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मंत्रीजी का तर्क सुनिए

मंत्रीजी का तर्क सुनिए

कुछ पत्रकार एक मंत्रीजी को घेरकर बैठ गए और कुछ संघी नियुक्तियों पर लगे घेरने। पहले एनबीटी चेयरमैन, फिर आईसीएचआर चयन और प्रसार भारती बोर्ड के चेयरमैन का मुद्दा उठाया। अचानक मंत्रीजी होश में आ गए, लगे समझाने। उन्होंने कहा गधे और घोड़े का फर्क समझो। मानो-न-मानो गधा चीपों-चीपों नहीं करता और घोड़ा है कि मिजाज बिगड़ते ही हिनहिनाने लगता है। इसलिए जानकार से भला अपना बुद्धू भाई है।

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