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लक्षद्वीप में विकास या सियासत

लक्षद्वीप में विकास या सियासत

अरब सागर में बसे भारत के एक हिस्से लक्षद्वीप में इन दिनों सियासी बवाल मचा हुआ है। जिसकी वजह वहां के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल द्वारा लाए गए नए नियम हैं। इन कानूनों को लेकर जहां लक्षद्वीप वासियों में कई आशंकाएं हैं तो इनके खिलाफ लोगों का गुस्सा भी बढऩे लगा है। साथ ही तमाम विपक्षी राजनीतिक दल भी इन कानूनों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार को निशाना बना रहे हैं। देशभर में विपक्षी दल के नेता लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल को हटाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए तमाम विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र भी लिखा है। विरोधी इसे लक्षद्वीप की संस्कृति में अनावश्यक सरकारी दखल और आरएसएस एजेंडे को लागू करने का आरोप लगा रहे हैं।

लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित राज्य है। लक्षद्वीप एक द्वीपसमूह है, जिस पर 36 द्वीप हैं। इसे भारत का मालदीव भी कहा जाता है, क्योंकि यहां सुंदर, मनोहरी और सूरज से चमकते समुद्र तय हैं। साथ में यहां हरे भरे प्राकृतिक नजारे देखने को मिलते हैं। लक्षद्वीप की राजधानी करवत्ती है। लक्षद्वीप में लगभग 75 से 80 हजार लोग रहते हैं। यह क्षेत्र सामाजिक व सांस्कृतिक तौर पर केरल के नजदीक है और इसे रणनीतिक तौर पर भारत के लिए बेहद अहम माना जाता है।

प्रावधानों में क्या है?

दरअसल, केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप में वहां के प्रशासक लक्षद्वीप भाई पटेल ने कुछ प्रावधान बनाए हैं। इनमें पहला है- लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन 2021। इस मसौदे में प्रशासक को विकास के उद्देश्य से किसी भी संपत्ति को जब्त करने और उसके मालिकों को स्थानांतरित करने या हटाने की अनुमति होगी। मसौदे को इस साल जनवरी में पेश किया गया था। दूसरा मसौदा है- असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए प्रिवेंशन ऑफ एंटी-सोशल एक्टीविटीज (PASA) एक्ट। इसके तहत किसी भी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से गिरफ्तारी का खुलासा किए बिना सरकार द्वारा उसे एक साल तक हिरासत में रखने की अनुमति होगी। तीसरा मसौदा पंचायत चुनाव अधिसूचना से जुड़ा हुआ है। इसके तहत दो बच्चों से ज्यादा वालों को पंचायत चुनाव की उम्मीदवारी से बाहर किया जा सकता है। यानी ऐसे व्यक्ति को पंचायत चुनाव लडऩे की इजाजत नहीं होगी, जिसके दो से ज्यादा बच्चे हैं। चौथा मसौदा है- लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन। इस मसौदे के तहत स्कूलों में मांसाहारी भोजन परोसने पर प्रतिबंध और गोमांस की बिक्री, खरीद या खपत पर रोक का प्रस्ताव है। पांचवा मसौदा है- शराब पर प्रतिबंध हटाना। इसके तहत शराब के सेवन पर रोक हटाई गई है। बताया जाता है कि अभी इस द्वीप समूह के केवल बंगरम द्वीप में ही शराब मिलती है, मगर वहां कोई स्थानीय आबादी नहीं है। ऐसे में अब द्वीप के कई अंचलों से शराब पर प्रतिबंध हटाया गया है।

हालांकि इन प्रस्तावों से लोग डर हुए हैं। खासकर लोगों में लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन 2021 से खौफ है तो लक्षद्वीप डेवलपमेंट अथारिटी रेगुलेशन (असामाजिक गतिविधि विनियमन विधेयक, 2021) को लेकर गुस्सा है। लोगों को डर है कि इन कानूनों से आने वाले समय में उनकी जमीनें छीनी जा सकती हैं। जबकि नए कानूनों के विरोध में खड़े होने वाले लोगों को चुप कराने के लिए यह अधिनियम (असामाजिक गतिविधि विनियमन विधेयक, 202) लाया जा रहा है। इसके अलावा आरोप यह भी लग रहे हैं कि सरकार ने निर्वाचित जिला पंचायत की स्थानीय प्रशासनिक शक्तियों का नियंत्रण भी अपने हाथ में ले लिया है। नया प्रस्ताव पंचायत नियमों में भी बदलाव लाएगा और दो से अधिक बच्चों वाले किसी भी व्यक्ति को पंचायत चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य बना देगा।

गोमांस पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव का भी विरोध किया जा रहा है। इसके पीछे की भी एक वजह है, क्योंकि द्वीपसमूह की लगभग 96 फीसदी आबादी मुस्लिम है और बीफ ही इनका मुख्य भोजन है। फिर भी मिड डे मील को शुद्ध शाकाहारी कर दिया गया है। आरोप है कि प्रशासक इन कानूनों के जरिए लक्षद्वीप की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं। आम जनता भी इन सभी कानूनों को वापस लेने की मांग कर रही है।

प्रशासन का दावा

विपक्ष की आलोचनाओं से घिरे लक्षद्वीप प्रशासन ने दावा किया है कि वह द्वीपसमूह के भविष्य के लिहाज से योजनाबद्ध तरीके से बुनियाद रख रहा है। प्रशासन ने कहा कि लक्षदीप को मालदीव की तर्ज पर विकसित करना चाहते हैं। लक्षद्वीप की जनता को विश्वास में लिए बिना इस तरह के कदम उठाने के आरोपों को खारिज करते हुए जिलाधिकारी एस असकर अली ने कहा कि निहित स्वार्थ वाले और अवैध कारोबार में संलिप्त लोग लक्षदीप प्रशासन के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप बहुत शांति वाली जगह है। यह शांतिपूर्ण रहेगी।

लक्षदीप में असामाजिक गतिविधि रोकथाम अधिनियम (पासा) लागू करने के फैसले को उचित ठहराते हुए जिला अधिकारी ने कहा कि यह कदम ड्रग्स तस्करी और बच्चों के साथ बढ़ते यौन उत्पीडऩ के मामलों को रोकने के लिए उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जब हम समग्र रूप से इस जगह को विकसित करने की योजना बना रहे हैं तो हम कानून व्यवस्था के मोर्चों पर समझौता नहीं कर सकते।

मुस्लिम बहुल लक्षद्वीप में शराब के इस्तेमाल पर उन्होंने कहा कि यहां कुछ चुनिंदा पर्यटकों के लिए शराब के परमिट दिए गए, जो सिर्फ पर्यटकों के लिए है। लक्षद्वीप में गोहत्या पर प्रतिबंध के फैसले पर उन्होंने कहा कि देश में राज्यों ने गाय संरक्षण कानून बनाए हैं, इसलिए लक्षद्वीप में भी कानून लाया गया है। लक्षद्वीप के भोजन के मेनू से मांस उत्पादों को बाहर करने के निर्णय के बारे में पूछे जाने पर जिला अधिकारी ने कहा एक नीतिगत निर्णय और मध्याह्न भोजन मेनू में मांसाहारी, मछली और अंडे जैसे उत्पाद रखे जाते हैं। यह निर्णय एक सरकारी समिति द्वारा लिया गया था। उन्होंने कहा कि स्थानीय को बढ़ावा देने के लिए मछली को शामिल किया गया था। मछुआरे और उन्होंने इसके लिए दबाव डाला था।

जिलाधिकारी एस. असकर अलीने कहा कि प्रशासन चाहता है लक्षद्वीप को अगले 10 या 20 वर्षों में मालदीव जैसे द्वीपों की तरह विकसित किया जाए। सुरक्षा की दृष्टि से ये द्वीप बहुत महत्वपूर्ण हैं और यहां के लिए समग्र विकास की योजना बना रहे हैं। मालदीव प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, जो विश्व के पर्यटन स्थल में से एक है। हालांकि, यहां सुविधाएं न होने से पर्यटक बहुत कम आते हैं। इसीलिए सुधार के कदम उठाए गए है, जिससे पर्यटक भी आएंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिल सकेगा।

विकास के रास्ते में जब जब राजनीति आती है वहां घमासान ही होता है, लेकिन लक्षद्वीप में जो हो रहा है वह विशुद्ध रूप से राजनीती का एक घिनौना चेहरा है। मान लीजिये अगर हम और आप लक्षद्वीप जाना चाहें तो पॉकेट पर बोझ बहुत भरी होगा, जबकि उससे सस्ते में ही ही विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित मालदीव्स आपके लिए पालक पावड़ें बिछाये दिखेगा, तो आप कहां जाना पसंद करेंगे? जब देश में इतनी अच्छी जगह मौजूद है तो फिर भारतीयों  को बहार जाने की क्या जरुरत पडऩी चाहिए यह समझ से परे है। इसलिए लक्षद्वीप का विकास होना निहायत ही जरुरी है।

 

नीलाभ कृष्ण

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