतिरिक्त मनोचिकित्सक की डिमांड स्वंयसेवी संस्थानों के द्वारा भी किया जाता है। एजुकेशनल इंस्टिट्यूट्स साइकोलॉजिस्ट और साइकेट्रिस्ट के रूप में काउंसलर की  अनिवार्य रूप से नियुक्ति करती है। मानसिक चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में भी मेंटल हेल्थ का डिपार्टमेंट होता है जहां मनोचिकित्सकों की नियुक्ति की जाती है।

साइकेट्रिस्ट और प्राइवेट प्रैक्टिस

मनोचिकित्सक किसी संस्था से जुडऩे की बजाय खुद के क्लिनिक में प्राइवेट प्रैक्टिस कर सकते हैं। यह कार्य पार्ट-टाइम के साथ-साथ फ्रीलांसर के रूप में भी किया जा सकता है। प्रसिद्ध हॉस्पिटल्स और अन्य संस्थाएं साइकेट्रिस्ट को इस रूप में भी रिक्रूट करती हैं।

कितनी आय कमा सकते हैं?

अन्य प्रोफेशन की तरह एक साइकेट्रिस्ट की भी औसत वार्षिक आय लोकेशन, संस्था की प्रसिद्धि और पर्सनल एक्सपीरियंस पर निर्भर करती है। फ्रेशर के लिए यह जहां औसतन 7 लाख रूपये वार्षिक से 9 लाख रूपये हो सकती है वहीं 6-7 वर्षों के अनुभव वाले साइकेट्रिस्ट के लिए यह 12 से 15 लाख रूपये तक हो सकती है। इससे अधिक अनुभव वाले साइकेट्रिस्ट के लिए औसत वार्षिक आय 20 लाख रूपये से ऊपर ही होती है।

करियर प्रोस्पेक्टस

देश में मेंटल डिसऑर्डर्स, साइकोसमेटिक डिसऑर्डर्स और कई इमोशनल और बेहेवियरल प्रोब्लम्स निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। ऐसी दशा में मनोचिकित्सक के रूप में करियर का प्रोस्पेक्टस काफी प्रोमिजिंग है। आने वाले वर्षों में यह करियर के सबसे अहम डोमेन के रूप में विकसित होने की अपार संभावनाओं से भरा हुआ है।

 

श्रीप्रकाश शर्मा

(लेखक प्राचार्य, जवाहर नवोदय विद्यालय, मामित, मिजोरम, हैं) 

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