ब्रेकिंग न्यूज़ 

मानवता ही ध्येय हो

मानवता ही  ध्येय हो

सबसे पहले तो मैं उन सभी व्यक्तियों के लिए भगवान राम से प्रार्थना करता हूं, जो इस वायरस के शिकार हुए। उदय इंडिया परिवार उन लाखों आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता हैं, जिन्होंने कोरोना के कारण अपनी जान गंवाई। हजारों परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। बहुत से बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया, तो कई बूढ़े माता-पिता ने अपने जवान लड़के-लड़कियों को खो दिया। कोरोना गरीब-अमीर में कोई फर्क नहीं देखता। जब भी फोन बजता है, तो डर लगता हैं की कहीं से कोई अनहोनी की खबर न आ जाये। और सोशल मीडिया ने इसे और भी नकारात्मक बना दिया है। इस पृष्ठभूमि में अभी हाल ही में कांग्रेस के नेता कमलनाथ ने जो बयान दिया वह इस कोरोना-काल में जले पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने कोरोना को ‘इंडियन कोरोना’ कहा, और आगे कहा कि हमारी पहचान, मेरा भारत कोविड। ऐसा लगता हैं कि भारत के प्रधानमंत्री जानबूझकर कोरोना फैला रहे हैं, और इसलिए लोग मर रहे हैं। यहां प्रश्न यह हैं कि आखिर कैसे एक पूर्व मुख्यमंत्री भारत का नाम खराब करने के लिए इस प्रकार का वक्तव्य दे सकता हैं? यह भारत ही है, जो वसुधैव कुटुम्बकम में विश्वास रखता हैं। भगवान इन अल्प-दृष्टिकोण वाले नेताओं की रक्षा करे, जो भारत-विरोधी षड्यंत्र में फंस जाते हैं और कुछ भी बोल देते हैं। हालांकि मेरे विचार में हमें हमेशा ‘भारत फस्र्ट’ की विचारधारा पर अडिग रहना चाहिए।

यह आरम्भ से ही पता था कि इस मामले पर राजनीति की जाएगी। क्योंकि राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, अखिलेश यादव जैसे नेता अपनी मेरिट के आधार पर भारतीय राजनीति में नहीं टिक सकते। और फिर अब वे दिन नहीं रहे जब अटल बिहारी वाजपेयी ने 1971 के युद्ध के समय उस समय की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दुर्गा कहा था। जैसा की यह एक सत्य है कि अकेले केंद्र सरकार इस कोरोना से नहीं लड़ सकती, इस परिपेक्ष्य में एक संगठित विपक्ष कहा हैं? जब लोग बेड, ऑक्सीजन और दवाइयों के लिए तड़प रहे थे, तब विपक्ष सरकार की कमियों को ढूंढऩे में लगा था। वहीं  दूसरी ओर निजी कंपनिया, सामाजिक संगठन, आम जान, आदि  लोगों की सहायता में लगे थे। यहां यह कहना उचित होगा की इस दु:ख की घड़ी में समूचा देश एक होकर  एक-दूसरे की सहायता में लगा है, क्योंकि इस दूसरी वेव की महामारी से लडऩा किसी बहुत बड़ी चुनौती से कम नहीं है। यदि भारत की तुलना दूसरे देशों से करें तो हमारी जनसंख्या औरों से कई गुना अधिक हैं। लेकिन 24X7 समाचार चैनल केवल शवों और शमशान घाटों को दिखाने में ही व्यस्त थे। इसी बात का फायदा उठाते हुए अंतर्राष्ट्रीय मीडिया भी भारत की नकारात्मक छवि दिखाने में ही व्यस्त थी। यह बहुत दु:ख का विषय है की जब कई पत्रकारों, डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने इस महामारी में अपनी जान गंवाई, उस समय भी कुछ लोग लाशों पर व्यापर करते हुए दवाइयों और ऑक्सीजन की  ब्लैक-मार्केटिंग में लगे थे। जो काफी शर्मसार करने वालों घटना  है।

लेकिन हम भारत के लोग एक बार फिर मजबूती से खड़ा होंगे। हम उन परिवारों को मजबूत करेंगे जिन्होंने अपने सदस्यों को खोया है। हम उन अनाथ बच्चों की देख-रेख करेंगे, जिन्होंने अपने माता-पिता  को खोया है। अब हमें देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए काम करना है, जिससे लोगों के जीवन में फिर से खुशियां लौट सकें। हमें सकारात्मकता को बढ़ाते हुए उनकी सहायता करनी चाहिए, जो फिर से खड़े होने में असमर्थ है। सामाजिक संगठनों का इसमें बड़ा योगदान होगा। केंद्र और राज्य सरकारो को भी अपना-अपना कर्तव्य निभाना होगा, क्योंकि सरकारों पर अब लोगों की कड़ी नजर है।

 

Deepak Kumar Rath

दीपक कुमार रथ

(editor@udayindia.in)

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.