ब्रेकिंग न्यूज़ 

कांग्रेस की भाजपा को निकाय चुनाव की चुनौती

कांग्रेस की भाजपा को निकाय चुनाव की चुनौती

लोकसभा और पंचायत राज संस्थाओं के चुनावों के बीच कांग्रेस का मतदान प्रतिशत बढ़ा है। आगामी निकाय चुनाव में हम साबित कर देंगे कि भारतीय जनता पार्टी पर से जनता का भरोसा उठ चुका है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पूर्व केन्द्रीय मंत्री सचिन पायलट ने पश्चिमी राजस्थान के दौरे में पाली में इन शब्दों के साथ सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को चुनौती पेश कर दी है। पिछले कुछ अर्से में प्रांतव्यापी दौरों में पायलट जहां प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में अपने पांव जमाने के लिए प्रयत्नशील हैं। वहीं विभिन्न मुद्दों को लेकर राज्य सरकार को घेरने में भी कोई चूक नहीं कर रहे हैं। प्रस्तावित निकाय चुनावों के मद्देनजर पायलट ने संबंधित जिलों में दौरे भी शुरू कर दिये हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी सक्रिय हैं तथा शासन को आढ़े हाथों लेते रहे हैं। गत तीन मई को अपने जन्मदिन पर वे दक्षिण अफ्रीका में थे लेकिन, उनके समर्थकों ने रक्तदान, मरीजों को फल वितरण आदि कर गहलोत की राजनीतिक हैसियत का सबको भान कराया।

लोकसभा एवं स्थानीय निकायों तथा पंचायत चुनावों में यद्यपि भाजपा ने बढ़त ली। लेकिन विधानसभा के चार उपचुनावों में मात्र एक सीट पर सिमटने से सत्तारूढ़ भाजपा को बैकफुट पर आना पड़ा। उधर सभी छ: निगमों सहित स्थानीय निकायों में भाजपा का वर्चस्व होने के बावजूद शहरी जनसमस्याओं को लेकर जन आक्रोश बढ़ रहा है। राजधानी जयपुर में पिछली बार महापौर कांग्रेस की थीं और नगर निगम में भाजपा का बहुमत था। इस खीचतान में दोनों दल एक दूसरे की खिचाई करते रहे। अब प्रदेश में भाजपा सत्तारूढ़ है। निगम में भाजपा का बहुमत है तथा महापौर उप-महापौर इसी दल के है। इसके बावजूद आपसी खीचतान के चलते समितियों के गठन में इतनी देरी की गई। शहर की सफाई व्यवस्था तथा अन्य मुद्दे वल्र्ड क्लास सिटी के औचित्य पर सवालिया निशान लगाये हुए है।

राज्य निर्वाचन विभाग ने अगस्त माह में नगर निगम अजमेर सहित कुल 130 निकायों के प्रस्तावित चुनाव कराने के लिए मतदाता सूची तैयार किए जाने की प्रक्रिया आरम्भ कर दी है। तय कार्यक्रम के अनुसार 20 जुलाई को निर्वाचन नामावलियों का अंतिम प्रकाशन किया जाना है। शेष बारह निकायों के चुनाव दिसम्बर से मार्च माह की अवधि में कराये जायेंगे।

Jaipur: Rajasthan Congress chief Sachin Pilot addresses a press conference in Jaipur, on Dec 12, 2014. (Photo: Ravi Shankar Vyas/IANS)

सत्तारूढ़ भाजपा तथा प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सदस्यता अभियान के जरिए अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने के प्रयास किए है। वहीं दोनों दलों को पार्टी में आपसी गुटबाजी तथा कार्यकर्ताओं में व्याप्त असंतोष से भी दो चार होना पड़ रहा है। जहां सत्तारूढ़ दल के नेता एवं कार्यकर्ताओं का सत्ता में हिस्सेदारी पाने की लालसा धूमिल होने से भीतर ही भीतर रोष व्याप्त है। गाहे-बगाहे मीडिया में राजनीतिक नियुक्तियों से जुड़ी खबरों को प्लांट किए जाने से भी स्थिति संभल नहीं रही है। इन नियुक्तियों में करीब तीन दर्जन बोर्डो, निगमों में प्रमुख नेताओं को केबीनेट या राज्यमंत्री का दर्जा मिल सकता है। एक बार में 12 हजार नियुक्तियां संभव हैं पर ऐसा नहीं हो पाता। आखिरी दो सालों में नियुक्तियां दी जाती रही हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मंत्रियों को सुबह 8 से 10 बजे तक जयपुर स्थित अपने निवास पर जनसुनवाई के लिए पाबंद किया। वहीं पार्टी मुख्यालय पर सोमवार से गुरूवार तक सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक मंत्रियों एवं संगठन पदाधिकारियों द्वारा बारी-बारी से जनसुनवाई का कार्यक्रम तय किया है। इसका नाम तो जनसुनवाई दिया गया है, लेकिन यह शर्त जोड़ी गई कि पार्टी के जिला या मंडल अध्यक्ष द्वारा निर्धारित फार्मेट में सिफारिशी पत्र के आधार पर मंत्रीगण एवं संगठन के पदाधिकारी सुनवाई करेंगे।

वसुंधरा सरकार में पिछले शासनकाल में भी पार्टी मुख्यालय में ऐसी जनसुनवाई की शुरूआत हुई थी, तब सिफारिशी पत्र की जरूरत नहीं थी। इसके पीछे एक मकसद यह भी था, कि शासन सचिवालय में पास बनवाने की भागदौड़ से कार्यकर्ताओं को निजात मिले। उधर विपक्ष का यह आरोप है, कि हर मोर्चे पर विफल रही सरकार ने जनसुनवाई के नाम पर नया शिगूफा छोड़ा है ताकि, शुरूआत में भरतपुर, बीकानेर, उदयपुर संभाग के दौरों में मिली करीब पौने तीन लाख शिकायतों के बारे में कोई कार्यवाही नहीं होने से जनता का ध्यान हटाया जा सके।

विधानसभा के भीतर और बाहर सरकार के कामकाज को सवालिया निशान पर लेने वाले भाजपा के मुखर और वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवारी ने भी ”आर्थिक न्याय’’ के नाम पर आरक्षण के मुद्दे को हवा दी है। विधानसभा में वह इस बाबत निजी विधेयक को पुन: स्थापित नहीं किए जाने पर रोष व्यक्त कर चुके हैं। सदस्यता अभियान के सिलसिले में पहली बार जयपुर आए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भी तिवारी के रोष से अवगत कराते हुए उन्हें समझाने का अनुरोध किया गया, तो अध्यक्ष ने पलटवार करते हुए आला नेता को यह कर नसीहत दी कि क्या आपने उन्हें समझाया अर्थात संवादहीनता से ऊपर उठो। पार्टी के असंतोष की एक यह बड़ी वजह है। तिवारी ने अपने सांगानेर (जयपुर) निर्वाचन क्षेत्र के विख्यात सांगानेरी प्रिंट उद्योग के बारे में मीडिया से बातचीत में राज्य सरकार के टॉप प्रायोरिटी कार्यक्रम रिसर्जेंट राजस्थान पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा, कि प्रदेश में उद्योगपतियों को आमंत्रित किया जा रहा है कि वे यहां आए और उद्योग लगाए। ऐसे समय में सांगानेरी प्रिंट की लगभग 900 इकाईयों को बंद करने का नोटिस दिये जाने से सरकार की छवि पर असर पड़ता है। अधिक निवेश आए इसके लिये जरूरी है कि इन इकाइयों को बचाया जाए। करीब तीन सौ साल पुराने तथा सालाना सात सौ करोड़ टर्न ओवर वाले इस उद्योग से करीब तीन लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। तिवारी का कहना है, कि अदालत ने अमानीशाह नाले में परिवर्तित द्रव्यवती नदी को बचाने का निर्देश दिया है, सांगानेरी पिंरट उद्योग को दांव पर नहीं लगाने के लिए। अन्य मुद्दों पर बोलने पर तिवारी ने कूटनीतिक भाषा में कहा कि वे कुछ समय बाद बोलेंगे। उन्होंने इसकी समय सीमा पूछे जाने पर ”इंतजार का फल मीठा होता है’’ मुहावरा सुनाकर और सस्पेंस पैदा कर दिया कि, वे कब और क्या बोलेंगे। इससे पहले भाजपा के सदस्यता अभियान में सांगानेर क्षेत्र के अव्वल रहने पर तिवारी ने टिप्पणी की थी, कि वे नम्बर वन हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट पार्टी को सक्रिय करने के हर सम्भव प्रयास में जुटे हैं। वे दिल्ली की अपेक्षा राजस्थान में अधिक समय देने लगे है। जनसमस्याओं से जुड़े मुद्दे पर लोगों से जुडऩे के लिए समितियों का गठन कर मौके पर जाने को कहा गया है। प्रदेश कांग्रेस की जम्बोजेट कार्यकारिणी की तर्ज पर महिला कांग्रेस अध्यक्ष विधायक शंकुतला रावत ने भी 133 सदस्यों को शामिल किया है ताकि किसी से भी नाराजगी मोल नहीं लेनी पड़े। लेकिन,कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को राजधानी जयपुर सहित प्रदेश स्तर पर आपसी गुटबाजी से जूझना पड़ रहा है। जयपुर के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर खेमेबाजी के तहत होने वाले धरना प्रदर्शन से परेशान होकर नेतृत्व को इन्हें बंद करने के निर्देश देने पड़े। संगठन चुनाव के चलते सदस्यता अभियान को भी गति दी गई। तीन साल पहले 2011 में प्रदेश में पार्टी के 14 लाख सदस्य बने थे। इस बार यह आंकड़ा पार होने की कवायद की गई। पन्द्रह मई तक चले सदस्यता अभियान के लेखे-जोखे से पता चल पाएगा कि पार्टी कहा खड़ी है। कार्यकारिणी का गठन तथा जाने अनजाने चेहरों को पार्टी के पदाधिकारी बनाये जाने से जमीनी नेताओं में अधिक उत्साह नहीं रहा है। पार्टी नेतृत्व ने करीब एक दर्जन प्रकोष्ठों एवं उनकी कार्यकारिणी को भंग कर दिया है। इनमें कई प्रकोष्ठों के अध्यक्षों का कार्यकाल चार साल से अधिक हो गया था। ब्लॉक जिला संगठन चुनाव के बाद इन प्रकोष्ठों का गठन किया जाएगा इससे नये कार्यकर्ताओं में पद पाने की उम्मीद जागी है लेकिन, सत्ता के अभाव में पार्टीजनों में उत्साह नहीं है। बहरहाल निकाय चुनावों के माध्यम से पार्टी नेतृत्व कांग्रेस संगठन में जान फूंकने की तैयारी में है। उधर सत्तारूढ़ दल अपनी रणनीति में क्या गुल खिलाएगा- यह तो वक्त ही बताएगा।

जयपुर से गुलाब बत्रा

world of warplanes прицелы модыдетектор лжи симферополь

Leave a Reply

Your email address will not be published.