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धरा से शिखर तक की यात्रा

धरा से शिखर तक की यात्रा

2श्रीमती जयवंतीबेन मेहता एक ऐसा नाम जो सहजता, सरलता और प्रेम का मूर्त रूप हैं। जयवंतीबेन मेहता की राजनीतिक सक्रियता व यशस्विता के कारण उनका नाम पूरे भारत में प्रचलित है, लेकिन महाराष्ट्र में लंबे समय तक सक्रियता के कारण उनकी प्रसिद्धि, घनिष्ट संपर्क व परिचय का क्षेत्र काफी बड़ा है। जयवंतीबेन के जीवन पर आधारित उनके संस्मरणों का चित्रांकन व चरित्रांकन ‘एक अविरल यात्रा’ पुस्तक में मौजूद हैं। इस पुस्तक में जयवंतीबेन की शैशव काल से लेकर अब तक के सभी संस्मरण पढऩे को मिलेंगे, उनके पारिवारिक एंव राजनीतिक जीवन, उन्हें दिए गए पद, उनके द्वारा किए गए कार्य, उनकी सामाजिक सेवाएं सबका गहरा और विशुद्ध परिचय ‘एक अविरल यात्रा’ में मौजूद है।

भारत में स्त्री को कुछ ऐसे गुणों से नवाजा गया है जो उसकी गरिमा को समाज में गौरवान्वित करते हैं जैसे- संवेदनशीलता, कार्यक्षमता, निष्ठा, सहनशीलता, मृदुल वाणी, वात्सल्य सभी भारतीय महिलाएं अपने इसी गुण के बल पर स्वयं के परिवार तथा विश्वकुटुंब में, मातृत्व के गरिमामय तथा मंडित स्थान पर विराजमान हैं। ‘मातृशक्ति’ शब्द से व्यक्त भाव का स्वरूप इस आत्मकथन के प्रत्येक पृष्ठ पर अंकित है। जयवंतीबेन में मातृशक्ति भाव के कारण राजनीति से जुड़े सभी युवा उन्हें मां का दर्जा देते हैं। जयवंतीबेन राजनीति में होने के बाद भी उतनी ही सरल और सामान्य हैं, जितनी एक सामाज की साधारण स्त्री।

जयवंतीबेन राजनीति में अपना विशष्ट स्थान रखतीं हैं। सन 1962 में राजनीति में प्रवेश करने के बाद वे पहले पार्षद, फिर महाराष्ट्र विधानसभा की दो बार सदस्य रहीं, उसके बाद नौंवी, ग्यारहवीं व तेरहवीं लोकसभा की सदस्य रहीं। श्रीमती जयवंतीबेन मेहता ने गत दो वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र में अपने लिए महत्वपूर्ण स्थान बनाने में सफलता पाई है। विद्मुत मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में उन्होंने अपने दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वाह किया है, और ऊर्जा संकट को हल करने के लिए उपयोगी भूमिका निभाई है। संसद के भीतर और बाहर जयवंतीबेन मेहता ने पिछले दो वर्षों में अपनी छाप छोड़ी है। जयवंतीबेन मेहता भाजपा की एक निष्ठावान, अनुभवी तथा कर्मठ कार्यकर्ता के रूप में पार्टी को मजबूत बनाने हेतु सक्रिय संगठनात्मक सहयोग दे रही हैं। जयवंतीबेन अपनी दोहरी जिम्मेदारियों का भली-भांती निर्वहन करते हुए एक जन-प्रतिनिधि की हैसियत से भी अपनी जिम्मेदारियों को बाखूबी निभा रही हैं।

गुजराती, मराठी, हिंदी व अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञान रखनेवाली जयवंतीबेन ने सदैव सामाजिक सरोकार को केन्द्र में रखकर राजनीति की है। चाहे वह पिछड़े वर्ग के उत्थान का विषय हो, महिलाओं के शोषण और अत्याचार के विरोध का मामला हो, बढ़ती कीमतों के विरूद्ध आवाज उठानी हो, या फिर चाहे शिक्षा, स्वास्थ्य या सामाजिक सुविधाओं और कानून-व्यवस्था में सुधार की बात हो। अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण पदों को सुशोभित किया- वे भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहीं। 1975 में आपातकाल के दौरान उन्नीस महीने ‘मीसा’ में कारावास भी किया। जयवंतीबेन ने राजनीति में रहते हुए जितनी देश सेवा की है, उससे ज्यादा योगदान उनका समाजसेवा में रहा। उन्होंने बिना किसी स्वार्थ भाव के लोगों की सेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। और आज भी वे निस्वार्थ भाव से सेवा में लगी हुईं हैं।

प्रीति ठाकुर

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