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कोविड वैक्सीन और विरोध की राजनीति

कोविड वैक्सीन और विरोध की राजनीति

एक प्रगतिशील लोकतंत्र में विपक्ष की मौलिक भूमिका रचनात्मक आलोचना के साथ-साथ राष्ट्रीय हितो का संवर्धन है ना कि तुच्छ स्वार्थों की पूर्ति के लिए सरकार के सकारात्मक प्रयासों की नकारात्मक आलोचना कर लोगों को गुमराह करना है। ज्यादातर विपक्षी दलों ने कोविड वैक्सीन का पहले विरोध किया, नकारात्मकता फैलाकर लोगों को गुमराह किया फिर खुद वैक्सीन लगवाई।

देश में कोरोना महामारी का संकट गहराता जा रहा है। कोरोना की दूसरी लहर घातक साबित हो रही है। हर रोज लाखों केस सामने आ रहे है, इस महामारी की वजह से कई लोगों ने अपनों को खोया है। लोगों को बेसब्री से कोरोना वायरस की वैक्सीन का इंतजार था। आखिरकार केंद्र सरकार के प्रयास कारगर हुए और टीकाकरण के लिए वैक्सीन को अप्रुवल भी मिली। कोरोना की दूसरी लहर से निपटने और वैक्सीन को कवच के रूप में इस्तेमाल करने के लिए लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करने का काम केंद्र सरकार ने बखूबी किया है। एक और जहां केन्द्र सरकार लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित कर रही है वहीं विपक्ष व कई अन्य राजनीतिक दलों ने टीकाकरण का भी राजनीतिकरण कर दिया है।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने महामारी के इस दौर में टीकाकरण पर खेल शुरू कर दिया है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीए) की ओर से कोरोना वायरस की दो वैक्सीन को भारत में अप्रूवल मिलने के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोरोना वायरस की वैक्सीन को भारतीय जनता पार्टी की वैक्सीन बताकर वैक्सीनेशन करवाने से मना कर दिया। यहीं नहीं समाजवादी पार्टी के ही कई अन्य नेताओं ने भी वैक्सीन को लेकर नकारात्मकता का माहौल बनाने की कोशिश की। समाजवादी पार्टी के ही आशुतोष सिन्हा ने कहा कि वैक्सीन लोगों को नपुंसक भी बना सकती है। इसके अलावा कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि जिस तरह से बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सीबीआई, इनकम टैक्स और ईडी का इस्तेमाल विपक्ष के खिलाफ करते है, उससे लगता है कि अखिलेश यादव का डर सही है। संकट की इस घड़ी में लोगों की मदद करने और सकारात्मकता के साथ सरकार का सहयोग करने के बजाए विपक्षी पार्टियों ने वैक्सीनेशन को लेकर लोगों को भ्रमित करने काम किया है। हाल ही में महाराष्ट्र सरकार की ओर से वैक्सीन वितरण में भेदभाव का आरोप लगाए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने गलत योजना से 5 लाख डोज बर्बाद कर दिए है, जिसकी वजह से लोगों को वैक्सीनेशन में काफी परेशानी हुई।

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महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले ने वैक्सीन वितरण को लेकर कहा था कि केंद्र सरकार पाकिस्तान को मुफ्त में वैक्सीन दे रही है लेकिन महाराष्ट्र में इस पर राजनीति की जा रही है। जवाब देते हुए जावड़ेकर ने कहा कि जरूरत के हिसाब से केंद्र सरकार सबको वैक्सीन देती है, लेकिन सही तरीके से वैक्सीन का वितरण करना राज्य सरकार का काम है। साथ ही बिना योजना के वैक्सीन का वितरण कर सरकार को जिम्मेदार ठहराना गलत है। देश के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने वैक्सीन के ऊंचे दामों को लेकर केंद्र सरकार पर वैक्सीन निर्माताओं की मुनाफाखोरी का साथ देने की बात कही। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने भी नई टीकाकरण नीति को दुनिया में सबसे अधिक भेदभावपूर्ण और अंसवेदनशील बताया।

देश में कोरोना की वैक्सीन को मंजूरी मिलने के बाद से ही शुरू हुई यह सियासत रूकने का नाम ही नहीं ले रही है।

अखिलेश यादव के वैक्सीन लेने से इनकार करने के बाद बिहार में कांग्रेस विधायक अजीत शर्मा ने कहा कि देश में वैक्सीन का श्रेय बीजेपी लेने की कोशिश कर रही है, बल्कि वैक्सीन की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक कम्पनी की स्थापना कांग्रेस के कार्यकाल में हुई थी। इसके अलावा कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के भाई व मध्य प्रदेश के चाचौड़ा से कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने भी प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के  मंत्रियों को पहले टीका लगवाने की बात कही और इसके पीछे तर्क दिया कि अगर वैक्सीन लगने के बाद सब ठीक रहेगा तो फिर हम वैक्सीन लगवाएंगे। उधर ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) के कोरोना वैक्सीन के इस्तेमाल की मंजूरी मिलने के बाद भी कांग्रेस ने सवाए उठाए और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने ट्वीट करते हुए कहा कि स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सीन को इस्तेमाल की मंजूरी देना खतरनाक हो सकता है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने संशोधित टीका नीति के बारे में कहा कि यह कई महत्वपूर्ण मामलों में प्रतिगामी और असमान है साथ ही उन्होंने कई आपत्तियां भी जताई।

देश का दुर्भाग्य है कि केंद्र सरकार के समग्र टीकाकरण अभियान की दूरदर्शिता को देखने और परखने के बजाए विपक्ष टीकाकरण से पूर्व ही लोगों में नकारात्मकता का भाव पैदा कर रहा है। हालांकि दूसरी लहर की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगवाने का प्रयास शुरू कर दिया था। लेकिन विपक्ष ने राजनीतिक साजिश के तहत आमजनों में वैक्सीन को लेकर भ्रम फैलाना शुरू कर दिया। कई कांग्रेसी नेताओं ने लोगों के बीच भ्रम फैलाने के लिए उन्हें महज गुमराह करने की कोशिश की लेकिन बाद में दूसरी लहर से बरपे कहर को देखकर सपा नेता अखिलेश यादव ने भी वैक्सीन लगवा ली है। यादव के अलावा कांग्रेसी नेता मनीष तिवारी ने भी वैक्सीन को लेकर कहा था कि नरेन्द्र मोदी भारतीयों को गिनी पिग बना रहे है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि वैक्सीन प्रोग्राम शुरू हो चुका है, ये थोड़ा सा पेचीदा है। भारत के पास ऐसा कोई नीतिगत फ्रेमवर्क नहीं है जो वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग की अनुमति देता हो, फिर भी आपातकालीन स्थिती में दो वैक्सीनों के प्रतिबंधित उपयोग को अनुमति दे दी गई, दूसरी तरफ कोवैक्सीन की अपनी एक अलग कहानी है, बिना प्रक्रिया पूरी हुए ही अप्रूवल दे दिया गया। हालांकि बाद में मनीष तिवारी समेत कई कांग्रेसी नेताओं ने वैक्सीन लगवाई। यहां तक की छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री ने यहां तक कह दिया कि वह अपने यहां कोविशील्ड को मंजूरी नही देंगे क्योंकि इस पर विश्वास नहीं है। कांग्रेस नेताओं द्वारा फैलाएं गए इस भ्रम के बीच पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने वैक्सीन की दोनो डोज लगवा ली है। इसके बाद उन्होंने वैक्सीन की कमी और बच्चों की वैक्सीन पर अपना राग छेड़ दिया। इसी तरह आम आदमी पार्टी के आईटी सेल के संयोजक अंकित लाल ने वैक्सीन पर सवाल उठाते हुए तमाम ट्वीट किए थे। वहीं आप प्रवक्ता राघव चड्डा ने एक ट्वीट में कहा कि आखिर मोदी को वैक्सीन की इतनी जल्दी क्या है। जहां एक और आम आदमी पार्टी के नेता ने ट्विटर पर वैक्सीन की कमी निकालते हुए लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूरे परिवार के साथ वैक्सीन लगवाकर लोगों को इसकी जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार के टीकाकरण अभियान को लेकर नकारात्मता फैलाने किसान नेता राकेश टीकैत और एआईएमआईएम के नेता असुद्दीन ओवैसी समेत कई कांग्रेस और वामपंथी नेताओं ने पूर्व में वैक्सीनेशन का भारी विरोध किया लेकिन बाद में अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा ली।

कहते है किसी व्यक्तित्व, परिवार, समाज या देश के वास्तविक चरित्र का पता संकट के समय ही लगता है, इसलिए आपदा की इस घड़ी में राजनीति की जगह जननीति और जनहित को प्राथमिकता हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है, भले ही विपक्षी दल का क्यों ना हो।

हमें याद रखना होगा कि

‘विरोध की सियासत में इतना ना डूबो

कि इंसानियत शर्मसार हो जाए’

 

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   डॉ. सुभाष कुमार


 

(लेखक हेड जरनलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर, हैं)

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