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सिनेमा बनेगा राजनैतिक हथियार!

सिनेमा बनेगा राजनैतिक हथियार!

उत्तर प्रदेश के राजनैतिक रंगमंच पर सियासी दंगल के लिए शतरंज की चाल-चलने के लिए विसात बिछ गई है। अखिलेश यादव सरकार ने पिछले तीन वर्षों में लगातार पासे अपने अनुकूल फेंकने के लिए हर जोर लगाया, लेकिन पासे-तो-पासे ही है। जिसके कारण पूरे प्रदेश ही नहीं देश का सियासी गणित उलझता नजर आ रहा है। हांलाकि 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों को फतह करने की रणनीति के तहत सपा-बसपा और कांग्रेस के साथ भाजपा अपने हर दांव चलने की तैयारी में लगी है। समाजवादी सरकार में सिनेमा के जादुई संसार का असर उत्तर प्रदेश में दिखेगा। कलाकारों के राजनैतिक सामाजिक सरोकार के बल पर चुनाव जीतकर दक्षिण भारत शासक, शासन या नेता का प्रतीक बन सकता है, तो उत्तर प्रदेश में क्यों नहीं।

फिल्म निर्माण के जरिए उत्तर प्रदेश में तमाम संभावनाओं के बेहतरीन द्वार खोलने की राह मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चुनी है। फिल्म वही हिट होगी, जिसे राज्य के ज्यादा- से-ज्यादा लोग देखेंगे।

राज्य में फिल्मों की शूटिंग के माध्यम से स्थानीय लोगों को रोजगार व प्रदेश के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त होता है। फिल्म निर्माताओं को राज्य में फिल्मों की शूटिंग करने के लिए आमंत्रित करते हुए कहा, कि इस कार्य में प्रदेश सरकार द्वारा उन्हें हर संभव सहयोग व मदद प्रदान की जाएगी। राज्य की सांस्कृतिक धरोहर विश्व विख्यात ताजमहल और वाराणसी उत्तर प्रदेश में स्थित हैं, ज्यादातर विदेशी जानते है। उत्तर प्रदेश की अलग पहचान के लिए फिल्मों को केन्द्र बनाया गया है।

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सरकारी आवास पर फिल्म बंधु द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए, फिल्म बंधु की वेबसाइट का उद्घाटन एवं ‘फिल्म नीति उत्तर प्रदेश-2015’ पुस्तिका का विमोचन किया। अखिलेश यादव ने नई फिल्म नीति के तहत फिल्म ‘तेवर’ को 2 करोड़, ‘जां निसार’ को 2 करोड़ 25 लाख तथा फिल्म ‘दोजख-इन सर्च ऑफ हैवेन’ को 59 लाख 53 हजार रुपए का अनुदान प्रदान किया।

राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 2 फिल्म सिटी के लिए हस्ताक्षरित एम.ओ.यू. के दस्तावेजों का आदान-प्रदान भी मुख्यमंत्री की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। एक फिल्म सिटी आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर तथा दूसरा ट्रांस गंगा हाइटेक सिटी परियोजना उन्नाव में विकसित किया जाएगा। दोनों फिल्म सिटी पर कुल मिलाकर लगभग 650 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा और इनसे लगभग 9 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। राज्य सरकार की ओर से एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर प्रमुख सचिव सूचना एवं अध्यक्ष फिल्म बंधु नवनीत सहगल ने किए। पहला एम.ओ.यू. मेधज प्रोडक्शन्स एवं रविकिशन प्रोडक्शन्स के साथ किया गया, जो ट्रांस गंगा हाइटेक सिटी परियोजना में फिल्म सिटी स्थापित करेंगे। दूसरी फिल्म सिटी के लिए एम.ओ.यू. पर्पेल सी होल्डिंग्स के साथ सम्पन्न हुआ। इसे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बनाया जाएगा। नई फिल्म नीति ने बड़ी संख्या में फिल्म निर्माताओं को प्रदेश में फिल्में बनाने के लिए आकर्षित किया है, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में लगभग 30 फिल्मों की यहां शूटिंग हो रही है।

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निर्माता बोनी कपूर ने कहा कि, उत्तर प्रदेश फिल्म निर्माताओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने वाले पहले कुछ राज्यों में शामिल है। मुंबई फिल्म उद्योग के साथ-साथ दक्षिण भारत के फिल्म जगत को भी प्रदेश में आमंत्रित करने से यहां फिल्म निर्माण की गतिविधियों को और बढ़ावा दिया जा सकता है। उत्तर प्रदेश से अपने जुड़ाव की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि, उनका जन्म मेरठ में हुआ था। बोनी कपूर ने कहा, कि उनकी फिल्म ‘तेवर’ की शूटिंग आगरा और मथुरा में सम्पन्न हुई थी। प्रदेश में दो और फिल्मों की शूटिंग करने की योजना है।

निर्माता पवन तिवारी ने बताया कि उनकी फिल्म ‘दोजख-इन सर्च ऑफ हैवेन’ में उत्तर प्रदेश की संस्कृति को दर्शाया गया है और इस फिल्म की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना हुई है। उन्होंने कहा कि, शीघ्र ही वे उत्तर प्रदेश में एक फिल्म की शूटिंग की शुरुआत करेंगे।

जापान के सांसद नागासाकी कातारू ने कहा, कि उत्तर प्रदेश में जापान के सहयोग से एक फिल्म सिटी की स्थापना की जा रही है। इस परियोजना के माध्यम से भारत और जापान के संबंध और मजबूत बनेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म सिटी में तैयार फिल्मों का प्रदर्शन जापान में भी होगा।

प्रमुख सूचना सचिव नवनीत सहगल ने कहा कि शीघ्र ही फिल्म बन्धु में भी, उद्योग बन्धु की तर्ज पर सिंगल विंडो व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके अलावा, फिल्म निर्माताओं के साथ समन्वय के लिए प्रत्येक जनपद में एक-एक नोडल अधिकारी नामित किया जाएगा, जिसका विवरण फिल्म बन्धु की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। सूचना निदेशक एवं फिल्म बन्धु के सचिव आशुतोष निरंजन सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। समाजवादी सरकार सिनेमा के विरोध की कभी पक्षधर मानी जाती रही है आज वही सरकार विरोध के नये मानक तय कर रही है। जिसमें कंप्यूटर, अंग्रेजी का अब विरोध नहीं होगा। मुलायम के समाजवाद से इतर अखिलेश यादव के समाजवाद में कंप्यूटर, अंग्रेजी, सिनेमा को बदलते वक्त की जरूरत के तौर पर स्वीकार कर उसी को हथियार के तौर पर राजनैतिक सामाजिक सरोकार को साधने और चुनाव जीतने का प्रतीक बनाया है।

उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण का इतिहास

उत्तर प्रदेश में फिल्म निर्माण का इतिहास है कि आईडियल फिल्म स्टूडियो की स्थापना सन् 1936 में एबट् रोड जो अब विधानसभा मार्ग है पर हुई थी। अब इस स्थान पर एग्रो का कार्यालय विधानसभा मार्ग, लखनऊ में स्थित है। इस आईडियल स्टूडियों में बिस्मिल की आरजू, आदर्श महिला, अंहिसा पथ, मंजिल के सहारे, रशीद दुल्हन, मुक्कदर, तीन वर्ष, बेबस और चोर आदि फिल्मों का निर्माण किया गया था। इनमें से बेबस और चोर का प्रदर्शन भी हुआ था।

आईडियल फिल्म स्टूडियों में प्रोसेसिंग लैब, सभी उपकरण इत्यादि मौजूद थे, जिससे प्रभावित होकर वरिष्ठ अनुभवी निर्माता निर्देशक  स्व. रूप. के. शोरी व स्व. डी. एम. पंचोली ने अपने फिल्म निर्माण की गतिविधियां लाहौर से वापसी के पश्चात् सन् 1947 में प्रारंभ कर दी थी। इस बार भी प्रदेश की सरकार व अन्य अवध के राजा, तलुकेदारों ने सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया, जिससे परेशान होकर स्व. रूप.के.शोरी ने अपनी फिल्म एक थी लड़की बम्बई में शुरू की, जो बनने के बाद सुपरहिट सिद्ध हुई थी। इस प्रकार उत्तर प्रदेश ने प्रथम बार फिल्म विकास का एक सुनहरा मौका खो दिया था।

इस प्रकार सन् 1955  में सरकारी सहायता के अभाव में यह ऐतिहासिक आईडियल स्टूडियों बन्द हो गया।

इसके बाद 1970 के दशक में ‘दम्पति’ फिल्म का निर्माण हुआ था। इसके बाद कई अन्य फिल्मों का निर्माण भी उत्तर प्रदेश में हुआ।

आईडियल फिल्म स्टूडियों बन्द होने के बाद इसके सारे उपकरण इत्यादि उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा खरीद कर शिक्षा प्रसार विभाग, महात्मा गांधी मार्ग, इलाहाबाद में एक स्टूडियों की स्थापना की गयी। इस स्टूडियों को भी सरकार की दोषपूर्ण, घटिया और अव्यवहारिक नीति का शिकार होना पड़ा और आज यह स्टूडियों कबूतरों का घर बन चुका है, करोड़ों की मशीनों में जंग लग रही है।

उत्तर प्रदेश में अत्याधिक चर्चित और प्रचारित उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम लिमिटेड का प्रारंभ 10 सितम्बर 1975 में हुआ। निगम ने फिल्म नीतियां घोषित की और 29 अक्टूबर 1984 में विधिवत् अपनी फिल्म नीति घोषित करके प्रदेश के निर्माताओं को ऋण देने के नाम पर फार्म और प्रोसेसिंग फीस जमा कराना प्रारंभ कर दिया। इस प्रकार सैकड़ों निर्माताओं ने लाखों रूपये लगा कर प्रोजेक्ट बनाये। लेकिन, यह पूरी-की-पूरी स्कीम कागजों पर फाईलों तक ही सीमित रह गयी।

उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम जब प्रदेश में फिल्म विकास का कोई कार्य सफलतापूर्वक नहीं कर पाया तो, उसके अधिकारियों ने अपना फिल्म निर्माण करने का सपना साकार करने की ठानी और उनके मस्तिष्क में फिल्म निर्माण करने का कीड़ा रेंगने लगा और इस प्रकार श्री नारायण मिश्रा, महाप्रबंधक उत्तर प्रदेश चलचित्र निगम व श्री रविभूषण वधावन, वाईस चेयरमैन ने मिल कर लोकधन से अपना शौक पूरा करने का निश्चय किया 8,00,000 रूपये का अनुदान प्राप्त होने के बाद भी  अभी तक फिल्म डिब्बे में बन्द है।

लखनऊ से सुरेन्द्र अग्निहोत्री

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