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सर्वेक्षण के अनुसार-टीकाकरण के बाद अस्‍पताल में भर्ती होने की संभावना 75 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाती है

सर्वेक्षण के अनुसार-टीकाकरण के बाद अस्‍पताल में भर्ती होने की संभावना 75 से 80 प्रतिशत तक कम हो जाती है

देश में कोविड के सक्रिय मामलों में कमी आ रही है  संक्रमण से ठीक होने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने आज नई दिल्ली में संवाददाताओं को बताया कि सात मई को एक दिन में कोविड के करीब चार लाख 14 हजार नए मामले सामने आए थे। लेकिन इसके बाद से इनमें लगातार कमी आ रही है। उन्होंने कहा कि कोविड के दैनिक मामलों में अब तक करीब 85 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। पिछले 24 घंटों के दौरान केवल 62 हजार 480 नए मामले दर्ज किए गए।

 

श्री अग्रवाल ने बताया कि पिछले 11 दिनों से कोविड के दैनिक मामले एक लाख से कम  रहे हैं। 27 राज्यों में इसकी संख्या एक हजार से भी कम रही है। उन्होंने बताया कि 4 मई को देश में 531 ऐसे जिले थे जहां रोजाना कोविड के 100 से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे थे। लेकिन अब ऐसे जिलों की संख्या घट कर 147 रह गई है।

नीति आयोग के सदस्य, स्वास्थ्य, डॉक्टर वी.के. पाल ने कहा है कि कोविड का टीका संक्रमण को घातक होने से बचाता है। उन्होने कहा कि टीका लगने से लोगों के संक्रमित होने की स्थिति में उनके अस्पताल में भर्ती होने की संभावना 75 से 80 प्रतिशत कम हो जाती है, ऑक्सीजन की जरूरत केवल 8 प्रतिशत लोगों को रह जाती है और आईसीयू में भर्ती होने का खतरा केवल 6 प्रतिशत रह जाता है। डॉक्टर पॉल ने कहा कि टीका ले चुके स्वास्थ्यकर्मियों पर किए गए एक सर्वेक्षण में इस बात का पता चला है।

 

उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन – डब्‍ल्‍यू.एच.ओ. और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान – एम्‍स द्वारा कराए गए इस सर्वेक्षण में इस बात का पता चला है कि 18 वर्ष से कम और ज्यादा आयु के लोगों में सीरो पाजिटिविटी का स्तर करीब बराबर रहता है। शहरी इलाकों में 18 वर्ष से कम आयु के लोगों में यह 78 प्रतिशत और 18 वर्ष से अधिक आयु में उनासी प्रतिशत पाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में 18 वर्ष से कम आयु के लोगों में यह 56 प्रतिशत और 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों में यह 63 प्रतिशत है। सर्वेक्षण में यह भी पता चला है कि बच्चों में संक्रमण का स्तर बहुत मामूली रहा, हालांकि कोविड की तीसरी लहर के दौरान बच्चों को इससे ज्यादा खतरा हो सकता है। डॉक्टर पॉल ने बताया कि इसे ध्यान में रखते हुए निजी और सरकारी भागीदारी से बच्चों के लिए विशेष किस्म की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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